दस्तावेज मन की बात

कैंसर संस्थान-अडियार, चेन्नई में प्रधानमंत्री ने क्या कहा आप भी पढ़ें…

कैंसर संस्थान डब्ल्यूआईए, चेन्नई एक स्वैच्छिक धर्मादा संस्थान है, जिसकी स्थापना स्वर्गीय डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी के प्रेरक नेतृत्व में स्वैच्छिक महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं के समूह द्वारा की गई थी।

इस संस्थान ने एक छोटे कॉटेज अस्पताल के रूप में अपनी शुरूआत की। यह दक्षिण भारत का पहला कैंसर विशेषज्ञता वाला अस्पताल था और देश का दूसरा कैंसर अस्पताल। आज संस्थान में 500 बिस्तरों का कैंसर अस्पताल है। मुझे बताया गया है कि इन बिस्तरों में 30 प्रतिशत बिस्तरों के लिए रोगियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।

केन्द्र सरकार द्वारा 2007 में संस्थान के मोलेकुलर ऑन्कोलॉजी विभाग को “उत्कृष्टता केन्द्र” घोषित किया गया। यह 1984 में स्थापित भारत का पहला सुपर स्पेशलिटी कॉलेज है। इसकी उपलब्धियां पथप्रदर्शक और सराहनीय हैं।

समाचार

स्वस्थ भारत अभियान के संरक्षक डॉ अनुराग अग्रवाल को मिला इंडिया न्यूज हेल्थ अवार्ड

गौरतलब है कि डॉ अनुराग अग्रवाल मूल रूप से बदायूं जिला के रहने वाले हैं। 1988 में एमबीबीएस का इंट्रैंस परीक्षा उतीर्ण करने वाले श्री अग्रवाल 1997 में एमएस की डिग्री प्राप्त किए। दो साल दिल्ली के बत्रा एवं जीटीवी अस्पताल में अपनी सेवाएं देने वाले डॉ. अनुराग 1999 में मुरादाबाद चले गए। वहां पर उन्होंने श्री साई अस्पताल में 2008 तक अपनी सेवाएं दी। फिर 2011 में मुरादाबाद में ही अपना कोसमोस अस्पताल की स्थापना की। आज 180 बेड वाला यह अस्पताल मुरादाबाद में अपनी अलग पहचान बना चुका है। डॉ. अनुराग अग्रवाल अभी तक 700 से ज्यादा नी रिप्लेसमेंट कर चुके हैं। उनके इसी काम को देखते हुए इंडिया न्यूज हेल्थ अवार्ड प्रदान किया गया।

चौपाल समाचार

अच्छा स्वास्थ्य मानव प्रगति  की आधारशिला है: प्रधानमंत्री

देश में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण हमारे राजनीतिक वर्ग में इस अहसास का जोर पकडऩा है कि स्वास्थ्य सेवा सामान्यत: मतदाताओं के लिए कोई प्राथमिकता नहीं है। यह 1978 की अल्मा-अल्टा घोषणा के अनुमोदन से कदम पीछे खींचना था, जिसमें 2000 के अंत तक सबके लिए स्वास्थ्य की शपथ तो ली गई थी, और स्वास्थ्य सेवा के अपने वादों में इसने न तो व्यापक और न ही सबके लिए जोड़ा था। स्वास्थ्य सेवा तक प्रभावी पहुंच में एक बड़ी चूक अब भी यही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों के बाहर कम खर्च वाले चिकित्सीय विकल्प उपलब्ध नहीं हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की संख्या दयनीय रूप से प्रति हजार लोगों पर 0.6 है, जबकि शहरी क्षेत्र में 3.9 है।

विविध समाचार

नीति आयोग ने ‘स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत’ रिपोर्ट जारी की,केरल , पंजाब और तमिलनाडु समग्र प्रदर्शन के मामले में सबसे आगे

स्वास्थ्य लक्ष्‍यों की  प्राप्‍ति में गति लाने के वास्‍ते सहकारिता और प्रतियोगी संघवाद का लाभ उठाने के लिए स्वास्थ्य सूचकांक एक उपकरण के रूप में विकसित किया गया है। यह राज्यों और संघ शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों के लिए वार्षिक स्‍तर पर लक्ष्‍यों की प्राप्‍ति के आंकलन के लिए एक  “उपकरण” के रूप में भी काम करेगा । उम्‍मीद की जाती है कि सूचकांक के वार्षिक प्रकाशन और सार्वजनिक डोमेन पर इसकी उपलब्धता सभी हितधारकों को सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) लक्ष्य नंबर 3 की प्राप्‍ति के लिए सतर्क रखेगी।

अस्पताल समाचार

MMU की तानाशाही: नर्सिंग की छात्राओं का हुक्का-पानी किया बंद, सैकड़ों छात्राएं हॉस्टल छोड़ निकली अपने घर की ओर…

मेडिकल कॉलेजों में बेहतर पढ़ाई हो इसको लेकर बेसक सरकार एनएमसी बिल लाने की तैयारी कर रही है लेकिन दूसरी तरफ हरियाणा सरकार के अंतर्गत आने वाले अंबाला के मुलाना स्थित महर्षि मार्कन्डेश्वर विश्वविद्यालय के प्रसाशन ने सैकड़ों नर्सिंग छात्राओं का हूक्का-पानी बंद कर दिया है। सैकड़ों लड़कियों को विश्वविद्यालय छोड़कर अपने घर जाना पड़ रहा है। पिछले कई दिनों से नर्सिंग विभाग की छात्राएं होस्टल फी बढाए जाने को लेकर हड़ताल पर थी। उनका हड़ताल खत्म कराने का नायाब तरीका विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनाया है. लड़कियों के मेस को बंद कर दिया गया. क्लासेस बंद कर दी गईं। उनके हॉस्टल में ताला जड़ दिया गया।

