Entries by Ashutosh kumar Singh

क्या आप जानते हैं ! 65 साल पहले भारत में आया जापानी इंसेफलाइटिस !

भारत जैसे देश किसी भी नई बीमारी का पालनहाल आसानी से बन जाते हैं। सवा अरब से ज्यादा जनसंख्या को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे भारत में जब कोई बीमारी आयात होती है, तो उसकी खातिरदारी घर आए मेहमान की तरह की जाती है। उसके प्रति हमारा नजरिया, उसको रोकने के उपाय ठीक वैसे ही होते हैं जैसे घर आए दामाद खुद से चले जाएं तो ठीक है, नहीं तो उन्हें कौन कहे की आप अपने घर चले जाइए। ऐसी बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि बीमारियों के फलने-फूलने के लिए जरूरी खाद-पानी यहां पर भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। यहां पर नई बीमारियों की खेती करने में पूरा तंत्र सहयोग करता है। कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू एवं इबोला जैसी बीमारियों की खेती यहां पर खूब हो रही है। इनकी ब्रांडिंग कर के कुछ यहां के कुछ दूसरे मूल्कों की संस्थाएं अपनी आर्थिक स्वार्थों को पूर्ण करने में सफल भी हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ स्वस्थ मानव संसाधन की रीढ़ की हड्डी तोड़ने की कोशिश साकार होती दिख रही है।
आश्चर्य का विषय यह है कि भारत सरकार इंसेफलाइटिस के सही कारणों को जानने में अभी तक नाकाम रही है। अभी जांच का फोकस गोरखपुर बना हुआ है। जबकि इस बीमारी का फैलाव देश के लगभग प्रत्येक कोने में है। दक्षिण भारत में यह बीमारी पहले आई लेकिन वहां पर वह उतना सफल नहीं हुई जितना उत्तर भारत में दिख रही है। ऐसे में शोध का बिंदु दक्षिण भारत भी होना चाहिए। इतना ही नहीं जांच का बिंदु एशिया के तमाम देश भी होने चाहिए जहां पर यह बीमारी अपना पांव पसार चुकी है। शायद तब जाकर हम इस बीमारी के कारणों की तह में जा पाएंगे एवं ईलाज ढूढ़ पाने के नजदीक पहुंचेंगे। अभी तो ऐसा लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं है कि इस बीमारी का ईलाज संभव हो सके नहीं तो गर हमारी सरकारों ने इस बीमारी की भयावहता को पहले ही भांप कर समुचित कदम उठाया होता तो बीआरडी अस्पताल में जो चीख-पुकार सुनने को मिल रही है शायद वह नहीं मिलती।

सबने पूछा…इतनी लूट! मैंने कहा-हाँ!

स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज संकल्पना से जब मैं कॉलेज की बालिकाओं को रूबरू करा रहा था, तब वे बहुत संयमित एवं गंभीरता के साथ पूरी बात को सुन रही थीं। मानो उनके मन की बात कोई कह रहा है। इस दौरान बालिकाओं को नो योर मेडिसन फिल्म, जेनरिक मेडिसिन पर आमिर खान एवं डॉ. समित शर्मा की बातचीत जब मैंने दिखाई तो वहां उपस्थित सभी बालिकाओं के जहन में एक सवाल गुंजा…इतनी लूट

जब शासक भ्रष्ट हो जाए तो महामारी फैलती है…

झाबुआ में दो वर्ष पूर्व स्वास्थ्य विषयक एक परिचर्चा में जन स्वास्थ्य अभियान से जुड़े डॉ. अमित सेन गुप्ता ने कहा था कि जब शासक भ्रष्ट होता है तो महामारी फैलती है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया महामारी का रूप ले चुका है, इसका सीधा सा अर्थ है कि शासक भ्रष्ट हो चुका है

डीडीए की जमीन पर मवेशियों के कंकाल, शहरी विकास मंत्रालय ने लगाई फटकार

गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा की टीम पिछले दिनों रंगपुरी का दौरा करने गयी थी। बसंतकुंज स्थित रंगपुरी में मवेशियों के कंकालों का अंबार मिला था। जिसकी रिपोर्टिंग हमने की थी। उसके बाद स्वस्थ भारत (न्यास) ने लेफ्टिनेंट गवर्नर एवं शहरी विकास मंत्री से इसकी शिकायत की थी।

Thoughtful expedition a Journey of Idea

The support of Gandhi Smriti and Darshan Samiti is very important in the entire trip. The father of the nation, Mahatama Gandhi was very much concerned about the health of Indians. Be it a matter of hygiene/sanitation/ cleanliness or health, He was worried for all. Gandhi considered natural therapy as the panacea for all ills. Gandhiji’s philosophy has become even more relevant in today’s time.
In 2012, for the first time, we envisioned ‘Swastha Bharat Abhiyan’ (Healthy India Mission). At that time we had no idea that in just four years, the convoy will get so extended. Under the ‘Healthy India Mission’, we had pledged/vowed to provide accessible, quality and affordable healthcare services. This determination has even started showing effective results.

