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मोदी सरकार के चार सालःस्वास्थ्य सेवाओं में होता सुधार, अभी भी बहुत कुछ करने की है जरूरत

भारत बीमारियों का बढ़ते ग्राफ के बीच में इस तरह की खबरें निश्चित रूप से सुकुन देती हैं। वहीं मीडिया में कहीं से यह खबर आती है कि ऑक्सिजन की कमी के कारण शिशुओं की मौत हो गई या प्रसूता को अस्पताल में समय पर भर्ती नहीं किया गया और उसने सड़क पर बच्चे को जन्म दिया। लाश को ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली, परिजन को अपने कंधे पर उठाकर कोषों दूर लाश ले जानी पड़ी। अस्पताल ने मृतक की लाश बिल भूगतान के लिए रोके रखा, परिजनों ने पुवाल का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार करने की तैयारी की। इस तरह की खबरों को पढ़कर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की जर्जरता का अंदाजा लगता है। ऐसी खबरों को पढ़कर रोना आता है और इंसान सोचने पर मजबूर होता है कि आखिर कब भारत सच में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी बनेगा! फिलहाल कुछ अच्छी खबरें आई हैं, उसे पढ़कर मन को तसल्ली तो दिया ही जा सकता है!

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