SBA विशेष समाचार स्वास्थ्य की बात गांधी के साथ

स्वास्थ्य की बात गांधी के साथः महात्मा गांधी के स्वास्थ्य चिंतन ने बचाई लाखों बच्चों की जान

प्‍यारे देशवासियों, 2014 में इसी लाल किले की प्राचीर से जब मैंने स्‍वच्‍छता की बात की थी, तो कुछ लोगों ने इसका मजाक उड़ाया था, मखौल उड़ाया था। कुछ लोगों ने ये भी कहा था अरे, सरकार के पास बहुत सारे काम हैं ये स्‍वच्‍छता जैसे में अपनी ऊर्जा क्‍यों खपा रहे हैं। लेकिन भाइयों-बहनों, पिछले दिनों WHO की रिपोर्ट आई है और WHO कह रहा है कि भारत में स्‍वच्‍छता अभियान के कारण 3 लाख बच्‍चे मरने से बच गए हैं। कौन हिन्‍दुस्‍तानी होगा जिसको स्‍वच्‍छता में भागीदारी बन करके इन 3 लाख बच्‍चों की ज़िन्‍दगी बचाने का पुण्‍य पाने का अवसर न मिला हो। गरीब के 3 लाख बच्‍चों की जिन्‍दगी बचाना कितना बड़ा मानवता का काम है। दुनिया भर की संस्‍थाएं इसको recognise कर रही हैं।

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समाचार

25  सितंबर से शुरू होगा प्रधानमंत्री आरोग्य अभियान, प्रधानमंत्री ने लाल किले के प्राचीर से की घोषणा

आयुष्मान भारत को लागू करने के लिए भारत सरकार अगले महीने 25 सितंबर से प्रधानमंत्री आरोग्य अभियान शुरू करने जा रही है। इस बात की घोषणा प्रधानमंत्री ने लाल किले के प्राचीर से की। प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘देश के गरीब से गरीब व्‍यक्ति को, सामान्‍य जन को, आरोग्‍य की सुविधा मिले, इसलिए गंभीर बीमारियों के लिए और बड़े अस्‍पतालों में सामान्‍य मानव को भी आरोग्‍य की सुविधा मिले, मुफ्त में मिले और इसलिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री जनआरोग्‍य अभियान प्रारंभ करने का तय किया है। ये प्रधानमंत्री जनअरोग्‍य अभियान के तहत आयुष्मान भारत योजना के तहत, इस देश के 10 करोड़ परिवार, ये प्रारंभिक है, आने वाले दिनों में निम्‍न मध्‍यम वर्ग, मध्‍यम वर्ग, उच्‍च मध्‍यम वर्ग को भी इसका लाभ मिलने वाला है।

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SBA विशेष विविध स्वास्थ्य स्कैन

मोदी सरकार के चार वर्षः ग्रामीण स्वास्थ्य की बदलती तस्वीर

आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत अभियान, पोषण अभियान, इंद्रधनुष अभियान, नल-जल योजना, उज्ज्वला योजना सहित तमाम ऐसी योजनाएं बीते चार वर्षों में लागू हुई हैं। इसका सकारात्मक असर देश के शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। खासतौर से ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण एक क्रांतिकारी सामाजिक बदलाव की तरह दिख रहा है। प्रत्येक गांव में आशा कार्यकर्ताओं की उपलब्धता ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को मजबूति प्रदान की है। बावजूद इसके भारत जैसे बड़े भूभाग एवं जनसंख्या वाले देश के लिए अपने नागरिकों की स्वास्थ्य को सेहतमंद बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती है। और इस चुनौती को इस सरकार ने बीते चार वर्षों में सफलतापूर्वक स्वीकार किया भी है।

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मन की बात समाचार

सफलता एवं समृद्धि का आधार स्वास्थ्य हैः प्रधानमंत्री

भारत सरकार स्वास्थ्य के मुद्दे पर बहुत ही गंभीर होती जा रही है। आज स्वास्थ्य के मुद्दे पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को तकरीबन 47 मिनट तक संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि सफलता एवं समृद्धि का आधार स्वास्थ्य ही है। उन्होंने कहा कि बीमारी सिर्फ शारीरिक कष्ट नहीं देती बल्कि इसके सामाजिक एवं आर्थिक पक्ष भी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी मध्यम वर्ग परिवार का सदस्य बीमार हो जाए तो उस परिवार की आर्थिकी खराब हो जाती है, कई बार तो मध्यम वर्ग का आदमी निम्न वर्ग में और निम्न वर्ग का आदमी गरीबी रेखा के नीचे चला जाता है।

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SBA विशेष फार्मा सेक्टर स्वस्थ भारत अभियान

सस्ती एवं गुणवत्तायुक्त दवा उपलब्ध कराने का जन-अभियान है प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजनाः विप्लव चटर्जी, सीईओ

जनऔषधि एक सामाजिक आंदोलन की अवधारणा है। इसमें चिकित्सकों की भूमिका बहुत अहम हैं। इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए चिकित्सकों का सहयोग अपेक्षित है। यह सच है कि चिकित्सकों का सहयोग उस रूप में नहीं मिल पाया है, जिस रूप में मिलना चाहिए था। लेकिन हम आशान्वित हैं कि देश के चिकित्सक भी इस पुनीत अनुष्ठान में अपनी आहूति और तीव्रता के साथ देते रहेंगे।

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चौपाल समाचार

अच्छा स्वास्थ्य मानव प्रगति  की आधारशिला है: प्रधानमंत्री

देश में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण हमारे राजनीतिक वर्ग में इस अहसास का जोर पकडऩा है कि स्वास्थ्य सेवा सामान्यत: मतदाताओं के लिए कोई प्राथमिकता नहीं है। यह 1978 की अल्मा-अल्टा घोषणा के अनुमोदन से कदम पीछे खींचना था, जिसमें 2000 के अंत तक सबके लिए स्वास्थ्य की शपथ तो ली गई थी, और स्वास्थ्य सेवा के अपने वादों में इसने न तो व्यापक और न ही सबके लिए जोड़ा था। स्वास्थ्य सेवा तक प्रभावी पहुंच में एक बड़ी चूक अब भी यही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों के बाहर कम खर्च वाले चिकित्सीय विकल्प उपलब्ध नहीं हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की संख्या दयनीय रूप से प्रति हजार लोगों पर 0.6 है, जबकि शहरी क्षेत्र में 3.9 है।

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SBA विशेष

  योग : भारतीयता की अंतराष्ट्रीय पहचान

अब भारत के युवा वर्ग और आम जनमानस मे ऐसा विश्वास हो चला है कि जिस समृद्ध परंपरा को हम किताबों मे पढ़ते आये हैं उस पर सम्पूर्ण विश्व मुहर लगा रहा है। और ये क्षण शायद सबसे ज़्यादा गौरव का क्षण होता है। अब वो गौरवशाली समय तो आने वाला है जब भारतीयों की कही गयी बातें और सम्मेलन सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित करने वाले हैं। तब ऐसे मे हमारा भी ये फर्ज़ होगा कि हम अपने अपने पक्ष की जिम्मेदारियों को निभाते चले जाएँ। विश्वगुरु बनने के बाद हमारी जिम्मेदारियाँ और भी बढ़ जायेंगी।

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