गोधरा के 21 वर्षीय फार्मेसी स्टूडेंट सोहेल खान को पीसीआई ने कहा दिल्ली आओ फिर करंगे बात

  

गड़बड़झाला : आरटीआई में पिछले चुनाव तक की जानकारी नही दे पाई पीसीआई

सूचना देने में आनाकानी करती है फार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया 

आरटीआई एक्टिविस्ट सोहेल खान और पीसीआई सचिव अर्चना मुग्दल

आरटीआई एक्टिविस्ट सोहेल खान और पीसीआई सचिव अर्चना मुग्दल

 

नई दिल्ली/ 27जनवरी 2017

फार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया दिनों दिन विवादों में फंसती नज़र आ रही है. चाहे रिफ्रेसर कोर्स को लेकर सोशल मीडिया में देश भर में विरोध प्रदर्शन हो या फिर आल इंडिया आर्गेनाईजेशन ऑफ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के प्रेसिडेंट अप्पा जगन्नाथ शिंदे के साथ करीबी रिस्ते.  हमेशा विवादों की वजह से सोशल मीडिया के सुर्ख़ियों में रहने वाली पीसीआई को इस बार गोधरा के आरटीआई एक्टिविस्ट सोहेल खान ने घेरा है. सोहेल ने आरटीआई के जरिए फार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया से पूछा था कि आखिरी बार पीसीआई इलेक्शन कैसे और कब हुवे था ? इसके जबाब में पीसीआई सचिव अर्चना मुग्दल ने आवेदक सोहेल खान को व्यक्तिगत तौर पर ऑफिस आने का न्योता दे दिया.

 

सोहेल ने बताया की इसे पहले भी उन्होंने कई बार पीसीआई से आरटीआई के जरिए जानकारी हासिल करनी चाही. सोहेल कहते हैं हर बार उन्हें गलत और भ्रामक सूचनायें दी जाती है. इसके खिलाफ उन्होंने अबतक 150 से अधिक आरटीआई दाख़िल किया है. अधिकांश जबाब अबतक पेंडिंग पड़े है. पीसीआई के खिलाफ सोहल 3 बार केंद्रीय सुचना आयोग में भी शिकायत कर चुके हैं.

सोशल मीडिया पर चर्चित नाम है सोहेल खान 

पीसीआई के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सोहेल खान सोशल मीडिया में चर्चित चेहरों में सुमार हो गए हैं. पीसीआई के कारनामों को एक्सपोज़ करने वाले सोहेल की उम्र महज़ 21 साल है. सोहेल स्टूडेंट हैं और अभी बैचलर इन फार्मेसी फ़ाइनल ईयर कर रहे हैं. सोहेल खान ने आरटीआई एक्टिविस्ट विनय कुमार भारती  को अपना आदर्श बताया है.

 

अखिलेश सरकार की वेबपोर्टल जनसुनवाई पर अवैध दवा दुकानों के मामले सबसे अधिक

लखनऊ /27 जनवरी :

एक तरफ जहाँ यूपी में चुनाव सर पर है दूसरी तरफ अखिलेश सरकार के अफसरों पर काम का दबाब बढ़ गया है. अखिलेश सरकार के वेबपोर्टल jansunwai.up.nic.in इन पर इनदिनों फ़र्ज़ी व बगैर फार्मासिस्ट चल रहे मेडिकल दुकानों की खूब शिकायत आ रही है. इसे लेकर ड्रग डिपार्टमेंट के अफसरों में अफरातरफरी मची हुई है. यूपी एफडीए ऑनलाइन होते ही करीब 30 हज़ार से ज्यादा ही अवैध व फ़र्ज़ी तरीके से बने ड्रग लाइसेंस का पर्दाफाश हो गया. अखिलेश सरकार ने औषधी प्रशाशन को फ़र्ज़ी रूप से मेडिकल चला रहे दवा कारोबारियों पर एफआईआर करने सख्त आदेश दे रखें है.

 

जनसुनवाई वेबपोर्टल पर सरकार सख्त

जनसुनवाई वेबपोर्टल पर सरकार सख्त

 

महराजगंज के फार्मासिस्ट शिवराम उपाध्याय ने सरकार के वेबपोर्टल पर शिकायत की थी, जिसपर शिकायत करते हुवे एफडीए आयुक्त ने सरकार के सचिव को सूचित करते हुवे सभी ड्रग इंस्पेक्टरों व लाइसेंसी ऑथरिटी को लाइसेंस रद्द करने के आदेश जारी कर दिए. महराजगंज के ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया की सरकार के आदेश का का पूरी तरह पालन किए जा रहे हैं. दर्ज़न भर से ज्यादा मेडिकल दुकानों को बंद कराया जा चुके हैं. उधर नेशनल फार्मासिस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के प्रेसिडेंट पियूष सिंह ने ड्रग इंस्पेक्टर  पर लापरवाही का आरोप लगाया है. पियूष ने आरोप जड़े की ड्रग इंस्पेक्टर ड्रग लाइसेंस ससपेंड तो कर रहे हैं पर एफआईआर करने से कतरा रहे हैं. पियूष फर्ज़ीवाड़ा कर मेडिकल चलाने वालों पर एफआईआर करने की मांग पर अड़े हैं.

