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आयुष काम की बातें

निरोगी काया के लिए जरूरी है कार्यस्थलों पर योग

सिद्धार्थ झा
आज हम लोग बीमारियों की चपेट में आते जा रहे हैं। ज्यादातर नॉन कॉमन्यूकेबल बीमारियां जैसे-मधुमेह , उच्च रक्तचाप ,हृदय संबधित बीमारियां, आधुनिक जीवन शैली की ही देन हैं। खासतौर से कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी जो 9 से 5 की ड्यूटी करते हैं उन्हें लगातार अपनी सीट पर बैठकर काम करना होता है और ऐसे में उन्हें जबरदस्त मानसिक श्रम तो करना होता है लेकिन शारीरिक श्रम न के बराबर होता है। ऐसे में उनका शरीर बहुत सी बीमारियों का घर बन जाता है। आज बहुत से सरकारी और गैरसरकारी प्रतिष्ठानों में सिर्फ २१ जून को अन्तराष्ट्रीय योग दिवस मनाकर ही खानापूर्ति नहीं की जाती बल्कि वहां ऐसे इंतजाम किये गए है जिससे की यदि कोई काम के घंटो के बीच फुर्सत के लम्हों में योगाभ्यास के ज़रिये खुद को चुस्त दुरुस्त रखना चाहे तो वो कर सकता है । यहाँ तक की बड़े कॉरपोरेट में भी ये सुविधा है क्योंकि अनेक योग ऐसे हैं जिसे आप चाहे तो अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे भी कर सकते हैं।  निश्चित तौर अपर ऐसे कदमो से ना सिर्फ कर्मचारी स्वास्थ्य रहता है बल्कि उसकी कार्यक्षमता भी बेहतर होती है।
वर्तमान में देश के नौनिहालो और युवाओं पर पढाई लिखाई का कितना बोझ है ये बताने की जरूरत नही है। आगे प्रतियोगिता कड़ी है और हमेशा बेहतर करने की होड़ कहीं न कहीं उनमे तनाव और निराशा के भाव को जन्म देती है। मगर कुछ देर का नियमित योगाभ्यास उन्हें और बेहतर करने में मदद करता है इसी का नतीजा है योग आज स्कूली जीवन का अहम हिस्सा है। यहां तक कॉलेज और महविद्यालयों में भी योग युवाओं के बीच में ख़ासा लोकप्रिय है और इसके लिए बाकायदा विभाग भी सृजित किये गए हैं।
अगर आपके पास योग का ज्ञान है और आपके लिए योग एक व्यवसाय से बढ़कर जिंदगी का अहम हिस्सा है तो निःसंदेह आपको कहीं नौकरी मांगने की जरूरत नहीं होगी। योग ने महिला सशक्तिकरण मे अहम् भूमिका निभाई  है। ऐसी महिलाएं जो घर से बाहर काम कने नहीं जा सकती घर-परिवार के परवरिश का सवाल है और सम्मानजनक काम करने के लिए जमापूंजी भी नहीं है तो योग ज्ञान उनके लिए रामवाण है।  दक्षिणी दिल्ली में अपना योग सेंटर चलाने वाली काजल चौधरी कुछ समय पहले तक आम गृहणी का जीवन जी रही थी। कुछ समय पहले तक इनकी जिंदगी भी आम घरेलू महिलाओं की भांति ही थी लेकिन योग ने उनके जीवन की दशा ही बदल दी। उन्होंने आसपास रहने वाली महिलाओं को योग के लिए प्रेरित किया और आज अच्छी खासी सख्या में महिलाए उनके पास योगाभ्यास के लिए आती हैं। यहाँ आप देख सकते है की इनकी कक्षा में उम्र का कोई बंधन नहीं है। महिला सशक्तिकरण का एक नायाब उदाहरण समाज के सामने पेश कर रही हैं। ये महिलाये घर परिवार के अलावा अपना कुछ समय स्वयं के स्वास्थ्य पर भी खर्च करती है, इससे इनकी जिंदगियों में बड़ा बदलाव आया है।
आज ऐसे युवाओं की कमी नहीं है जो योग सीखकर उसे जनसेवा के साथ अपनी आजीविका का भी माध्यम बनाना चाहते है।
आज योग का बहुत बड़ा बाज़ार है जिससे लाखो लोगो की आजीविका जुड़ी हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में योग सीखने वाले लोगों की संख्या करीब 20 करोड़ है। इसके साथ ही योग टीचर्स की मांग सालाना 35 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। देश में योग ट्रेनिंग का कारोबार करीब 2.5 हजार करोड़ रुपये का हो चुका है। इसमें लगाए जाने योग शिविर, कॉरपोरेट्स कंपनियों को दी जाने वाली ट्रेनिंग और प्राइवेट ट्रेनिंग शामिल है। योग टीचर प्रति घंटे 400-2000रुपये तक फीस लेते है। बीते कुछ सालो मे योग शिक्षको की मांग काफी तेज़ी से बढ़ी हैं। योग सीखने
के लिए योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक की जरूरत होती है। जिसकी वज़ह से देश और विदेशो में योग शिक्षको की मांग में बहुत तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है भारतीय योग प्रोफेशनल की मांग देश में ही नहीं विदेशों में भी काफी है।
योग बाजार में योग सिखाने वाले शिक्षकों की मांग देश ही नहीं विश्व के अन्य देशों में भी बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ अमेरिका में 76, 000 रजिस्टर्ड योग शिक्षक हैं और इसके साथ 7000 योग के स्कूल जुड़े हुए हैं। Yoga Alliance से 2014 से 2016 के बीच 14, 000 नये योग शिक्षक जुड़े। एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार देश में योग की मांग आने वाले वर्षों में 30-40 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ने का अनुमान है। एसोचैम की इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि योग की शिक्षा देने वालों की मांग 30-35 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ने का अनुमान है। योग के ब्रांड अम्बेस्ड्र बाबारामदेव की बात न की जाये तो बात अधूरी है निसंदेह बाबा रामदेव का बहुत बड़ा योगदान है योग को विश्व पटल पर लाने का। आज बाबा लाखो नौजवानो के प्रेरणा है कल तक जिस योग को दुनिया करतब और सरकर्स कहने से नहीं झिझकती थी आज उन सबकी नजरे हमारी तरफ एक उम्मीद से देख रही है की कैसे योग के माध्यम से हम संसार को तनावमुक्त और निरोगी काया दे रहे है।
लेखक परिचय
लेखक टीवी पत्रकार हैं। इन दिनों लोकसभा टीवी को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सामाजिक मसलों पर देश के विभन्न-पत्र-पत्रिकाओं में लिखते रहते हैं। सेहत आपका पसंददीदा विषय है। स्वस्थ भारत अभियान को आगे बढ़ाने में सक्रीय रहते हैं।

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