फार्मा सेक्टर

देश में फार्मासिस्टों की कोई कमी नही है – केंद्र सरकार

नई दिल्ली/2 फ़रवरी 2.17 : सर्राफा कारोबारियों के बाद अब मोदी सरकार ने दवा कारोबारियों को बड़ा झटका दिया है. केमिस्टों की सर्वोच्च संगठन आल इंडिया आर्गेनाईजेशन ऑफ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) फार्मासिस्टों की कमी का हवाला देकर 5 साल से अधिक समय तक दवा कारोबार करने वाले केमिस्ट को 6 माह का रिफ्रेसर कोर्स करवा कर फार्मासिस्ट का दर्ज़ा देने की मांग कर रहे थे. इसे लेकर संसद में यूपी के कई सांसद सवाल उठा रहे थे . फार्मासिस्ट की कमी को लेकर उठे सवालों को लेकर संसद में सरकार के तरफ से राज्य मंत्री फगन सिंह ने साफ़ किया कि देश में फार्मासिस्ट की कहीं कोई कमी नही है. मंत्री ने बताया कि देश भर में साढ़े सात लाख से कहीं ज्यादा

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होलसेल में फार्मासिस्ट की अनिवार्यता एक क्रन्तिकारी पहल – डॉ. अमित वर्मा

बरेली /28 नवम्बर:
फार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया अपने लक्ष्यों से भटक गई है. देश भर में फार्मेसी एक्ट 1948 कि धारा 42 का खुलेआम उलंघन किया जा रहा है और शाशन मुकदर्शक बना हुवा है. ऐसे में फार्मासिस्टों को चाहिए कि एकजुटता दिखाते हुवे फार्मेसी विरोधी ताकतों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करें. उक्त बातें रुहेलखंड यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर डॉ. अमित वर्मा ने रोटरी क्लब बरेली में ग्रेट वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने कही .

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फार्मासिस्टों के पे ग्रेड 3600 से बढाकर 4200 करने को लेकर फैसला ले सकती है सरकार …

जयपुर:२7 जनवरी

वेतन में बढ़ोतरी को लेकर राजस्थान के फार्मासिस्टों में एक बार फिर आस बढ़ी है. सूत्रों के अनुसार बजट सत्र के दौरान फार्मासिस्टों के पे ग्रेड को नर्सिंग और लेब टेक्नीसियन के समतुल्य करने को लेकर चर्चायें गर्म है. राजस्थान के फार्मासिस्ट फारूक अली ने बताया कि बसुंधरा सरकार से उन्हें कई उम्मीदें है. फारूक ने आगे बताया कि राजस्थान में नर्सिंग कर्मचारियों और लेब टेक्निशन को 4200 का पे स्केल दिया जाता है, जबकि फार्मासिस्ट को अबतक 3600 रुपए ही मिल रहे है. बतातें चले की पंजाब और उत्तराखंड सरकार में फार्मासिस्ट कैडर का वेतन 4200 रुपए दिए जाते हैं.

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गोधरा के 21 वर्षीय फार्मेसी स्टूडेंट सोहेल खान को पीसीआई ने कहा दिल्ली आओ फिर करंगे बात

नई दिल्ली/ 27जनवरी 2017

फार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया दिनों दिन विवादों में फंसती नज़र आ रही है. चाहे रिफ्रेसर कोर्स को लेकर सोशल मीडिया में देश भर में विरोध प्रदर्शन हो या फिर आल इंडिया आर्गेनाईजेशन ऑफ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के प्रेसिडेंट के साथ करीबी रिस्ते. हमेशा विवादों की वजह से सोशल मीडिया के सुर्ख़ियों में रहने वाली पीसीआई को इस बार गोधरा के आरटीआई एक्टिविस्ट सोहेल खान ने घेरा है. सोहेल ने आरटीआई के जरिए फार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया से पूछा था कि आखिरी बार पीसीआई इलेक्शन कैसे और कब हुवे था ? इसके जबाब में पीसीआई सचिव अर्चना मुग्दल ने आवेदक सोहेल खान को व्यक्तिगत तौर पर ऑफिस आने का न्योता दे दिया.

