Frontpage Article SBA विशेष अस्पताल विमर्श स्वास्थ्य स्कैन

क्या आप जानते हैं ! 65 साल पहले भारत में आया जापानी इंसेफलाइटिस !

भारत जैसे देश किसी भी नई बीमारी का पालनहाल आसानी से बन जाते हैं। सवा अरब से ज्यादा जनसंख्या को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे भारत में जब कोई बीमारी आयात होती है, तो उसकी खातिरदारी घर आए मेहमान की तरह की जाती है। उसके प्रति हमारा नजरिया, उसको रोकने के उपाय ठीक वैसे ही होते हैं जैसे घर आए दामाद खुद से चले जाएं तो ठीक है, नहीं तो उन्हें कौन कहे की आप अपने घर चले जाइए। ऐसी बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि बीमारियों के फलने-फूलने के लिए जरूरी खाद-पानी यहां पर भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। यहां पर नई बीमारियों की खेती करने में पूरा तंत्र सहयोग करता है। कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू एवं इबोला जैसी बीमारियों की खेती यहां पर खूब हो रही है। इनकी ब्रांडिंग कर के कुछ यहां के कुछ दूसरे मूल्कों की संस्थाएं अपनी आर्थिक स्वार्थों को पूर्ण करने में सफल भी हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ स्वस्थ मानव संसाधन की रीढ़ की हड्डी तोड़ने की कोशिश साकार होती दिख रही है।
आश्चर्य का विषय यह है कि भारत सरकार इंसेफलाइटिस के सही कारणों को जानने में अभी तक नाकाम रही है। अभी जांच का फोकस गोरखपुर बना हुआ है। जबकि इस बीमारी का फैलाव देश के लगभग प्रत्येक कोने में है। दक्षिण भारत में यह बीमारी पहले आई लेकिन वहां पर वह उतना सफल नहीं हुई जितना उत्तर भारत में दिख रही है। ऐसे में शोध का बिंदु दक्षिण भारत भी होना चाहिए। इतना ही नहीं जांच का बिंदु एशिया के तमाम देश भी होने चाहिए जहां पर यह बीमारी अपना पांव पसार चुकी है। शायद तब जाकर हम इस बीमारी के कारणों की तह में जा पाएंगे एवं ईलाज ढूढ़ पाने के नजदीक पहुंचेंगे। अभी तो ऐसा लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं है कि इस बीमारी का ईलाज संभव हो सके नहीं तो गर हमारी सरकारों ने इस बीमारी की भयावहता को पहले ही भांप कर समुचित कदम उठाया होता तो बीआरडी अस्पताल में जो चीख-पुकार सुनने को मिल रही है शायद वह नहीं मिलती।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
women toilet काम की बातें मन की बात विमर्श समाचार स्वस्थ भारत यात्रा

विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत ने की मांग, महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर बने शौचालय!

‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ विषय को लेकर 21000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा करने वाले स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर अलग शौचालय बनाएं जाने कीय मांग की है। अपनी यात्रा के अनुभवों एवं बालिकाओं से हुई बातचीत का हवाला देते हुए श्री आशुतोष ने कहा कि देश के प्रत्येक जिला मुख्यालय, प्रखंड मुख्यालय, बस अड्डा सहित उन सभी जगहों पर महिलाओं के अलग से शौचालय बनें, विशेष रूप से मूत्रालय।
श्री आशुतोष ने बताया की यात्रा के दौरान देश भर की बालिकाओं ने अलग से मूत्रालय बनाये जाने की बात प्रमुखता से रखी थी। विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत (न्यास) के पदाधिकारियों ने एक बैठक की। इस बैठक में यह निर्णय किया गया की बालिकाओं के लिए अलग से शौचालय की मांग को जोर सोर से उठाया जायेगा। अगर सरकार इस बात पर गंभीर नहीं हुई तो आंदोलन किया जायेगा। इस अवसर पर धीप्रज्ञ द्विवेदी, शशिप्रभा तिवारी, प्रसून लतांत सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
विविध समाचार स्वास्थ्य मित्र

श्रीनगर के 18 वर्षीय युवा को ‘स्वच्छता ही सेवा’ का एम्बेसडर बनाया गया

श्रीनगर के युवा बिलाल डार को श्रीनगर नगर निगम का ब्रान्ड एम्बेसडर बनाया गया है। 12 वर्ष की उम्र से ही बिलाल डार ‘स्वच्छता अभियान’ में योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में बिलाल डार का जिक्र किया था।श्रीनगर के युवा बिलाल डार को श्रीनगर नगर निगम का ब्रान्ड एम्बेसडर बनाया गया है। 12 वर्ष की उम्र से ही बिलाल डार ‘स्वच्छता अभियान’ में योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में बिलाल डार का जिक्र किया था।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
काम की बातें बचाव एवं उपचार रोग समाचार

