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बेटियों का स्वस्थ होना स्वस्थ समाज की पहली कसौटी हैः डॉ अचला नागर

स्वस्थ भारत यात्रा दल का मुंबई में हुआ स्वागत

मुंबई की दो बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर

मीरा-भाइंदर एवं मालाड में हुए आयोजन

बॉलीवुड के रचनाकारों से यात्रा दल की हुई मुलाकात

प्रथम चरण में यात्रा दल ने पूरी की 2700 किमी की यात्रा, दूसरा चरण कन्याकुमारी तक
स्वस्थ भारत यात्रा के प्रथम चरण में 5 राज्यों की 29 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर

मुंबई. 12.2.17

 

यात्रा दल को मिला डॉ अचला नागर का आशीर्वाद
स्वस्थ भारत यात्रा दल ने निकाह, बागवान सहित दर्जनों फिल्म लिखने वाली वरिष्ठ लेखिका डॉ अचला नागर से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने यात्रा के लिए अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि बेटियों का स्वास्थ्य बहुत जरूरी है। वर्तमान स्थिति में बेटियों के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां स्वस्थ नहीं होगी तब तक स्वस्थ देश अथवा समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि आज बेटियों के लिए सारे दरवाजे खुले हुए हैं, बस जरूरत है कि वे सार्थक एवं अनुशासित तरीके से आगे बढ़ें। अपनी ताकत को समझें और समाज में अपनी आवाज को बुलंद करें। ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ राष्ट्रीय यात्रा की परिकल्पना की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां सेहतमंद नहीं होंगी सेहतमंद समाज का सपना अधूरा ही रहेगा। एक घंटे तक चली बातचीत में यात्रा दल के वरिष्ठ यात्री एवं वरिष्ठ पत्रकार लतांत प्रसून ने उनके फिल्मी करियर को लेकर कई सवाल पूछे, जिसका उन्होंने सहजता से उत्तर दिया।
सरोज सुमन, डॉ. सागर एवं शेखर अस्तित्व से भी हुई मुलाकात
मुंबई प्रवास के दौरान यात्रा दल ने जाने-माने संगीतकार सरोज सुमन, गीतकार शेखर अस्तित्व एवं डॉ. सागर से मुलाकात की। सभी ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की अभियान के लिए यात्रा दल को शुभकामनाएं दी। इस दौरान यात्रा दल ने कवयित्री रीता दास राम से भी मुलाकात की।

 

रत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा शुरू हुई स्वस्थ भारत यात्रा का मुंबईकरों ने जोरदार तरीके से स्वागत किया। यात्रा दल सबसे पहले मीरा-भाइंदर के विवेकानंद किड्स स्कूल पहुंचा, जहां पर बच्चों एवं उनको अभिभावकों के बीच में स्वास्थ्य चर्चा हुई। यहां पर जलधारा एवं बेटी बचाओं बेटी पढाओं की टीम ने यात्रा दल का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा दल ने दूसरा कार्यक्रम मुंबई के मालाड (ईस्ट) में किया। इस अवसर पर मुंबई की दो बालाकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। शरन्या सिगतिया और प्रीति सुमन को इस अभियान का गुडविल एंबेसडर बनाया गया। प्रीति सुमन जहां एक ओर निर्देशन के क्षेत्र में अपना नाम रौशन कर रही हैं वहीं उनकी गायकी के चर्चे भी चहुंओर हैं। शरन्या सिगतिया की उम्र अभी 12 वर्ष ही है लेकिन उन्होंने अपनी कक्षा में बेहतरीन परफॉमेंस दिया है। मालाड में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वस्थ भारत (न्यास) के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आज समय आ गया है कि हम अपनी सेहत को लेकर चिंतनशील हों। सेहत की चिंता हम सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। सेहत से बड़ा पूंजी कुछ और नहीं है। यात्रा दल के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत जी ने कहा कि महाराष्ट्र एवं गुजरात की धरती पर माताओं एवं बहनों के प्रति समाज ज्यादा संवेदनशील है। उन्होंने निगम का चुनाव लड़ रहीं 
संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा से कहा कि आप जीत के बाद स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के इस संदेश को और व्यवस्थित तरीके से घर-घर ले जाएं. इस अवसर पर मालाड पूर्व के निगम पार्षद ज्ञानमूर्ति शर्मा ने दवाइयों में मची लूट के बारे में लोगों को जागरूक किया। इस अवसर पर कमलेश शाह, वरिष्ठ लेखिका अलका अग्रवाल सिगतिया, विनोद रोहिल्ला सहित सैकड़ों महिलाएं उपस्थित थीं। महाराष्ट्र में निगम चुनाव के गहमागहमी के बीच में मालाड के स्थानीय लोगों द्वारा आयोजित इस स्वास्थ्य चर्चा के लिए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।