स्वास्थ्य आंदोलन की ओर अग्रसर फार्मासिस्टों के स्वागत में…

स्वस्थ भारत अभियान चाहता है कि आप स्वास्थ्य- मित्र बनें। देश की जनता के सेवक बनें। आप मेडिकल-फिल्ड की सही जानकारी लोगों को दें। हम तो यह भी चाहते हैं कि यदि आप तैयार हों तो आपका संपर्क-सूत्र आपके नाम व क्षेत्र के साथ इस वेबसाइट स्वस्थ भारत डॉट इन पर डाल दें। ताकि यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी कुछ पूछना हो तो आप उन्हें बता सकें। आप चाहे तों अपने ज्ञान से सरकार की तमाम योजनाओं के बारे में आम लोगों को जागरूक कर सकते हैं, जिनकी जानकारी के अभाव में सरकारी पैसा बाबुओं व दलालों की जेब में जा रहा है। सच्चाई तो यह है कि आपलोगों को देखकर ऐसा लग रहा है कि वह दिन दूर नहीं जब ‘स्वस्थ भारत’ का हम सब का सपना साकार होगा!

6 दिनों से भूखे अनशनकारियों को पीटा, जेल में डाला और बिना मेडिकल के छोड़ दिया है मरने के लिए

सबसे अमानवीय पक्ष यह है कि विनय कुमार भारती जो की पिछले 6 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं पहले तो उन्हें पुलिस ने मारा फिल जेल में बंद कर दिया वह भी बिना किसी मेडिकल चेकअप के…और अब उनसे मिलने भी नहीं दिया जा रहा है…
एक शांति के साथ आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों पर यूपी सरकार की पुलिस ने जिस बर्बरता के साथ पेश आई है वह ‪#‎मानवाअधिकार‬ का मामला बनता है…एक भूखे आदमी को पहले डंडा मारना फिर जेल में बंद करना वह भी बिना डॉक्टरी चेकअप के..

फार्मासिस्टों की हुई जीत…एफडीए ने माने अनशनकारियों की मांग…दूसरे मांग को लेकर आमरण अनशन अभी भी जारी

लखनऊ के लक्ष्मण मेले में चल रहे फार्मासिस्टों भूख हड़ताल के आगे यूपी एफडीए ने समर्पण करते हुए उनकी बात मान ली है। फार्मासिस्टों की मांग थी कि यूपी फार्मेसी को ऑनलाइन किया जाए, जिसे यूपी ड्रग कंट्रोलर एक.के मल्होत्रा ने मान लिया है। झारखंड से आए फार्मा एक्टिविस्ट धर्मेन्द्र सिंह की मध्यस्थता में यह फैसला लिया गया।

अनशनकारी फार्मासिस्ट मरें तो मरें मुझे फर्क नहीं पड़ता: ड्रग कंट्रोलर लखनऊ

ड्रग कंट्रोलर के रवैये को लेकर फार्मासिस्टों में जबरदस्त आक्रोश है ! अबतक अवैध और बगैर फार्मासिस्ट के चल रही दवा दुकानों को बंद करवाने की मांग कर रहे फार्मासिस्टों ने ड्रग कंट्रोलर की बर्खास्तगी की मांग की है ! बतातें चलें के विगत 1 मार्च से फार्मासिस्ट फाउंडेशन के बैनर तले भूख हड़ताल कर रहे है !

जयपुर में फार्मासिस्टों का जोरदार प्रदर्शन, सर्वेश्वर शर्मा की अगुवाई में हजारों फार्मासिस्ट उतरे सड़क पर, विधानसभा का किया घेराव, चिकित्सा मंत्री व स्वास्थ्य सचिव को दिया ज्ञापन

फार्मासिस्ट जागृति संस्थान के अध्यक्ष सर्वेश्वर शर्मा की अगुवाई में हुए इस आंदोलन से राजस्थान सरकार सकते में है। इस बावत संस्थान के मीडिया प्रभारी देवेन्द्र माधोपुर ने बताया कि हम चाहते हैं कि सरकार फार्मा मसले को गंभीरता लें, ताकि राजस्थान के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके। इस बीच इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए दूसरे राज्यों से भी फार्मासिस्ट जयपुर पहुंचे थे। सिंहभूम फार्मासिस्ट एसोसिएशन, जमशेदपुर के अध्यक्ष धरमेन्द्र सिंह ने कहा कि जहां भी हमारे फार्मासिस्टों को आवाज की जरूरत होगी वहां पर सिंहभूम फार्मासिस्ट एसोसिएशन खड़ा रहेगा।