समाचार स्वस्थ भारत अभियान

स्वस्थ भारत अभियान के त्रिपुरा समन्वयक देबाशीष मजूमदर दिल्ली में हुए सम्मानित, मिला नेशनल इटिगरेशन सदभावना यूथ अवार्ड

नई दिल्ली/9.02.18 समाज की बेहतरी के लिए काम करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वस्थ भारत अभियान के त्रिपुरा समन्वयक देबाशीष मजूमदर को दिल्ली में सम्मानित किया गया है। एनवाईपी, जीपीएफ एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एक कार्यक्रम में श्री मजूमदर को ‘नेशनल इंटीगरेशन सदभावना यूथ अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। […]

SBA विडियो स्वस्थ भारत अभियान

जानिए कैसे आशुतोष के गुस्से ने नींव रखी ‘स्वस्थ भारत अभियान’ की

पिछले पांच वर्षों से स्वस्थ भारत अभियान लगातार चलाया जा रहा है। कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिमम रिटेल प्राइस, जेनरिक लाइए पैसा बचाइए, नो योर मेडिसिन, स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज जैसे कैंपेन के माध्यम से देश को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने वाले आशुतोष कुमार सिंह से इस साक्षात्कार में प्रभांशु ओझा ने उनके जीवन एवं इस अभियान की कहानी को जानने का प्रयास किया है। इसे जरूर देखें। इसे देखकर आपको अंदाजा हो जायेगा कि अगर एक आदमी ठान ले तो बहुत कुछ बदल सकता है।

SBA विडियो काम की बातें स्वास्थ्य स्कैन

यह वीडियो सभी माताओं को जरूर देखनी चाहिए, आप अपने बच्चों को कहीं ‘कैंसर’ तो नहीं खिला रही हैं…

बच्चों को हम जो खिलाते हैं, जैसे खिलाते हैं, उसका असर उनके मन मनष्तिसक में होता ही है। ऐसे में अपने बच्चों को हेल्दी फूड खिलाना बहुत जरूरी होता है। कई बार टीवी पर चल रहे विज्ञापन को देखकर हम यह समझ लेते हैं, अमूक उत्पाद ज्यादा फायदेमंद हैं। लेकिन ऐसी बात नहीं है। नीचे दिया गया वीडियो दक्षिण भारतीय भाषा में है। इस वीडियो में कही गयी एक-एक बात को गौर से देखिए, आपके रोंगटे ख़ड़े हो जाएंगे। स्वस्थ भारत अभियान इस वीडियो को प्रोड्यूस करने वालों को साधुवाद प्रेषित करता है।

चौपाल मन की बात

‘पीरियड’ एक फ़िल्म भर का मुद्दा नहीं है

जिस बात पर सबसे ध्यान देने की ज़रूरत है, वह यह है कि पीरियड में आप चाहें सेनिटरी पैड इस्तेमाल में ला रही हों, क्लॉथ-पैड का प्रयोग करती हों या फ़िर टैम्पॉन, कप जैसी चीज़ों का इस्तेमाल करती हों, इसे बस औरतों की गुप-चुप बात न बनाए रखें. इसके बारे में बात करें, अपने घर के मर्दों से बात करें, घर पर काम करने आने वाली दीदीयों से बात करें, अपनी बेटी से बात करें, अपनी माँ से सवाल-जवाब करें, अपने किशोर होते बेटों को समझाएं ताकि उनके दिमाग में कोई अधूरी जानकारी घर न कर जाए.
साथ ही साथ सेनिटरी पैड वालों के किसी भी फ़िज़ूल के एड का भरोसा न करें. वे चाहे लाख कहें कि पीरियड में भी आपको आम दिनों की तरह रहना चाहिये, उतना ही काम करना चाहिये, उनकी बात न मानें. आप भी जानती हैं कि आपका शरीर इन दिनों उन हालात में नहीं रहता कि आप नॉर्मल रह पायें तो फ़िर बाज़ार की बकवास सुननी ही क्यों है?
खैर, बाज़ार अनजाने में भी कभी-कभी भली बात कर जाता है. शुक्र है कि फ़ायदे के लिए ही सही, सिनेमा जैसे वृहत माध्यम के ज़रिये पीरियड्स पर वह बात तो हो रही है जो आम-लोगों तक जायेगी, वर्ना सोशल मीडिया की बहस का क्या है, यहीं शुरू होती है, यहीं ख़त्म हो जाती है.

SBA विडियो काम की बातें बचाव एवं उपचार रोग समाचार

अच्छे डॉक्टर मिल जाए तो जिंदगी बदल जाती है…ऐसी ही यह कहानी हैं…देखें चार मिनट में…

डॉ. मनीष कुमार, न्यूरो सर्जन हैं। वे हमेशा इस तरह का काम करते रहते हैं कि सुनकर विश्वास न हो। इस बार उन्होंने ट्राइजैमनल न्यूरोलजिया की एक मरीज की सर्जरी की है। पांच दिनों में वो बिल्कुल ठीक हो गई। क्या कहती है मरीज, आप खुद सुनिए उसके जुबानी…