फार्मा सेक्टर

देश में फार्मासिस्टों की कोई कमी नही है – केंद्र सरकार

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नई दिल्ली/2 फ़रवरी 2.17 : सर्राफा कारोबारियों के बाद अब मोदी सरकार ने दवा कारोबारियों को बड़ा झटका दिया है. केमिस्टों की सर्वोच्च संगठन आल इंडिया आर्गेनाईजेशन ऑफ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) फार्मासिस्टों की कमी का हवाला देकर 5 साल से अधिक समय तक दवा कारोबार करने वाले केमिस्ट को 6 माह का रिफ्रेसर कोर्स करवा कर फार्मासिस्ट का दर्ज़ा देने की मांग कर रहे थे.  इसे लेकर  संसद में यूपी के कई सांसद सवाल उठा रहे थे . फार्मासिस्ट की कमी को लेकर उठे सवालों को लेकर संसद में सरकार के तरफ से राज्य मंत्री फगन सिंह ने साफ़ किया कि देश में फार्मासिस्ट की कहीं कोई कमी नही है. मंत्री ने बताया कि देश भर में साढ़े सात लाख से कहीं ज्यादा ही फार्मासिस्ट है. उन्होंने  यह भी बताया कि देश की विभिन्न कॉलेजों से हर साल एक लाख छत्तीस हज़ार फार्मासिस्ट पास होकर निकलते हैं. स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत ट्रैंड किए जाने वाले फार्मेसी अस्सिटेंट सीधे तौर पर रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के अधीन होंगे और उनके निर्देशों का पालन करेंगे. 

फार्मासिस्ट की कमी को लेकर लोक सभा में सरकार द्वारा दिए गए जबाब पर देश भर के फार्मासिस्टों ने ख़ुशी जताई है. फार्मा एक्टिविस्ट विनय कुमार भारती ने अपने फ़ेसबुक पर सबसे पहले “सत्यमेव जयते” लिखकर इस बाबत सूचना दी. विनय ने स्वस्थ्य मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया है. मध्य प्रदेश महाकौशल फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश त्रिपाठी ने इसे सच्चाई की जीत बताया है. अविनव फार्मेसी अभियान, राजस्थान के प्रवक्ता ने विनोद नेरिया ने इसे अबतक की सबसे शानदार जीत बताते हुवे कहा की इसके साथ ही केमिस्टों के नापाक मनसूबे वेनकाब हुवे हैं. 

 फार्मेसी अस्सिस्टेंट को लेकर विवाद जारी

केमिस्ट संगठन भारत सरकार के स्किल डेवलपमेंट के जरिये फार्मेसी अस्सिस्टेंट को फार्मासिस्ट का विकल्प समझ बैठे थे. पर लोक सभा में उन्हें एकबार फिर मुह की खानी पड़ी. स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पस्ट किया कि ऐसे कार्यक्रम को चलाए जाने की योजना तो है ,पर यह केवल फार्मेसी में दवा के रख रखाव भर ही सिमित है. फार्मेसी अस्सिस्टेंट को रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के निर्देशों पर ही कार्य करना होगा.  फार्मेसी अस्सिस्टेंट मरीज़ को दवा नही दे सकते.

छत्तीसगढ़ के बरिष्ठ फार्मासिस्ट रामसजीवन साहू ने कहा कि जैसा की डॉक्टर का असिस्सटेंट जूनियर डॉक्टर होता है. उसी तर्ज़ पर फार्मासिस्ट को असिस्ट करने के लिए भी जूनियर फार्मासिस्ट ही होना चाहिए. वहीँ रामपुर के फार्मासिस्ट मोहम्मद अली ने कहा कि ऐसे किसी भी अनपढ़ या कम पढ़े  लिखे इंसान जिसे दवा की बिलकुल जानकारी ना हो थोड़ी ट्रेनिंग दे देने भर से दवा के रख रखाव की तकनीक नही समझ सकता. अली ने आगे बताया कि फार्मासिस्ट को पाठ्यक्रम के दौरान कौन सी दवा को कितने टेम्प्रेचर में रखना है बतौर पढाई कराइ जाती है. अली ने एतराज जताया है कि दवा मार्किट में मिलने वाली अन्य खाद्य बस्तु नही है जो कोई भी मरीज़ को दे दे. गलत दवा दिए जाने से मरीज़ की मौत हो सकती है. राजस्थान के बरिष्ठ फार्मासिस्ट रामावतार गुप्ता ने कहा कि जहाँ दवा वहां फार्मासिस्ट के तर्ज़ पर व्यवस्था होना चाहिए.

झारखण्ड के फार्मासिस्ट मनोज झा ने कहा है कि केमिस्टों का भरोषा नही किया जा सकता. उन्होंने आशंका जताई है कि भले ही प्रशिक्षण पाकर अबतक दवा बाँट रहे दवा कारोबारी अस्सिस्टेंट का काम कर लेंगे. पर पुनः यही अनुभव के आधार पर फार्मासिस्ट होने का दावा करने लगेंगे. सरकार को चाहिए की फार्मेसी असिस्टेंट का काम के जूनियर फार्मासिस्ट से करायें जायें. मनोज ने साफ़ किया कि देश के फार्मासिस्टों को असिस्ट करने के लिए किसी अयोग्य व्यक्ति की जरुरत नही.

 

 

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5 thoughts on “देश में फार्मासिस्टों की कोई कमी नही है – केंद्र सरकार”

  1. Dr. Ke basis per chalne wale chemist shop band ho jisse PG base companies me Kami aaye. Inhi companies ki wajha se mdcns jyada costly ho gayi hen bcz ye lalchi Dr. Se mdcn likhwate hen. Kitne hi rules banne ke baad bi Dr. Mdcns ko thik se nahi likhte or patient preshan hokar unhi Dr. Ke mdcl store se mdcn lete hen.

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