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बिहार में जनऔषधि केन्द्र खोलना हुआ आसान, बिहार सरकार देगी सरकारी अस्पतालों में स्थान

फार्मासिस्टों  के लिए स्वरोजगार का सुनहरा अवसर 

  • आपीजीए ने किया स्वागत, अध्यक्ष ने कहा सेवा एवं उद्यमिता का कॉबों है जनऔषधि केन्द्र खोलना
  • 19 अस्पतालों में पहले से ही चल रही जनऔषधि की दुकान
नई दिल्ली/पटना/ आशुतोष कुमार सिंह
जेनरिक दवा को लोगों तक पहुंचाने के लिए बिहार सरकार इन दिनों कमर कस चुकी है।  एक नए आदेश में बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में जनऔषधि केन्द्र खोलने  के लिए मुफ्त में स्थान देने  की घोषणा की है। सरकार के इस फैसले को बहुत सराहा जा रहा है। सरकार के इस फैसले से जहां जनऔषधि केन्द्र खोलने में सहुलियत होगी वहीं फार्मासिस्टों के लिए भी यह एक सुनहरा अवसर है खुद को स्वरोजगार से जोड़ने का।
इस बावत बिहार में  प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना के अधिकारी किशोर कुणाल ने बताया कि सरकार के इस फैसले से जनऔषधि केन्द्रों की संख्य़ा में इजाफा होगा और जरुरतमंदों को कम कीमत पर दवा उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने बताया कि बिहार में कोई भी व्यक्ति/संस्था या कोई समूह संबंधित सिविल सर्जन को अपना आवेदन दे  सकता है।  जनऔषधि खोलने के मानडंडो को पूरा करने वाले को बिना किसी मासिक रेंटल के सरकार जगह मुहैया करायेगी।  जनऔषधि परियोजना के अधिकारी की माने तो सूबे में अभी तक 25 अस्पतालों में स्थान का आवंटन किाय जा जा चुका है, जिसमें 19 जगहों पर जनऔषधि केन्द्र खुल चुके हैं। 10 जगहों पर आवंटन प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
आईपीजीए के बिहार प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार इस फैसले का स्वागत करते हुए कहते हैं कि फार्मासिस्टों  को  इससे स्वरोजगार मिलेगा। सरकार से अपील करते हुए वे कहते हैं  कि सरकार को भी फार्मासिस्टों के भविष्य की गारंटी लेनी चाहिए। बीपीपीआई को सुझाव देते  हुए उनका कहना है कि अगर जनऔषधि को सफल बनाना है है  तो जनऔषधि को फार्मासिस्टों के बीच में जागरुकता अभियान चलाना चाहिए। वे आगे जोड़ते हैं कि जनऔषधि केन्द्र खोलना उद्यमिता एवं सेवा का कॉबों है। यहां से कोई भी फार्मासिस्ट अपनी अलग पहचान बना सकता है।
गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व बिहार के सभी अस्पतालों में 3 लाख रुपये खर्च कर के एक जेनरिक काउंटर का निर्माण किया गया था, लेकिन उसका उपयोग अभी तक नहीं हो सका है। सरकार उस जगह को जेनरिक स्टोर खोलने के लिए दे रही है। यहां भी ध्यान देने योग्य बात हैं कि जहां एक ओर यूपी एवं झारखंड में राज्य सरकारों ने केन्द्र के माध्यम से बड़ी-बड़ी कंपनियों को जनऔषधि केन्द्र खोलने के लिए सूचीबद्ध कर दिया है वहीं बिहार सरकार ने जनऔषधि केन्द्र खोलने के लिए किसी प्रकार का वित्तीय अथवा तकनीकि शर्त नहीं रखा है। बीपीपीआई की यह एक बड़ी सफलता है। इसे बीपीपीआई एवं राज्य सरकार के बेहतर तालमेल के रूप में देखा जाना चाहिए। बिहार का यह मॉडल अगर देश के अन्य राज्य भी अपना ले तो जनऔषधि परियोजना की गति और तीव्र हो जायेगी।
सनद रहे  कि बिहार सरकार के संयुक्त  सचिव ने 27/07/18  को एक पत्र जारी किया है। इस पत्र में जगह मुहैया कराने के पूर्व के फैसले पर से लगी रोक को हटाते हुए कहा गया है कि, जनऔषधि स्कीम  के  तहत खोले जाने वाले जनऔषधि  स्टोर के लिए  जगह मुहैया करवाने  संबंधित कार्रवाई  जनऔषधि से संबंधित भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार किया जाए। संबंधित स्कीम की जानकारी  भारत सरकार की वेबसाइट www.janaushadhi.gov.in से प्राप्त की जा सकती है।
स्वस्थ भारत  डाट इन की सलाह
आवेदकों को इस बात का विशेष  ध्यान रखने की सलाह दी जाती है कि जनऔषधि केन्द्र खोलने के लिए किसी भी तरह के बिचौलिए के  चक्कर में न पड़ें। अगर कोई बरगलाने की  कोशिश करता है तो  इसकी शिकायत आप complaints@janaushadhi.gov.inपर डायरेक्ट कर सकते हैं।

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…तो फार्मासिस्टों पर लाठीचार्ज की तैयारी थी।

swasthadmin

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swasthadmin

1 comment

swasthadmin August 3, 2018 at 10:36 pm

बेहतरीन स्टोरी

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