अस्पताल समाचार

सरकारी अस्पतालों में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव नहीं पढ़ा पाएंगे ब्रांडेड दवाइयों का पाठ,बिहार सरकार का क्रांतिकारी फैसला

मेडिकल क्षेत्र के लिए बिहार से एक बहुत ही क्रांतिकारी खबर सामने आ रही है। बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव को चिकित्सकों से मिलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का तर्क है इससे जेनरिक दवाइयों की मुहिम को नुक्सान हो रहा है। साथ ही मरीजों को दिए जाने वाले समय में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
SBA विशेष अस्पताल कैरियर

अब तो मेडिकल की महंगी पढाई मार गई…

स्वास्थ्य के मामले में भारत की स्थिति दुनिया में शर्मनाक  है। यहां तक कि चिकित्सा सेवा के मामले में भारत के हालात श्रीलंका, भूटान व बांग्लादेश से भी बदतर हैं। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य पत्रिका ‘ लांसेट’ की ताजातरीन रिपोर्ट ‘ ग्लोबल बर्डन आफ डिसीज’ में बताया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में हमारा देश दुनिया के कुल 195 देशों की सूची में  145वें स्थान पर है। रिपोर्ट कहती है कि भारत ने सन 1990 के बाद अस्पतालों की सेहत में सुधार तो किया है। उस साल भारत को 24.7 अंक मिले थे, जबकि 2016 में ये बढ़ कर 41.2 हो गए हैं। देश के आंचलिक कस्बें की बात तो दूर राजधानी दिल्ली के एम्स या सफदरजंग जैसे अस्पतालों की भीड़ और आम मरीजों की दुर्गति किसी से छुपी नहीं है। एक तो हम जरूरत के मुताबिक डाक्टर तैयार नहीं कर पा रहे, दूसरा देश की बड़ी आबादी ना तो स्वास्थ्य के बारे में पर्याप्त जागरूक है और ना ही उनके पास आकस्मिक चिकित्सा के हालात में  केाई बीमा या अर्थ की व्यवस्था है।  हालांकि सरकार गरीबों के लिए मुफ्त इलाज की कई योजनाएं चलाती है लेकिन व्यापक अशिक्षा और गैरजागरूकता के कारण ऐसी योजनाएं माकूल नहीं हैं।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
अस्पताल समाचार

अंखड ज्योति आई अस्पतालः जहां 5 लाख लोगों की निःशुल्क हुई आंखों की सर्जरी…

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि, अंखड ज्योति आई अस्पताल के रजनीकांत केन्द्र का उद्घाटन करते हुए आशा करता हूं कि  आंखों के देखभाल के क्षेत्र में  यह केन्द्र सस्ती एवं सुलभ सेवा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं कि यह केन्द्र उच्च गुणवत्ता की के साथ आंखों की देखभाल करने में सफल होगा और अंधेपन को दूर करने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय कार्यक्रम को सफल बनाने में सहायक भी साबित होगा।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
अस्पताल समाचार

MMU की तानाशाही: नर्सिंग की छात्राओं का हुक्का-पानी किया बंद, सैकड़ों छात्राएं हॉस्टल छोड़ निकली अपने घर की ओर…

मेडिकल कॉलेजों में बेहतर पढ़ाई हो इसको लेकर बेसक सरकार एनएमसी बिल लाने की तैयारी कर रही है लेकिन दूसरी तरफ हरियाणा सरकार के अंतर्गत आने वाले अंबाला के मुलाना स्थित महर्षि मार्कन्डेश्वर विश्वविद्यालय के प्रसाशन ने सैकड़ों नर्सिंग छात्राओं का हूक्का-पानी बंद कर दिया है। सैकड़ों लड़कियों को विश्वविद्यालय छोड़कर अपने घर जाना पड़ रहा है। पिछले कई दिनों से नर्सिंग विभाग की छात्राएं होस्टल फी बढाए जाने को लेकर हड़ताल पर थी। उनका हड़ताल खत्म कराने का नायाब तरीका विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनाया है. लड़कियों के मेस को बंद कर दिया गया. क्लासेस बंद कर दी गईं। उनके हॉस्टल में ताला जड़ दिया गया।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
SBA विशेष अस्पताल दस्तावेज

जानिए किस तरह लूटते हैं दिल्ली के बड़े अस्पताल…

दिल्ली के मैक्स, गुरुग्राम एवं बसंतकुंज के फोर्टिज अस्पताल, सरिता बिहार के अपोलो अस्पताल सहित देश की राजधानी के कई नामचीन अस्पतालों की सच्चाई लोगों के पास आनी शुरू हो गई है। जनता जागी तो सरकारों के कान भी बजने लगे हैं। सरकार भी इन अस्पतालों के खिलाफ कमर कस चुकी है। इसी कड़ी में बीते दिसंबर को दिल्ली सरकार ने मेडिकल निग्लीजेंस के मामले में दिल्ली के शालिमारबाग स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया।  इस फैसले ने पूरी मेडिकल क्षेत्र में हो रही लापरवाही एवं लूट के मामले को देश की मुख्यधारा मीडिया में ला दिया है। हालांकि बाद में अस्पताल का लाइसेंस बहाल कर दिया गया। यह बहाली भी कटघरे में ही है।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
Frontpage Article SBA विशेष अस्पताल विमर्श स्वास्थ्य स्कैन

क्या आप जानते हैं ! 65 साल पहले भारत में आया जापानी इंसेफलाइटिस !