संगठन के प्रवक्ता शिवराम उपाध्याय ने यूपी के समस्त फार्मासिस्टों से अपील की है की वेबसाइट पर ज्यादा से ज्यादा शिकायत दर्ज करें.

 

ड्रग इस्पेक्टर रविन्द्र गेंदले को एसीबी ने दबोचा

घूसखोर ड्रग इंस्पेक्टर रविन्द्र गेंदले

घूसखोर ड्रग इंस्पेक्टर रविन्द्र गेंदले

दुर्ग : जीले में पदस्थापित ड्रग इंस्पेक्टर रविंद्र गेंदले को एंटी करप्सन डिपार्टमेंट ने गिरफ्तार कर लिया है ! जानकारी के मुताबिक गेंदले एक मेडिकल स्टोर के ससपेंड लाइसेंस को बहाल करने के एवज़ में अस्सी हज़ार रूपये के मांग कर रहा था ! छत्तीसगढ़ स्टेट युथ फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल बर्मा ने एसीबी की करवाई की सराहना करते हुवे कहा की ड्रग इंस्पेक्टर गेंदले की करतूतों से फार्मासिस्ट काफी परेसान थे ! कई बार शाशन को पत्र लिखने के वावजूद उसपर कोई करवाई नहीं हो रही थी ! वही वैभव शास्त्री ने कहा की रविन्द्र गेंदले की छवि एक घूसखोर अधिकारी की रही है ! सोशल मीडिया पर रिस्वतखोर ड्रग इंस्पेक्टर की फोटो खूब शेयर हो रही है . फार्मासिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने गेंदले की गिरफ़्तारी पर ख़ुशी जाहिर की है !

बिहार में फार्मेसी छात्रों का प्रदर्शन ! पीसीआई हुई रेस

 

हॉस्टल में प्रदर्शन करते छात्र

हॉस्टल में प्रदर्शन करते छात्र

 

फार्मेसी पेशे की गिरती साख को लेकर गवर्नमेंट फार्मेसी इंस्टिट्यूट पटना के छात्रों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है ! बिहार स्टेट फार्मासिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले फार्मेसी के छात्रों ने हॉस्टल के बाहर प्रदर्शन किया ! बड़ी संख्या में स्टूडेंट हाथों में तख्तियां लिए इक्कठा हुवे और जोरदार नारेबाजी की ! फार्मेसी के छात्र राज्य में फार्मेसी की गिरती साख को लेकर नाराज चल रहे हैं ! नेतृत्व कर रहे रजत राज ने सरकार  को चेताते हुवे कहा कि  अगर सरकार  नहीं चेती तो आगे उग्र आंदोलन किया जाएगा !

इन मांगो लेकर किया प्रदर्शन

१. जहाँ दवा वहां फार्मासिस्ट की तर्ज़ पर फार्मसिस्ट की नियुक्ति की जाए !
२. सरकारी अस्पतालों में रिक्त पद तुरंत भरे जायें !
३. बिहार स्टेट फार्मेसी कौंसिल और स्टेट एफडीए को तुरंत ऑनलाइन किया जाए !
४. प्रदेश में में चल रही अवैध दवा दुकानों को बंद कराया जाए !
५. प्रत्येक मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए !
६. छात्रों में मिलने वाला स्टाइपेन बढ़ाया जाए !
इन संगठनों के किया समर्थन

बिहार में फार्मेसी छात्रों के समर्थन में इंडियन फार्मेसी ग्रेजुएट एसोसिएशन उठ खड़ी हुई है ! संगठन के प्रेसिडेंट बिनोद कुमार ने छात्रों की मांगो को जायज बताते हुवे सरकार से बात करने को कहा है ! वही छात्रों के समर्थन में सिंघभूम फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने कहा की बिहार में छात्रों की मदद के लिए हर संभव मदद की जायेगी !

पीसीआई हुई रेस

पीसीआई की सचिव अर्चना मुग्दल ने पटना में छात्रों को एक रूपये स्टाइपेन दिए जाने पर हैरानी जताई है ! पीसीआई सचिव ने कहा है की इस मामले को लेकर बिहार सरकार को पत्र लिखा जाएगा !

प्रदर्शन करने वाले छात्रों में सादाब चाँद , अनवर , प्रदीप कुमार, अरविन्द कुमार , रंजन कुमार , अभिषेक कुमार, गौरव कुमार , जीतेन्द्र रजक, सौरव कुमार , मोहन महतो , रौशन राज , विकाश कुमार , सीतेश , श्रवण  कुमार , अविनाश कुमार समेत सैकड़ों छात्र छात्राएं  शामिल  थे !

