8 वर्षों में भारत बनेगा पूर्णतः निर्मल

आशुतोष कुमार सिंह

 

नई दिल्ली/25जुलाई/14

नई राजग सरकार ने भारत को स्वच्छ व निर्मल बनाने का वादा किया था। इस वादा को पूरा करने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री उपेन्द्र कुशवाहा ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि, निर्मल भारत अभियान का लक्ष्य, सभी ग्रामीण परिवारों के लिए 100 प्रतिशत स्वच्छता संबंधी सुविधाएं वर्ष 2022 तक उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एन.एस.एस.ओ) 2012, के अनुसार 40.60 फीसद ग्रामीण बसाहटों के पास शौचालय है।

श्री कुशवाहा ने बताया कि, ‘निर्मल भारत अभियान (एन.बी.ए) के अंतर्गत शौचालयों के निर्माण के लिए सभी पात्र लाभार्थियों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन की राशि 46,00 रूपये कर दी गयी है जो पहले 3200 रूपये थी। इसके अतिरिक्त शौचालय के निर्माण के लिए महात्मा गाधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 5400 रूपये तक का उपयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त 900 रूपये के लाभार्थी अंशदान के साथ ही शौचालय की कुल लागत अब 10,900 रूपये है। पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के लिए यह राशि 11,400 रूपये निर्धारित की गयी है।’

श्री कुशवाहा ने बताया कि स्वच्छता के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाते हुए 12वीं पंचवर्षीय योजना परिव्यय को 37,159 करोड़ रूपये निर्धारित किया गया है, जो 11वीं पंचवर्षीय योजना परिव्यय के 6540 करोड़ रूपये से 468 प्रतिशत अधिक है।

  • स्वच्छ भारत के लिए 37,159 करोड़ रूपये का बजट
  • बजट में 468 फीसदी की वृद्धि

 

डायरिया से प्रत्येक वर्ष 1.36 मिलियन बच्चों की हो रही मौत

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज भारत के कॉर्पोरेट क्षेत्र से शौचालय बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी परियोजना में योगदान की अपील की । उन्होंने कहा कि सरकार ने इससे पहले व्यापक स्तर पर ऐसो कोई प्रयास नहीं किया है तथा इसकी सफलता बहुत कुछ इस आम सहमति पर टिकी है कि खुले में शौच जाना राष्ट्रीय समस्या है और यह समाप्त होनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री ने अपने मंत्रालय के पहले ” तीव्री कृत अतिसार नियंत्रण पखवाड़े” की शुरुआत करते हुए कहा, ”हमारे प्रधानमंत्री ने इस कुप्रथा को बंद करने का प्रण लिया है। ” डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के इस्तेमाल से हर भारतीय के लिए शौचालय का उनका सपना साकार करने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने लंबे से चली आ रही समस्याओं के असाधारण समाधान पर अभूतपूर्व बल दिया है। उन्होंने कहा, ” बहुत वर्षों से बहुत कुछ किया गया है। अब हमें ऐसे विचारों की जरूरत है जो नई राह को परिभाषित करे और उसके लिए साहसिक कार्य करने की जरूरत हो। ”

उन्होंने कहा कि भारत के स्वास्थ्य प्रशासक अतिसार प्रबंधन के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाने में नाकाम रहे हैं और यह तथ्य स्पष्ट करता है कि पिछले कार्यक्रम पर्याप्त नहीं थे। इसलिए लोगों से संवद करने के नए श्रेष्ठ तरीकों के बारे में सोचने का समय आ गया है। दस्त या अतिसार से हर साल 1.36 मिलियन बच्चे मरते हैं जो बच्चों की मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है।

डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, ” मृत्यु दर कम करने के लिए हमारे पास ज्यादा समय नहीं है। सितंबर 2015 तक हमें संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों को हासिल करना है। इसलिए मैं बच्चों की मृत्यु की महाविपत्ति की चुनौती से निपटने के लिए प्रयासों के व्यापक तालमेल की अपील करता हूं। ”

” तीव्रीकृत अतिसार नियंत्रण पखवाड़े” के औचित्य के बारे में डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि इससे अतिसार नियंत्रण उपायों को तेज करने के लिए केंद्र और राज्यों के स्तर पर तथा स्वयं सेवी क्षेत्र से स्वास्थ्यकर्मी एकजुट होंगे। यह अनिवार्य सेवाओं का समूह है जिसमें जागरूकता फैलाने में तेजी लाने, इस चुनौती से निपटने की तरफदारी करने, अधिक ओआरएस-जिंक केंद्रों की स्थापना, जरूरत पड़ने पर बच्चों वाले परिवारों तक ओआरएस पैकेट जैसे समाधान पहुंचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना शामिल है।

