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मन की बात कार्यक्रम में बोले प्रधानमंत्री, भारतीय चिकित्सकों ने पूरी दुनिया में अपनी की पहचान कायम की है

प्रधानमंत्री ने आज अपने मन की  बात में योग दिवस की व्यापकता की चर्चा की। साथ ही उन्होंने कहा कि योग सभी सीमाओं को तोड़कर जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के लोगों ने मिलकर इस अवसर को उत्सव बना दिया यह देश के लोगों के लिए गर्व की बात है। सुरक्षा बलों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि  जल, थल एवं वायु में सभी जगह योग किया गया। अहमदाबाद में 750 दिब्यांगों द्वारा योग किए जाने की भी उन्होंने चर्चा की। भारत की वसुधैव कुटुंकम की भावना को योग ने सिद्ध कर के दिखाया है। आशा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि योग से वेलनेस की मुहिम और आगे बढ़ेगी।

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स्वस्थ भारत के लिए जरूरी हैं खेल: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने खत्म हो रहे पारंपरिक खेलों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि, खेलों कभी-कभी चिंता होती है कि कहीं हमारे यह खेल खो न जाएँ और वह सिर्फ खेल ही नहीं खो जाएगा, कहीं बचपन ही खो जाएगा और फिर उस कविताओं को हम सुनते रहेंगे –

यह दौलत भी ले लो

यह शौहरत भी ले लो

भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी

मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन

वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी

 यही गीत हम सुनते रह जाएँगे और इसीलिए यह पारंपरिक खेल, इसको खोना नहीं है। आज आवश्यकता है कि स्कूल, मौहल्ले,युवा-मंडल आगे आकर इन खेलों को बढ़ावा दें। crowd sourcing के द्वारा हम अपने पारंपरिक खेलों का एक बहुत बड़ा archive बना सकते हैं। इन खेलों के videos बनाए जा सकते हैं, जिनमें खेलों के नियम, खेलने के तरीके के बारे में दिखाया जा सकता है। Animation फ़िल्में भी बनाई जा सकती हैं ताकि हमारी जो नई पीढ़ी है, जिनके लिए यह गलियों में खेले जाने वाले खेल कभी-कभी अज़ूबा होता है – वह देखेंगे, खेलेंगे, खिलेंगे।

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मन की बात

लंबा है स्वास्थ्य का डगर

स्थिति यह है कि अगर कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित भी है तो उसे अपनी मौत आने तक पता तक नहीं चलता है कि उसे सही मायने में कौन-सी बीमारी हुई है। देर-सबेर किसी मरीज को सद्बुद्धि आ भी जाए तो वो दौड़ता है जिला अस्पताल या फिर एम्स की तरफ।

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