अस्पताल समाचार

MMU की तानाशाही: नर्सिंग की छात्राओं का हुक्का-पानी किया बंद, सैकड़ों छात्राएं हॉस्टल छोड़ निकली अपने घर की ओर…

मेडिकल कॉलेजों में बेहतर पढ़ाई हो इसको लेकर बेसक सरकार एनएमसी बिल लाने की तैयारी कर रही है लेकिन दूसरी तरफ हरियाणा सरकार के अंतर्गत आने वाले अंबाला के मुलाना स्थित महर्षि मार्कन्डेश्वर विश्वविद्यालय के प्रसाशन ने सैकड़ों नर्सिंग छात्राओं का हूक्का-पानी बंद कर दिया है। सैकड़ों लड़कियों को विश्वविद्यालय छोड़कर अपने घर जाना पड़ रहा है। पिछले कई दिनों से नर्सिंग विभाग की छात्राएं होस्टल फी बढाए जाने को लेकर हड़ताल पर थी। उनका हड़ताल खत्म कराने का नायाब तरीका विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनाया है. लड़कियों के मेस को बंद कर दिया गया. क्लासेस बंद कर दी गईं। उनके हॉस्टल में ताला जड़ दिया गया।

आयुष काम की बातें बचाव एवं उपचार

नींबू-वंशीय फल चकोतरा में मिले मधुमेह-रोधी तत्व

मधुमेह के शुरुआती चरण में मरीजों के उपचार के लिए भोजन के बाद हाई ब्लड शुगर को नियंत्रित करना चिकित्सीय रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा है। इसके लिए कार्बोहाइड्रेट के जलीय अपघटन के लिए जिम्मेदार एंजाइमों को बाधित करने की रणनीति अपनायी जाती है। रक्त में ग्लूकोज के बढ़ते स्तर को धीमा करने के लिए इन एंजाइमों के अवरोधकों का उपयोग किया जाता है। नरिंगिन जैविक रूप से सक्रिय एक ऐसा ही एंजाइम है, जो कार्बोहाइड्रेट के जलीय अपघटन से जुड़ी गतिविधियों के अवरोधक के तौर पर काम करता है।

संतुलित भोजन जरूरी

श्रीपद येस्सो नाइक 12 दिसंबर, 2015 को वाराणसी में आरोग्य मेले का उद्धाटन करेंगे

अपनी बदहाली पर रो रहा है 90लखिया होम्योपैथी लैब, पांच वर्ष गुजर गए एक भी कर्मचारी नहीं बहाल हुआ

होम्योपैथी से सम्भव है कैंसर का इलाज

SBA विशेष फार्मा सेक्टर स्वस्थ भारत अभियान

स्वस्थ भारत ने मनाया अपना तीसरा स्थापना दिवस, गांधी का स्वास्थ्य चिंतन व जनऔषधि की अवधारणा विषय पर हुआ राष्ट्रीय परिसंवाद

अंतरराष्ट्रीय मानक के हिसाब से पेटेंट फ्री मेडिसिन को जेनरिक दवा कहा जाता है। लेकिन भारत में साल्ट के नाम से बिकने वाली दवा को सामान्यतया जेनरिक माना जाता रहा है। वैसे बाजार में जेनरिक दवाइयों को ‘ऐज अ ब्रांड’ बेचने का भी चलन है, जिसे आम बोलचाल में जेनरिक ब्रांडेड कहा जाता है। लेकिन ‘प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना’ के अंतर्गत खुलने वाली सभी दवा दुकानों पर हम लोग विशुद्ध जेनरिक दवा रखते हैं। यहां पर स्ट्रीप पर साल्ट अर्थात रसायन का ही नाम लिखा होता है’ अपने लक्ष्य को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि,’बीपीपीआई का गठन 2008 में हुआ था। तब से लेकर 2014 तक उतनी सफलता नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी। लेकिन 2014 से सरकार ने इस दिशा में तेजी से काम किया है और आज हम 3350 से ज्यादा जनऔषधि केन्द्र खोलने में सफल रहे हैं। 2018-19 में जनऔषधि केन्द्रों की संख्या 4000 तक ले जाने का हमारा लक्ष्य है।