यात्रा के प्रथम चरण में 29 बालिकाएं बनीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर
 2700 किमी की प्रथम चरण की यात्रा में यात्री दल ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज अभियान से 29 बालिकाओं को जोड़ा। इन्हें इस अभियान का गुडविल एंबेसडर बनाया गया। हरियाणा में 6, राजस्थान में 4, मध्यप्रदेश में 15, गुजरात में 2 एवं महाराष्ट्र में 2 बालिकाओं को गुडविल एंबेसडर बनाकर सम्मानित किया गया है। 
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा ‘भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वें वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नंई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप, वर्ल्ड टीवी न्यूज़ सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है। 13 फरवरी को यह यात्रा पुणे होते हुए कन्याकुमारी जायेगी। जहां पर दूसरे चरण की यात्रा समाप्त होगी। 16000 किमी की जनसंदेशात्मक यह यात्रा अप्रैल में समाप्त होगी।
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यात्री दल से संपर्क
9891228151, 9811288151

6 छात्राओं को बनाया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

झाबुआ की 6 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर

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भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गंधिस्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में निकली स्वस्थ भारत यात्रा टीम ने आज माँ त्रिपुरा कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग की बालिकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का सन्देश दिया.
छात्राओं को संबोधित करते हुए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आपलोग नर्सिंग की छात्रा हैं, आप के ऊपर देश के स्वास्थ्य की बड़ी जिम्मेदारी हैं. सही मायने में स्वस्थ भारत की सिपाही आप ही लोग हैं. छात्राओं को उन्होंने antibaiotic के दुरूपयोग को लेकर भी जागरुक किया. साथ ही उनसे शुभ लाभ की अवधारणा पर इलाज करने का संकल्प कराया. इस अवसर पर गांधीवादी चिंतक कुमार कृष्णन ने भी अपनी बात रखी.
स्वस्थ भारत यात्री दल ने कॉलेज की तीन छात्राओं को स्वस्थ भारत की ओर से स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गूडविल अम्बेसडर मनोनीत किया.
गौरतलब है की झाबुआ प्रवास के प्रथम दिन भी उत्कृष्ट विद्यालय से तीन बालिकाओं को यात्री दल ने इस अभियान का गुड विल अम्बेसडर बनाया था. साथ ही यहां के पुलिस अधीक्षक महेश चंद जैन से मुलाकात कर यात्रा की जानकारी दी थी. उन्होंने यात्री दल को कम उम्र में बालिकाओं की हो रही शादी के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का सुझाव दिया.

स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल अम्बेसडर

  1. मनीषा गाडडिया
  2. साक्षी सोलंकी
  3. ऋतू निनामा
    सभी उत्कृष्ट विद्यालय, झाबुआ

4 पूजा डोहरिया
5 नेहा डावर
6 इंदूबाला खेतेडीया

कार्यक्रम की शुरुवात दीपप्रज्वलन के साथ हुआ. कार्यक्रम का सञ्चालन श्री ओम शर्मा जी ने की. इस अवसर पर यात्री दल के विनोद कुमार रोहिला, कॉलेज के प्रधानाचार्य अल्पित गांधी सहित बड़ी संख्या में बीएससी नर्सिंग की छात्राएं उपस्थित थी.

16000 हजार किमी की यह यात्रा झाबुआ से अहमदाबाद, मुम्बई होते हुए कन्याकुमारी, फिर नार्थ इष्ट होते हुए दिल्ली तक जायेगी. इस यात्रा में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजकमल प्रकाशन समूह, नॅस्टिवा अस्पताल, संवाद मीडिया सहित कई समाजसेवी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं.

