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एड्स : बचाव ज़रूरी है

जागरूक रहें... एड्स कहें बाय-बाय
जागरूक रहें… एड्स कहें बाय-बाय
एचआईवी एड्स से बचाव ही सबसे ज्यादा जरूरी व कारगर उपाय है. कैसे बचें  बता रहे हैं असलम खान
एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी ये सभी बीमारियां रक्त के उत्पादों और यौन संबंधों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे में चली जाती हैं. हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक़ गैर शिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों से इंजेक्शन लेने से एचआईवी/एड्स फैलने का ख़तरा हो सकता है! 
एड्स कैसे पहुंचता एक से दूसरे में…
एक व्यक्ति से दूसरे में एचआईवी की प्रक्रिया तब होती है, जब एचआईवी सवंमित व्यक्ति का आंतरिक तरल एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति की तहत तक पहुंचता है, जिसमें ब्लडस्ट्रीम शामिल होती है, तब वह दूसरे में पहुंचता है. आमतौर पर एचआईवी कई तरह दूसरे में पहुंचता है, जैसे एक ही सुई का इस्तेमाल, अनप्रोटेक्टेड एनल, वैजाइनल और कभी-कभी ओरल सेक्स और मां से शिशु में अगर उसे डिलीवरी से पहले इसकी समस्या हो साथ ही स्तनपान से भी. एचआईवी असुरक्षित तरीके से कई साथियों के साथ यौन संबंध बनाने से, रक्त के उत्पादों को लेने से, मां से शिशु में (जन्म से पहले या इसके दौरान या फिर स्तनपान के समय) और सहवास के दौरान (वैजाइनल और एनल). जेनिटल और रेक्टम में एचआईवी सीधे म्यूकस में ब्रेन्स को संक्रमित कर सकता है या फिर कटने से भी या ज़ख़्म से भी सहवास के दौरान इसका संक्रमण संभव है. इसको ज़्यादातर लोग ध्यान नहीं देते हैं. वैजाइनल और एनल सहवास में सबसे ज़्यादा इसकी आशंका रहती है.
मुंह एचआईवी के लिए इनहास्पिटेबिल माहौल होता है (शुक्राणु, वैजाइनल फ्ल्यूड या ब्लड). इसका मतलब ये है कि एचआईवी फैलने का ख़तरा, गले, मसूड़े या ओरल में ब्रेन्स से कम होता है बनिस्बत वैजाइनल या एनल में ब्रेन्स के. ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जो ओरल तरीक़े से इसका ट्रांसमिशन हुआ है, इसलिए हम नहीं कह सकते कि एचआईवी सवंमित सीमेन, वैजाइनल फ्ल्यूड या ब्लड मुंह में लेना ख़तरे से मुक्त है. हालांकि ओरल सैक्स में इसका ख़तरा कम रहता है.
एक इंजेक्शन की सुई से रक्त सीधे एक व्यक्ति से दूसरे के ब्लडस्ट्रीम में पहुंचता है. इसमें रक्त से जनित बीमारियों के फैलने की आशंका काफ़ी होती है. सुई को एक दूसरे के लिए शेयर करना उच्च आशंकित ख़तरे की श्रेणी में आता है.
एचआईवी सवंमित मां से सीधे वायरस जन्म के दौरान या स्तनपान से शिशु में पहुंच सकता है. स्तनपान में एचआईवी होता है और थोड़ा-सा भी दूध पिलाने से महत्वपूर्ण संक्रमण वयस्कों में भी संभव है, जो शिशु में इसके ट्रांसमिशन की पुष्टि करता है.
एचआईवी से बचाव के लिए प्रभावी रणनीति
एचआईवी के बारे में जानकारी और उसके बारे में समझदारी से ही इसके ट्रांसमिशन पर क़ाबू संभव है और संभवत: यही इसके क़ाबू पाने का सबसे प्रभावी तरीक़ा है. कई लोगों से सेक्स संबंध से बचना और सुइयों को शेयर न करके भी एचआईवी के संक्रमण के साथ ही अन्य ट्रांसमिशन वाली बीमारियों से बचा जा सकता है.
बचाव की तीन स्थितियां
-पहला, हर व्यक्ति को संक्रमण से बचाव के हर तरह के ज़रूरी क़दम उठाने चाहिए.
-दूसरा संक्रमित व्यक्ति जो यह नहीं जानता हो कि वह संक्रमित है, तो उसे इस बारे में जागरूक करें और इसके लिए ज़रूरी जांच करवाएं.
तीसरा यह कि जो पहले से ही इसकी गिरफ़्त में हो, तो उसे भी अन्य लोगों में यह बीमारी न हो, इसके लिए बचाव के ज़रूरी तरीक़े अपनाएं और इस बारे में अन्य को भी जागरूक करें.
एचआईवी संक्रमण से बचाव के सबसे ज्यादा प्रभावी तरीक़े
  • -वैजाइनल, एनल या ओरल सेक्स न करें.
  • -सिर्फ़ दो म्यूचुअली मोनोगैमस, असंक्रमित साथी से ही करें.
  • -बिना डॊक्टर के कहे इंजेक्शन न लें
  • -किसी भी क़ीमत पर सुई या सिरिंज को शेयर न करें.
  • -ऐसी किसी भी गतिविधि में हिस्सा न लें, जिसमें रक्त, शुक्राणु, वैजाइनल फ्ल्यूड्स या स्तनपान के बदलाव की प्रक्रिया शामिल हो.
एचआईवी संक्रमण को कम करने के तरीक़े
  • – लैटेक्स कंडोम का इस्तेमाल करना सबसे बढ़िया तरीक़ा है चाहे वैजाइनल, एनल या ओरल सैक्स करना हो.
  • – ड्रग्स या शराब का सेवन न करें, क्योंकि इससे आप बहक जाते हैं.
  • – साफ़-सुथरी सुई या सिंरिज जिसे क्लोरीन ब्लीच या पानी से साफ़ करें, यदि बचाव का अन्य कोई तरीक़ा नहीं रहा.
  • – जब ब्लड के संपर्क में आएं, तो बचाव की अन्य चीज़ें, जैसे लैटेक्स ग्लव्ज़ अपनाएं.
 साभारः स्टार न्यूज़ एजेंसी
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