 

थोक दवा दुकान में भी फार्मासिस्ट की अनिवार्यता जरूरीः अतुल कुमार नासा

Atul Nasha new
नई दिल्ली:
पिछले 3 वर्षों में फार्मासिस्ट व फार्मेसी का मुद्दा जितना उछाल पर है, उतना भारतीय फार्मा क्षेत्र के इतिहास में पहले कभी नहीं था. इसी सन्दर्भ में पिछले दिनों पटना में इंडियन फार्मेसी ग्रेजुएट असोसिएशन ने अपना वार्षिक सम्मलेन किया. इस सम्मलेन में तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई.
इंडियन फार्मेसी ग्रेजुएट्स एसोसिएसन , बिहार ब्रांच के वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए IPGA के अध्यक्ष श्री  अतुल कुमार नासा ने कहा कि थोक दवा दुकान में compitent person के जगह पर सिर्फ Registered pharmacist ही रहेंगे की योजना बहुत आगे  बढ़  गई  है.विभिन्न समितियों से पास होते हुए कानून  बनने  की ओर अग्रसर  है. फार्मेसी के सभी पदों  की  योग्यता सिर्फ फार्मेसी हो के  लिए  भी  हमलोग प्रयत्न हैं. देर सबेर हमें इसमें भी सफलता  मिलेगी. औषधि महानियंत्रक डा० जी.एन.सिंह ने दवा कारोबार पर प्रकाश डालते हुए drugs एक्ट & रूल्स विचार मांगें. बिहार के महासचिव श्रीपति सिंह ने अपने रिपोर्ट प्रस्तुत किये. मुख्य अतिथि माननीय अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी बिहार विधान सभा ने स्वास्थ्य जगत में फार्मासिस्टों के योगदान की सराहना करते हुवे कहा की फार्मासिस्ट स्वास्थ्य की रीढ़ हैं ! सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे आईपीजी ए बिहार के अध्यक्ष बिनोद कुमार ने फार्मासिस्ट को राजपत्रित अधिकारी का दर्ज़ा देने की मांग की .धन्यवाद नन्द किशोर प्रसाद  ने दिया. इस अवसर पर हज़ारों की संख्या में फार्मेसी स्टूडेंट मौजूद थे ।
मौके पर उपस्थित छात्र - छात्रायें

मौके पर उपस्थित छात्र – छात्रायें

IPGA ने किया सम्मानित
फार्मा के क्षेत्र में कार्य कर रहे एक्टिविस्टों को IPGA ने सम्मानित किया सम्मान पाने वाले एक्टिविस्टों में सिंहभूम फार्मासिस्ट एसोसिएशन (झारखण्ड) के धर्मेंद्र सिंह , विनय कुमार भारती समेत दर्ज़नो नाम शामिल हैं !
इस सफल आयोजन के लिए स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक आशुतोष कुमार सिंह ने IPGA बिहार को शुभकामना प्रेषित किया है.

प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की निगरानी में हो यूपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल का चुनाव – जयदीप गुप्ता

लखनऊ/02.07.2016

आरटीआई एक्टिविस्ट जयदीप गुप्ता (फ़ाइल फोटो)

आरटीआई एक्टिविस्ट जयदीप गुप्ता (फ़ाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल चुनाव सर पर है। पिछली बार चुनाव में बड़े व्यापक पैमाने पर धांधली की बात सामने आई थी । काउंसिल के पदाधिकारियों द्वारा फ़र्ज़ी वैलेट छपवा कर बोगस बोटिंग की बात सामने आई थी ! कई फार्मासिस्टों ने वैलेट नहीं मिलने की शिकायत की थी । ऐसे में यूपी के फार्मासिस्ट इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहते । उत्तर प्रदेश के तेज़ तर्रार फार्मा और आरटीआई एक्टिविस्ट जयदीप गुप्ता ने काउंसिल के कामकाज पर सवाल उठाये है साथ ही पदाधिकारियों पर कई गम्भीर आरोप जड़ें हैं।जयदीप ने शासन के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेट की तैनाती करने की गुहार लगाई है । स्वस्थ भारत डॉट इन को मिले पत्र की प्रति हु बा हु निचे वेब साइट पर लगाई जा रही है ।  

सेवा में

मुख्य सचिव

उत्तर प्रदेश शासन

बापू भवन लखनऊ (उ. प्र.)

विषय- उ.प्र.फार्मेसी कौंसिल के प्रस्तावित चुनाव 2016 उ. प्र . शासन द्वारा नियुक्त प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की निगरानी में करवाने के संबंध में..

