SBA विशेष

दांव पर चिकित्सकों की साख!

आज 1 जुलाई को देश राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मना  रहा है। देश-दुनिया में यह दिवस बहुत ही संवेदनशीलता के साथ मनाया जाता है और चिकित्सकों को उनके नेक काम के लिए समाज की तरफ से कृतज्ञता ज्ञापित किया जाता है। भारत में राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस जाने-माने समाज सेवी एवं पं.बंगाल के पहले स्वास्थ्य मंत्री एवं दूसरे मुख्यमंत्री रह चुके भारत रत्न विधानचन्द्र राय के जन्म दिवस के अवसर पर मनाया जाता है। चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ.बी.सी.राय ने अतुलनीय काम किया है। सच तो यह है कि देश के चिकित्सक डॉ.बी.सी.राय को अपना नायक मानते हुए जन-सरोकारिता को अपनाएं साथ ही समाज के लोग अपने चिकित्सकों का विशेष ख्याल रखें, उनके साथ किसी भी तरह की अभद्रता न करें और संवाद का सहारा लें। इतना ही नहीं देश की सरकारों को भी चिकित्सा व्यवस्था की अव्यवस्था को दूर करने में और तीव्र गति से आगे आना होगा। तभी हम एक स्वस्थ समाज की परिकल्पना को पूर्ण कर सकते हैं!

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SBA विशेष विविध स्वास्थ्य स्कैन

मोदी सरकार के चार वर्षः ग्रामीण स्वास्थ्य की बदलती तस्वीर

आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत अभियान, पोषण अभियान, इंद्रधनुष अभियान, नल-जल योजना, उज्ज्वला योजना सहित तमाम ऐसी योजनाएं बीते चार वर्षों में लागू हुई हैं। इसका सकारात्मक असर देश के शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। खासतौर से ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण एक क्रांतिकारी सामाजिक बदलाव की तरह दिख रहा है। प्रत्येक गांव में आशा कार्यकर्ताओं की उपलब्धता ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को मजबूति प्रदान की है। बावजूद इसके भारत जैसे बड़े भूभाग एवं जनसंख्या वाले देश के लिए अपने नागरिकों की स्वास्थ्य को सेहतमंद बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती है। और इस चुनौती को इस सरकार ने बीते चार वर्षों में सफलतापूर्वक स्वीकार किया भी है।

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SBA विशेष आयुष काम की बातें

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष: वैश्विक होता योग

आशुतोष कुमार सिंह बड़ी आबादी वाले अपने देश में स्वस्थ समाज के निर्माण का कार्य बहुत बड़ी चुनौती है। विकास की दौड़ में गर सबसे ज्यादा नुकसान किसी चीज का हुआ है तो वो हमारा स्वास्थ्य ही है। अपने देश में अंग्रेजी दवा बाजार तकरीबन 90 हजार करोड़ रुपये (वार्षिक) का है। पिछले दिनों स्वस्थ भारत यात्रा […]

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आयुष समाचार स्वस्थ भारत अभियान स्वस्थ भारत यात्रा

गांधी का स्वास्थ्य चिंतन ही रख सकता है सबको स्वस्थःप्रसून लतांत

‘स्वस्थ रहने के लिए गांधी के स्वास्थ्य चिंतन को अपनाना पड़ेगा। स्वस्थ भारत की कुंजी गांधी के विचारों में ही अंतर्निहित है। यदि आप गांधी को जी रहे हैं तो निश्चित ही रोग आपसे कोसो दूर रहेगा। रोग को भगाने के लिए गांधी का स्वास्थ्य चिंतन रामवाण है।’ उक्त बातें गांधी स्वच्छता एवं स्वास्थ्य विषय पर बोलते हुए वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक प्रसून लतांत ने कही। वे गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत न्यास द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में बोल रहे थे। समस्तीपुर के सूदुर गांव बटहा के सुंदरी देवी सरस्वती विद्या मंदिर विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में बोलते हुए स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि स्वच्छ भारत से ही स्वस्थ भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने महात्मा गांधी के स्वच्छता के संदेश को साझा करते हुए कहा कि मन एवं तन दोनों की स्वच्छता जरूरी है। स्वच्छ मन से ही स्वस्थ तन का निर्माण होता है। स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के संबंध पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अस्वच्छता के कारण मलेरिया, डेंगू, डायरिया, पीलिया सहित तमाम तरह की बीमारियों के शिकार हम हो जाते हैं।

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SBA विशेष आयुष काम की बातें

अच्छी आदतों से जोड़ने का काम करता है योग

दरअसल योग सिर्फ स्वस्थ जीवन का ही आधार नही है बल्कि ये लोगो को जोड़ने का माध्यम भी बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री ने कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर प्राणायाम करके लोगो को प्रेरणा भी दी। हालांकि वो समय- समय पर ऐसा करते रहते है जिससे की देशवासी सेहतमंद और फिट रहें । योग की लोकप्रियता का आलम ये है की क्या आम क्या ख़ास आज हर कोई योग से अपनी जिंदगी संवार रहा है। इस बीच सोशल मीडिया पर तमाम मंत्रियो और गणमान्य लोगों ने फिटनेस चेलेंज दिया जो इस बात का सबूत है योग का प्रचार प्रसार कितनी तेज़ी से हुआ है। 

