SBA विशेष

देश को ब्रांड नहीं, जनऔषधि की है जरूरत

जेनरिक दवा और ब्रांडेड को लेकर जो भ्रम पैदा किया जा रहा है, उसे भी समझने की जरूरत है। पेंटेंट मुक्त मेडिसिन को जेनरिक मेडिसिन कहा जाता है। इस तरह से भारत में बिकने वाली अधिकतर दवाइयां पेटेंट फ्री हो चुकी हैं और उसे कोई भी कंपनी बनाकर बेच सकती है। इसी का फायदा उठाकर देश के दिग्गज कंपनियां अपने ब्रांड नेम के साथ दवाइयों को मार्केट में उतार रही हैं और उसकी जमकर मार्केटिंग कर रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पहले दवा बनती हैं, बाद में उसे ब्रांड बनाया जाता है। ऐसे में अगर सरकार लोगों को जनऔषधि के माध्यम से सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है तो क्या बुरा कर रही है? देश भर 612 जिलों में 3800 के आसपास जनऔषधि की दुकाने खुल चुकी हैं। जनऔषधि को लेकर लेकर भ्रम फैलाना बंद होना चाहिए। और इस जनसरोकारी काम को आगे बढ़ाने के लिए देश की जनता, देश चिकित्सक एवं फार्मासिस्टों को आगे आना चाहिए। ताकि महंगी दवाइयों के कारण गरीबी रेखा से नहीं ऊबर पा रहे देश की 3 फीसद आबादी को इस रेखा से ऊपर लाया जा सके।

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SBA विशेष विविध स्वास्थ्य स्कैन

मोदी सरकार के चार वर्षः ग्रामीण स्वास्थ्य की बदलती तस्वीर

आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत अभियान, पोषण अभियान, इंद्रधनुष अभियान, नल-जल योजना, उज्ज्वला योजना सहित तमाम ऐसी योजनाएं बीते चार वर्षों में लागू हुई हैं। इसका सकारात्मक असर देश के शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। खासतौर से ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण एक क्रांतिकारी सामाजिक बदलाव की तरह दिख रहा है। प्रत्येक गांव में आशा कार्यकर्ताओं की उपलब्धता ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को मजबूति प्रदान की है। बावजूद इसके भारत जैसे बड़े भूभाग एवं जनसंख्या वाले देश के लिए अपने नागरिकों की स्वास्थ्य को सेहतमंद बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती है। और इस चुनौती को इस सरकार ने बीते चार वर्षों में सफलतापूर्वक स्वीकार किया भी है।

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SBA विशेष मन की बात विमर्श

जेनरिक दवाइयां अनिवार्य रूप से देश के सभी दवा दुकानों पर उपलब्ध होनी चाहिए

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत भारत सरकार निश्चित रूप से लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने में जुटी है। जाने-अनजाने में सरकार ने एक समानान्तर दवा बाजार बनाने की कोशिश की है। एक बाजार जिस दवा को 100 रुपये में बेच रहा है, उसी दवा को जनऔषधि केन्द्र में 10 रुपये में बेचा जा रहा है। मुनाफे के खेल को खत्म करने की एक सार्थक कदम भारत सरकार ने उठाया है। लेकिन सही अर्थों में 3600 जनऔषधि केन्द्रों से देश की सवा अरब जनता को सस्ती दवाइयां नहीं उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके लिए सरकार को दवा बाजार के अर्थतंत्र को ठीक से समझना होगा। बाजार के खेल को समझना होगा। बिना इसे समझे सरकार आम लोगों तक सस्ती दवाइयों की खुराक नहीं पहुंचा सकती है।

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फार्मा सेक्टर मन की बात स्वस्थ भारत अभियान

देश के हर पंचायत में जरूरी है जनऔषधि केन्द्र

यह हर्ष का विषय है कि प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने का काम इधर के वर्षों में तेजी से हुआ है। विपल्व चटर्जी के मार्गदर्शन में काम को गति मिली। हम आशा करते हैं कि विपल्व जी देश के प्रत्येक पंचायत में एक जनऔषधि केन्द्र खोलने का संकल्प लेंगे। स्वस्थ भारत उनके इस नेक काम में हर संभव मदद करने की कोशिश करेगा।

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SBA विशेष फार्मा सेक्टर स्वस्थ भारत अभियान

सस्ती एवं गुणवत्तायुक्त दवा उपलब्ध कराने का जन-अभियान है प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजनाः विप्लव चटर्जी, सीईओ

जनऔषधि एक सामाजिक आंदोलन की अवधारणा है। इसमें चिकित्सकों की भूमिका बहुत अहम हैं। इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए चिकित्सकों का सहयोग अपेक्षित है। यह सच है कि चिकित्सकों का सहयोग उस रूप में नहीं मिल पाया है, जिस रूप में मिलना चाहिए था। लेकिन हम आशान्वित हैं कि देश के चिकित्सक भी इस पुनीत अनुष्ठान में अपनी आहूति और तीव्रता के साथ देते रहेंगे।

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