महोदय, आपको अबगत कराना है कि उ.प्र.फार्मेसी कौंसिल जो कि केन्द्रीय अधिनियम फार्मेसी एक्ट 1948 के द्वारा गठित है जिसका सञ्चालन उ.प्र.फार्मेसी रूल्स 1955 व फार्मेसी एक्ट 1948(8 of 1948) के अन्तर्गत किया जाता है उक्त नियम के अनुसार ही वर्ष 2016 में कॉउंसिल के चुनाव प्रस्तावित हैं जिसमें पूर्व की भांति चुनाव में भारी मात्रा में गड़बड़ी व धांधली की जायेगी ऐसे में उक्त चुनाव पूर्व की भांति निष्पक्ष नहीं होंगें इस हेतू पूर्व के काबिज पदाधिकारी उक्त चुनाव में वोटर लिस्ट से लेकर पोस्टल मत पत्र में धांधली की योजना बनाये बैठे हैं आने वाले चुनाव में उमीदवारों को अयोग्य करना मतदाता सूचि में फेरबदल करना पोस्टल वैलेट पेपर आदि ऐसे महोदत से निवेदन है कि उक्त चुनाव निष्पक्ष व भयमुक्त हो इस हेतू शासन स्तर से उक्त चुनाव मजिस्ट्रेट की देख रेख में ताकि प्रदेश का वैध फमसिस्ट उक्त चुनाव की प्रक्रिया में भाग लेते हुये भयमुक्त अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके यहाँ यह भी स्पष्ट करना चाहूँगा की उत्तर प्रदेश फार्मेसी कौंसिल में प्रदेश के फार्मेसी से जुड़े व्यवसायीओं का पंजीयन किया जाता है वर्तमान में लगभग 70 हजार पंजीयन उक्त कौंसिल से हो चुके हैं परन्तु कौंसिल द्वारा सभी विधायी व्यवस्था को किनारा करते हुये उ.प्र.फार्मेसी रूल्स 1955 में अनेक संसोधन बिना किसी संसदीय प्रक्रिया के पालन किये बिना संसोधन कर डाले जबकि उक्त हेतू फार्मेसी एक्ट 1948(8 of 1948) की धारा 46 के अन्तर्गत व्यवस्था दी गई है कि प्रत्येक नियम जो राज्य सरकार द्वारा बनाया जाता है, उसे शीघ्र से शीघ्र बनने के उपरांत राज्य विधान मंडल के सम्मुख प्रस्तुत किया जायेगा (धारा-46/3) (प्रतिलिपि संलगन) ऐसा न करना अपने आप में एक गंभीर प्रकरण है जो कभी भी उ.प्र.सरकार को एक गंभीर संकट में डाल सकती है राज्य में कार्यरत सरकारी व गैर सरकारी पंजीकृत फार्मासिस्टों को इनके द्वारा बनाये गये इन्हीं नियमों से गुजरना पड़ता है प्रदेश में कार्यरत सरकारी पंजीक्रत फार्मासिस्ट इन नियमों का अनुपालन करते हुये फार्मेसी के जॉब में कार्यरत हैं उ.प्र.फार्मेसी कौंसिल में डी.पी.ए. के सदस्य वर्षों से नामित सदस्य के रूप में काबिज है कौंसिल में उ.प्र.के बेरोजगार फार्मासिस्ट, स्नातक फार्मासिस्ट,दवा व्यापारियों से कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं है न ही कौंसिल में डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन (डी.पी.ए.) सरकारी फार्मासिस्टों का संगठन अन्य किसी को नामित होने देता है पिछले दिनों माननीय उच्च न्यालय की लखनऊ बेंच ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कौंसिल के निर्वाचित सदस्यों को अयोग्य घोषित करते हुये कौंसिल को भंग कर दिया था जिसके बाद उ.प्र.शासन के निर्देश पर कौंसिल में नये चुनाव की अधिसूचना जारी की गई जो कि आधी अधूरी व उ.