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जानिए कैसे एक फेसबुक पोस्ट ने बदल दी स्वस्थ भारत की तस्वीर….

सोशल मीडिया के सार्थक उपयोग की चर्चा आज चारों ओर हो रही है। इस बीच में आज से 6 वर्ष पूर्व स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने अपने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा था। महंगी दवाइयों के खिलाफ लिखा उनका पहला पोस्ट आईवी सेट की कीमतों में मची लूट को लेकर था। उनके पोस्ट को आप नीचे दिए चित्र में देख सकते हैं।

इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि, यह आईवी सेट है, इसे आप मरीजों को ग्लूकोज की बोतल चढ़ाते समय जरूर देखे होंगे…एक तरह से जीवन रक्षक दवाओं में इसका प्रयोग होता है। दुर्भाग्य की बात यह है कि मुम्बई जैसे शहर में इन पाइपों को दवा दुकानदार 100-125 रूपये में बेच रहे हैं…यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पाइप दवा दुकानदारों को 4 रूपये से लेकर 11 रूपये तक में गुणवत्ता के हिसाब से होलसेल मार्केट में मिलती है। आश्चर्य की बात है न!!! 10 रूपये की जीवन रक्षक कैटेगरी की दवा 100 रुपये में यानी 1000 प्रतिशत मुनाफे के साथ बेची जा रही है…कोई है जो इन निकम्मी सरकारों की कुम्भकर्णी नींद से जगा सके….( दवा में भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐलान-ए-जंग की पहली किस्त)

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स्वस्थ भारत अभियान ने पूरे किए 6 वर्ष, फेसबुक से शुरू हुआ था यह अभियान

स्वस्थ भारत अभियान के माध्यम से देश के लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने काम आशुतोष कुमार सिंह ने आज ही के दिन  22 जून,2012 को किया था। स्वस्थ भारत अभियान के 6 वर्ष पूरे होने के अवसर पर श्री आशुतोष फेसबुक लाइव के माध्यम से अपने मित्रो से बातचीत करते हुए कहा कि, सोशल मीडिया का सार्थक प्रयोग स्वस्थ भारत अभियान ने बेहतरीन तरीके से किया है। उन्होंने बताया कि महंगी दवाइयों के खिलाफ जो आंदोलन उन्होंने शुरू किया था वह आज जनआंदोलन में तब्दील हो चुका है।

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गांधी का स्वास्थ्य चिंतन ही रख सकता है सबको स्वस्थःप्रसून लतांत

‘स्वस्थ रहने के लिए गांधी के स्वास्थ्य चिंतन को अपनाना पड़ेगा। स्वस्थ भारत की कुंजी गांधी के विचारों में ही अंतर्निहित है। यदि आप गांधी को जी रहे हैं तो निश्चित ही रोग आपसे कोसो दूर रहेगा। रोग को भगाने के लिए गांधी का स्वास्थ्य चिंतन रामवाण है।’ उक्त बातें गांधी स्वच्छता एवं स्वास्थ्य विषय पर बोलते हुए वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक प्रसून लतांत ने कही। वे गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत न्यास द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में बोल रहे थे। समस्तीपुर के सूदुर गांव बटहा के सुंदरी देवी सरस्वती विद्या मंदिर विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में बोलते हुए स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि स्वच्छ भारत से ही स्वस्थ भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने महात्मा गांधी के स्वच्छता के संदेश को साझा करते हुए कहा कि मन एवं तन दोनों की स्वच्छता जरूरी है। स्वच्छ मन से ही स्वस्थ तन का निर्माण होता है। स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के संबंध पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अस्वच्छता के कारण मलेरिया, डेंगू, डायरिया, पीलिया सहित तमाम तरह की बीमारियों के शिकार हम हो जाते हैं।

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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की 11वीं सामान्य समीक्षा मिशन (सीआरएम) रिपोर्ट जारी, अश्वनी कुमार चौबे ने इससे जुड़े हितधारकों को बधाई दी 

 ‘देश में 2013 से मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में रिकॉर्ड 22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। एसआरएस के पहले के राउंड्स के अनुसार पहले के वर्षों में एमएमआर में हुई कमी की तुलना में यह अब तक की सबसे अधिक कमी है।  ‘देश में मातृ मृत्यु दर 2011-13 में 167 थी, जो 2013-16 में घटकर 130 हो गयी। यह मंत्रालय और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से संभव हुआ है। मैं राज्यों और इस उपलब्धि से जुड़े सभी हितधारकों को बधाई देता हूं।’ उक्त बातें  स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री  अश्विनी कुमार चौबे ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की 11वीं सामान्य समीक्षा मिशन (सीआरएम) रिपोर्ट जारी करते हुए नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कही। 

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Indian researchers find insulin clue to Huntington’s

Huntington’s presently has no treatment or cure. The afflicted individuals lose their ability to walk, talk, think, and reason. This disease begins between the age 30 and 45, and every individual with the gene for the disease will eventually develop the disease. It is an autosomal dominant genetic disorder which means that if one parent carriers the defective Huntington’s gene, the offspring have a 50/50 chance of inheriting the disease.