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स्वस्थ समाज की परिकल्पना में बालिकाओं का स्वस्थ होना जरूरीः प्रो. बीके कुठियाला

स्वस्थ समाज की परिकल्पना में बालिकाओं का स्वस्थ होना जरूरीः प्रो. बीके कुठियाला

स्वस्थ भारत के यात्रियों ने दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश

कबीर वाणी के माध्यम से दिया गया स्वास्थ्य एवं स्वच्छता का संदेश

भोपाल/ 4.02.17

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बालिकाओं की प्रबंधकीय क्षमता बेहतर होती है। एक समय था जब पत्रकारिता में बालिकाओं की संख्या कम थी लेकिन आज बढ़ी है। बदलाव हो रहा है लेकिन शायद समाज उतना नहीं बदला है जितना उसे बदलने की जरूरत है। नहीं तो स्वस्थ भारत यात्रा की जरूरत नहीं पड़ती। यह कहना था प्रो. बीके कुठियाला का। वे आज शहर में स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज एक परिसंवाद में अपनी बात रख रहे थे. उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष को याद करते हुए निकली स्वस्थ भारत की टीम एक बहुत ही ज्वलंत मुद्दे को समाज के सामने रखने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर बेटियों को पहले जैसा सम्मान मिल जाए तो शायद आशुतोष कुमार सिंह और उनकी टीम को सड़क पर भटक कर इस तरह के संदेश देने की जरूरत न पड़े।

भोपाल की चार बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर
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मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज परिसंवाद के अवसर पर स्वस्थ भारत (न्यास) ने शहर के चार बालिकाओं को इस अभियान का गुडविल एमबेसडर मनोनित किया। आस्था दीक्षित, वत्सला चौबे, सर्वज्ञा त्रिपाठी एवं कीर्ति गुर्जर को गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। प्रो. बीके कुठियाला एवं स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशतोष कुमार सिंह के हाथों बालिकाओं को यह मनोनयन प्रपत्र प्रदान किया गया।

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बालिकाओं के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए संस्था के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि अगर भारत की बालिकाएं अपनी शक्ति को समझ लें तो निश्चित रूप से वह दिन दूर नहीं जब स्वस्थ समाज की परिकल्पना को पूर्ण किया जा सके। इस अवसर पर मालिनी अवस्थी का वीडियो संदेश भी दिखाया गया। अंतं में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ जिसमें दयाराम सारोलिया एवं साथियों द्वारा कबीर गायन प्रस्तुत किया गया।
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वें वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नंई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है। 5 फरवरी को यह यात्रा मध्यप्रदेश के इंदौर एवं 6 फरवरी को झाबुआ में रहेगी। 16000 किमी की जनसंदेशात्मक यह यात्रा अप्रैल में समाप्त होगी।
इस अवसर पर स्पंदन के अनिल सौमित्र, सुनिल मिश्र, विनोद गुर्जर, विनोद रोहिल्ला सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन गांधीवादी पत्रकार कुमार कृष्णन ने किया।

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स्वस्थ भारत का सपना जरूर पूरा होगाः आशुतोष कुमार सिंह

आज स्वस्थ भारत अभियान के संयोजक आशुतोष कुमार सिंह का जन्म दिन है। उनके जन्म दिन के अवसर पर हम आपके लिए लेकर आए हैं विशेष बातचीत। पिछले दिनों विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आशुतोष कुमार सिंह का साक्षात्कार आकाशवाणी के एफएम रेंबो ने आशुतोष कुमार सिंह से स्वास्थ्य  के संबंध में विशेष चर्चा की थी। आप भी सुने और स्वस्थ भारत की उनकी परिकल्पना को साकार करने में उनका साथ दें।