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अखिलेश सरकार की वेबपोर्टल जनसुनवाई पर अवैध दवा दुकानों के मामले सबसे अधिक

लखनऊ /27 जनवरी :

एक तरफ जहाँ यूपी में चुनाव सर पर है दूसरी तरफ अखिलेश सरकार के अफसरों पर काम का दबाब बढ़ गया है. अखिलेश सरकार के वेबपोर्टल jansunwai.up.nic.in इन पर इनदिनों फ़र्ज़ी व बगैर फार्मासिस्ट चल रहे मेडिकल दुकानों की खूब शिकायत आ रही है. इसे लेकर ड्रग डिपार्टमेंट के अफसरों में अफरातरफरी मची हुई है. यूपी एफडीए ऑनलाइन होते ही करीब 30 हज़ार से ज्यादा ही अवैध व फ़र्ज़ी तरीके से बने ड्रग लाइसेंस का पर्दाफाश हो गया. अखिलेश सरकार ने औषधी प्रशाशन को फ़र्ज़ी रूप से मेडिकल चला रहे दवा कारोबारियों पर एफआईआर करने सख्त आदेश दे रखें है.

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ड्रग इस्पेक्टर रविन्द्र गेंदले को एसीबी ने दबोचा

दुर्ग : जीले में पदस्थापित ड्रग इंस्पेक्टर रविंद्र गेंदले को एंटी करप्सन डिपार्टमेंट ने गिरफ्तार कर लिया है ! जानकारी के मुताबिक गेंदले एक मेडिकल स्टोर के ससपेंड लाइसेंस को बहाल करने के एवज़ में अस्सी हज़ार रूपये के मांग कर रहा था ! छत्तीसगढ़ स्टेट युथ फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल बर्मा ने एसीबी की करवाई की सराहना करते हुवे कहा की ड्रग इंस्पेक्टर गेंदले की करतूतों से फार्मासिस्ट काफी परेसान थे ! कई बार शाशन को पत्र लिखने के वावजूद उसपर कोई करवाई नहीं हो रही थी ! वही वैभव शास्त्री ने कहा की रविन्द्र

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बिहार में फार्मेसी छात्रों का प्रदर्शन ! पीसीआई हुई रेस

पीसीआई की सचिव अर्चना मुग्दल ने पटना में छात्रों को एक रूपये स्टाइपेन दिए जाने पर हैरानी जताई है ! पीसीआई सचिव ने कहा है की इस मामले को लेकर बिहार सरकार को पत्र लिखा जाएगा !

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थोक दवा दुकान में भी फार्मासिस्ट की अनिवार्यता जरूरीः अतुल कुमार नासा

सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे आईपीजी ए बिहार के अध्यक्ष बिनोद कुमार ने फार्मासिस्ट को राजपत्रित अधिकारी का दर्ज़ा देने की मांग की .धन्यवाद नन्द किशोर प्रसाद ने दिया. इस अवसर पर हज़ारों की संख्या में फार्मेसी स्टूडेंट मौजूद थे ।

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प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की निगरानी में हो यूपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल का चुनाव – जयदीप गुप्ता

