SBA विशेष

आइए जानते हैं क्या है तपेदिक (टीबी)…

तपेदिक तपेदिक या ट्यूबरोक्युलोसिस (टी.बी) मायकोबेक्टिरियम ट्यूबरोक्युलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है। फैलाव तपेदिक का फैलाव इस रोग से ग्रस्‍त व्‍यक्ति द्वारा लिये जानेवाले श्‍वास-प्रश्‍वास (सांस के दौरान छोड़ी गई हवा) के द्वारा होता है। केवल एक रोगी पूरे वर्ष के दौरान 10 से भी अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है। टी.बी. के […]

SBA विशेष आयुष

आयुर्वेद क्यों जरूरी है?

आयुर्वेद से हमारा सदियों से नाता रहा है। लेकिन आधुनिकता की चादर इतनी बड़ी होती गयी है कि इस परंपरागत ज्ञान को हम भूल-से गए हैं…इसी ज्ञान की ओर आप देशवासियों को पुनः लौटाने का प्रयास www.swasthbharat.in कर रहा है. इस कड़ी में आपको आयुर्वेद से परिचय करा रहे हैं देश के जाने में आयुर्वेदाचार्य […]

SBA विशेष आयुष

ब्रेथवर्क : सुंदर सांसों की कला

कन्या राशि की होने के नाते लोगो से भावनात्मक तल पर जुड़ने का मेरा स्वभाव है और लोगो की समस्याएं सुनने और जानने और उनका समाधान निकालना मेरे काम का ही नही मेरे होने का भी ढंग है.यह सब अनुभव करते करते मैंने जाना प्रत्येक व्यक्ति के अपने संकोच, तनाव, कठोर विचारधाराएं और डर होते […]

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यूरोप में नहीं बिक पाएंगी हमारी आयुर्वेदिक दवाएं

यूरोपीय यूनियन के एक कड़े फैसले के बाद 30 अप्रैल 2011 के बाद भारत की आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री पर उनके इलाके में पांबंदी लगा दी गई है। इन दवाओं के दुष्प्रभावों की बढ़ती शिकायतों के चलते अब यूरोपीय देशों में हर्बल दवाओं की बिक्री से पहले उनकी कड़ी जांच हो रही है। यदि दवाएं […]

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बदहाल स्वास्थ्य सेवाएँ संवैधानिक अधिकारों का हनन

Amit Tyagi For Swasthbharat.in सार्वजनिक चिकित्सा व्यवस्था की बदहाली एक चिंता का विषय है। देश की आम जनता अपने अनुभव से इसे महसूस करती रही है अनेक अध्ययन और विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े इस कटु सत्य से समय-समय पर हमें रूबरू करते रहे हैं। डेढ़ वर्ष पूर्व केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम रमेश […]

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‘एड्स’ का समाजशास्त्र

एड्स को ले के फैली भ्रांतियों के हालात इतने गंभीर हैं कि महानगरों के बड़े अस्पताल व डाक्टर एचआईवी संक्रमितों का इलाज अपने यहां करने से परहेज करते हैं। ऐसे लोगों को काम नहीं मिलता, ऐसे में एचआईवी ग्रस्त लोगों की बड़ी संख्या बेरोजगार के रूप में अर्थ व्यवस्था को आहत कर रही है। यहां जानना जरूरी है कि अभी तक उजागर एड्स के मामलों में 78 फीसदी अलग-अलग तरह के यौन संबंधों से पनपे हैं। गौरतलब है कि 20 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोग सर्वाधिक यौन सक्रिय होते हैं। चिंता का विषय है कि जब इस आयुवर्ग के लोग एड्स जैसी बीमारी से ग्रस्त होंगे तो देश को सक्रिय मानव शक्ति का कितना नुकसान होगा।

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डायरिया से प्रत्येक वर्ष 1.36 मिलियन बच्चों की हो रही मौत!

”अतिसार पर काबू पाने के लिए आसान उपायों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने की जरूरत” डॉ. हष वर्धन ने शौचालय बनाने के लिए योजना में सीएसआर फंड के इस्तेमाल को कहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज भारत के कॉर्पोरेट क्षेत्र से शौचालय बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी परियोजना में योगदान की […]