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सरकारी अस्पताल ने बताया एचआइवी पोजिटिव, मामला थाने पहुंचा, यूपी के देवरिया जिला का है मामला

यूपी सरकार की  स्वास्थ्य व्यवस्था  की खुली पोल

नई दिल्ली/ 11.08.18

देवरिया जिला अस्पताल के महिला चिकित्सालय के लैब की इसी रिपोर्ट ने निलू उपाध्याय की जिंदगी को अंधेरा कर दिया था…

सरकारी अस्पतालों की लापरवाही का अद्भूत नमूना है यह। यूपी के देवरिया जिला के सदर अस्पताल में जो हुआ है उसे पढ़कर आप डर जाएंगे। 17 जुलाई का वह दिन पंकज उपाध्याय के परिवार के लिए पहाड़ बन कर आया। पंकज की गर्भवति पत्नि निलू उपाध्याय को रात में पेट में दर्द हुआ। उन्हें लेकर परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में उनकी एचआईबी जांच कराई गई। दूसरे दिन  जब जाँच की रिपोर्ट आई तो पत्नी के होश उड़ गए। रिपोर्ट में लिखा था एचआईवी पोजिटिव है। यह सुनते ही निलू बदहवास हो गई। खुद को घर की एक कोठरी में कैद कर लिया। घर के लोगों से बोलना-बतियाना लगभग बंद कर दिया। निलू की यह हालत देखकर घर के बाकी सदस्य जिन्हें पूरी बात नहीं मालूम थी सकते में थे। निलू का बदला हुआ यह व्यवहार उन्हें समझ में नहीं आ रहा था। अंत में जब उन्हें सही जानकारी मिली तब पूरा परिवार दुःख के सागर में डूब गया। पति को लोग ढांढस देने लगे। पंकज उपाध्याय के लिए पत्नी एवं परिवार को सम्भालना मुश्किल हो रहा था। आखिर अब किया क्या जाए। इसी बीच पंकज को किसी ने सलाह दी कि एक बार किसी निजी अस्पताल में जाकर पत्नी का चेकअप करा लीजिए। मरता क्या न करता लोकोक्ति को साकार करते हुए पंकज अपनी पत्नी को एक निजी अस्पताल में ले गए और उसका ईलाज हुआ। फिर से एचआईवी का टेस्ट हुआ। इस बार जो परिणाम आया वह सुकुनदायी था। रिपोर्ट में लिखा था एचआइवी निगेटिव है। यानी एचआइवी नहीं है। इसके बाद उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र घुघली में भी इसकी जांच कराई वहां पर भी परिणाम निगेटिव ही आया।

14 दिन के बाद हुए इस टेस्ट में एचआइवी निगेटिव आया

इस बावत पंकज उपाध्याय का कहना है कि वे  अपनी पत्नी के लिए इंसाफ की  लड़ाई लड़ेंगे। दोषियों को सजा दिलवाकर रहेंगे। उन्होंने  कहा कि मेरी पत्नी को जिन मानसिक यातनाओं को झेलना पड़ा है, उसका को कंपंनसेशन नहीं हो सकता है। सदर अस्पताल की लापरवाहियों को उजागर  करते हुए पंकज कहते हैं कि यहां तो एचआइवी किट को निजी दवा दुकानदारों को बेच दिया जाता है और मरीजों से एचआइवी किट बाहर से खरीदकर लाने को कहा जाता है। पंकज के इस आरोप पर जब स्वस्थ भारत डॉट इन ने सीएमओ,देवरिया से बात करने की कोशिश की तो उनका मोबाइल न. किसी इलाहाबाद के आदमी ने उठाया और कहा कि यह उसका न. है। लैंडलाइन न. भी स्थाई रुप से सेवा में नहीं है। जिले की सरकारी वेबसाइट पर स्वास्थ्य महकमें को जो न. दिए गए हैं वे सब के सब फर्जी निकले।

थाने पहुंचा मामला

देवरिया जिला पुलिस ने मामले को कोतवाली थाना को प्रेषित किया है

पंकज  उपाध्याय ने इस मामले को ट्वीटर पर लिखा। देवरिया पुलिस को टैग करते हुए उन्होंने अपनी आपबीती बताई। इस मामले को देवरिया पुलिस ने कोतवाली थाना को भेज दिया है। हालांकि इस बावत जिले के एसपी ने स्वस्थ भारत से बातचीत करते हुए इस तरह की किसी जानकारी से इंकार किया। उन्होंने कहा कि उनके  संज्ञान में यह मामला नहीं आया है।

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी:  डीजी, मेडिकल हेल्थ

उत्तरप्रदेश के डीजी मेडिकल हेल्थ डॉ. पदमाकर सिंह ने स्वस्थ भारत डॉट इन को बताया कि अभी उनके संज्ञान में मामला नहीं आया है। आते ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। जो भी दोषी होगा उसे छोड़ा नहीं जायेगा।

 

 

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आशुतोष कुमार सिंह
आशुतोष कुमार सिंह भारत को स्वस्थ देखने का सपना संजोए हुए हैं। स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर पत्र-पत्रिकाओं में अनेक आलेख लिखने के अलावा वह कंट्रोल एमएमआरपी (मेडिसिन मैक्सिमम रिटेल प्राइस) तथा 'जेनरिक लाइये, पैसा बचाइये' जैसे अभियानों के माध्यम से दवा कीमतों व स्वास्थय सुविधाओं पर जन जागरूकता के लिए काम करते रहे हैं। संपर्क-forhealthyindia@gmail.com, 9891228151
http://www.swasthbharat.in

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