देश के हर पंचायत में जरूरी है जनऔषधि केन्द्र

स्वस्थ भारत (न्यास) का तृतीय स्थापना दिवस के अवसर पर होगी जेनरिक दवाइयों की बात, मुख्य अतिथि विपल्व चटर्जी का होगा उद्बोधन

SBA विशेष बचाव एवं उपचार मन की बात

मोदी सरकार के चार सालः टीकाकरण की दिशा में सार्थक पहल

टीकाकरण की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन इस बात पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है कि आखिर यह टीका पेशेवर एवं प्रशिक्षित हाथों से कैसे दिलाया जाए। टीका के मामले में सबसे ज्यादा शिकायत इसी बात की होती है कि टीका देने वाले प्रशिक्षित नहीं है। अगर प्रशिक्षित हाथों से टीका नहीं पड़ा तो इसका गलत प्रभाव भी बच्चों पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को इस बात को सुनिश्चित करना होगा कि टीका को टेंपरेचर मेंटेन हो और सुरक्षित हाथों से ही शिशुओं एवं गर्भवती महिलाओं को टीका दी जाए।

काम की बातें मन की बात

चिकित्सक-मरीज के बीच सार्थक संवाद जरूरी

संसद में 2012 में यह कहा गया कि देश की दवा कंपनियां 1100 फीसद तक मुनाफा कमा रही है। इसको लेकर पूरे देश में बहुत हो-हल्ला मचा था। इसी बीच डीपीसीओ-2013 की ड्राफ्ट नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग ऑथोरिटी ने जारी किया था। उस मसौदे में दवाइयों की कीमतों को तय करने की जो सरकारी विधी बताई गई थी, उसका विरोध होना शुरू हुआ। बावजूद इसके बाजार आधारित मूल्य निर्धारण नीति को डीपीसीओ-2013 का हिस्सा बनाया गया। इसका नुकसान यह हुआ कि दवाइयों को लेकर जो लूट मची थी, वह कम होने की बजाय यथावत रह गई। 2014 में बनी नई सरकार ने आम लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए जनऔषधि केन्द्र को बढ़ावा देना शुरू किया है। लेकिन इसकी उपलब्धता अभी सीमित है। ऐसे में दवा के नाम पर उपभोक्ता लगातार लूटे जा रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को जागरुक तो होना ही पड़ेगा ताकि संगठित लूट से वे खुद को बचा पाएं।

 

आयुष काम की बातें बचाव एवं उपचार

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मधुमेह के शुरुआती चरण में मरीजों के उपचार के लिए भोजन के बाद हाई ब्लड शुगर को नियंत्रित करना चिकित्सीय रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा है। इसके लिए कार्बोहाइड्रेट के जलीय अपघटन के लिए जिम्मेदार एंजाइमों को बाधित करने की रणनीति अपनायी जाती है। रक्त में ग्लूकोज के बढ़ते स्तर को धीमा करने के लिए इन एंजाइमों के अवरोधकों का उपयोग किया जाता है। नरिंगिन जैविक रूप से सक्रिय एक ऐसा ही एंजाइम है, जो कार्बोहाइड्रेट के जलीय अपघटन से जुड़ी गतिविधियों के अवरोधक के तौर पर काम करता है।

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टीकाकरण की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन इस बात पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है कि आखिर यह टीका पेशेवर एवं प्रशिक्षित हाथों से कैसे दिलाया जाए। टीका के मामले में सबसे ज्यादा शिकायत इसी बात की होती है कि टीका देने वाले प्रशिक्षित नहीं है। अगर प्रशिक्षित हाथों से टीका नहीं पड़ा तो इसका गलत प्रभाव भी बच्चों पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को इस बात को सुनिश्चित करना होगा कि टीका को टेंपरेचर मेंटेन हो और सुरक्षित हाथों से ही शिशुओं एवं गर्भवती महिलाओं को टीका दी जाए।

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निपाह से डरे नहीं, समझे इसे

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