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बार्सिलोना सम्मेलनः ई-सिगरेट पर प्रतिबंध का भारत ने किया समर्थन 

  • बार्सिलोना में यूनियन को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन
    बार्सिलोना में यूनियन को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन

    तंबाकु छोड़ने की चाह रखने वालों के लिए हेल्पलान

    27 नये राज्य तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठों की स्थापना संभव

 

एसबीए डेस्क

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ई-सिगरेट और ऐसे सभी उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में हैं जिन्हें इलेक्ट्रानिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) कहा जाता है।
ईएनडीएस की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न विवाद पर अपने स्पष्ट संदेश में डॉ. हर्षवर्धन ने विशेषज्ञों द्वारा अनुसंधान निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए उनकी स्वीकार्यता से इनकार किया।
डॉ. हर्षवर्धन ने कल बार्सिलोना, स्पेन में फेफड़ों के स्वास्थ्य के बारे में 45वें यूनियन विश्व सम्मेलन में विश्व के तंबाकू नियंत्रण विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए अपनी बात को रख रहे थे। उन्होंने कहा कि ई-सिगरेट और इसी तरह के अन्य उत्पाद बच्चों में निकोटिन पर निर्भरता पैदा करते हुए उन्हें तम्बाकू के सेवन की तरफ ले जाते हैं।
डॉ. हर्षवर्धन जिन्हें देश में धूम्रपान के खिलाफ पहला कानून – दिल्ली धूम्रपान निषेध और धूम्रपान न करने वालों के लिए स्वास्थ्य संरक्षण अधिनियम, 1996 बनाने का श्रेय मिला हुआ है, का सम्मेलन में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। यूनियन 94 वर्ष पुराना मंच है जो फेफड़ों की बीमारियों, तपेदिक और तंबाकू जैसे विषयों पर चिंतन-मनन करता है।

ई-सिगरेट पर सरकारी मार
ई-सिगरेट पर सरकारी मार

डॉ हर्षवर्धन ने माना कि ईएनडीएस पर प्रतिबंध लगा देने से ही समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रतिबंध की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम इस तरह के उत्पादों के अवैध व्यापार और सीमा पार से बिक्री को किस प्रकार नियंत्रित करते हैं। इस व्यापार के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल पर भी रोक लगनी चाहिए।
भारत में 27 करोड़ 50 लाख लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। धुंआ रहित तंबाकू का सेवन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी समस्या बन चुका है जिस पर यदि कड़े उपाय करते हुए समय पर अंकुश नहीं लगाया गया तो यह एक राष्ट्रीय खतरा बन जाएगा। आकर्षक पैकेजिंग, फ्लेवरिंग और दामों में कटौती जैसी बड़े पैमाने पर अपनाई जाने वाली मार्केटिंग रणनीतियां सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, “मुझे यकीन है कि यहां मौजूद सभी विशेषज्ञों को तंबाकू उद्योग की ताकत की जानकारी है। भारत इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए अति सक्रिय उपाय करने के लिए प्रतिबद्ध है।’ इस संबंध में उन्होंने हाल में भारत द्वारा सिगरेट के डिब्बों के बड़े हिस्से और अन्य किस्म के तंबाकू पर अनिवार्य चेतावनी लिखने के मामले में अन्य देशों के साथ पहला स्थान हासिल करने का जिक्र किया। नये नियमों के तहत तंबाकू के पैकेट के दोनों तरफ 85 प्रतिशत हिस्से में तस्वीर के रूप में स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी देनी होगी।

तंबाकु छोड़ने की चाह रखने वालों के लिए हेल्पलाइन

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि उन्होंने भविष्य के लिए एक रोड मैप तैयार किया है जिसमें तंबाकू का उपयोग करने वाले उन लोगों को सलाह देने के लिए 24 घंटे की टेलीफोन हेल्प लाइन शुरू की जाएगी जो इसे छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं इसके अलावा वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर पांच तंबाकू परीक्षण प्रयोगशालाएं, 27 नये राज्य तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठों की स्थापना और सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 में संशोधन शामिल है ताकि इसे बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।

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