उ.प्र.फार्मेसी कौंसिल में डी.पी.ए. के सदस्य वर्षों से नामित सदस्य के रूप में काबिज है कौंसिल में उ.प्र.के बेरोजगार फार्मासिस्ट, स्नातक फार्मासिस्ट,दवा व्यापारियों से कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं है न ही कौंसिल में डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन (डी.पी.ए.) सरकारी फार्मासिस्टों का संगठन अन्य किसी को नामित होने देता है पिछले दिनों माननीय उच्च न्यालय की लखनऊ बेंच ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कौंसिल के निर्वाचित सदस्यों को अयोग्य घोषित करते हुये कौंसिल को भंग कर दिया था जिसके बाद उ.प्र.शासन के निर्देश पर कौंसिल में नये चुनाव की अधिसूचना जारी की गई जो कि आधी अधूरी व उ.प्र फार्मेसी रूल्स 1955 के अनुरूप नहीं है उक्त की सूचना मात्र लखनऊ के आस-पास के समाचार पत्रों में प्रकाशित कर इतिश्री कर दी गयी साथ ही उ.प्र.फार्मेसी रूल्स 1955 के नियम-1 में दिये गये प्रारूप-E के 12 बिन्दुओं को शामिल न करते हुये अपनी स्वयं की तैयार वोटर लिस्ट आधी-अधूरी कौंसिल के वेवसाइट पर अपलोड कर फार्मासिस्टों को अपने नाम देखने व आपत्ति दर्ज करने को कहा गया जिसमे से भारी संख्या में वैध फार्मासिस्टों के नाम उक्त लिस्ट हटा दिये गये,कई फार्मासिस्टों के एक से अधिक जगह नाम दर्शाये गये ताकि उन्हें मताधिकार व चुनाव लड़ने से रोका जा सके अनेक ऐसे सरकारी फार्मासिस्टों का नाम शामिल कर दिया गया क्योंकि वह डी.पी.ए.के सदस्य हैं वहीं उ.प्र.से स्थान्तरित हो गये हजारों उतराखंड व अन्य राज्यों के फार्मासिस्टों को शामिल कर लिया गया ताकि उनकी फर्जी वोटिंग करायी जा सके कौंसिल में उक्त सूचि की हार्ड कॉपी मांगी गई तो उसे देने से इंकार कर दिया गया इस पर पंजीकृत फार्मासिस्टों द्वारा जो अपने प्र्त्यावेदना पत्र दिये गये उनका कोई निश्तारण अभी तक नहीं किया गया कौंसिल में हजारों की संख्या में फर्जी फार्मासिस्टों के पंजीयन किये गये हैं इस पर समय समय पर माननीय उच्च न्यालय द्वारा टिप्पणी की हैं व माननीय उच्च न्यायलय द्वारा जाँच के आदेश भी दिये गये जिस पर जाँच भी चल रही है जो कि उ.प्र.का सतर्कता विभाग कर रहा है, इससे पूर्व उ.प्र.शासन द्वारा उ.प्र.फार्मेसी कौंसिल जाँच आयोग माननीय उच्च न्यालय इलाहाबाद के पूर्व न्यायधीश जस्टिस के.एल.शर्मा की अध्यक्षता में गठित किया गया था जिसने अपनी पहली संस्तुति में उक्त कौंसिल के किर्याकलापों पर गंभीर टिपण्णी की थी लेकिन कौंसिल ने

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स्वास्थ्य आंदोलन की ओर अग्रसर फार्मासिस्टों के स्वागत में…

स्वस्थ भारत अभियान चाहता है कि आप स्वास्थ्य- मित्र बनें। देश की जनता के सेवक बनें। आप मेडिकल-फिल्ड की सही जानकारी लोगों को दें। हम तो यह भी चाहते हैं कि यदि आप तैयार हों तो आपका संपर्क-सूत्र आपके नाम व क्षेत्र के साथ इस वेबसाइट स्वस्थ भारत डॉट इन पर डाल दें। ताकि यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी कुछ पूछना हो तो आप उन्हें बता सकें। आप चाहे तों अपने ज्ञान से सरकार की तमाम योजनाओं के बारे में आम लोगों को जागरूक कर सकते हैं, जिनकी जानकारी के अभाव में सरकारी पैसा बाबुओं व दलालों की जेब में जा रहा है। सच्चाई तो यह है कि आपलोगों को देखकर ऐसा लग रहा है कि वह दिन दूर नहीं जब ‘स्वस्थ भारत’ का हम सब का सपना साकार होगा!