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एमआर को ब्राइब एजेंट न समझें

मेरे 25 साल के अनुभव यह कहते हैं कि सरकार यदि चाहे तो ब्रांडेड दवाओं को भी मौजूदा व्यवस्था के तहत ही मरीजों को सस्ते व उचित दर पर उपलब्ध कराया जा सकता है वो है “अधिकतम खुदरा मूल्य की सीमा निर्धारित कर”। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की सरकार ने जिन दवाओं के ऊपर प्राइस कंट्रोल आर्डर लगा रखा है वैसी दवाएं काफी सस्ते में मरीजों को उपलब्ध है।
दरअसल इस पुरे खेल के कई पहलू हैं जिसमें सबसे ऊपर बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों का दबाव है वो भारतीय दवा बाजार पर पूरी तरह एकाधिकार चाहती हैं उन्हें मरीजों के हित से कुछ लेना देना नहीं है। उनका मकसद जेनेरिक दवाओं के बहाने भारतीय दवा उद्योग के बढ़ते वैश्विक वर्चस्व को खत्म कर भारत के स्वदेशी दवा उद्योग को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर लेने या लील जाने का है।

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समाचार

बिहार में जनऔषधि केन्द्र खोलना हुआ आसान, बिहार सरकार देगी सरकारी अस्पतालों में स्थान

जेनरिक दवा को लोगों तक पहुंचाने के लिए बिहार सरकार इन दिनों कमर कस चुकी है।  एक नए आदेश में बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में जनऔषधि केन्द्र खोलने  के लिए मुफ्त में स्थान देने  की घोषणा की है। सरकार के इस फैसले को बहुत सराहा जा रहा है। सरकार के इस फैसले से जहां जनऔषधि केन्द्र खोलने में सहुलियत होगी वहीं फार्मासिस्टों के लिए भी यह एक सुनहरा अवसर है खुद को स्वरोजगार से जोड़ने का।

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