समाचार

इलाज़ के लिए दर-दर भटक रही है तेजाब पीड़िता पूजा, सरकारी दावों की खुली पोल

विकिलिक्स 4 इंडिया व सन स्टार हिन्दी दैनिक ने किया खुलासा
विडियो संदेश में पीड़िता ने सरकार से लगाई मदद की गुहार
पीजीआई चंडीगढ़ ने इलाज के लिए मांगे 2 लाख रुपये
डेढ़ साल हो गए लेकिन अभी तक हरियाणा सरकार ने पूजा को मुवावजा राशि नहीं दी है

नई दिल्ली।21.10.15

 

जिंदगी जब मौत से भी बद्दतर हो जाए...
जिंदगी जब मौत से भी बद्दतर हो जाए…

केंद्र सरकार तेजाब पीड़ितों के इलाज में हर तरह की मदद करने का बार-बार संकल्प दुहराती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिये हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। नौकरशाहों की संवेदनहीनता और टाल-मटोल के रवैये के कारण पीड़ितों को सरकारी सहायता नहीं मिल पाती। हरियाणा के यमुनानगर के जगाधरी की पूजा गुप्ता को इसका कड़वा अनुभव हो रहा है। उन्हें सरकारी मदद के 3 लाख देने की घोषणा तो हुई लेकिन उसमें से उन्हें मात्र 25 हजार दिये गए जबकि शेष राशि के लिए पिछले डेढ़ वर्षों से एक विभाग से दूसरे विभाग और एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी तक भटकना पड़ रहा है। पैसों के अभाव में उनका इलाज रुका हुआ है। बच्चे अनाथालय में पल रहे हैं और अपने जीवन यापन के लिए औरों के आगे हाथ पसारना पड़ रहा है। अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए पूजा बताती है-

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बावजूद पीजीआई चंडीगढ़ ने इलाज के लिए मुझसे 2 लाख रुपये मांगे। प्राइवेट अस्पताल ने भी इलाज से इनकार किया। यमुनानगर सीएमओ ने मुझे इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल पारस भेजा। डेढ़ साल हो गए आज भी मैं हरियाणा सरकार से अपने इलाज के मुआवजे के लिए दर-दर भटक रही हूं। तेजाब ने मेरा चेहरा ही नहीं वर्तमान और भविष्य भी जला दिया है। इस दर्द भरी दास्तान की शुरूआत 20 जनवरी 2014 को हुई जब पूजा गुप्ता पर उसी के पति अशोक कुमार ने ही तेजाब डाल दिया था…। इस एसिड अटैक में पूजा का चेहरा पूरी तरह झुलस गया। आनन-फानन में पूजा को इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ भेजा गया। पूजा की जान तो बच तो गई लेकिन इस हादसे में उसका पूरा चेहरा झुलस गया और उसने अपनी दोनों आंखें खो दी। सरकार की ओर से एसिड अटैक पीड़ितों को मिलने वाली मदद के 3 लाख रुपये में से उसे 25 हजार रुपये दिए गए… लेकिन अपना इलाज कराने के लिए बाकी बचे 2,75,000 रुपये के लिए वहा आज भी दर-दर भटक रही है।

पूजा ने क्या कहा देखिए इस विडियो में…

https://www.youtube.com/watch?v=z3_rbX4pBbY
हरियाणा की राजनीति पर लालफीताशाही इस कदर हावी है कि कई बार राजनेताओं के फटकार लगाने पर भी और 18 महीने बीत जाने के बाद भी पूजा को सरकारी मदद की शेष रकम नहीं मिल पाई है। हरियाणा सरकार का गृह मंत्रालय, हरियाणा पीड़ित मुआवजा योजना-2013 के तहत एसिड पीड़ितों को तुरंत 3 लाख रुपये जारी करने की बात करता है… पर इन अफसरों ने तो सारे नियमों को भी ताक पर रख दिया है। पूजा ने हादसे के तीन महीने बाद अप्रैल 2014 में मुआवजे के लिए यमुनानगर के डीएम को आवेदन शेष खबर पेज 2 पर… दिया था। इसके बाद शुरू हुआ एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने और मामले को टालने का घिनौना खेल…

