फार्मा सेक्टर

प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की निगरानी में हो यूपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल का चुनाव – जयदीप गुप्ता

लखनऊ/02.07.2016

आरटीआई एक्टिविस्ट जयदीप गुप्ता (फ़ाइल फोटो)
आरटीआई एक्टिविस्ट जयदीप गुप्ता (फ़ाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल चुनाव सर पर है। पिछली बार चुनाव में बड़े व्यापक पैमाने पर धांधली की बात सामने आई थी । काउंसिल के पदाधिकारियों द्वारा फ़र्ज़ी वैलेट छपवा कर बोगस बोटिंग की बात सामने आई थी ! कई फार्मासिस्टों ने वैलेट नहीं मिलने की शिकायत की थी । ऐसे में यूपी के फार्मासिस्ट इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहते । उत्तर प्रदेश के तेज़ तर्रार फार्मा और आरटीआई एक्टिविस्ट जयदीप गुप्ता ने काउंसिल के कामकाज पर सवाल उठाये है साथ ही पदाधिकारियों पर कई गम्भीर आरोप जड़ें हैं।जयदीप ने शासन के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेट की तैनाती करने की गुहार लगाई है । स्वस्थ भारत डॉट इन को मिले पत्र की प्रति हु बा हु निचे वेब साइट पर लगाई जा रही है ।  

सेवा में

मुख्य सचिव

उत्तर प्रदेश शासन

बापू भवन लखनऊ (उ. प्र.)

विषय- उ.प्र.फार्मेसी कौंसिल के प्रस्तावित चुनाव 2016 उ. प्र . शासन द्वारा नियुक्त प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की निगरानी में करवाने के संबंध में..