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देश की सभी दवा दुकानों पर मिलेंगी उच्च गुणवत्ता वाली जेनरिक दवाइयां, सरकार कानून लाने की तैयारी में

देश के लोगों को सस्ती दवाइयां मिल सके इसके लिए सरकार हर वह कदम उठाने के लिए तैयार दिख रही है, जो वह उठा सकती है। इसी दिशा में सरकार अब सभी दवा दुकानों पर  जेनरिक दवा उपलब्ध करवाने के लिए कानून बनाने की तैयारी कर रही है। देश के प्रतिष्ठित अखबार अमर ऊजाला में प्रकाशित खबर में बताया गया है कि डीसीजीआई ने राज्यों को इस संबंध में सर्कुलर जारी कर दिया है। अगले 2 महीने में इसे लागू करने की तैयारी चल रही है।

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स्वस्थ भारत जेनरिक दवाइयों की उपलब्धता को लेकर प्रधानमंत्री को लिखे पत्र को आप यहां पढ़ सकते हैं

इन सब के बीच में मेरा अनुभव यह कहता है कि भारत में जनऔषधि केन्द्र की जरूरत ही नहीं है। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि वैध-अवैध मिलाकर देश में 7 लाख से अधिक अंग्रेजी दवा दुकाने चल रही हैं। भारत का घरेलु दवा बाजार 90 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया है। ऐसे में अगर कुछ हजार जनऔषधि केन्द्र खुल भी जायेंगे तो कितना फायदा हो जायेगा। क्या सच में इससे समस्या का समाधान हो पायेगा। मेरी समझ में तो बिल्कुल भी नहीं। यहां पर यह भी समझना जरूरी है कि आज के समय में देश में जितनी भी दवाइयां बिक रही हैं उनमें से 90 फीसद या उससे भी ज्यादा दवाइयों की पेटेंट अवधि समाप्त हो चुकी हैं और वे बाजार में जेनरिक हो चुकी हैं। और भारत में जितनी दवा कंपनियां हैं उनके पास अपने पेटेंट वाली कितनी दवाइयां हैं या भारत सरकार के पास अपनी पेटेंटेड दवाइयों की कितनी संख्या है। न के बराबर। इसका मतलब यह हुआ कि भारत में जो ब्रांड के नाम पर दवाइयां बेची जा रही हैं, वो भी जेनरिक ही हैं। फिर उनकी इतनी कीमत क्यों हैं? इसके जवाब में ही महंगी दवाइयों से निजात पाने का समाधान है।

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पोलियो उन्मूलन के लिए भारत को मिली वैश्विक सराहना,2011 के बाद भारत में पोलियों का एक भी मामला सामने नहीं आया है

विशेषज्ञों के समूह ने-पिलाने और सूई द्वारा दिए जाने वाले पोलियो टीकों- दोनों का उपयोग करने के लिए भारत की सराहना की और तारीफ करते हुए कहा कि भारत ने इस दिशा में जिस तरह से कार्य किया उससे भारत में आने वाले समय में भी कोई बच्चा पोलियो का शिकार न हो पायेगा, यह बहुत ही सराहनीय कार्य है। सामुदायिक भागीदारी देश में पोलियो टीकाकरण प्रयासों का एक अभिन्न अंग रहा है। विशेषज्ञों के समूह ने देखा कि 23 लाख से अधिक टीकाकरणकर्ताओं को हर पोलियो अभियान को सफल बनाने के लिए एकत्रित किया गया है, जिसके दौरान 17 करोड़ बच्चों को पोलियो की बूंद पिलायी गयी

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देश के 100 जिले हुए लिम्फेटिक फाइलेरिया से मुक्त, 156 जिलों में अभी भी है इस बीमारी का असर

लिम्फेटिक फाइलेरिया के संचरण और इस बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि भावी पीढियां इस बीमारी से मुक्त रहें। भारत ने लिम्फेटिक फाइलेरिया को समाप्त करने के प्रयासों तथा इस संदर्भ में किये जाने वाले शोध का हमेशा से स्वागत किया है। उक्त बातें केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी नड्डा ने  लिम्फेटिक फाइलेरिया को समाप्त करने के लिए आयोजित वैश्विक गठबंधन की 10वीं बैठक (जीएईएलएफ) का उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि लिम्फेटिक फाइलेरिया को समाप्त करने की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों व विकास संगठनों के सम्मिलित प्रयास से सर्वाधिक प्रभावित 256 जिलों में से 100 जिलों ने उन्मूलन लक्ष्य हासिल कर लिया है। संचरण मूल्यांकन सर्वे (टीएएस) द्वारा सत्यापन के बाद इन जिलों में बड़े पैमाने पर दी जाने वाली दवा कार्यक्रम को रोक दिया गया है। अभी ये जिले निगरानी में हैं।

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20 राज्यों ने आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन (एबी-एनएचपीएम) को लागू करने के लिए सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए  

स्वास्थ्य मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि, आप लोग बहुत भाग्यशाली हैं कि आपके कार्यकाल में दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संरक्षण कार्यक्रम लागू किया जा रहा हैं। 10 साल बाद आपको खुद कहेंगे कि आप उस टीम के सदस्य रहे जिसने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य कवरेज कार्यक्रम को लागू कराने का काम किया। पत्रकारों को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह एक बड़ी योजना है, इसे हम पहली बार इतने बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी चल रही है, ऐसे में संभव है कि कुछ कमियां निकले। आपलोग उन कमियों को हमसे साझा कीजिए, उसे दूर करने का हम प्रयास करेंगे।

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