ईलाज के वक्त इन बातों का रखें विशेष ध्यान…

आशुतोष कुमार सिंह

राष्ट्र के स्वास्थ्य को लेकर पिछले कुछ महीनों से सरकारी स्तर पर सक्रियता बढ़ी है। सरकार ने नई दवा नीति-2013 को लागू कर दिया है। सरकार दावा कर रही है कि नई दवा नीति लागू होने से दवाइयों के मूल्यों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। हालांकि कुछ संगठन एवं बुद्धिजीवी सरकार के दावों को सच नहीं मान रहे हैं। खैर, स्वास्थ्य चिंतन का मसला केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। इसमें आम आदमी की भागीदारी जरूरी है। जब तक आप अपने स्वास्थ्य के बारे में चिंतित नहीं होंगे, सरकार की किसी भी योजना का लाभ आप तक नहीं पहुंच सकता। ऐसे में जरूरी है कि हम और आप स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, अपने अधिकारों को जाने-समझे।

डॉक्टर-मरीज संवाद बहुत जरूरी

डॉक्टर-मरीज संवाद बहुत जरूरी

नई दवा-नीति लागू होने और 400 दवाइयों के नाम एसेन्शीयल मेडिसिन लिस्ट में आने भर से आम उपभोक्ताओं को लाभ मिल ही जायेगा, इसकी गारंटी अभी कोई नहीं दे सकता है, हाँ यह जरूर है कि आप जाग गए तो आपका ईलाज बेहतर हो सकता है। इसके लिए कुछ मुख्य बिन्दुओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

दवा दुकानदार से सरकारी रेट लिस्ट मांगे

नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग ऑथोरिटी (एनपीपीए) के गाइडलाइंस के अनुसार प्रत्येक दवा दुकानदार के पास एसेंशियल मेडिसिन लिस्ट में शामिल दवाइयों के सरकारी मूल्य की सूची होनी चाहिए। प्रत्येक उपभोक्ता को यह अधिकार है कि वह दवा दुकानदारों से सरकारी रेट लिस्ट माँग सके। अगर आप इतनी-सी पहल कीजियेगा तो सरकार द्वारा तय मूल्य से ज्यादा एम.आर.पी की दवा आपको दुकानदार नहीं दे पायेगा। डॉक्टर भी महंगी दवाइयां लिखने से पहले कई बार सोचेंगे। तो अपने केमिस्ट से सरकारी दवा की मूल्य सूची जरूर माँगे।

साफ-साफ अक्षरों में दवाइयां लिखने के लिए डॉक्टर से कहें

आप यदि किसी डॉक्टर को शुल्क देकर अपना ईलाज करा रहे हैं तो यह आपका अधिकार है कि आप डॉक्टर से कह सके कि वह साफ-साफ अक्षरों में दवाइयों के नाम लिखे। साफ अक्षरों में लिखे दवाइयों के नाम से आपको दवा खरीदने से लेकर उसके बारे जानने-समझने में सुविधा होगी। केमिस्ट भी गलती से दूसरी दवा नहीं दे पायेगा। जिस फार्म्यूलेशन की दवा है, उसे आप एसेंशीयल मेडिसिन लिस्ट से मिला सकते हैं। ज्यादा एम.आर.पी होने पर आप इसकी शिकायत ड्रग इंस्पेक्टर से लेकर एनपीपीए तक को कर सकते हैं।

अपने डॉक्टर से कहें सबसे सस्ती दवा लिखें

जिस फार्म्यूलेशन का दवा आपको डॉक्टर साहब लिख रहे हैं, उसी फार्म्यूलेशन की सबसे सस्ता ब्रान्ड कौन-सा है, यह आप डॉक्टर से पूछे। केमिस्ट से भी आप सेम कम्पोजिशन की सबसे सस्ती दवा देने को कह सकते हैं। दवा लेने के बाद अपने डॉक्टर को जरूर दिखाएं। गौरतलब है कि डॉक्टरों पर सस्ती और जेनरिक नाम की दवाइयां लिखने के लिए सरकार कानून लाने की तैयारी कर रही है।

सेकेंड ओपेनियन जरूर लें

यदि किसी गंभीर बीमारी होने की पुष्टि आपका डॉक्टर करता हैं तो ईलाज शुरू कराने से पहले एक दो और डॉक्टरों से सलाह जरूर लें। कई बार गलत ईलाज हो जाने के कारण मरीज की जान तक चली जाती है।