महोदय, आपको अबगत कराना है कि उ.प्र.फार्मेसी कौंसिल जो कि केन्द्रीय अधिनियम फार्मेसी एक्ट 1948 के द्वारा गठित है जिसका सञ्चालन उ.प्र.फार्मेसी रूल्स 1955 व फार्मेसी एक्ट 1948(8 of 1948) के अन्तर्गत किया जाता है उक्त नियम के अनुसार ही वर्ष 2016 में कॉउंसिल के चुनाव प्रस्तावित हैं जिसमें पूर्व की भांति चुनाव में भारी मात्रा में गड़बड़ी व धांधली की जायेगी ऐसे में उक्त चुनाव पूर्व की भांति निष्पक्ष नहीं होंगें इस हेतू पूर्व के काबिज पदाधिकारी उक्त चुनाव में वोटर लिस्ट से लेकर पोस्टल मत पत्र में धांधली की योजना बनाये बैठे हैं आने वाले चुनाव में उमीदवारों को अयोग्य करना मतदाता सूचि में फेरबदल करना पोस्टल वैलेट पेपर आदि ऐसे महोदत से निवेदन है कि उक्त चुनाव निष्पक्ष व भयमुक्त हो इस हेतू शासन स्तर से उक्त चुनाव मजिस्ट्रेट की देख रेख में ताकि प्रदेश का वैध फमसिस्ट उक्त चुनाव की प्रक्रिया में भाग लेते हुये भयमुक्त अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके यहाँ यह भी स्पष्ट करना चाहूँगा की उत्तर प्रदेश फार्मेसी कौंसिल में प्रदेश के फार्मेसी से जुड़े व्यवसायीओं का पंजीयन किया जाता है वर्तमान में लगभग 70 हजार पंजीयन उक्त कौंसिल से हो चुके हैं परन्तु कौंसिल द्वारा सभी विधायी व्यवस्था को किनारा करते हुये उ.प्र.फार्मेसी रूल्स 1955 में अनेक संसोधन बिना किसी संसदीय प्रक्रिया के पालन किये बिना संसोधन कर डाले जबकि उक्त हेतू फार्मेसी एक्ट 1948(8 of 1948) की धारा 46 के अन्तर्गत व्यवस्था दी गई है कि प्रत्येक नियम जो राज्य सरकार द्वारा बनाया जाता है, उसे शीघ्र से शीघ्र बनने के उपरांत राज्य विधान मंडल के सम्मुख प्रस्तुत किया जायेगा (धारा-46/3) (प्रतिलिपि संलगन) ऐसा न करना अपने आप में एक गंभीर प्रकरण है जो कभी भी उ.प्र.सरकार को एक गंभीर संकट में डाल सकती है राज्य में कार्यरत सरकारी व गैर सरकारी पंजीकृत फार्मासिस्टों को इनके द्वारा बनाये गये इन्हीं नियमों से गुजरना पड़ता है प्रदेश में कार्यरत सरकारी पंजीक्रत फार्मासिस्ट इन नियमों का अनुपालन करते हुये फार्मेसी के जॉब में कार्यरत हैं उ.प्र.फार्मेसी कौंसिल में डी.पी.ए. के सदस्य वर्षों से नामित सदस्य के रूप में काबिज है कौंसिल में उ.प्र.के बेरोजगार फार्मासिस्ट, स्नातक फार्मासिस्ट,दवा व्यापारियों से कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं है न ही कौंसिल में डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन (डी.पी.ए.) सरकारी फार्मासिस्टों का संगठन अन्य किसी को नामित होने देता है पिछले दिनों माननीय उच्च न्यालय की लखनऊ बेंच ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कौंसिल के निर्वाचित सदस्यों को अयोग्य घोषित करते हुये कौंसिल को भंग कर दिया था जिसके बाद उ.प्र.शासन के निर्देश पर कौंसिल में नये चुनाव की अधिसूचना जारी की गई जो कि आधी अधूरी व उ.प्र फार्मेसी रूल्स 1955 के अनुरूप नहीं है उक्त की सूचना मात्र लखनऊ के आस-पास के समाचार पत्रों में प्रकाशित कर इतिश्री कर दी गयी साथ ही उ.प्र.फार्मेसी रूल्स 1955 के नियम-1 में दिये गये प्रारूप-E के 12 बिन्दुओं को शामिल न करते हुये अपनी स्वयं की तैयार वोटर लिस्ट आधी-अधूरी कौंसिल के वेवसाइट पर अपलोड कर फार्मासिस्टों को अपने नाम देखने व आपत्ति दर्ज करने को कहा गया जिसमे से भारी संख्या में वैध फार्मासिस्टों के नाम उक्त लिस्ट हटा दिये गये,कई फार्मासिस्टों के एक से अधिक जगह नाम दर्शाये गये ताकि उन्हें मताधिकार व चुनाव लड़ने से रोका जा सके अनेक ऐसे सरकारी फार्मासिस्टों का नाम शामिल कर दिया गया क्योंकि वह डी.पी.ए.के सदस्य हैं वहीं उ.प्र.से स्थान्तरित हो गये हजारों उतराखंड व अन्य राज्यों के फार्मासिस्टों को शामिल कर लिया गया ताकि उनकी फर्जी वोटिंग करायी जा सके कौंसिल में उक्त सूचि की हार्ड कॉपी मांगी गई तो उसे देने से इंकार कर दिया गया इस पर पंजीकृत फार्मासिस्टों द्वारा जो अपने प्र्त्यावेदना पत्र दिये गये उनका कोई निश्तारण अभी तक नहीं किया गया कौंसिल में हजारों की संख्या में फर्जी फार्मासिस्टों के पंजीयन किये गये हैं इस पर समय समय पर माननीय उच्च न्यालय द्वारा टिप्पणी की हैं व माननीय उच्च न्यायलय द्वारा जाँच के आदेश भी दिये गये जिस पर जाँच भी चल रही है जो कि उ.प्र.का सतर्कता विभाग कर रहा है, इससे पूर्व उ.प्र.शासन द्वारा उ.प्र.फार्मेसी कौंसिल जाँच आयोग माननीय उच्च न्यालय इलाहाबाद के पूर्व न्यायधीश जस्टिस के.एल.शर्मा की अध्यक्षता में गठित किया गया था जिसने अपनी पहली संस्तुति में उक्त कौंसिल के किर्याकलापों पर गंभीर टिपण्णी की थी लेकिन कौंसिल ने अभी तक फर्जी पंजीयन व उनका नवीनीकरण कोनहीं रोका गया न ही इस ओर कोई गंभीर कदम उठाये गये साथ ही साथ कौंसिल में भारी वित्तीय अनियमितायें वरती जा रही है उक्त कौंसिल में पंजीक्रत फार्मासिस्टों के जमा करोड़ों रुपये का गोल-माल जारी है अध्यक्ष व रजिस्ट्रार द्वारा अपनी वित्तीय शक्ति से कहीं अधिक धन की निकासी की गई, जो जाँच का विषय है कौंसिल में शासन की पूर्वानुमति धारा 26 व उ.प्र.फार्मेसी रूल्स 1955 को संज्ञान में लिये बिना कर्मचारियों की भर्ती की गई व उनकों दिया जा रहा वेतन व भत्ते नियमानुसार नहीं है व भारी मात्रा में कौंसिल के सचिव/रजिस्ट्रार एवं अध्यक्ष द्वारा वित्तीय अनियमितायें भी की गई कौंसिल द्वारा किया गया उक्त कृत अधिनियम व रूल्स के विपरीत है एवं संज्ञेयअपराध की कोटि में आता है महोदय हम फार्मासिस्ट आपसे अनुरोध करते हैं उपरोक्त गंभीर विषय पर अपने स्तर से जाँच कराकर इस कौंसिल को भ्रष्टाचार से मुक्त करायें साथ ही भविष्य में होने वाले कौंसिल के चुनाव मजिस्ट्रेट के देखरेख में निष्पक्ष तरीके से करवाने के व्यवस्था सुनिश्चित की जाये ताकि प्रदेश का प्रत्येक वैध व्यवस्था सुनिश्चित की जाये ताकि प्रदेश का प्रत्येक वैध पंजीक्रत फार्मासिस्ट निडर होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके

भवदीय जयदीप कुमार

(रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट)

माटखेड़ा रोड बिलासपुर

जनपद रामपुर (उ.प्र.)

email – jaideepgupta52@gmail.com मोबाइल-9359395672

प्रतिलिपि सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतू

1 मुख्य चुनाव अधिकारी उ. प्र .

 

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Vinay Kumar Bharti
विनय कुमार भारती देश के जाने में आरटीआई एक्टिविस्ट हैं. फार्मा सेक्टर में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ स्वस्थ भारत अभियान के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। फार्मासिस्टों के अधिकार की लड़ाई को आगे बढ़ाने हेतु इन दिनों वे दिल्ली में प्रवास कर रहे हैं। संपर्कःvinayk@zindagizindabad.com

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