SBA विशेष बचाव एवं उपचार मन की बात

मोदी सरकार के चार सालः टीकाकरण की दिशा में सार्थक पहल

टीकाकरण की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन इस बात पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है कि आखिर यह टीका पेशेवर एवं प्रशिक्षित हाथों से कैसे दिलाया जाए। टीका के मामले में सबसे ज्यादा शिकायत इसी बात की होती है कि टीका देने वाले प्रशिक्षित नहीं है। अगर प्रशिक्षित हाथों से टीका नहीं पड़ा तो इसका गलत प्रभाव भी बच्चों पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को इस बात को सुनिश्चित करना होगा कि टीका को टेंपरेचर मेंटेन हो और सुरक्षित हाथों से ही शिशुओं एवं गर्भवती महिलाओं को टीका दी जाए।

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काम की बातें मन की बात

चिकित्सक-मरीज के बीच सार्थक संवाद जरूरी

संसद में 2012 में यह कहा गया कि देश की दवा कंपनियां 1100 फीसद तक मुनाफा कमा रही है। इसको लेकर पूरे देश में बहुत हो-हल्ला मचा था। इसी बीच डीपीसीओ-2013 की ड्राफ्ट नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग ऑथोरिटी ने जारी किया था। उस मसौदे में दवाइयों की कीमतों को तय करने की जो सरकारी विधी बताई गई थी, उसका विरोध होना शुरू हुआ। बावजूद इसके बाजार आधारित मूल्य निर्धारण नीति को डीपीसीओ-2013 का हिस्सा बनाया गया। इसका नुकसान यह हुआ कि दवाइयों को लेकर जो लूट मची थी, वह कम होने की बजाय यथावत रह गई। 2014 में बनी नई सरकार ने आम लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए जनऔषधि केन्द्र को बढ़ावा देना शुरू किया है। लेकिन इसकी उपलब्धता अभी सीमित है। ऐसे में दवा के नाम पर उपभोक्ता लगातार लूटे जा रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को जागरुक तो होना ही पड़ेगा ताकि संगठित लूट से वे खुद को बचा पाएं।

 

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SBA विशेष मन की बात

निपाह से डरे नहीं, समझे इसे

यहां यह ध्यान देने की बात है कि निपाह वायरस कोई नया वायरस नहीं है। आज से 20 वर्ष पूर्व 1998-99 में यह सबसे पहले मलेशिया एवं सिंगापुर में पाया गया था। 2001 में बाग्लादेश एवं भारत के पूर्वी हिस्सों में इसने अपना जाल फैलाया। भारत में सबसे पहले जनवरी-फरवरी-2001 में यह वायरस सिलीगुड़ी में फैला था। तब 66 केस सामने आए थे जिसमें 45 लोग यानी 68 फीसद लोगों को मृत्यु से नहीं बचाया जा सका। फिर सन 2007 में भारत के नादिया क्षेत्र में 5 लोग इस वायरस के परिक्षेत्र में आए और पांचों को अपनी जान गंवानी पड़ी। और एक बार फिर से केरल में इसने अपना पैर फैलाया है। इस बीमारी का लक्ष्ण जापानी बुखार, इंसेफलाइटिस जैसा ही है। बुखार आना, मांसपेसियों में दर्द होना एवं वोमेंटिंग इंटेंशन इस बीमारी के सामान्य लक्ष्ण बताए जा रहे हैं । चिकित्सकों के लिए मुसीबत यह है कि यह लक्ष्ण आमतौर पर पाए जाते हैं।

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फार्मा सेक्टर मन की बात स्वस्थ भारत अभियान

देश के हर पंचायत में जरूरी है जनऔषधि केन्द्र

यह हर्ष का विषय है कि प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने का काम इधर के वर्षों में तेजी से हुआ है। विपल्व चटर्जी के मार्गदर्शन में काम को गति मिली। हम आशा करते हैं कि विपल्व जी देश के प्रत्येक पंचायत में एक जनऔषधि केन्द्र खोलने का संकल्प लेंगे। स्वस्थ भारत उनके इस नेक काम में हर संभव मदद करने की कोशिश करेगा।

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दस्तावेज मन की बात

कैंसर संस्थान-अडियार, चेन्नई में प्रधानमंत्री ने क्या कहा आप भी पढ़ें…

कैंसर संस्थान डब्ल्यूआईए, चेन्नई एक स्वैच्छिक धर्मादा संस्थान है, जिसकी स्थापना स्वर्गीय डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी के प्रेरक नेतृत्व में स्वैच्छिक महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं के समूह द्वारा की गई थी।

इस संस्थान ने एक छोटे कॉटेज अस्पताल के रूप में अपनी शुरूआत की। यह दक्षिण भारत का पहला कैंसर विशेषज्ञता वाला अस्पताल था और देश का दूसरा कैंसर अस्पताल। आज संस्थान में 500 बिस्तरों का कैंसर अस्पताल है। मुझे बताया गया है कि इन बिस्तरों में 30 प्रतिशत बिस्तरों के लिए रोगियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।

केन्द्र सरकार द्वारा 2007 में संस्थान के मोलेकुलर ऑन्कोलॉजी विभाग को “उत्कृष्टता केन्द्र” घोषित किया गया। यह 1984 में स्थापित भारत का पहला सुपर स्पेशलिटी कॉलेज है। इसकी उपलब्धियां पथप्रदर्शक और सराहनीय हैं।

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चौपाल मन की बात

‘पीरियड’ एक फ़िल्म भर का मुद्दा नहीं है

जिस बात पर सबसे ध्यान देने की ज़रूरत है, वह यह है कि पीरियड में आप चाहें सेनिटरी पैड इस्तेमाल में ला रही हों, क्लॉथ-पैड का प्रयोग करती हों या फ़िर टैम्पॉन, कप जैसी चीज़ों का इस्तेमाल करती हों, इसे बस औरतों की गुप-चुप बात न बनाए रखें. इसके बारे में बात करें, अपने घर के मर्दों से बात करें, घर पर काम करने आने वाली दीदीयों से बात करें, अपनी बेटी से बात करें, अपनी माँ से सवाल-जवाब करें, अपने किशोर होते बेटों को समझाएं ताकि उनके दिमाग में कोई अधूरी जानकारी घर न कर जाए.
साथ ही साथ सेनिटरी पैड वालों के किसी भी फ़िज़ूल के एड का भरोसा न करें. वे चाहे लाख कहें कि पीरियड में भी आपको आम दिनों की तरह रहना चाहिये, उतना ही काम करना चाहिये, उनकी बात न मानें. आप भी जानती हैं कि आपका शरीर इन दिनों उन हालात में नहीं रहता कि आप नॉर्मल रह पायें तो फ़िर बाज़ार की बकवास सुननी ही क्यों है?
खैर, बाज़ार अनजाने में भी कभी-कभी भली बात कर जाता है. शुक्र है कि फ़ायदे के लिए ही सही, सिनेमा जैसे वृहत माध्यम के ज़रिये पीरियड्स पर वह बात तो हो रही है जो आम-लोगों तक जायेगी, वर्ना सोशल मीडिया की बहस का क्या है, यहीं शुरू होती है, यहीं ख़त्म हो जाती है.

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women toilet काम की बातें मन की बात विमर्श समाचार स्वस्थ भारत यात्रा

विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत ने की मांग, महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर बने शौचालय!

‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ विषय को लेकर 21000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा करने वाले स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर अलग शौचालय बनाएं जाने कीय मांग की है। अपनी यात्रा के अनुभवों एवं बालिकाओं से हुई बातचीत का हवाला देते हुए श्री आशुतोष ने कहा कि देश के प्रत्येक जिला मुख्यालय, प्रखंड मुख्यालय, बस अड्डा सहित उन सभी जगहों पर महिलाओं के अलग से शौचालय बनें, विशेष रूप से मूत्रालय।
श्री आशुतोष ने बताया की यात्रा के दौरान देश भर की बालिकाओं ने अलग से मूत्रालय बनाये जाने की बात प्रमुखता से रखी थी। विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत (न्यास) के पदाधिकारियों ने एक बैठक की। इस बैठक में यह निर्णय किया गया की बालिकाओं के लिए अलग से शौचालय की मांग को जोर सोर से उठाया जायेगा। अगर सरकार इस बात पर गंभीर नहीं हुई तो आंदोलन किया जायेगा। इस अवसर पर धीप्रज्ञ द्विवेदी, शशिप्रभा तिवारी, प्रसून लतांत सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।

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मन की बात

लंबा है स्वास्थ्य का डगर

स्थिति यह है कि अगर कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित भी है तो उसे अपनी मौत आने तक पता तक नहीं चलता है कि उसे सही मायने में कौन-सी बीमारी हुई है। देर-सबेर किसी मरीज को सद्बुद्धि आ भी जाए तो वो दौड़ता है जिला अस्पताल या फिर एम्स की तरफ।

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