एंटीबायोटिक दवाइयां बिना डॉक्टरी सलाह के न लें

बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन न करें। पहले आप कौन-कौन सी एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन कर चुके हैं, उसका विवरण डॉक्टर को जरूर दें। बिना जाँच के कि कौन-सी एंटीबायोटिक आपको सूट करेगी, एंटीबायोटिक का इस्तेमाल सेहत के लिए नुक्सानदेह है। अगर आपका डॉक्टर कोई एंटीबायोटिक लिख रहा है तो उससे पूछिए की इसका क्या फंक्शन है। ध्यान रखिए कि डॉक्टर साहब आपके सेवक हैं, जिन्हें आप सेवा शुल्क दे रहे हैं। डॉक्टर और मरीज का संवाद बहुत जरूरी है।

मेडिकल हिस्ट्री जरूर माँगे

आप जहाँ भी ईलाज कराएं, ईलाज की पूरी फाइल संभाल कर रखें। यदि अस्पताल में आप भर्ती हैं तो डिस्चार्ज होते समय मेडिकल हिस्ट्री जरूर माँगे। इसको सम्भाल कर रखे। आपकी मेडिकल हिस्ट्री भविष्य में आपके ईलाज में बहुत सहायक साबित होगी।

 

स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत की ओर एक कदमःस्वास्थ्य मंत्री

राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल का शुभारंभ

राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल का शुभारंभ को स्वस्थ भारत अभियान एक सकारात्मक कदम मानता है। इससे स्वास्थ्य सूचनाओं में पार्दशिता आयेगी। हमें उम्मीद है की स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल स्वस्थ भारत के सपने को साकार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा संपादक

 Ashutosh Kumar Singh For SBA

राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल

राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने शुक्रवार को भारत अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2014 में स्वास्थ्य मंत्रालय के मंडप का उद्घाटन किया। इस वर्ष मंडप का विषय ‘आशा: अ चेंज एजेंट’ है। स्वास्थ्य मंत्री ने मंडप का अवलोकन किया और आशाओं से बातचीत की। स्वास्थ्य मंडप में इस बार टेलीमेडिसिन पर जानकरी देने वाले पैनलों वाला एक खास स्टॉल लगाया गया है। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने मंडप देखने आये लोगों के साथ भी बातचीत की।
मंडप में श्री जे. पी. नड्डा ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल की भी शुरूआत की। स्वास्थ्य मंत्रालय के इस पोर्टल में स्वास्थ्य से संबंधित सभी मामलों के बारे में जानकारी का व्यापक भंडार है। इसकी परिकल्पना आम लोगों में स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए की गई है।
इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री ने दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में स्वच्छ भारत अभियान में हिस्सा लिया। उन्होंने अस्पताल परिसर में सफाई अभियान की अगुवाई, जिसमें डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारी भी शामिल हुए। उन्होंने अस्पताल में अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली का निरीक्षण किया। उन्होंने मरीजों के साथ बातचीत की और उन्हें अपने आसपास साफ-सफाई रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ भारत के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में स्वच्छ भारत कार्यक्रम की शुरूआत की गई है।

गौरतलब है कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने स्वास्थ्य के मसले को एक जन आंदोलन का रूप देने का वादा किया था। इसी कड़ी में इस पोर्टल को लॉच करने का निर्णय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लिया था। जे.पी.नड्डा खुद हिमाचल प्रदेश में धुमल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं, उम्मीद की जानी चाहिए की वो स्वास्थ्य के मसले को सही तरीके से सुलझाने का प्रयास करेंगे।

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स्वास्थ्य भारत अभियान व मीडिया

भारतीय मीडिया ने स्वस्थ भारत अभियान को बहुत मजबूति प्रदान की है....

भारतीय मीडिया ने स्वस्थ भारत अभियान को बहुत मजबूति प्रदान की है….

