फार्मा सेक्टर

केमिस्ट ने मंत्री जी को खिलाई गलत दवा औषधि नियंत्रण प्रशाशन रेस

आल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रिस्ट्रीब्यूशन फ़ेडरेशन के महासचिव गितेश्वर चंद्राकर ने बताया, ”दवा दुकान को बंद कर दिया गया और फिर नगरीय प्रशासन विभाग का अमला पुलिस के साथ दुकान तोड़ने के लिए आ पहुंचा. हमारे विरोध के बाद कहीं जाकर कार्रवाई रोकी गई। चंद्राकर का कहना था कि इस घटना के बाद राज्य भर के मेडिकल और केमिस्ट का व्यवसाय करने वालों में भय का वातावरण है।

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मध्य प्रदेश के संबीदा कर्मी ने सीएम शिवराज को लिखा खुला पत्र

भोपाल / 15.03.2016 एनएचआरएम मध्य प्रदेश में काम कर रहे एक संबीदा स्वास्थ्य कर्मी ने शिवराज चौहान को एक खुला पत्र लिखा है बतातें चलें की मध्य प्रदेश के करीब 30 हज़ार संबीदा कर्मचारी पिछले पंद्रह दिनों से लगतार कलमबंद हड़ताल पर है । आदरणीय शिवराज चौहान जी मुख्यमंत्री म.प्र. शासन   आपके कार्यकाल में […]

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फार्मासिस्ट संगठन समेत सोशल मीडिया पर चीख रहे फार्मासिस्टों की सच्चाई

काफी दिन से चाह रहा की आंदोलनों और संगठनो समेत सोशल मीडिया पर चीख रहे फार्मासिस्टों की सच्चाई लिखूं ! यह सोच कर रुक जाता की कई दिल टूट जायेगे… रिश्ते में खटास आ जायेगी ! आज कोशिश करता हूँ की रिस्क ले ही लूँ … वैसे भी क्या फर्क पड़ेगा… जिन्हे बुरा लगे ज्यादा से ज्यादा गालियां देंगे … उससे ज्यादा कुछ कर भी तो नहीं सकते … !!

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मध्य प्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल का घेराव 8 जनवरी को …

मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल और औषधी नियंत्रण प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार से तंग आकर मध्य प्रदेश के फार्मासिस्टों ने खुली जंग छेड़ दी है। संगठन के सदस्य विभिन्न जिलों में लगातार प्रदर्शन कर रहे है। संगठन के सदस्यों ने सरकार को चेतावनी दी है अगर फार्मेसी काउंसिल अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आती है। तो वे फार्मेसी काउंसिल के साथ औषधी नियंत्रण विभाग में ताले जड़ देंगे। संगठन के अध्यक्ष अम्बर चौहान ने दिनांक 8 जनवरी को स्टेट फार्मेसी काउंसिल का घेराव करने का एलान किया है! अम्बर ने बताया की रैली दोपहर 12 बजे बोर्ड ऑफिस, भोपाल से निकलेगी। अम्बर ने प्रदेश के फार्मासिस्टों को बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने को कहा है।

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7 वें वेतन आयोग के नाइंसाफी के खिलाफ 28 दिसंबर को संसद पर हल्ला बोलेंगे फार्मासिस्ट

28 को संसद का घेराव करेंगे के फार्मासिस्ट

बर्षों से अच्छे दिनों के इंतज़ार कर रहे देश के फार्मासिस्टों को बड़ा झटका लगा है। 7 वें सेंट्रल पे कमीशन के फार्मासिस्ट विरोधी गतिविधियों के खिलाफ देश भर के फार्मासिस्ट एक जुट हो गए है। फेडरेशन ऑफ़ इंडियन फार्मासिस्ट आर्गेनाईजेशन ने 7वें सीपीसी की सिफारिशों को फार्मासिस्ट समुदाय के साथ धोखा बताया है। 7वें सीपीसी के खिलाफ देश भर के फार्मासिस्टों में जबरजस्त उबाल है। उक्त विषय को लेकर 28 दिसंबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन और संसद मांर्च का एलान फेडरेशन ने किया है। खबरों के मुताबिक जंतर मंतर पर होने वाले धरने को सफल बनाने के लिए देश भर से फार्मासिस्टों का जत्था दिल्ली पहुंच रहा है।

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सरकार चाहे तो फार्मा हब के रूप में विकसित हो सकता है बिहारःबिनोद कुमार

