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MTP दवाएं दे रहे हैं 'डॉक्टर साहब'!

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कितने दुर्भाग्य की बात है कि एमटीपी कीट का उपयोग अवैध तरीके से हो रहा है। बिना यह ध्यान रखे की इसका महिला के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ने वाला है…यह खबर तो मुंबई से है, लेकिन इस खबर का दायरा पूरा देश है। यह स्थिति पूरे देश में है। लचर मोनीटरिंग नीति के कारण पूरा स्वास्थ्य महकमा भ्रष्टाचार की चपेट में आ चुका है...संपादक
दीपिका शर्मा, मुंबई
कुछ दिन पहले ही धारावी की संगीता (बदला नाम) ने अपनी प्रेग्नेंसी के 14 हफ्ते में अबॉर्शन का निर्णय लिया और एक ‘डॉक्टर साहब’ (जनरल प्रैक्टिश्नर) ने उन्हें अबॉर्शन के लिए दो दवाएं ‘मिप्रीस्टोन’ और ‘मिसोप्रोस्टोल’ लेने को दे दी। दवा लेने के कुछ घंटों के भीतर ही संगीता की हालत बिगड़ने लगी और उसी हालत में जब उन्हें एक गायनकलॉजिस्ट के पास ले जाया गया तो पता चला, कि अबॉर्शन की प्रक्रिया आधी ही हुई है। संगीता, ऐसे नीम-हकीमों से अबॉर्शन की दवा लेने वाली कोई अकेली मरीज नहीं है। डॉक्टरों और फॉर्मासिस्टों की मानें, तो बेहद कड़े नियमों के तहत मिलने वाली ‘मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) किट’, बिना किसी रोक-टोक के मेडिकल स्टोर पर मिल रही है। साथ ही कई जनरल प्रैक्टिश्नर बिना आधिकारिक होते हुए भी यह दवाएं मरीजों को दे रहे हैं।
बोगस डॉक्टर दे रहे हैं MTP की दवाएं
जेजे अस्पताल के गायनकलॉजिस्ट, डॉ़ अशोक आनंद बताते हैं कि ऐसे कई मामले आते हैं, जिनमें अबॉर्शन के लिए महिलाओं को किसी जनरल प्रैक्टिश्नर ने ‘मिप्रीस्टोन’ और ‘मिसोप्रोस्टोल’ दवाएं दे दी हैं। हम ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस को सूचना देते हैं। डहाणू में प्रैक्टिस करने वाले गायनकलॉजिस्ट, डॉ़  राजेश तिवारी ने बताया कि मुंबई के धारावी, गोवंडी, मानखुर्द आदि इलाकों से कई पेशंट बहुत ही बुरी हालत में हमारे पास आते हैं। ज्यादातर मामलों में किसी जनरल प्रैक्टिश्नर ने बिना गर्भावस्था की अवधि जाने (कभी-कभी प्रेग्नेंसी के 12वें या 14वें हफ्ते में) मरीजों को ‘मिप्रीस्टोन’ और ‘मिसोप्रोस्टोल’ दवाएं दे दी हैं। कुछ मामालों में होम्योपैथी और आयुर्वेदिक डॉक्टरों द्वारा भी यह दवा देने के मामले सामने आए हैं।
400 की दवा 10,000 में
वहीं युनियन ऑफ रजिस्टर्ड फॉर्मासिस्ट (यूआरपी) के अध्यक्ष, उमेश खाके ने बताया कि पिछले 6 महीनों में शहर में एमटीपी ड्रग के बिना प्रिस्क्रिप्शन के मिलने की तादाद बहुत बढ़ी है। कुछ महीनों पहले यह दवाएं बिना प्रिस्क्रिप्शन के मिलना बहुत मुश्किल हो गई थी। यही कारण है कि सामान्य तौर पर 400 से 500 रुपये तक मिलने वाली यह दवाएं 10,000 रुपये तक में लोगों को दी जा रही हैं। नियमों के मुताबिक हर मेडिकल स्टोर को एमटीपी किट का पूरा रेकॉर्ड रखना होता है, लेकिन अभी फिलहाल ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार एमटीपी ऐक्ट, 1971 में बदलाव कर नया ड्राफ्ट ला रही है। जिसके अनुसार आयुर्वेदिक, होम्योपैथ और प्रशिक्षित नर्सों को अबॉर्शन करने का अधिकार देने की बात कर रहा है। सरकार के इस बदलाव पर चिकित्सा जगत दो फांक हो गया है।
कोट
‘हमें यह जानकारी मिली है कि कुछ डॉक्टर और मेडिकल स्टोर इस तरह की दवाएं दे रहे हैं। इनपर रोक लगाने के लिए हमने अपने ड्रग इंस्पेक्टरों को विशेष ऑर्डर दिए हैं। वसई, मीरा रोड, भाईंदर, मुंब्रा आदि इलाकों में ऐसे मेडिकल स्टोर व डॉक्टरों की जानकारी मिली है।’
एस़ टी़ पाटील, असिस्टेंट कमिश्नर (एफडीए)
क्या है, MTP ऐक्ट की बारीकियां
– अबॉर्शन के लिए केवल 12 हफ्ते तक ही किया जा सकता है दवाओं का इस्तेमाल
– उसके बाद सर्जिकल प्रक्रिया से ही होता है अबॉर्शन
– सिर्फ गायनकलॉजिस्ट ही दे सकते हैं एमटीपी के लिए दवाएं
– एमटीपी किट देने वाले डॉक्टर के पास होनी चाहिए सर्जिकल प्रॉसेस की सुविधा
– एमटीपी दवाओं को देने वाले डॉक्टर, मेडिकल स्टोर आदि को रखना होता है एमटीपी दवाओं को देने का रेकॉर्ड
NBT, MUMBAI से साभार

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