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SBA की टीम ने छग के ड्रग कंट्रोलर के खिलाफ दर्ज कराई FIR, अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर हुए निलंबित

SBA टीम के साथ Ashutosh Kumar Singh

बिलासपुर के सिविल लाइन थाना में FIR दर्ज करने के लिए दिए गए आवेदन की प्रति
बिलासपुर के सिविल लाइन थाना में FIR दर्ज करने के लिए दिए गए आवेदन की प्रति
FIR दर्ज कराते विनय कुमार भारती
FIR दर्ज कराते विनय कुमार भारती

बिलासपुर/ छत्तीसगढ़ मेें दवा कानूनों का हो रहे उलंघन के मामले में स्वस्थ भारत अभियान ने ड्रग कंट्रोलर छत्तीसगढ़ व अन्य दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया है। बिलासपुर के सिविल लाइन थाना में एफआईआर दर्ज कराई गयी है। स्वस्थ भारत अभियान के प्रतिनिधि व आरटीआई एक्टिविस्ट विनय कुमार भारती अपनी टीम के साथ रविवार शाम को सिविल लाइन थाना पहुंचे, जहां पर ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट के अनुपालन में औषधि प्रशासन द्वारा की गयी लापरवाही का हवाला दिया गया है। एफआईआर आवेदन में श्री भारती ने लिखा है कि किस तरह से औषधि प्रशासन ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। गौरतलब है कि बिलासपुर नसबंदी मामले में 19 महिलाओं की मौत हो गयी थी। दर्जनों महिलाएं अभी भी बीमार हैं। सिम्स अस्पताल में गैर फार्मासिस्ट दवाइयां बांट रहा है। इसकी खबर स्वस्थ भारत डॉट इन पहले ही दे चुका है। गौरतलब है कि स्वस्थ भारत अभियान की टीम पिछले चार दिनों से बिलासपुर में कैंप कर रही है।

महावर को लाइसेंस देने वाले अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर पर गिरी गाज

hemant-sriwastaw-asst-drug-controlar-225x300रायपुर। नसबंदी कांड में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के निर्देश पर राज्य शासन ने महावर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड को लाइसेंस देने वाले अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर को भी निलंबित कर दिया है। इस मामले में अब तक कुल चार अफसरों को सस्पेंड किया जा चुका है। बिलासपुर के नसबंदी कांड में 13 महिलाओं की मौत के बाद प्रदेश भर में सिप्रोसिन का कहर जारी है। सिप्रोसिन टेबलेट रायपुर की महावर कंपनी द्वारा बनाई गई थी। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला को जांच के दौरान सिप्रोसिन दवा में जिंक फास्फाइड मिले होने की जानकारी मिली थी, जिसके सेवन से मरीजों के लीवर और किडनी फेल हो रहे थे। श्री शुक्ला ने महावर कंपनी की सभी दवाओं को प्रदेश की छोटी से बड़ी दुकानों तक जप्त करने के निर्देश दे डाले। सिप्रोसिन दवा को पूरे प्रदेश के सभी जिलों से बुला लिया गया है। नसबंदी कांड के बाद अमानक दवाओं के निर्माण को लेकर प्रकाश में आई महावर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड को 2013 में दवाई निर्माण का लाइसेंस दिया गया था। बताया जाता है कि  यह लाइसेंस अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर हेमंत श्रीवास्तव द्वारा दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो महावर फार्मा प्रायवेट लिमिटेड की व्यवस्था को देखते हुए लाइसेंस नहीं दिया जा रहा था, लेकिन लेनदेन के बाद अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर ने इस लाइसेंस को जारी किया था। प्रदेश के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव डा आलोक शुक्ला ने बताया कि महावर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड को गलत तरीके से लाइसेंस देने के कारण अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर हेमंत श्रीवास्तव को दोषी मानते हुए  निलंबित किया जा रहा है।
इसके साथ ही राज्य शासन ने स्वास्थ्य विभाग के दो अधिकारियों की नवीन पदस्थापनाओं का आदेश जारी किया है। इसमें बिलासपुर के प्रभारी संयुक्त संचालक एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमर सिंह ठाकुर को उप संचालक पद के विरूद्ध स्वास्थ्य संचालनालय रायपुर में पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर सर्जरी विशेषज्ञ एवं प्रभारी सिविल सर्जन धमतरी डॉ. सूर्य प्रकाश सक्सेना को प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के दायित्व के साथ-साथ बिलासपुर के साथ-साथ संभागीय संयुक्त संचालक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। धमतरी के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विरेन्द्र कुमार साहू, डीआईओ. को अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी धमतरी के प्रभार के साथ-साथ वहां के सिविल सर्जन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। गौरतलब है कि स्वस्थ भारत अभियान ने ड्रग कंट्रोलर के खिलाफ सिविल लाइन थाना में एफआईआर दर्ज कराया है।

नसबंदी शिविरों में मौत : दवा कंपनी के खिलाफ पहले भी हुयी थी कार्रवाई

बिलासपुर जिले में नसबंदी शिविरों में पीड़ितों को कथित रूप से घटिया दवाइयों की आपूर्ति करने वाली कंपनी महावर फार्मास्यूटिकल्स प्रा. लि. को अपने उत्पादों की खराब गुणवत्ता के कारण पहले भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2010-11 में एफटीए ने कंपनी द्वारा तैयार की जाने वाली छह दवाइयों की उत्पाद मंजूरी को रद्द कर दिया गया था क्योंकि वे घटिया स्तर की थीं।
इसके बाद 2012 में कंपनी के खिलाफ यहां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दो मामले दायर किए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने 21 मार्च 2012 को विधानसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि महावर फार्मा सहित दवा बनाने वाली आठ कंपनियों के खिलाफ अदालत में मामले दाखिल किए गए हैं। विपक्षी कांग्रेस ने कंपनी का रिकार्ड देखते हुए उससे दवाइयां खरीदते रहने के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि एफडीए अधिकारी ने कहा कि प्रतिबंध कुछ खास दवाइयों पर ही और सीमित समय के लिए था। उन्होंने कहा कि सिप्ररोसिन..500 (नसबंदी शिविरों में इस्तेमाल की गयी दवाई) पर पहले कभी भी प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।
नसबंदी शिविरों में 13 महिलाओं की मौत के बाद कंपनी के निदेशक रमेश महावर और उनके पुत्र सुमित को गुरूवार को गिरफ्तार कर लिया गया और कंपनी के सभी उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

साथ में http://www.hellocg.com/

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swasthadmin
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