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SBA विशेष आयुष काम की बातें

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष: योग करते समय इन बातों का ध्यान रखें…

भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का अपना प्राचीन इतिहास रहा है। भारत हमेशा से चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। बीच के कुछ कालखंड को छोड़ दे तो भारत की प्राचीन चिकित्सकीय परंपरा हमेशा से सर्वोपरी रही है। वर्तमान समय में भी देश-दुनिया के लोग इस बात को मानने लगे हैं कि स्वस्थ रहना है तो भारतीय स्वास्थ्य पद्धतियों को अपना ही होगा। आयुर्वेद,यूनानी,होमियोपैथी, सिद्धा, प्राकृतिक चिकित्सा, योगा एवं सोवा-रिग्पा जैसी चिकित्सा पद्धतियों को संवर्धित करने एवं इनकी पहुंच आम-जन तक पहुंचाने के लिए ही भारत सरकार ने अलग से आयुष मंत्रालय बनाया है। इस कड़ी में आगे बढ़ते हुए भारत सरकार की पहल के कारण योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान जून 2015 में मिला। और पूरी दुनिया ने एक स्वर में 21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने पर अपनी सहमति प्रदान की। तब से योग का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

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SBA विशेष अस्पताल कैरियर

अब तो मेडिकल की महंगी पढाई मार गई…

स्वास्थ्य के मामले में भारत की स्थिति दुनिया में शर्मनाक  है। यहां तक कि चिकित्सा सेवा के मामले में भारत के हालात श्रीलंका, भूटान व बांग्लादेश से भी बदतर हैं। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य पत्रिका ‘ लांसेट’ की ताजातरीन रिपोर्ट ‘ ग्लोबल बर्डन आफ डिसीज’ में बताया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में हमारा देश दुनिया के कुल 195 देशों की सूची में  145वें स्थान पर है। रिपोर्ट कहती है कि भारत ने सन 1990 के बाद अस्पतालों की सेहत में सुधार तो किया है। उस साल भारत को 24.7 अंक मिले थे, जबकि 2016 में ये बढ़ कर 41.2 हो गए हैं। देश के आंचलिक कस्बें की बात तो दूर राजधानी दिल्ली के एम्स या सफदरजंग जैसे अस्पतालों की भीड़ और आम मरीजों की दुर्गति किसी से छुपी नहीं है। एक तो हम जरूरत के मुताबिक डाक्टर तैयार नहीं कर पा रहे, दूसरा देश की बड़ी आबादी ना तो स्वास्थ्य के बारे में पर्याप्त जागरूक है और ना ही उनके पास आकस्मिक चिकित्सा के हालात में  केाई बीमा या अर्थ की व्यवस्था है।  हालांकि सरकार गरीबों के लिए मुफ्त इलाज की कई योजनाएं चलाती है लेकिन व्यापक अशिक्षा और गैरजागरूकता के कारण ऐसी योजनाएं माकूल नहीं हैं।

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SBA विशेष काम की बातें

Women with breast cancer may be spared chemotherapy, but…

These are legitimate concerns that need to be addressed in a systematic manner by the government as well as health care professionals. This would allow Indian patients to  benefit from the impact of this study allowing  early stage breast cancer patients  (Hormone receptor positive, Her2 negative, axillary node negative) with a medium range risk score in Oncotype Dx to safely avoid chemotherapy and its associated physical, emotional and economic burden

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SBA विशेष काम की बातें

सोशल एटॉप्सी की मदद से कम हो सकती हैं असामयिक मौतें

सामाजिक जागरूकता नहीं होने के कारण अक्सर लोग पीलिया, लकवा, सांप काटने जैसी समस्याओं में चिकित्सकीय इलाज को छोड़कर घरेलू उपचार या झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। इस मामले में बुजुर्गों और महिलाओं की आमतौर पर उपेक्षा की जाती है और उनके इलाज में लापरवाही बरती जाती है। परिवार में युवाओं की प्रवृत्तियों की तरफ ध्यान नहीं दिया जाने से भी समस्या को बढ़ावा मिलता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, समाज में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की परिवारों तक पहुंच, बीमारियों की पहचान तथा निदान और नशे की लत के बारे में जागरूकता का प्रसार जरूरी है। इसके लिए सोशल एटॉप्सी जैसे टूल की मदद से देश के अन्य क्षेत्रों में भी मृत्यु के सामाजिक कारणों की पहचान की जा सकती है और असामयिक मौतों को रोका जा सकता है। 

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SBA विशेष आयुष

All you want to know about Homoeopathy

You are right in choosing Homoeopathy System of Medicine for treatment of disease or ailment you are suffering from. At present, you have before you a variety of system of medicine. No one system is of lesser importance than any other. However, Homoeopathy has its own special place in the field of treatment of disease. Homoeopathic prescriptions aim at the disease symptoms treating the patient as a whole. Besides removing the disease symptoms they also enhance the existing healing power of the patient, so that these symptoms do not reappear.

 

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