डॉ. हर्ष वर्धन ने माताओं से अपील की कि वे दस्त लगने पर भी छह महीनों से कम आयु के बच्चों को स्तानपान कराना बंद न करें। यह शिशु और बच्चों को स्तानपान कराने की बेहतरीन परिपाटियों का ज्ञान फैलाने के आइडीसीएफ के कार्यक्रम के तहत शामिल है।

एक प्रस्तुति के जरिए इस कार्यक्रम का ब्योरा देते हुए अमरीका के जॉन हॉकिन्स विश्वविद्यालय के डॉ. माथूराम संतोषम और स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि साफ-सफाई के बारे में पखवाड़े भर के तीव्रीकृत जागरूकता अभियान तथा समुचित आयु वर्ग के बच्चों को स्तनपान कराने की आदत तथा ओआरएस एवं जिंक थॅरेपि को प्रोत्साहन राज्य, जिला और ग्राम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे।

यूनिसेफ इंडिया प्रतिनिधि श्री लुईस-जॉर्ज आर्सेनॉल्ट ने ” तीव्रीकृत अतिसार नियंत्रण पखवाड़े” के आयोजन के लिए मंत्रालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे जीवन-रक्षक कार्यक्रमों तक पहुंच बढ़ाने के जरिण् देश में बच्चों की मृत्यु रोकने के लिए भारत के प्रयासों में फिर से जोश भरा जा सकेगा।

भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ. नाटा मेनाब्डे ने कहा, ” विकासशील जगत में अनेक बच्चे स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और व्यापक स्तनपान के लिए गंभीर बीमारी होने पर तत्काल चिकित्सा देखभाल हासिल नहीं कर सकते। ये अतिसार नियंत्रण के महत्वपूर्ण घटकों में शामिल होने चाहिए।

केंद्रीय गृह सचिव श्री लव वर्मा ने कहा कि टीकाकरण एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं तक हाल के दिनों में पहुंच बढ़ने के बीच शिशु और बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। ”

2 लाख आंगनवाड़ी केन्द्रों को मिलेगी छत

नई दिल्ली/ नई राजग सरकार ने आते ही नीतिगत फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में सरकार ने  12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 2 लाख आगनवाड़ी केन्द्र की इमारतें बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।2013-14 में 20000, 2014-15 में 50,000, 2015-16 में 60,000 व 2016-17 में 70,000 आंगनवाड़ी केन्द्रों को क्रमशः अपना छत नसीब होगा।

राज्यसभा में दिए लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने बताया कि इन इकाईयों का निर्माण 4.5 लाख रुपये प्रति इकाई के दर से किया जाएगा, जिसके खर्च का वहन केन्द्र और राज्यों के बीच 75:25 के अनुपात में होगा, जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए यह अनुपात 90:10 है।

उन्होंने यह भी बताया कि अब तक राज्यों को 44,709 आंगनवाड़ी केन्द्र इमारतों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसमें ओड़िशा में 5556 इमारतों का निर्माण शामिल है। बजट आवंटन के संबंध में उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में राज्यों/ केन्द्रशासित प्रदेशों को 72,334.01 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है।

सरकार के इस फैसले से बिना छत के चल रहे आंगनवाड़ी केन्द्रों को अपना छत मिल जायेगा। इस फैसले का आंगनवाणी कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है।

आशुतोष कुमार सिंह

शिशुओं की मृत्यु पर स्वास्थ्य मंत्री चिंतित

  • स्वास्थ्य मंत्री ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
  • सहयोग का आश्वासन
  • पश्चिम बंगाल के प्रभावित इलाकों में विशेषज्ञ टीम रवाना