बिहार में दवा कंपनियां करोडो डॉलर का टर्न ओवर पूरा कर रही है, सरकार को अच्छा खासा राजस्व भी मिल रहा है वही बिहार में फार्मासिस्टों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति ठीक नहीं है। फार्माक्युटिकल कंपनियों की बिहार से दुरी यहाँ के प्रतिभावान छात्रों को पलायन को मजबूर करती रही है। उन्हें सम्मानित वेतन तक नसीब नहीं। उक्त बातें इंडियन फार्मासिस्ट ग्रेजुएट एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष बिनोद कुमार ने राष्ट्रीय फार्मासिस्ट सप्ताह के आयोजन पर कही।

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फार्मासिस्टों ने मनाया ब्लैक डे

सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के विरोध में काला दिवस मनाते हुए जनपद मुरादाबाद के विभिन्न विभागों के हजारों कर्मचारियो ने केंद्र के कर्मचारियो के साथ रेलवे स्टेशन से जुलुस निकाल कर DRM पर आम सभा की। राज्य कर्मचारियो में वेतन आयोग की रिपोर्ट के विरूद्ध जबरदस्त आक्रोश दिखाई दिया और कहा अगर जरुरत पड़ी तो कर्मचारी सडको पर उतरकर इस रिपोर्ट का विरोध करेंगे। अगर हड़ताल पर भी जाने पड़े तो गुरेज नही करेंगे ।

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अवैध दवा दुकानों का पता लगायेंगे मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव

प्रांतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने एक विशेष टीम का गठन किया है जो दवा विक्रेताओं को अवैध तरीके से दवा वितरण करने वालों पर लगाम लगाने हेतु औषधि नियंत्रण विभाग से साथ मिलकर काम करेगी। इस बावत सभी जिले के कलेक्टरों को सूचित किया जा रहा है। अगर ड्रग इंसपेक्टर और औषधि नियंत्रण प्रशासन के अधिकारी सहयोग नहीं करेंगे तो उनपर भी करवाई हेतु सरकार को लिखा जाएगा। इस अभियान के अभियान के लिए मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव का काम कर रहे फार्मासिस्टों को ज़िम्मेदारी दी गई है । इस खबर से जहाँ दवा विक्रेताओं में हड़कम्प मचा हुवा है, वही दूसरी तरफ अवैध तरीके से दवा वेच रहे डॉक्टरों की भी साँसे फूल गयी है।

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एलोपैथी प्रिस्क्रिप्सन के अधिकार को लेकर आमने – सामने हुवे आयुष और फार्मासिस्ट

फार्मासिस्टों द्वारा प्रिस्क्रिप्सन की मांग करना कोई नया मुद्दा नहीं है। काफी सालों से देश के बिभिन्न राज्यों में फार्मासिस्ट संगठन अपनी मांग उठाते रहे है। विगत कुछ सालों में देश भर के फार्मासिस्ट एक जुट होने लगे है। जहाँ एक तरफ मद्य प्रदेश में आंदोलन जोर पकड़ रहा है। वही उत्तर भारत समेत राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, यूपी, बिहार समेत नार्थ ईस्ट राज्यों ने भी प्रिस्क्रिप्सन लिखने की मांगो को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। एक तरफ जहाँ पहले ही डॉक्टर की कमी से राज्यों की सरकारें परेसानी झेल रही थी । आयुष चिकित्सकों पर एमटीपी और बंध्याकरण के फैसले पर भी सोच विचार कर रही थी ऐसे में फार्मासिस्टों की धमक कही सरकार को मुश्किल में डाल सकता है। ऐसे में राज्य सरकारों की मुश्किलें बढ़ने वाली है।

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सुर्ख़ियों में है PJSR राजस्थान का अभियान

राजस्थान के फार्मासिस्टों ने औषधि विभाग के खिलाफ जगह जगह मोर्चा खोल दिया है इसी क्रम में अलवर जिले में फार्मासिस्ट जाग्रति संस्थान (राजस्थान) के जिलाध्यक्ष दुर्गेश चौधरी ने पहले बैठक की फिर अपने साथी सदस्यों के साथ एडीसी से मुलाकात कर करवाई हेतु जनादेश दिया । अलवर के एडीसी ने संगठन के सदस्यों द्वारा की गई शिकायत को गंभीरता से लेते हुवे करवाई करने का आश्वासन दिया है ।

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