भारत जैसे देश किसी भी नई बीमारी का पालनहाल आसानी से बन जाते हैं। सवा अरब से ज्यादा जनसंख्या को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे भारत में जब कोई बीमारी आयात होती है, तो उसकी खातिरदारी घर आए मेहमान की तरह की जाती है। उसके प्रति हमारा नजरिया, उसको रोकने के उपाय ठीक वैसे ही होते हैं जैसे घर आए दामाद खुद से चले जाएं तो ठीक है, नहीं तो उन्हें कौन कहे की आप अपने घर चले जाइए। ऐसी बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि बीमारियों के फलने-फूलने के लिए जरूरी खाद-पानी यहां पर भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। यहां पर नई बीमारियों की खेती करने में पूरा तंत्र सहयोग करता है। कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू एवं इबोला जैसी बीमारियों की खेती यहां पर खूब हो रही है। इनकी ब्रांडिंग कर के कुछ यहां के कुछ दूसरे मूल्कों की संस्थाएं अपनी आर्थिक स्वार्थों को पूर्ण करने में सफल भी हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ स्वस्थ मानव संसाधन की रीढ़ की हड्डी तोड़ने की कोशिश साकार होती दिख रही है।
आश्चर्य का विषय यह है कि भारत सरकार इंसेफलाइटिस के सही कारणों को जानने में अभी तक नाकाम रही है। अभी जांच का फोकस गोरखपुर बना हुआ है। जबकि इस बीमारी का फैलाव देश के लगभग प्रत्येक कोने में है। दक्षिण भारत में यह बीमारी पहले आई लेकिन वहां पर वह उतना सफल नहीं हुई जितना उत्तर भारत में दिख रही है। ऐसे में शोध का बिंदु दक्षिण भारत भी होना चाहिए। इतना ही नहीं जांच का बिंदु एशिया के तमाम देश भी होने चाहिए जहां पर यह बीमारी अपना पांव पसार चुकी है। शायद तब जाकर हम इस बीमारी के कारणों की तह में जा पाएंगे एवं ईलाज ढूढ़ पाने के नजदीक पहुंचेंगे। अभी तो ऐसा लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं है कि इस बीमारी का ईलाज संभव हो सके नहीं तो गर हमारी सरकारों ने इस बीमारी की भयावहता को पहले ही भांप कर समुचित कदम उठाया होता तो बीआरडी अस्पताल में जो चीख-पुकार सुनने को मिल रही है शायद वह नहीं मिलती।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
चिकित्सक संवेदनशील बनें
SBA विशेष अस्पताल

देश के गरीबों को ध्‍यान में रखें चिकित्सकः प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सर्वांगीण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा संबंधी विश्‍व रुझानों का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने उत्‍तीर्ण छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल बीमारी का इलाज न करें बल्‍कि मरीजों के साथ निकट का संबंध भी रखें। समारोह में निकट के सरकारी स्‍कूलों के बच्‍चों की उपस्‍थिति को देखकर प्रधानमंत्री ने कहा कि ये बच्‍चे ही इस अवसर पर असली विशेष अतिथि हैं। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि यह अवसर बच्‍चों को प्रेरित करेगा।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
अस्पताल समाचार

संसदीय समिति ने लगाई स्वास्थ्य मंत्रालय को फटकार

राज्य सभा सांसद सतीश चंद्र मिश्र की अगुवाई वाली संसद की स्थाई समिति ने कहा है कि चिकित्सा जगत में शोध व विकास के मामले में देश ही नहीं दुनिया में भी अग्रणी रहे संस्थान एम्स में शोध व विकास की सारी जरूरतें न केवल सरकार पूरी करे बल्कि इसकी लोकतांत्रिक जवाबदेही भी है। की जाए। इससे न केवल जनस्वास्थ्य के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है बल्कि इसी तरह से कंपनी प्रायोजित शोध व विकास का उन्मूलन किया जा सकता है।
समिति ने कहा है कि जनता के पैसों से स्थापित एम्स को जरूरत के हिसाब से देश के तमाम दूसरे सरकारी मेडिकल कालेजों के साथ या दुनिया के नामी स्वस्थ्य केंद्रों के साथ साझीदारी की जरूरत हो तो वह किया जा सकता है। शोध भी ऐसा किया जाए जिसका जनता को सीधे लाभ मिले न कि लैब में बंद पड़े रहने वाले शोध किए जाय। जरूर हो तो केवल उच्च शिक्षा ही संस्थान में कराई जाय।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
अस्पताल समाचार

केईएम अस्पताल के एक और डॉक्टर को हुआ डेंगू

– डॉक्टर की गंभीर हालत के चलते किया हिंदूजा अस्पताल में ऐडमिट – बीएमसी ने केईएम अस्पताल और हॉस्टल को दिया डेंगू की ब्रीडिंग साइट के चलते नोटिस Deepika Sharma For SBA मुंबई/ केईएम अस्पताल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की डेंगी से मौत हुए, एक हफ्ता भी नहीं हुआ है, इसी अस्पताल के तीन और […]

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
अस्पताल समाचार

500 रूपये की खातिर छत्तीसगढ़ में तार तार हो गई इंसानियत

अभी अभी छत्तीसगढ़ ने बहुत गर्व और गौरव से अपना स्थापना दिवस मनाया है। लेकिन जिस वक्त राजधानी अपने होने के जश्न में डूबी थी उसी वक्त राजधानी रायपुर के सबसे बड़े भीमराव अंबेडकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। पोस्टमार्टम विभाग (चीरघर) के कुछ भ्रष्ट कर्मचारी शनिवार ने […]

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें