SBA विशेष विविध स्वास्थ्य स्कैन

मोदी सरकार के चार वर्षः ग्रामीण स्वास्थ्य की बदलती तस्वीर

आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत अभियान, पोषण अभियान, इंद्रधनुष अभियान, नल-जल योजना, उज्ज्वला योजना सहित तमाम ऐसी योजनाएं बीते चार वर्षों में लागू हुई हैं। इसका सकारात्मक असर देश के शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। खासतौर से ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण एक क्रांतिकारी सामाजिक बदलाव की तरह दिख रहा है। प्रत्येक गांव में आशा कार्यकर्ताओं की उपलब्धता ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को मजबूति प्रदान की है। बावजूद इसके भारत जैसे बड़े भूभाग एवं जनसंख्या वाले देश के लिए अपने नागरिकों की स्वास्थ्य को सेहतमंद बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती है। और इस चुनौती को इस सरकार ने बीते चार वर्षों में सफलतापूर्वक स्वीकार किया भी है।

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SBA विशेष काम की बातें स्वास्थ्य स्कैन

पढ़े-लिखे लोग भी एंटीबायोटिक दवाओं के खतरों से बेखबर

सर्वेक्षण में शामिल पोस्ट ग्रेजुएट लोगों में से आधे से ज्यादा यह नहीं जानते थे कि दवा स्ट्रिप्स पर लाल रेखा क्या संकेत करती है। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि दवा स्ट्रिप्स पर लाल रेखा होने का तात्पर्य है कि उस दवा को डॉक्टर के परामर्श के बिना नहीं उपयोग करना चाहिए। उन्हें यह भी पता नहीं था कि ऐसी दवाओं को ओवर-द-काउंटर बिक्री की अनुमति नहीं है। कम शिक्षित लोगों की स्थिति इस मामले में अधिक खराब थी। स्नातक कर रहे 71 प्रतिशत और 58.5 प्रतिशत स्नातक लोग दवा स्ट्रिप्स पर ‘लाल रेखा’ के बारे में अनजान थे।

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SBA विडियो काम की बातें स्वास्थ्य स्कैन

यह वीडियो सभी माताओं को जरूर देखनी चाहिए, आप अपने बच्चों को कहीं ‘कैंसर’ तो नहीं खिला रही हैं…

बच्चों को हम जो खिलाते हैं, जैसे खिलाते हैं, उसका असर उनके मन मनष्तिसक में होता ही है। ऐसे में अपने बच्चों को हेल्दी फूड खिलाना बहुत जरूरी होता है। कई बार टीवी पर चल रहे विज्ञापन को देखकर हम यह समझ लेते हैं, अमूक उत्पाद ज्यादा फायदेमंद हैं। लेकिन ऐसी बात नहीं है। नीचे दिया गया वीडियो दक्षिण भारतीय भाषा में है। इस वीडियो में कही गयी एक-एक बात को गौर से देखिए, आपके रोंगटे ख़ड़े हो जाएंगे। स्वस्थ भारत अभियान इस वीडियो को प्रोड्यूस करने वालों को साधुवाद प्रेषित करता है।

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स्वस्थ भारत ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र, कहा जनऔषधि योजना विफल हो चुकी है

स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रही स्वस्थ भारत अभियान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर देश के सभी दवा दुकानों को राष्ट्रीयकृत किए जाने की मांग की है। स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने इस पत्र में प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना की विफलताओं के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि देश में 90 फीसद दवाइयां जेनरिक ही बिक रही हैं। फिर देश की तमाम दवा दुकानों पर ब्रांड के नाम पर जनता को क्यों लूटा जा रहा हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि गर सरकार देश की सभी दवा दुकानों को राष्ट्रीयकृत कर दे और सभी दुकानों पर जनऔषधि दवाइयां मिलने लगे तो अलग से जनऔषधि केन्द्र खोले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि देश का दवा बाजार 90 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया है। महंगी दवाइयों के कारण लोग गरीबी रेखा से ऊबर नहीं पा रहे हैं ऐसे में बाजार में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करना उचित नहीं है।

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क्या आप जानते हैं ! 65 साल पहले भारत में आया जापानी इंसेफलाइटिस !

भारत जैसे देश किसी भी नई बीमारी का पालनहाल आसानी से बन जाते हैं। सवा अरब से ज्यादा जनसंख्या को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे भारत में जब कोई बीमारी आयात होती है, तो उसकी खातिरदारी घर आए मेहमान की तरह की जाती है। उसके प्रति हमारा नजरिया, उसको रोकने के उपाय ठीक वैसे ही होते हैं जैसे घर आए दामाद खुद से चले जाएं तो ठीक है, नहीं तो उन्हें कौन कहे की आप अपने घर चले जाइए। ऐसी बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि बीमारियों के फलने-फूलने के लिए जरूरी खाद-पानी यहां पर भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। यहां पर नई बीमारियों की खेती करने में पूरा तंत्र सहयोग करता है। कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू एवं इबोला जैसी बीमारियों की खेती यहां पर खूब हो रही है। इनकी ब्रांडिंग कर के कुछ यहां के कुछ दूसरे मूल्कों की संस्थाएं अपनी आर्थिक स्वार्थों को पूर्ण करने में सफल भी हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ स्वस्थ मानव संसाधन की रीढ़ की हड्डी तोड़ने की कोशिश साकार होती दिख रही है।
आश्चर्य का विषय यह है कि भारत सरकार इंसेफलाइटिस के सही कारणों को जानने में अभी तक नाकाम रही है। अभी जांच का फोकस गोरखपुर बना हुआ है। जबकि इस बीमारी का फैलाव देश के लगभग प्रत्येक कोने में है। दक्षिण भारत में यह बीमारी पहले आई लेकिन वहां पर वह उतना सफल नहीं हुई जितना उत्तर भारत में दिख रही है। ऐसे में शोध का बिंदु दक्षिण भारत भी होना चाहिए। इतना ही नहीं जांच का बिंदु एशिया के तमाम देश भी होने चाहिए जहां पर यह बीमारी अपना पांव पसार चुकी है। शायद तब जाकर हम इस बीमारी के कारणों की तह में जा पाएंगे एवं ईलाज ढूढ़ पाने के नजदीक पहुंचेंगे। अभी तो ऐसा लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं है कि इस बीमारी का ईलाज संभव हो सके नहीं तो गर हमारी सरकारों ने इस बीमारी की भयावहता को पहले ही भांप कर समुचित कदम उठाया होता तो बीआरडी अस्पताल में जो चीख-पुकार सुनने को मिल रही है शायद वह नहीं मिलती।

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SBA विशेष स्वस्थ भारत अभियान स्वास्थ्य स्कैन

साँसों में घुलता जहर : रहने के लायक नहीं है शहर

पिछले दिनों आयी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली का वातावरण बेहद जहरीला हो गया है । इसकी गिनती विश्व के सबसे अधिक प्रदूषित शहर के रूप में होने लगी है। यदि वायु प्रदूषण रोकने के लिए शीघ्र कदम नहीं उठाए गए तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। […]

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समाचार स्वास्थ्य स्कैन

एमसीआई और स्वास्थ्य मंत्रालय में तकरार

  मेडिकल कालेजों में सीटें रद्द करने के लिए डॉ. हर्षवर्धन ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की आलोचना की    आशुतोष कुमार सिंह   नई दिल्ली/  नई सरकार बनते ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की मनमानियों पर उंगली उठनी शुरू हो गयी है। इस बार किसी और ने नहीं बल्की खुद देश के स्वास्थ्य मंत्री […]

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