लिवर से संबंधित बिमारी आ ओकर बचाव

जब लिवर मे कवनो संक्रमण , सूजन चाहे कवनो तरह के विकार से संबंघित लक्छण के हेपाटाइटिस चाहे आम भाषा मे पीलिया भा जॉन्डिस कहल जाला।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
SBA विशेष काम की बातें चिंतन

साहब! एड्स नहीं आंकड़ों का खेल कहिए…

आज चारों ओर बाजार का दबदबा है। उसने हमारे मनोभाव को इस कदर गुलाम बना लिया है कि हम उसके कहे को नकार नहीं पाते। वह जो कहता है, वही जीवन-आधार और सुख का मानक हो जाता है! इसी बाजार ने एक बीमारी दी, जिसको वर्तमान में एड्स के नाम से जाना जाता है। इसके लिए बाजार ने बहुत ही शातिर तरीके से सुख-खोजी प्रवृत्ति को सुख-भोगी बना दिया है! भोग-बाजार के विस्तार ने पारिवारिक ढांचे को तहस-नहस कर दिया, संबंध और रिश्तों के अनुशासन को बाजार के हवाले कर दिया और जरूरतों को वस्तुवादी बना दिया। फिर हम खुद भी बाजार के लिए एक वस्तु बन गए! वर्तमान में बीमारियों में सबसे बड़े ब्रांड के रूप में एड्स की पहचान है! पहले भोगी बना कर बाजार ने कमाई की और अब उसके दुष्परिणाम को बेच कर बाजार अपना विस्तार पा रहा है। बाजार-विस्तार को सूक्ष्मता से निरीक्षण करने पर मालूम चलता है कि बाजार ने हमें बीमारू किस तरह से बना दिया है।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
SBA विशेष स्वास्थ्य मित्र

…और बिनोद कुमार की पहल रंग लायी

स्वस्थ भारत अभियान से विशेष बातचीत में बिनोद कुमार ने बताया की फार्मा सेक्टर में रोजगार की कमी नहीं है ! दवा के उत्पादन से लेकर वितरण तक में फार्मासिस्टों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। सरकारी लिपापोती के कारण आज भी फार्मासिस्ट दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं ! महज़ ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट 1940 और फार्मेसी एक्ट 1948 को ठीक से लागू कर दिया जाए तो देश के लाखों बेरोजगार फार्मासिस्टों को रोजगार मिल जाए और आम लोगों को सुरक्षित तरीके से दवा। फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन 2015 के लागू होने से फार्मासिस्टों का मान सम्मान बढ़ेगा !

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
चिकित्सक संवेदनशील बनें
SBA विशेष अस्पताल

देश के गरीबों को ध्‍यान में रखें चिकित्सकः प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सर्वांगीण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा संबंधी विश्‍व रुझानों का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने उत्‍तीर्ण छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल बीमारी का इलाज न करें बल्‍कि मरीजों के साथ निकट का संबंध भी रखें। समारोह में निकट के सरकारी स्‍कूलों के बच्‍चों की उपस्‍थिति को देखकर प्रधानमंत्री ने कहा कि ये बच्‍चे ही इस अवसर पर असली विशेष अतिथि हैं। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि यह अवसर बच्‍चों को प्रेरित करेगा।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
अस्पताल समाचार

संसदीय समिति ने लगाई स्वास्थ्य मंत्रालय को फटकार

राज्य सभा सांसद सतीश चंद्र मिश्र की अगुवाई वाली संसद की स्थाई समिति ने कहा है कि चिकित्सा जगत में शोध व विकास के मामले में देश ही नहीं दुनिया में भी अग्रणी रहे संस्थान एम्स में शोध व विकास की सारी जरूरतें न केवल सरकार पूरी करे बल्कि इसकी लोकतांत्रिक जवाबदेही भी है। की जाए। इससे न केवल जनस्वास्थ्य के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है बल्कि इसी तरह से कंपनी प्रायोजित शोध व विकास का उन्मूलन किया जा सकता है।
समिति ने कहा है कि जनता के पैसों से स्थापित एम्स को जरूरत के हिसाब से देश के तमाम दूसरे सरकारी मेडिकल कालेजों के साथ या दुनिया के नामी स्वस्थ्य केंद्रों के साथ साझीदारी की जरूरत हो तो वह किया जा सकता है। शोध भी ऐसा किया जाए जिसका जनता को सीधे लाभ मिले न कि लैब में बंद पड़े रहने वाले शोध किए जाय। जरूर हो तो केवल उच्च शिक्षा ही संस्थान में कराई जाय।

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें
गैर सरकारी संगठन

दिल्ली में देश भर के एनएचएम कर्मियों की होगी जुटान, सरकार को घेरने की बनेगी योजना

AINHMA की बैठक 14 जून को देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य परियोज़ना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारी अपनी स्थाईकरण की मांग को लेकर लामबंद हो रहे है ! विदित है की देश भर में लाखों की संख्या में चिकित्सक, पैरामेडिकल समेत लाखों कर्मचारी बर्षों से अपनी सेवा दे रहे हैं। […]

यदि लेख/समाचार से आप सहमत है तो इसे जरूर साझा करें