प्र फार्मेसी रूल्स 1955 के अनुरूप नहीं है उक्त की सूचना मात्र लखनऊ के आस-पास के समाचार पत्रों में प्रकाशित कर इतिश्री कर दी गयी साथ ही उ.प्र.फार्मेसी रूल्स 1955 के नियम-1 में दिये गये प्रारूप-E के 12 बिन्दुओं को शामिल न करते हुये अपनी स्वयं की तैयार वोटर लिस्ट आधी-अधूरी कौंसिल के वेवसाइट पर अपलोड कर फार्मासिस्टों को अपने नाम देखने व आपत्ति दर्ज करने को कहा गया जिसमे से भारी संख्या में वैध फार्मासिस्टों के नाम उक्त लिस्ट हटा दिये गये,कई फार्मासिस्टों के एक से अधिक जगह नाम दर्शाये गये ताकि उन्हें मताधिकार व चुनाव लड़ने से रोका जा सके अनेक ऐसे सरकारी फार्मासिस्टों का नाम शामिल कर दिया गया क्योंकि वह डी.पी.ए.के सदस्य हैं वहीं उ.प्र.से स्थान्तरित हो गये हजारों उतराखंड व अन्य राज्यों के फार्मासिस्टों को शामिल कर लिया गया ताकि उनकी फर्जी वोटिंग करायी जा सके कौंसिल में उक्त सूचि की हार्ड कॉपी मांगी गई तो उसे देने से इंकार कर दिया गया इस पर पंजीकृत फार्मासिस्टों द्वारा जो अपने प्र्त्यावेदना पत्र दिये गये उनका कोई निश्तारण अभी तक नहीं किया गया कौंसिल में हजारों की संख्या में फर्जी फार्मासिस्टों के पंजीयन किये गये हैं इस पर समय समय पर माननीय उच्च न्यालय द्वारा टिप्पणी की हैं व माननीय उच्च न्यायलय द्वारा जाँच के आदेश भी दिये गये जिस पर जाँच भी चल रही है जो कि उ.प्र.का सतर्कता विभाग कर रहा है, इससे पूर्व उ.प्र.शासन द्वारा उ.प्र.फार्मेसी कौंसिल जाँच आयोग माननीय उच्च न्यालय इलाहाबाद के पूर्व न्यायधीश जस्टिस के.एल.शर्मा की अध्यक्षता में गठित किया गया था जिसने अपनी पहली संस्तुति में उक्त कौंसिल के किर्याकलापों पर गंभीर टिपण्णी की थी लेकिन कौंसिल ने अभी तक फर्जी पंजीयन व उनका नवीनीकरण कोनहीं रोका गया न ही इस ओर कोई गंभीर कदम उठाये गये साथ ही साथ कौंसिल में भारी वित्तीय अनियमितायें वरती जा रही है उक्त कौंसिल में पंजीक्रत फार्मासिस्टों के जमा करोड़ों रुपये का गोल-माल जारी है अध्यक्ष व रजिस्ट्रार द्वारा अपनी वित्तीय शक्ति से कहीं अधिक धन की निकासी की गई, जो जाँच का विषय है कौंसिल में शासन की पूर्वानुमति धारा 26 व उ.प्र.फार्मेसी रूल्स 1955 को संज्ञान में लिये बिना कर्मचारियों की भर्ती की गई व उनकों दिया जा रहा वेतन व भत्ते नियमानुसार नहीं है व भारी मात्रा में कौंसिल के सचिव/रजिस्ट्रार एवं अध्यक्ष द्वारा वित्तीय अनियमितायें भी की गई कौंसिल द्वारा किया गया उक्त कृत अधिनियम व रूल्स के विपरीत है एवं संज्ञेयअपराध की कोटि में आता है महोदय हम फार्मासिस्ट आपसे अनुरोध करते हैं उपरोक्त गंभीर विषय पर अपने स्तर से जाँच कराकर इस कौंसिल को भ्रष्टाचार से मुक्त करायें साथ ही भविष्य में होने वाले कौंसिल के चुनाव मजिस्ट्रेट के देखरेख में निष्पक्ष तरीके से करवाने के व्यवस्था सुनिश्चित की जाये ताकि प्रदेश का प्रत्येक वैध व्यवस्था सुनिश्चित की जाये ताकि प्रदेश का प्रत्येक वैध पंजीक्रत फार्मासिस्ट निडर होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके

भवदीय जयदीप कुमार

(रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट)

माटखेड़ा रोड बिलासपुर

जनपद रामपुर (उ.प्र.)

email – jaideepgupta52@gmail.com मोबाइल-9359395672

प्रतिलिपि सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतू

1 मुख्य चुनाव अधिकारी उ. प्र .

 

स्वास्थ्य आंदोलन की ओर अग्रसर फार्मासिस्टों के स्वागत में…

आशुतोष कुमार सिंह

आशुतोष कुमार सिंह

नई दिल्ली

देश में कोई भी बड़ा परिवर्तन होता है तो उसकी गवाह दिल्ली बनती है। इसी तरह देश एक बार फिर से एक नए परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है। यह परिवर्तन है फार्मा सेक्टर का। फार्मा सेक्टर में जिस तरह से माफियाओं ने अपनी धाक जमा ली है, उनसे छुटकारा दिलाने के लिए देश के फार्मासिस्ट एकजुट हो रहे हैं। उनकी यह एकता आने वाले समय के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण संकेतक है।

 

 

व्यापक विषय है स्वास्थ्य

स्वास्थ्य एक बहुत बड़ा व व्यापक विषय है। आज हम इस विषय के एक महत्वपूर्ण पहलू पर चर्चा करने के लिए इकट्ठे हुए हैं। देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्टों की उपयोगिता को मैं बहुत ही महत्वपूर्ण मानता आया हूं। मुझे लगता है कि जिस तरह से डॉक्टर, दवा व मरीज की चर्चा होती है, उस कड़ी में फार्मासिस्ट की चर्चा नहीं हो पाती। यह स्थिति दुर्भाग्यपूण हैं। जिस तरह से डॉक्टरों की इज्जत हम करते आएं हैं, उस कड़ी में फार्मासिस्ट को हम इज्जत नहीं दे पाएं हैं। आखिर ऐसा क्यों और कैसे हो गया। यह शोध का विषय हो सकता हैं लेकिन उससे भी पहले यह आत्मावलोकन का विषय भी है। आखिर क्यों फार्मासिस्ट समाज में अपनी वह इज्जत नहीं जमा पाएं जो उन्हें मिलनी चाहिए थी।
किराएं पर सर्टिफिकेट देना बंद करना होगा

इस संदर्भ में जहां तक मैं समझ पाया हूं, मुझे लगता है कि एक तरफ सरकार की स्वास्थ्य नीतियां जिम्मेदार रही हैं लेकिन उसी के समानांतर मुझे यह भी लगता है कि फार्मासिस्टों ने जिस दिन से खुद को बेचना शुरू किया उस दिन से उनकी आवाज दबती चली गयी। आप मित्रो को यह पता लगना होगा कि वह कौन पहला फार्मासिस्ट रहा होगा जिसने अपना सर्टीफिकेट चंद रुपयों की लालच में गिरवी रखा होगा। इन्हीं चंद रुपयों की लालच ने आपको कमजोर कर दिया। आप कभी एक नहीं हो पाएं। आपकी समस्याएं और बड़ी होती चली गयीं और आप मन ही कभी सरकार को तो कभी खुद को कोसते रह गए।

सोशल मीडिया को योगदान

इन सबके बीच पिछले दो-तीन वर्षों में खासतौर से सोशल मीडिया के उभार के बाद जिस तरीके से आप मित्रो ने अपनी समस्याओं को साझा किया है, अपनी बातों को एक मंच से कहने की ताकत जुटाई है, यह उसी का कमाल है कि आप सैकड़ों की तादाद में लाखों फार्मासिस्टों का संदेश लेकर दिल्ली आ पहुंचे हैं। आपकी इस एकता को सलाम करता हूं।
#स्वस्थ_भारत_अभियान आप मित्रो के साथ हमेशा से खड़ा रहा है। दिल्ली पहुंच रहे ज्यादातर मित्रो से मेरी बातचीत होती रही है, लेकिन मुलाकात पहली बार होने जा रही है, लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है कि हम पहली बार मिलने वाले हैं। इस मौके पर खासतौर से विनय कुमार भारती व उनकी पूरी टीम बधाई की पात्र है कि इतने कम समय में देश तमाम राज्यों से आप मित्रो को बुलाकर एक सम्मेलन का रूप देना बहुत ही साहस का काम है।

सम्मेलन की उपयोगिता
यह सभा भारत के स्वास्थ्य सेक्टर के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखेगा। इस सम्मेलन में हमारे कई पत्रकार मित्र रहेंगे, वे इस सभा के महत्व को अच्छी तरह से रेखांकित कर पायेंगे। जहां तक मेरी जानकारी है, राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा पहली बार हो रहा है कि पूरे देश के फार्मासिस्ट एक सभामंडल में बैठने जा रहे हैं और अपनी समस्याओं व समाधान पर चिंतन-मनन कर रहे हों। इस चिंतन-मनन से निकलने वाले परिणाम की महत्ता को मैं समझ रहा हूं। संख्या में बेशक ये मुट्ठी भर दिख रहे हैं लेकिन आपमें इतनी मारक क्षमता है कि आप चाहें तो देश की स्वास्थ्य-व्यवस्था को स्वस्थ कर सकते हैं। मुझे आप मित्रो से बहुत उम्मीदे हैं।

स्वस्थ भारत अभियान की उम्मीदे

हम यानी स्वस्थ भारत अभियान चाहता है कि आप स्वास्थ्य- मित्र बनें। देश की जनता के सेवक बनें। आप मेडिकल-फिल्ड की सही जानकारी लोगों को दें। हम तो यह भी चाहते हैं कि यदि आप तैयार हों तो आपका संपर्क-सूत्र आपके नाम व क्षेत्र के साथ इस वेबसाइट स्वस्थ भारत डॉट इन पर डाल दें। ताकि यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी कुछ पूछना हो तो आप उन्हें बता सकें। आप चाहे तों अपने ज्ञान से सरकार की तमाम योजनाओं के बारे में आम लोगों को जागरूक कर सकते हैं, जिनकी जानकारी के अभाव में सरकारी पैसा बाबुओं व दलालों की जेब में जा रहा है। सच्चाई तो यह है कि आपलोगों को देखकर ऐसा लग रहा है कि वह दिन दूर नहीं जब ‘स्वस्थ भारत’ का हम सब का सपना साकार होगा!