तत्कालीन डीएम मनदीप सिंह बरार ने खानापूर्ति करते हुए एक कमेटी बनाकर मामले को जिला कार्यक्रम अधिकारी और महिला एवं बाल विकास अधिकारी राज बाला को सौंप दिया… एक लम्बे अरसे तक पूजा की फाइल वहां धूल खाती रही जिसके बाद फिर जिला कार्यक्रम अधिकारी और महिला एवं बाल विकास अधिकारी राज बाला ने इससे अपना पल्ला झाड़ने के लिए ये मामला जिला परियोजना अधिकारी परवीन छाबड़ा को भेज दिया। पूजा को उम्मीद थी की यहां से उसे मुआवजा मिल जाएगा लेकिन एकबार फिर उसे निराशा हाथ लगी क्योंकि जिला परियोजना अधिकारी परवीन छाबड़ा ने भी अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए यह मामला महिला एवं बाल विकास निदेशक पंचकुला को रेफर कर दिया। जब मामला जिले से बाहर उच्चाधिकारी के पास पहुंचा तो पूजा को लगा कि यहां उसकी समस्या का समाधान हो जाएगा लेकिन एक बार फिर वही हुआ जो लगातार होता आया था… महिला एवं बाल विकास निदेशक पंचकुला ने भी ये मामला हरियाणा स्टेट लीगल अथॉरिटी को रेफर कर दिया।
मामले को टलता देख पीड़िता ने तत्कालीन हरियाणा सरकार के चीफ सेक्रेटरी डी.एस. धेसी से न्याय की गुहार लगाई जिस पर उन्होंने 24 अप्रैल 2014 को यमुनानगर के डिप्टी कमिश्नर एस.एस. फूलिया को पत्र लिख कर पीड़िता को तुरंत मुआवजा दिलाने का निर्देश जारी किया। लेकिन ये अफसर इतने ढीठ हैं कि चीफ सेक्रेटरी के निर्देश के बाद भी अपना रवैया नहीं बदला।
हादसे के लगभग 6 महीने बाद पीड़िता पूजा ने एक बार फिर से जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास से गुहार लगाई जिस पर जिला कार्यक्रम अधिकारी ने 04 जुलाई 2014 को पत्र लिख कर हरियाणा स्टेट लीगल अथॉरिटी को पीड़िता को रकम मुहैया कराने का अनुरोध किया जिससे पूजा में एक बार फिर मुआवजा मिलने की उम्मीद जगी… लेकिन पत्र मिलने के 10 दिन बाद 14 जुलाई 2014 को हरियाणा स्टेट लीगल अथॉरिटी के मेंबर सेक्रेट्री ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास को पत्र लिख कर कहा कि ये मामला पहले जिला लीगल अथॉरिटी को भेजना चाहिए जहां से जांच हो जाने के बाद मुआवजे की रकम भेजी जाएगी। 21 जुलाई 2014 को जिला कार्यक्रम अधिकारी और महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक को पत्र लिख कर अनुरोध किया कि हरियाणा स्टेट लीगल अथॉरिटी द्वारा वित्तीय सहायता देने से मना कर दिया गया है तो इसके लिए फंड रीलीज किया जाए ताकि पीड़िता को मुआवजा दिया जा सके। जिसके बाद पूजा की फाइल वहां पड़े-पड़े धूल खाती रही… आखिरकार महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक ने 15 मई 2015 को राज्य के सभी डिप्टी कमीश्नरों को पत्र लिखकर 10 अप्रैल 2015 को एसिड अटैक पीड़ितों के मुआवजे पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संलग्न कर इस आधार पर मुआवजा देने के निर्देश जारी कर दिए।
गुलशन कुमार को आपबीती सुनाते हुए पीड़िता पूजा गुप्ता ने बताया कि जब ये घटना हुई तब उसे इलाज के लिए यमुनानगर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया…। उन्होंने बताया कि मैं तीन महीने तक इलाज के लिए पीजीआई गई। अबतक मुझे सरकार से मदद के रूप में सिर्फ 25 हजार रुपये मिले हैं। इस हादसे में मेरी दोनों आखें चली गई। पीजीआई अस्पताल अब 10 आॅपरेशन करने की बात कह कर हर आॅपरेशन के लिए 20 हजार रुपये की मांग कर रहा है जबकि एसिड अटैक पीड़ित का इलाज मुफ्त में करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। जब मदद मांगने के लिए पूजा जिला यमुनानगर के सीएमओ के पास भी गईं तो सीएमओ ने उसे यमुनानगर के ही प्राइवेट अस्पताल पारस में भेज दिया जहां तकनीकि अभाव का बहाना कर इलाज से मना कर दिया गया। पूजा ने बताया कि वह अपने जीवन यापन के लिए लोगों के रहमो-करम की मुहताज हैं।
इस पूरे मामले पर  संवाददाता गुलशन कुमार से बात करते हुए एक वरिष्ठ सरकारी प्रशासनिक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर ये कबूल किया कि पूजा गुप्ता मामले में उन लोगों से भारी चूक हुई है, साथ ही उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन पूरी मुसतैदी से अपने काम को करना चाहता है पर उंचे पदों पर बैठे कई बड़े अधिकारियों की वजह से सच में एसिड अटैक पीड़िता पूजा गुप्ता को अबतक सरकारी मदद नहीं मिल पाई है। जब संवाददाता ने डिस्ट्रीक्ट लीगल अथॉरिटी की चीफ जुडिशियल मैजिस्ट्रेट अनूप मिश्र मोदी से बात की और पूजा के बारे में माननीय कोर्ट को अवगत कराया तो उनका कहना था कि यह मामला महिला और बाल विकास अधिकारी के द्वारा हमारे पास आना चाहिए था लेकिन मेरे पास कोई केस नहीं आया। इस पर हमारे संवाददाता गुलशन कुमार ने महिला और बाल विकास निदेशक अमनीत पी. कुमार से जब बात की तो उन्होंने कबूल किया कि मैं इस मामले को देख रही हूं…। लेकिन जब हमारे संवाददाता ने इसी विभाग की परियोजना अधिकारी सूरज कौर से बात की तो उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। सूरज कौर का कहना है की ये स्कीम ज्वाइंट स्कीम थी लेकिन अब हम हरियाणा सरकार को लिख रहे हैं कि हमें इस योजना से अलग किया जाए और हरियाणा स्टेट लीगल अथॉरिटी के द्वारा ही मुआवजा दिया जाए। जब इस मामले पर हमारे संवाददाता ने हरियाणा की महिला और बाल विकास मंत्री कविता जैन से बात की तो उन्होंने मामले को टालते हुए कहा कि मैं देखती हूं कि मैं इस मामले में क्या कर सकती हूं।
sunstarइन सब के बीच आज भी पूजा मुआवजे के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है.. पूजा के दो मासूम बच्चियां अनाथालय में रहने को मजबूर हैं। तो सवाल ये उठता है कि प्रदेश सरकार की स्कीम और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद एसिड अटैक पीड़ित को मुआवजा नहीं मिल पाना सरकार की विफलता है या सरकार पर लाल फीताशाही का हावी होना दर्शाता है… क्या ये अफसर सरकारी तंत्र पर इतना हावी हैं कि ये सरकार के निर्देश और सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन भी नहीं करते। आखिर कब तक एसिड अटैक पीड़ित जिन्हें शारीरिक और मानसिक तौर पर ठेस पहुंची है वो मुआवजे के लिए इन बाबुओं के दफ्तरों के चक्कर काटते रहेंगे?