राष्ट्र बीमार होता जा रहा है, इतना ही नहीं बीमार बनाया जा रहा है! बीमारियों की ब्रान्डिंग हो रही है। दवा कंपनियों की लूट चरम पर है। डाक्टर मनमाने हो गए हैं। दवा दुकानदार पर किसी का अंकुश नहीं है। मरीज घर-जोरू-जमीन बेचकर जीने की जद्दोजहत में है, ऐसे में हमारी मीडिया के पास इसे छापने के लिए स्पेस नहीं है। मीडिया की नजरों में शायद ये वे लोग हैं जिनके पास मीडिया में स्पेस खरीदने की ताकत नहीं है। जिसकी है, वह छप रहा है, उसकी प्रेस रिलीज देश के लिए फ्रंट पेज की स्टोरी बन रही है। लेकिन न जाने क्यों मुद्दों पर आधारित रिपोर्टिंग करने में हमारी मीडिया पीछे हट जाती है! हद तो यह है कि आज खबर छपवाने के लिए रिपोर्टरों को ढूंढ़ना पड़ता है, शायद पहले के जमाने में (जिसे हमने नहीं देखा, सुना है) खबर तक रिपोर्टर खुद पहुंचते थे।

 

Ashutosh Kumar Singh for Swasthbharat.in

हिन्दुस्तान के नीति निर्धारण में मीडिया की भूमिका बढ़ती जा रही है। यहां पर मीडिया में बने रहने के लिए नीतियां बनती हैं और बदलती भी हैं। मीडिया को अपनी बात बता कर सरकार अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ लेती है। मीडिया भी ‘प्रेस रिलीज रिपोर्टिंग’ कर इस खुशफहमी में है कि जन की सबसे बड़ी सेवक वही है। ‘मीडिया-सरकार’ अथवा ‘सरकारी-मीडिया’ के इस खेल के बीच में कभी-कभी कुछ आंदोलन उग आते हैं। बिना खाद-पानी दिए उग आए इन आंदोलनों को मीडिया कई बार लपक कर आसमान में पहुंचा देती है तो कई बार पाताल लोक की सैर भी कराती है। कुछ आंदोलनों को चलाने के लिए मीडिया को मैनेज करना पड़ता है तो कुछ आंदोलनों को खुद मीडिया मैनेज करती है। मैनेज-मैनेज के इस खेल में कई बार मीडिया एक उत्तम गुणयुक्त मैनेजर की भूमिका निभा रही होती है।

मीडिया और आंदोलन, अभियान अथवा कैंपेन के संबंध को नजदीक से देखने-समझने का सौभाग्य मुझे भी प्राप्त हुआ है। इस अवसर को प्राप्त हुए अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। मुश्किल से दो वर्ष भी नहीं गुजरे हैं। ऐसे में मेरी समझ एक बाल-गोपाल की तरह है। फिर भी जो समझ बन पड़ी है उसे साझा करने में कोई हर्ज भी तो नहीं है!