 

IPGA का सेमिनार 25 जून को पटना में

पटना / दिल्ली :09.06.2016

बिनोद कुमार (अध्यक्ष,IPGA बिहार )

बिनोद कुमार (अध्यक्ष,IPGA बिहार )

हालिया दिनों में देश भर के फार्मासिस्टों ने सक्रियता बढ़ी है वे अपने हक़ के लिए एकजुट हो रहे हैं । अब जरुरत है की देश भर के फार्मासिस्ट एक मंच पर आकर सरकार तक अपनी माँग को रखें । उक्त बातें आईपीजी ए बिहार चेप्टर के अध्यक्ष बिनोद कुमार स्वस्थ भारत डॉट इन से एक बिशेष बातचीत में कही । बिनोद कुमार ने आगे बताया की हर साल की भांति इस साल भी इंडियन फार्मासिस्ट ग्रेजुएट एसोसिएशन 25 जून को वार्षिक अधिवेशन कर आयोजित कर रहा है । इस आयोजन में देश भर के फार्मासिस्ट समेत, एफडीए के बरिष्ठ अधिकारी शरीक हो रहे है। गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी के छात्र छात्राएं सेमिनार को सफल बनाने में जुटे हैं ।

इन मुद्दों पर होती बातचीत

१. केंद्र और राज्य सरकार में सेवारत फार्मासिस्टों का वेतनमान व ग्रेड में संसोधन
२. बिहार व अन्य राज्यों में प्रयोगशाला का विस्तार
३. उपकेंद्रों में फार्मासिस्टों की नियुक्ति
४. फार्मेसी के छात्रों को स्कॉलरशिप
५. ड्रग इंस्पेक्टरों की नियुक्ति
६. फार्मेसी काउंसिल का चुनाव
८. निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट की उपस्थिति की अनिवार्यता व अन्य

 

IPGA के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य करेंगे सिरकत

आईपीजीए सेंट्रल कमिटी के वाईस चेयरमैन श्रीपति सिंह ने बताया की 25 जून की सुबह दिल्ली व अन्य शहरों से राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पटना पहुंच रहे हैं श्रीपति सिंह ने बताया की ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया डॉ. जी. एन. सिंह के आने की प्रबल सम्भावना है । इस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री समेत कई मंत्रियों को भी न्योता दिया है।
साइंटिफिक सेमिनार में फार्मेसी के स्टूडेंट्स को भाग लेने की अपील

बिनोद कुमार ने बिहार व झारखण्ड के फार्मेसी के छात्र छात्राओं से साइंटिफिक सेमिनार में हिस्सा लेने की अपील की है। श्री कुमार ने बताया की हर साल उनकी संस्था इस तरह की आयोजन करती है ताकि यूवाओं में कौशल का विकास हो सके।

केमिस्ट ने मंत्री जी को खिलाई गलत दवा औषधि नियंत्रण प्रशाशन रेस

 

अमर अग्रवाल फ़ाइल फोटो

अमर अग्रवाल फ़ाइल फोटो

रायपुर/ 02.06.2016

लापरवाही के तमाम मामले सामने आते हैं। जब लापरवाही के शिकार आम लोग होते हैं तो जांच बैठा दी जाती है। साल दर साल चलने वाली जांच का नतीजा भी सामने आता है। जहां कुछ लोग बाइज्जत बरी हो जाते हैं। वहीं कुछ लोगों को मामूली सजा मिल जाती है। लेकिन ये मामला थोड़ा अलग है। केमिस्ट की लापरवाही का शिकार कोई आम आदमी नहीं था। बल्कि छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन और आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल थे। मंत्री जी का संतरी उनके लिए दवा लेने गया। केमिस्ट ने पर्चे के मुताबिक दवा दी। मंत्री जी ने दवा खाया लेकिन उनकी सेहत सुधरने की जगह और खराब हो गयी। लेकिन जो राजनेता सामान्य हादसों की जांच के लिए आयोग बनाने की मांग करते हैं। वैसा कुछ इस मामले में नहीं हुआ। आरोपी केमिस्ट की न तो दलील सुनी गयी और न ही अपील। उसकी दुकान पर ताला लगाने का फरमान आ गया।

क्या है मामला ?

बीबीसी के मुताबिक मंत्री जी का एक कर्मचारी राजधानी रायपुर के एक मेडिकल स्टोर में पहुंचा। उसने डॉक्टर की पर्ची दिखा कर कुछ दवाइयां लीं। आरोप है कि दवा खाने के बाद मंत्री जी का ब्लड प्रेशर लो हो गया। कि मंत्री जी को बैठक छोड़कर घर लौटना पड़ा। डॉक्टरों को बुलाया गया तो पता चला कि मेडिकल स्टोर के दुकानदार ने ग़लत दवा दे दी है। इसकी पूरी जानकारी ज़िले के कलेक्टर को दी गई। कलेक्टर ने खाद्य और औषधि विभाग को तलब किया. खाद्य और औषधि विभाग ने तुरंत दुकान पर छापा मार कर कार्रवाई शुरू कर दी।

