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लखनऊ: हाईकोर्ट के सामने सड़क पर बिकती रही दवा प्रशासन बेखबर

 

प्रदर्शन करते फार्मासिस्ट फाउंडेशन के सदस्य
प्रदर्शन करते फार्मासिस्ट फाउंडेशन के सदस्य

लखनऊ (16.12.2015)

सड़कों पर दवा बेच रहे युवा दरअसल फार्मासिस्ट फाउंडेशन के सदस्य है, जो यूपी में धड़ल्ले गैर क़ानूनी रूप से अयोग्य लोगों द्वारा दवा वितरण किए जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।  फाउंडेशन के अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव ने कहा की पुरे प्रदेश की दवा दुकानों में दवा वितरण गैर प्रशिक्षित लोगों द्वारा किया जा रहा है। यूपी में लगभग 80 फीसदी दवा दुकानों में ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट और फार्मेसी एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा है। हज़ारों की संख्यां में ऐसे मेडिकल शॉप है जो बगैर किसी ड्रग लाइसेंस के चल रही हैं। औषधी नियंत्रण प्रशासन मूकदर्शक बना हुवा है। बार बार चेतावनी देने के वावजूद भी प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है।अमित श्रीवास्तव ने राज्य औषधी नियंत्रक ए.के.मल्होत्रा पर ड्रग माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुवे दो टूक चेतावनी दी और कहा अगर जल्द से जल्द गैर क़ानूनी मेडिकल स्टोरों को बंद नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

वही फार्मासिस्ट फीमेल फाउंडेशन के प्रमुख सुष्मिता मिश्रा ने कहा की प्रदेश भर की  दवा दुकानों में गैर प्रशिक्षित लोग दवा बाँट रहे है। ऐसे में गलत दवा के दिए जाने से आमजन की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है।

सड़क पर दवा बेचते देख कानून के रखवाले दौड़े 

हालाँकि फार्मासिस्ट महज़ प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सड़क पर दवा बेचते देख दवा अचानक भीड़ जुट गई। दिलचस्प था की सामने हाई कोर्ट से कई बड़े और दिग्गज वकील भी सस्ती दवा खरीदने दौड़े चले आए। किसी ने टोका तक नहीं की ऐसे दवा बेचना गैर क़ानूनी है। वे अंत तक सस्ती दवा के चक्कर में फार्मासिस्टों को मनाते दिखे।

औषधी और पुलिस प्रशासन बेखबर 

लखनऊ के स्वस्थ भवन और कोर्ट  के समीप सबसे व्यस्त चौराहे पर फार्मासिस्टों का दल करीब चार घंटे तक दवा बेचने का ड्रामा किया। कई बार आते जाते राहगीर दवा खरीदने का प्रयास करते तो फार्मासिस्ट उन्हें दवा के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में समझते रहे। पुरे प्रकरण तक इन्हे रोकने ना पुलिस आई ना औषधी प्रशासन के अधिकारी।

प्रदर्शन करने वालों में अमित श्रीवास्तव, अमर यादव, जवालामुखी,  इंद्रजीत सिंह, राम नारायण, कौशल इन्द्रेश, अभिनव, मनोज रावत, यदुनंदन, पंकज शुक्ला समेत लगबग 50 -60 फार्मासिस्ट मौजूद थे।

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