फार्मा सेक्टर समाचार

झारखंड के फार्मासिस्ट अंजन प्रकाश से पीएम ने की लंबी बातचीत

सेहत की  बात पीएम के साथ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने झारखंड के फार्मासिस्ट श्री अंजन प्रकाश से  लंबी बातचती की। अंजन प्रकाश ने  बताया कि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर लोगों की सेवा करने के लिए प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र खोला है। उन्होंने बताया कि उनका केन्द्र झारखंड के रामगढ़ में है। वहां पर सूदूर गांव से लोग सस्ती दवाइयां लेने के लिए आते है। गरीब लोगों की दुवाएं मिलती हैं। हमें इस बात का संतोष मिलता है कि हमारे कारण लोगों को सस्ती दवाइयां मिल पा रही है।

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SBA विशेष मन की बात विमर्श

जेनरिक दवाइयां अनिवार्य रूप से देश के सभी दवा दुकानों पर उपलब्ध होनी चाहिए

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत भारत सरकार निश्चित रूप से लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने में जुटी है। जाने-अनजाने में सरकार ने एक समानान्तर दवा बाजार बनाने की कोशिश की है। एक बाजार जिस दवा को 100 रुपये में बेच रहा है, उसी दवा को जनऔषधि केन्द्र में 10 रुपये में बेचा जा रहा है। मुनाफे के खेल को खत्म करने की एक सार्थक कदम भारत सरकार ने उठाया है। लेकिन सही अर्थों में 3600 जनऔषधि केन्द्रों से देश की सवा अरब जनता को सस्ती दवाइयां नहीं उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके लिए सरकार को दवा बाजार के अर्थतंत्र को ठीक से समझना होगा। बाजार के खेल को समझना होगा। बिना इसे समझे सरकार आम लोगों तक सस्ती दवाइयों की खुराक नहीं पहुंचा सकती है।

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SBA विशेष फार्मा सेक्टर स्वस्थ भारत अभियान

सस्ती एवं गुणवत्तायुक्त दवा उपलब्ध कराने का जन-अभियान है प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजनाः विप्लव चटर्जी, सीईओ

जनऔषधि एक सामाजिक आंदोलन की अवधारणा है। इसमें चिकित्सकों की भूमिका बहुत अहम हैं। इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए चिकित्सकों का सहयोग अपेक्षित है। यह सच है कि चिकित्सकों का सहयोग उस रूप में नहीं मिल पाया है, जिस रूप में मिलना चाहिए था। लेकिन हम आशान्वित हैं कि देश के चिकित्सक भी इस पुनीत अनुष्ठान में अपनी आहूति और तीव्रता के साथ देते रहेंगे।

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SBA विशेष

फार्मासिस्टों ने किया AIOCD का बंद विफल

ई-फार्मेसी का कथित विरोध के नाम पर देश में दवा दुकान बंद करने के आह्वान करने वाले ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट को उस समय जबरदस्त झटका लगा जब देश भर के फार्मासिस्टों ने अपने-अपने दुकान खोलने शुरू कर दिए। यूपी, मुंबई, बिलासपुर, जयपुर, असम, झारखंड सहित तमाम शहरों से फार्मासिस्टों ने जब अपनी दुकान खोलकर सेल्फी फेसबुक पर अपलोड करना शुरू किया तो केमिस्ट एसोसिएशन को होश उड़ गए। बौखलाए केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने यूपी के कुछ स्थानों पर व असम में फार्मासिस्टों को डराने की कोशिश की लेकिन फार्मासिस्ट बिना किसी भय के जनहित में अप्नी दुकान खोलने में सफल रहे।

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समाचार

रातो-रात ड्रग लाइसेंस बनाने में जुटा औषध प्रशासन!

चौकिए मत! भारत में कुछ भी संभव है। बिलासपुर में जिस अपोलो फार्मेसी के पास कल तक दवा बेचने का लाइसेंस नहीं था, आज उसका लाइसेंस बन गया है! सूत्रो कि माने तो औषध प्रशासन ने रातो-रात अपनी नाक को बचाने के लिए इस फार्मेसी का लाइसेंस बनाया है। गौरतलब है कि कल यानी 6 सितंबर को फार्मासिस्टों की एक टीम ने अपोलो फार्मेसी पर छापा मारा था, साथ में मीडिया के लोग भी थे, तब अपोलो फार्मेसी लाइसेंस नहीं दिखा पाया था। अपोलो फार्मेसी पर काम करने वाले दवा विक्रेताओं ने स्थानीय डॉक्टर से मिलने की बात कही थी।

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SBA विशेष

कब जागेगी पीसीआई!

हम सब को मालूम है कि फार्मासिस्टों के हितो की रक्षा करने के लिए एक सरकारी संस्था काम करती है। जिसका नाम है फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया। लेकिन जब से मैं फार्मेसी काउंसिल के कार्यों को जानने-समझने लगा हूं मुझे लगता है कि यह संस्थान केवल कागजों पर ही पहाड़ खड़ा करती रही है। हम फार्मासिस्टों की दशा व दिशा से इसे शायद ही कुछ लेना-देना रहा हो। केमिस्ट एसोसिएशनों की गोद में बैठी यह संस्था आज अपना वजूद खो चुकी है। इसे जगाने की जरूरत है। दिल्ली में हमलोगों ने पिछले दिनों इस कॉउंसिल को उसके मूल काम को याद दिलाने की कोशिश की थी…लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

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SBA विशेष

केवल रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट ही करेंगे होलसेल दवा कारोबार…

अबतक फार्मासिस्टों की मांग केवल रिटेल सेक्टर तक सिमित थी। सरकार ने नियम कानून में संसोधन कर अब होलसेल ड्रग लाइसेंस में फार्मासिस्टों की अनिवार्यता को हरी झंडी दे दी है! पहले मात्र दसवीं पास व्यक्ति को भी बड़ी आसानी से थोक कारोबार हेतु ड्रग लाइसेंस मिल जाते थे । लम्बे अर्से से फार्मासिस्ट रिटेल के साथ ही होलसेल ड्रग लाइसेंस में भी रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की अनिवार्यता की मांग कर रहे थे !

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SBA विशेष

स्वास्थ्य-मित्रो! आप एक हों, हम आपके साथ हैं…

मुझे लगता है कि एक तरफ सरकार की स्वास्थ्य नीतियां जिम्मेदार रही हैं लेकिन उसी के समानांतर मुझे यह भी लगता है कि फार्मासिस्टों ने जिस दिन से खुद को बेचना शुरू किया उस दिन से उनकी आवाज दबती चली गयी। आप मित्रो को यह पता लगना होगा कि वह कौन पहला फार्मासिस्ट रहा होगा जिसने अपना सर्टीफिकेट चंद रुपयों की लालच में गिरवी रखा होगा। इन्हीं चंद रुपयों की लालच ने आपको कमजोर कर दिया। आप कभी एक नहीं हो पाएं। आपकी समस्याएं और बड़ी होती चली गयीं और आप मन ही कभी सरकार को तो कभी खुद को कोसते रह गए।

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