छत्तीसगढ़ फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विनी गुर्देकर ने कहा है की राजधानी समेत कई जिलों में बगैर फार्मासिस्ट कई दुकानों का सञ्चालन किया जा रहा है । जबकि ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट 1940 रूल  1945 और फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा के तहत केवल एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट ही दवा देने के लिए प्राधिकृत है । अश्विनी ने बगैर फार्मासिस्ट के चल रही तमाम दवा दुकानों पर करवाई की मांग सरकार से की है ।

आल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रिस्ट्रीब्यूशन फ़ेडरेशन के महासचिव गितेश्वर चंद्राकर ने बताया, ”दवा दुकान को बंद कर दिया गया और फिर नगरीय प्रशासन विभाग का अमला पुलिस के साथ दुकान तोड़ने के लिए आ पहुंचा. हमारे विरोध के बाद कहीं जाकर कार्रवाई रोकी गई। चंद्राकर का कहना था कि इस घटना के बाद राज्य भर के मेडिकल और केमिस्ट का व्यवसाय करने वालों में भय का वातावरण है।
गौरतलब है कि अमर अग्रवाल रमन सिंह सरकार में नगरीय प्रशासन और आबकारी मंत्री हैं। पहले वो छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री थे।

 

स्रोत : जागरण

बगैर फार्मासिस्ट की सलाह के दवा लेना खतरनाक – क्षितिज

 

 

Kshitiz Kumar

 

कानपुर / क्षितिज कुमार :

अक्सर देखा गया है की रोज की व्यस्त दिनचर्या में हम अनेकों प्रकार की मानसिक तनाव , शारीरिक, काम के बोझ , आजीविका की चिंता आदि और शारीरिक कष्टों यथा वातावरणीय प्रभाव से गुजरते रहते हैं ! इन सभी प्रतिकूल परिस्थितियों का असर कहीं न कहीं हमारे स्वस्थ्य पर पड़ता है ! अधिकतर व्यक्ति इनके द्वारा उत्पन्न विकारों जैसे डिप्रेशन, नींद न आना सिरर्दद, बवासीर, बुखार नजला खांसी पेट दर्द अपच इत्यादि से ग्रस्त हो जाते हैं ! अधिकतर समय इन विकारों से तुरंत लाभ पाने के लिए किसी के द्वारा सुझाई गयी या टीवी में अख़बार में दिखाई गयी विभिन्न औषधियों का सेवन करने लगते हैं ! फार्मासिस्ट डॉक्टर या किसी की सलाह न लेकर खुद ही डॉक्टर बन जाते हैं, यह गलत ही नहीं  खतरनाक भी है ! हर दवा का साइड इफ़ेक्ट होता है, हर एक दवा की अपनी अलग कार्यप्रणाली होती है ! जरुरी नहीं की जो दवा एक व्यक्ति को फायदा करे वह दुसरे को भी उतना ही फायदा करे ! इस प्रकार बिना दवा के बारे में पूर्णरूपेण जाने बिना किसी व्यक्ति की सलाह लिए यदि दवा खाई जाती है तो हो सकता है की तात्कालिक रूप से तो लाभ प्रदान करें, परन्तु बाद में कैंसर , मानसिक विक्षिप्तता , नपुंसकता, आंत की खराबी इत्यादि जैसे कई गंभीर विकारों को शरीर में उत्पन्न करतें हैं ! इनसे बचने के लिए हमें उचित सलाह की जरुरत होती है जो दवाओं के बारें में जानकारी रखने वाला ही बता सकते हैं ! जैसे फार्मासिस्ट या डॉक्टर ! फार्मासिस्ट हर मेडिकल स्टोर, फार्मेसी पर उपलब्ध होते हैं जिनका काम ही चिकित्सीय परामर्श के बाद मरीजों की काउंसिल करना और दवा और खुराक के बारे में पूरी जानकारी देना है ! यहाँ ध्यान देने योग्य ये बात है की कई मेडिकल स्टोर सरकार की आँखों में धूल झोंककर सेल्समैन द्वारा दवा बेचने का काम करवा रहे हैं ! सेल्समैन दवा की सटीक जानकारी नहीं दे सकते ! अतः केवल फार्मासिस्ट वाले मेडिकल स्टोर या फार्मेसी से ही दवा लें ! हमेशा सही सलाह व पूरी जानकारी के साथ ही खाएं  ! याद रखें सही सलाह और सही इस्तेमाल पर दवा अमृत है तो गलत सलाह और अधूरी जानकारी के साथ लेने पर यह जहर भी हो सकती है I

 

(लेखक क्षितिज कुमार मास्टर ऑफ़ फार्मेसी प्रोफेशनल हैं और वर्तमान में प्रो इंडिया नामक फार्मासिस्ट संगठन से जुड़े है)