आशुतोष कुमार सिंह

नई दिल्ली/ 25जुलाई/14

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने पश्चिम बंगाल में एईएस और जेई के कारण नवजात शिशुओं की हो रही मौतों के संबंध में मुख्‍यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर केंद्र का सहयोग देने का प्रस्‍ताव दिया है।
अपने पत्र में डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि, ‘पश्चिम बंगाल से नवजात शि‍शुओं की मौतों की आ रही खबरों के चलते उन्‍होंने इसी माह प्रभावित इलाकों में विशेषज्ञों की टीमें भेजी हैं।’ ढांचागत मुद्दों पर काम करने पर जोर देते हुए डॉ हर्षवर्धन ने लिखा है कि, ‘एमसीएच मापदंडों पर मिलेनियम विकास लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए तय समय सीमा को पूरा होने में महज एक साल बाकी है, ऐसे में हमें ढांचागत मुद्दों पर काम करने की जरूरत है।’ पश्चिम बंगाल को इस बीमारी से निपटने के लिए हर संभव सहायता करने का प्रस्ताव देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि, ‘मंत्रालय ने जेई के खिलाफ टीकाकरण अभियान की शुरूआत कर दी है और प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत आवश्‍यक अस्‍पतालों के बनाने का रास्‍ता साफ कर दिया।’ उन्‍होंने जून महीने में बिहार में व्‍यापक टीकाकरण अभियान शुरू किए जाने की जानकारी भी दी। गौरतलब है कि बिहार के मुज्जफरपुर जिले में जापानी बुखार से लगातार नवजात शिशुओं की मौत हो रही है। इस बावत स्वास्थ्य मंत्री बिहार का दौरा भी किए थे।

2 लाख आंगनवाड़ी केन्द्रों को मिलेगी छत

 

आशुतोष कुमार सिंह

नई दिल्ली/ नई राजग सरकार ने आते ही नीतिगत फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 2 लाख आगनवाड़ी केन्द्र की इमारतें बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।2013-14 में 20000, 2014-15 में 50,000, 2015-16 में 60,000 व 2016-17 में 70,000 आंगनवाड़ी केन्द्रों को क्रमशः अपना छत नसीब होगा।

राज्यसभा में दिए लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने बताया कि इन इकाईयों का निर्माण 4.5 लाख रुपये प्रति इकाई के दर से किया जाएगा, जिसके खर्च का वहन केन्द्र और राज्यों के बीच 75:25 के अनुपात में होगा, जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए यह अनुपात 90:10 है।

उन्होंने यह भी बताया कि अब तक राज्यों को 44,709 आंगनवाड़ी केन्द्र इमारतों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसमें ओड़िशा में 5556 इमारतों का निर्माण शामिल है। बजट आवंटन के संबंध में उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में राज्यों/ केन्द्रशासित प्रदेशों को 72,334.01 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है।

सरकार के इस फैसले से बिना छत के चल रहे आंगनवाड़ी केन्द्रों को अपना छत मिल जायेगा। इस फैसले का आंगनवाणी कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है।

 

एमसीआई और स्वास्थ्य मंत्रालय में तकरार

 

मेडिकल कालेजों में सीटें रद्द करने के लिए डॉ. हर्षवर्धन ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की आलोचना की 

 

आशुतोष कुमार सिंह

 

नई दिल्ली/  नई सरकार बनते ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की मनमानियों पर उंगली उठनी शुरू हो गयी है। इस बार किसी और ने नहीं बल्की खुद देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एमसीआई के काम करने के तरीके की आलोचना की है। स्वास्थ्य मंत्री मेडिकल कॉलेजों में सीटें रद्द करने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की आलोचना की है। एम.सी.आई के इस कृत्य को छात्र विरोधी कदम बताते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के इस कदम के कारण 2014-15 के अकादमिक सत्र में 1,170 सीटों का नुकसान हुआ है और कई प्रतिभावान विद्यार्थियों का सपना टूट गया है।

गौरतलब है कि कि 31 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने मंत्रालय की उस याचना को खारिज कर दिया था, जिसमें मंत्रालय ने प्रार्थना की थी कि नये मेडिकल कालेजों को मंजूरी देने और पुराने कालेजों में मौजूदा सीटों की अनुमति के नवीनीकरण के लिए समय सारणी में बदलाव करने की जरूरत है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि, ‘अदालत में हमारे निवेदन को समर्थन देने के बजाय मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने इसका विरोध किया, जिससे मैं हैरान हूं कि वे किसकी तरफ हैं।’

उन्होंने आगे कहा कि, मौजूदा सीटें बढ़ाने के लिए कई आवेदन आये हैं क्योंकि नये मेडिकल कॉलेज खोले जाने हैं और पुराने मेडिकल कालेजों की सीटें बढ़ाई जानी हैं। इसके मद्देनजर 2,750 सीटों को मंजूरी दी गई है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मानदण्डों पर असफल हो जाने के कारण 3,920 सीटों के नवीनीकरण के आवेदनों को रद्द कर दिया गया है। इसके कारण 1,170 सीटों का कुल ऩुकसान हुआ है। प्रभावित होने वाले 46 मेडिकल कालेजों में से 41 निजी कालेज हैं। मंत्रालय ने इस संबंध में 150 मामले, जिनमें ज्यादातर सरकारी कालेजों के हैं, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को समीक्षा के लिए भेजे थे लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया है।