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बेगुसराय में खुला प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्र

स्वस्थ भारत अभियान के अंतर्गत 2012 से चलाए जा रहे जेनरिक लाइए पैसा बचाइए कैंपेन के तहत बिहार के बेगुसराय में प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्र का उद्घाटन पर्यावर्ण दिवस के अवसर पर किया गया।  जनऔषधि परियोजना के नोडल अधिकारी कुणाल किशोर, स्वस्थ भारत अभियान के बेगुसराय संयोजक डॉ. एन.के. आनंद ने इस केन्द्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर जनऔषधि परियोजना, बिहार के नोडल अधिकारी कुणाल किशोर ने कहा कि, जनऔषधि का प्रचार प्रसार बहुत जरूरी है। बाजार मूल्य से यहां पर 50 फीसद तक सस्ती दवाइयां मिलती है। सरकार चाहती है कि लोगों को सस्ती दवाइयां मिले। उन्होंने कहा कि महंगी दवाइयों के कारण 55 हजार परिवार गरीबी रेखा से नहीं ऊबर पाते हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना एक क्रांतिकारी कदम है।

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SBA विशेष मन की बात विमर्श

जेनरिक दवाइयां अनिवार्य रूप से देश के सभी दवा दुकानों पर उपलब्ध होनी चाहिए

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत भारत सरकार निश्चित रूप से लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने में जुटी है। जाने-अनजाने में सरकार ने एक समानान्तर दवा बाजार बनाने की कोशिश की है। एक बाजार जिस दवा को 100 रुपये में बेच रहा है, उसी दवा को जनऔषधि केन्द्र में 10 रुपये में बेचा जा रहा है। मुनाफे के खेल को खत्म करने की एक सार्थक कदम भारत सरकार ने उठाया है। लेकिन सही अर्थों में 3600 जनऔषधि केन्द्रों से देश की सवा अरब जनता को सस्ती दवाइयां नहीं उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके लिए सरकार को दवा बाजार के अर्थतंत्र को ठीक से समझना होगा। बाजार के खेल को समझना होगा। बिना इसे समझे सरकार आम लोगों तक सस्ती दवाइयों की खुराक नहीं पहुंचा सकती है।

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SBA विशेष फार्मा सेक्टर स्वस्थ भारत अभियान

स्वस्थ भारत ने मनाया अपना तीसरा स्थापना दिवस, गांधी का स्वास्थ्य चिंतन व जनऔषधि की अवधारणा विषय पर हुआ राष्ट्रीय परिसंवाद

अंतरराष्ट्रीय मानक के हिसाब से पेटेंट फ्री मेडिसिन को जेनरिक दवा कहा जाता है। लेकिन भारत में साल्ट के नाम से बिकने वाली दवा को सामान्यतया जेनरिक माना जाता रहा है। वैसे बाजार में जेनरिक दवाइयों को ‘ऐज अ ब्रांड’ बेचने का भी चलन है, जिसे आम बोलचाल में जेनरिक ब्रांडेड कहा जाता है। लेकिन ‘प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना’ के अंतर्गत खुलने वाली सभी दवा दुकानों पर हम लोग विशुद्ध जेनरिक दवा रखते हैं। यहां पर स्ट्रीप पर साल्ट अर्थात रसायन का ही नाम लिखा होता है’ अपने लक्ष्य को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि,’बीपीपीआई का गठन 2008 में हुआ था। तब से लेकर 2014 तक उतनी सफलता नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी। लेकिन 2014 से सरकार ने इस दिशा में तेजी से काम किया है और आज हम 3350 से ज्यादा जनऔषधि केन्द्र खोलने में सफल रहे हैं। 2018-19 में जनऔषधि केन्द्रों की संख्या 4000 तक ले जाने का हमारा लक्ष्य है।

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