सरकार की सबसे बड़ी दुश्मन ‘फेसबुक’ के माध्यम से 22 जून,2012 से दवाइयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ हमने एक कैंपेन शुरू किया है जिसका नाम दिया गया है ‘कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिमम रिटेल प्राइस’। दवाइयों में मची लूट के बारे में शुरू के एक महीनों तक लगातार लिखने-पढ़ने, सुनने-सुनाने के बाद देश की मुख्यधारा की मीडिया की नज़र इस मसले पर पड़ी थी। इस अभियान को जब हमलोगों ने शुरू किया था तब ऐसा लगा था कि पता नहीं कब तक इस जटिल मसले को समझाने में हम सफल हो पायेंगे। लेकिन यहां पर हम सौभाग्यशाली रहे कि मीडिया मित्रों ने कैंपेन को आगे बढ़ाने में मदद की। नई मीडिया तो शुरू के दिनों से ही साथ थी लेकिन कथित रूप से मेन स्ट्रीम मीडिया में इस मसले को आने में तकरीबन महीने लग गए। रायपुर से प्रकाशित सांध्य दैनिक ‘जनदखल’ ने सर्वप्रथम इस मसले पर जोरदार दख़ल दिया। तब उस अखबार के संपादक देशपाल सिंह पंवार थे और उन्होंने ही कहा कि आशुतोष, यह बहुत ही सेंसेटिव मसला है, इसके बारे में जितनी जानकारी है उसे स्टोरी फॉर्म में विकसित करो, मैं प्रकाशित करूंगा। एक बार बस शुरू होने की देरी थी। उसके बाद तो प्रत्येक दिन देश के किसी न किसी कोने से इस तरह की खबरे आने लगी। इस मुहिम में नई मीडिया ने बहुत जबरदस्त भूमिका अदा की है। ‘बियोंड हेडलाइंस’ ने इस मुहिम से जुड़े सभी तथ्यों को जनता के सामने लाने में अहम योगदान दिया है। साथ ही साथ प्रवक्ता डॉट कॉम, जनोक्ति डॉट कॉम, इनसाइड स्टोरी डॉट कॉम, आर्यावर्त लाइव, लखनऊ सत्ता डॉट कॉम, हिन्दी मीडिया डॉट इन एवं भडास फॉर मीडिया ने इस मसले को प्रमुखता से उठाया है। नई मीडिया के सहयोग से यह मसला राष्ट्रीय हो गया और देश के बड़े अखबारों में शुमार होने वाला दैनिक हिन्दुस्तान ने  ‘10 की दवा 100 में’ शीर्षक से दिल्ली सहित लगभग अपने सभी संस्करणों में फ्रंट पेज पर खबर प्रकाशित किया। यहां ध्यान देने वाली बात यह रही की एक बार इसी खबर (जिसमें कॉरपोरेट मंत्रालय ने दवा कंपनियों द्वारा 1136 प्रतिशत तक मुनाफा कमाने की बात स्वीकारी थी) को अंदर के पन्नों में दो कॉलम की छोटी सी खबर के रूप में पहले ही प्रकाशित कर चुका था। लेकिन कैंपेन का दबाव कहे अथवा हिन्दुस्तान के संपादक की जनसरोकारिता जो भी हो दैनिक हिन्दुस्तान की एक सराहनीय पहल रही। फेसबुक पर चल रहे कंट्रोल एम.एम.आर.पी कैंपेन पर आई नेक्स्ट, रांची की नज़र पड़ी और 24.07.2012 से उन्होने अपने यहां दवाइयों से संबंधित स्टोरी छापनी शुरू की। आई नेक्स्ट के पत्रकार मित्र मयंक राजपूत ने लगातार 6 दिनों तक दवा व्यवसाय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अपनी कलम चलाई। अंत में उनकी बात झारखंड के हेल्थ मिनिस्टर से हुई और स्टोरी चलानी उन्होंने बंद कर दी। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री से आई नेक्स्ट की क्या बातचीत हुई इसकी जानकारी मुझे नहीं मिल पायी। खैर, इस कैंपेन को आगे बढाने में आई नेक्स्ट, के योगदान को कम नहीं आंका जा सकता है। आई नेक्स्ट के बाद सबसे बेहतरीन काम किया प्रभात खबर ने। 28 अक्टूबर, 2012 को डाक्टर कथा नामक सीरिज शुरू किया और लगातार 12 दिनों तक प्रथम पृष्ठ पर विजय पाठक जी डाक्टरी पेशे से जुड़े तमाम पेचिदगियों को सामने लाते रहे। बीच में दीपावली का त्योहार आने के कारण विजय पाठक जी ने अपनी स्टोरी लिखनी बंद कर दी। उनसे मेरी कई बार बात हुई उन्होंने आश्वासन दिया की आगे भी स्टोरी करनी है। नई दिल्ली से प्रकाशित होने वाली पत्रिका सोपान स्टेप ने इस मुद्दे पर कवर स्टोरी प्रकाशित किया तो डायलॉग इंडिया मासिक पत्रिका ने इस मुद्दे पर लगातार तीन महीनों तक चार-चार पेज दिए। इस बीच नई दवा नीति को लेकर ‘सरकारी प्रेस रिलीज’ देश के सभी अखबारों में प्रमुखता से छपते रहे। बिजनेस स्टैंडर्ड (हिन्दी) ने हिम्मत जुटाते हुए नई दवा नीति-2012 पर अपनी व्यापार गोष्ठी में लोगों के मत आमंत्रित किए तो मुम्बई से प्रकाशित डीएनए न्यूज पेपर के पत्रकार मित्र संदीप पई ने तीन दिनों तक लगातार फार्मा कंपनियों की धांधली पर अपनी कलम चलाई। संदीप पई से मेरी एक बार मुलाकात हुई और वे आगे भी स्टोरी करने को राजी हुए। लेकिन अभी तक स्टोरी लिखने में वे सफल नहीं हो पाए हैं। वहीं नवभारत टाइम्स, मुम्बई के पत्रकार मित्र मनीष झा पिछले दो वर्ष से मुझसे मिलना चाह रहे हैं। लेकिन मिलने का संयोग नही हो पा रहा है। इसी बीच युवा पत्रकार अफरोज आलम साहिल ने इस मसले पर चौथी दुनिया में एक पेज की स्टोरी लिखी व उर्दू अखबार इन्कलाब में भी लगातार कॉलम लिखे। जनसत्ता के संपादक ओम थानवी जी, प्रभात खबर के संपादक हरिवंश जी, कैन्विज टाइम्स के संपादक प्रभात रंजन दीन, जनदखल के संपादक देशपाल सिंह पंवार (अब जनसंदेश से जुड़े हैं), पंकज चतुर्वेदी, शिवानंद द्विवेदी सहर, शशांक द्विवेदी, अनिता गौतम, स्वतंत्र मिश्र सहित कई पत्रकार-मित्रों ने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लेख लिखे।

