नारी व योग

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Ira Singh For Swasthbharat.in

सभी तरह के वैज्ञानिक विकास और चिकित्सकीय सुविधायों के बावजूद आदमी के दर्द कम नहीं हुए है। मुख्यतः औरते जिन्हें अब और अधिक कार्य भार का सामना करना पड़ा रहा है, घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी के साथ साथ करिअर और बदलते सामाजिक ढांचे से उत्पन्न स्थितियों का भी सामना करना पड़ रहा है। जिसका परिणाम है औरतों में बढ़ता मानसिक तनाव और शारीरिक कमजोरी। यहां योग आपकी मदद कर सकता है। अच्छा स्वास्थ अच्छे जीवन की
आधारशीला है। ऋषि मुनियों ने योग को इजाद करते वक्त कहा था की योग मनुष्य जाति के सभी दुखों को हर लेगा। योगाभ्यास से शारीरिक, मानसिक, अध्यात्मिक, भावनात्मक विकास व तालमेल से व्यक्ति का विकास होता है और यह ही हमारा मुख्य उदेश्य है। मेरा विश्वास है की योग नारी शरीर के लिए सर्वोतम व्यायाम है। कई समस्याएं है जिससे महिलाओं को अधिक जुझना पड़ता है जैसे मासिक धर्म  सम्बन्धी  समस्याएं , प्रजनन अंगों से सम्बंधित समस्याएं  या हार्मोन्स से जुड़ी बीमारियां |योग अद्भुत देन  है जिसे अपना कर हम इन परेशानियों  से दूर रह सकते हैं |चूँकि योग धीमी और लयबद्ध पद्धति है इसलिए इसमें उर्जा का अनावश्यक व्यय नहीं होता है बल्कि हम योगाभ्यास के बाद अधिक उर्जा को प्राप्त करते हैं। योग हमारी जीवन पद्धति को सुधारता है। किसी भी परिस्थिति और उम्र में योग को अपनाया जा सकता है। योग से न सिर्फ शारीरिक बिमारियों को दूर रखा जा सकता है अपितु मानसिक शान्ति व स्थिरता की स्थिति भी प्राप्त की जा सकती है।

यह सच है की हमारा जीवन बहुत- सी जिम्मेदारियों व इच्छाओं से घिरा है परन्तु हमको समय-समय पर अपनी प्राथमिकताओं का आंकलन करते रहना चाहिए। आज प्रत्येक औरत समय की कमी की शिकायत करती है परन्तु सच में यह इच्छा शक्ति की कमी है। योग को अपने जीवन में  अपनाने की एक ही शर्त है अनुशाशन व नियमित अभ्यास। यदि आप शुरूआत में 20-25 मिनट अपने लिए निकाल सके तो इसके अद्भुत परिणाम आप स्वयं देख  सकेंगे। योग आपकी खूबसूरती को ही नहीं आपके आत्म विश्वास को भी बढ़ा देगा।

यहां हम आपको कुछ आसन व प्राणायाम दे रहे जो महिलाओं के स्वास्थ, खूबसूरती, और विश्वास के लिए उत्तम है।

पश्चिमोत्तान आसन

पश्चिमोत्तान आसन

  • पश्चिमोत्तान आसन-पैरो को सामने फैला कर बैठे  जाइए। धीरे-धीरे शरीर को आगे झुकाइए। पैरों के अंगूठे को पकड़ने का  प्रयत्न कीजिये। कुछ देर रुकें। किसी भी हालत मे जबरदस्ती से न करे। ये पेट के सभी अंगो पर दबाब डालता है। इसलिए ये स्त्रियों के प्रजनन अंगो के रोगों को दूर करने मे विशेष रूप से लाभदायक है।

 

  • विपरितकरनी मुद्रा

    विपरितकरनी मुद्रा

    विपरितकरनी मुद्रासीधा लेट जाएं। अब हाथों का सहारा लेते हुए दोनों पावों को एवं कमर को ऊपर उठाएं । शरीर को जमीन से ४५ डिग्री पर रखें। यह हारमोंस से संबंधित समस्याओं को दूर करता है। लगातार अभ्यास से चहरे की झुरियां दूर होती है। मासिक के समय इस आसन को न करें।

 

  • vyaghrasana-kya-hai3व्याघ्रासन- वज्रासन में  बैठे। अब घुटने के बल खड़े हो जाएं और दोनों हाथों को आगे की तरफ रखे। अब दाएं पांव को पीछे उठा कर सिर की तरफ लाएं। सिर आगे झुकाएं और अपनी नाक घुटने को लगाएं फिर सिर उपर उठाएं और पांव पीछे ले जाएं। ऐसा पांच बार करें। यह शिशु जन्म के बाद विशेष रूप से लाभकारी है और महिलायों के प्रजनन अंगों को सामान्य बनाने में उपयोगी है।

 

  • उज्जाई प्राणायाम

    उज्जाई प्राणायाम

    उज्जाई प्राणायाम –इसमें सांस लेते समय गले को संकुचित करें और सांस  छोड़ते समय ढीला छोड़े|सांस गहरी और धीमी रखें। इस प्राणायाम को बहुत देर तक कर सकते हैं। यह सम्पूर्ण नाड़ी संस्थान पर अच्छा प्रभाव डालता है। रक्त पूर्ति को सही करता है। अनिंद्रा व मानसिक तनाव को कम करता है।

 

प्रथ्वी मुद्रा

प्रथ्वी मुद्रा

  • प्रथ्वी मुद्रा इस मुद्रा में अनामिका के शीर्ष को अंगूठे के शीर्ष के साथ मिलाया जाता है| स्त्रियों के लिए ये मुद्रा बहुत लाभकारी है। यह मुद्रा हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। इससे उर्जा  बढती है और विटामिनों की कमी दूर होती है।

 

नोटःलेखिका- योग प्रशिक्षिका हैं।

संपर्क- 91- 9460513744,email-irahere1@yahoo.co.in

 

 

 

 

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