http://sunstardaily.in/NewsDetail.aspx?Article=532 से साभार

सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिएःआशुतोष
दैनिक अखबार सन स्टार व विकिलिक्स फॉर इंडिया द्वारा इस मामले को उठाए जाने की सराहने करते हुए स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने केन्द्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। इस मामले की निंदा करते हुए श्री आशुतोष ने कहा कि सरकारी प्रावधान होने के बावजूद पीड़िता को न्याय नहीं मिल पाना देश के लिए शर्म की बात है। इस मामले की जितनी निंदा की जाए कम ही है।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
swasthadmin
देश के लोगों में स्वास्थ्य चिंतन की धारा को प्रवाहित करना, हमारा प्रथम लक्ष्य है। प्रत्येक स्तर पर लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहना और रखना जरूरी है। इस दिशा में ही एक सार्थक प्रयास है स्वस्थ भारत डॉट इन। यह एक अभियान है, स्वस्थ रहने का, स्वस्थ रखने का। आप भी इस अभियान से जुड़िए। स्वस्थ रहिए स्वस्थ रखिए।
http://www.swahbharat.in

One thought on “इलाज़ के लिए दर-दर भटक रही है तेजाब पीड़िता पूजा, सरकारी दावों की खुली पोल”

प्रातिक्रिया दे

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.