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डायरिया से प्रत्येक वर्ष 1.36 मिलियन बच्चों की हो रही मौत!

”अतिसार पर काबू पाने के लिए आसान उपायों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने की जरूरत” डॉ. हष वर्धन ने शौचालय बनाने के लिए योजना में सीएसआर फंड के इस्तेमाल को कहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज भारत के कॉर्पोरेट क्षेत्र से शौचालय बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी परियोजना में योगदान की अपील की । उन्होंने कहा कि सरकार ने इससे पहले व्यापक स्तर पर ऐसो कोई प्रयास नहीं किया है तथा इसकी सफलता बहुत कुछ इस आम सहमति पर टिकी है कि खुले में शौच जाना राष्ट्रीय समस्या है और यह समाप्त होनी चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने अपने मंत्रालय के पहले ” तीव्री कृत अतिसार नियंत्रण पखवाड़े” की शुरुआत करते हुए कहा, ”हमारे प्रधानमंत्री ने इस कुप्रथा को बंद करने का प्रण लिया है। ” डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के इस्तेमाल से हर भारतीय के लिए शौचालय का उनका सपना साकार करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने लंबे से चली आ रही समस्याओं के असाधारण समाधान पर अभूतपूर्व बल दिया है। उन्होंने कहा, ” बहुत वर्षों से बहुत कुछ किया गया है। अब हमें ऐसे विचारों की जरूरत है जो नई राह को परिभाषित करे और उसके लिए साहसिक कार्य करने की जरूरत हो। ” उन्होंने कहा कि भारत के स्वास्थ्य प्रशासक अतिसार प्रबंधन के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाने में नाकाम रहे हैं और यह तथ्य स्पष्ट करता है कि पिछले कार्यक्रम पर्याप्त नहीं थे। इसलिए लोगों से संवद करने के नए श्रेष्ठ तरीकों के बारे में सोचने का समय आ गया है। दस्त या अतिसार से हर साल 1.36 मिलियन बच्चे मरते हैं जो बच्चों की मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, ” मृत्यु दर कम करने के लिए हमारे पास ज्यादा समय नहीं है। सितंबर 2015 तक हमें संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों को हासिल करना है। इसलिए मैं बच्चों की मृत्यु की महाविपत्ति की चुनौती से निपटने के लिए प्रयासों के व्यापक तालमेल की अपील करता हूं। ” ” तीव्रीकृत अतिसार नियंत्रण पखवाड़े” के औचित्य के बारे में डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि इससे अतिसार नियंत्रण उपायों को तेज करने के लिए केंद्र और राज्यों के स्तर पर तथा स्वयं सेवी क्षेत्र से स्वास्थ्यकर्मी एकजुट होंगे। यह अनिवार्य सेवाओं का समूह है जिसमें जागरूकता फैलाने में तेजी लाने, इस चुनौती से निपटने की तरफदारी करने, अधिक ओआरएस-जिंक केंद्रों की स्थापना, जरूरत पड़ने पर बच्चों वाले परिवारों तक ओआरएस पैकेट जैसे समाधान पहुंचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना शामिल है। डॉ. हर्ष वर्धन ने माताओं से अपील की कि वे दस्त लगने पर भी छह महीनों से कम आयु के बच्चों को स्तानपान कराना बंद न करें। यह शिशु और बच्चों को स्तानपान कराने की बेहतरीन परिपाटियों का ज्ञान फैलाने के आइडीसीएफ के कार्यक्रम के तहत शामिल है। एक प्रस्तुति के जरिए इस कार्यक्रम का ब्योरा देते हुए अमरीका के जॉन हॉकिन्स विश्वविद्यालय के डॉ. माथूराम संतोषम और स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि साफ-सफाई के बारे में पखवाड़े भर के तीव्रीकृत जागरूकता अभियान तथा समुचित आयु वर्ग के बच्चों को स्तनपान कराने की आदत तथा ओआरएस एवं जिंक थॅरेपि को प्रोत्साहन राज्य, जिला और ग्राम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। यूनिसेफ इंडिया प्रतिनिधि श्री लुईस-जॉर्ज आर्सेनॉल्ट ने ” तीव्रीकृत अतिसार नियंत्रण पखवाड़े” के आयोजन के लिए मंत्रालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे जीवन-रक्षक कार्यक्रमों तक पहुंच बढ़ाने के जरिण् देश में बच्चों की मृत्यु रोकने के लिए भारत के प्रयासों में फिर से जोश भरा जा सकेगा। भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ. नाटा मेनाब्डे ने कहा, ” विकासशील जगत में अनेक बच्चे स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और व्यापक स्तनपान के लिए गंभीर बीमारी होने पर तत्काल चिकित्सा देखभाल हासिल नहीं कर सकते। ये अतिसार नियंत्रण के महत्वपूर्ण घटकों में शामिल होने चाहिए। केंद्रीय गृह सचिव श्री लव वर्मा ने कहा कि टीकाकरण एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं तक हाल के दिनों में पहुंच बढ़ने के बीच शिशु और बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। ”
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