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कुएं में मिली अस्पताल में बंटने वाली दवाएं

यूपी के उन्नाव जिले में सरकारी लापरवाही का आलम यह है कि दवाइयों को कुएं में फेंका जा रहा है...
यूपी के उन्नाव जिले में सरकारी लापरवाही का आलम यह है कि दवाइयों को कुएं में फेंका जा रहा है…

देश के स्वास्थ्य के लिए यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि जिन दवाओं को बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए स्कूलों में दिया जाना था, उन्हीं दवाओं को स्वास्थ्य प्रशासन कुएं में फेंकवा देता है…यूपी की यह खबर स्वास्थ्य के बिगड़े हालात को बयां कर रही हैं…स्वस्थ भारत अभियान सरकार से मांग करता है कि इस दिशा में उचित कार्रवाई की जाएं…
आप पाठकों के लिए नीचे दैनिक जागरण में प्रकाशित इस रिपोर्ट को दे रहे हैं…(संपादक)

उन्नाव, जागरण संवाददाता : रावतपुर टिकौली स्टेशन के निकट स्थित एक कुआं में भारी मात्रा में दवाओं के पत्ते पड़े होने की सूचना से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। इसपर कुंए की सफई करा दवाओं को बाहर निकलवाया गया। कुएं से निकली दवाईयां रैपर बंद गोलियां है जिनकी संख्या हजारों में हैं। बताते हैं जिनका वितरण राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बेसिक स्कूल के बच्चों में किया जाता है। कुएं में मिली सरकारी अस्पतालों में वितरित होने वाली दवा के मिलने की सूचना सिकंदरपुर स्वास्थ्य केंद्र में दी गई लेकिन सूचना के बाद भी कोई वहां पर झांकने तक नहीं आया। खास बात यह है कि दवाओं की अभी एक्सपायरी डेट दिसंबर 2014 है। इसके बाद भी उसे कुएं में फेंक दिया जाना दवाओं के पीछे चल रहे किसी खेल की तरफ इशारा कर रहा है। बताते हैं कि सरकारी अस्पतालों के अलावा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के अंतर्गत बेसिक स्कूल के बच्चों में आयरन की गोली के साथ पेट के कीड़ा मारने की दो गोली के रूप में दवा का वितरण किया जाना था। रविवार को रावत पुर टिकौली गांव के पंसरिया रोड पर मिथलेश अवस्थी के खेत में स्थित कुएं में भारी मात्रा में पन्नी में बंद गोलियां पड़ी हुई कुछ ग्रामीणों ने देखी। इसकी सूचना उन्होंने गांव के लालजी मिश्र को दी। कुछ ग्रामीणों के साथ मिश्र ने कुंए की सफाई करायी और दवाओं को बाहर निकलवाया। इन दवाओं पर ईएक्सवाईटी 400 लिखा है। साथ ही पन्नी पर नाट फार सेल केवल सरकारी अस्पतालों की आपूर्ति की चेतावनी भी अंकित है। पन्नी पर दर्ज एक्सपायरी दिसंबर 2014 है। ग्रामीणों ने दवाओं के मिलने की सूचना सिकंदरपुर करन के स्वास्थ्य केंद्र में दी। लेकिन कोई भी मौके पर झांकने नहीं पहुंचा। कुएं से मिली दवाएं अभी लालजी मिश्र के घर पर सुरक्षित रखी हुई हैं लेकिन कोई भी उन्हें देखने नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि कुएं में दवाओं का मिलना विभागीय स्तर पर व्यापक गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है। उनका कहना है कि दवाओं के वितरण में लापरवाही की जाती है। कुछ लोगों में चर्चा है कि कुएं में मिली दवाएं किसी स्कूल के छात्रों में वितरित न कर शिक्षक द्वारा फेंक दी गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि हजारों रुपए कीमत की दवाएं कुएं में फेंक कर केवल फर्जी आंकड़ेबाजी की जा रही है।

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swasthadmin
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