16 दिसम्बर-2012 को ‘हाऊ टू कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिमम रिटेल प्राइस’ परिचर्चा हेतु जब दिल्ली गया तो वहां पर एन.डी.टी.वी से जुड़े रवीश कुमार से मुलाकात हुई। उन्होंने तकरीबन आधे घंटे तक का समय दिया। इस मसले को लेकर गंभीर भी दिखे लेकिन साथ ही साथ यह कहने से नहीं चूके कि इस मसले पर दवा कंपनी की ओर से कोई बोलने के लिए तैयार नहीं होगा!

इस पूरे कैंपेन के दौरान एक और घटना चौंकाने वाली घटी। 24 सितम्बर, 2012 को मैंने फेसबुक पर एक पोस्ट डाला, ‘देश की जानी-मानी पत्रिका इंडिया टुडे ने अपने 19 सितम्बर, 2012 वाले अंक में पृष्ट 23 पर अलकेम नामक एक दवा कंपनी का फूल पेज विज्ञापन प्रकाशित किया है। जब पूरे देश में दवा कंपनियों की लूट की पोल खुल रही है और सरकार पर दवा कंपनियों द्वारा मनमाने तरीके से एम.आर.पी तय करने को लेकर कार्रवाई करने का दबाव बन रहा हो…ऐसे में देश की इस प्रतिष्ठित पत्रिका में इस तरह के विज्ञापन कई तरह की शंकाएं उत्पन्न कर रही हैं…कहीं मीडिया भी दवा कंपनियों के चंगुल में न फंस जाए…इस का डर है मुझे…इंडिया टुडे समूह से देश जानना चाहेगा कि आखिर किस मजबूरी में उसे एक दवा कंपनी का विज्ञापन प्रकाशित करना पड़ा…जबकि दवा कंपनियों की लूट की एक भी खबर इंडिया टुडे ने प्रकाशित करने की जहमत नहीं उठायी…इंडिया टुडे के संपादक जी अपनी बात रखें तो लोगों को बहुत सुकून मिलेगा।’ इस पोस्ट की प्रतिक्रिया में इंडिया टुडे पत्रिका के संपादक सदस्य दिलीप मंडल जी ने मुझे अपनी फेसबुक मित्रमंडली से बाहर कर दिया। दिलीप जी का यह व्यवहार पत्रकारिता की कौन-सी कहानी बयां कर रहा है मेरे लिए कहना मुश्किल है।

उपरोक्त विवरणों में कई ऐसे छोटे-छोटे विवरण छूट गए हैं,जिससे कंट्रोल एम.एम.आर.पी कैंपेन को मजबूती मिली और दूसरी तरफ कमजोर करने की कोशिश भी की गयी।

राष्ट्र के स्वास्थ्य जैसे मसले पर जितनी चर्चा 28 महीनों में हुई है, उतनी चर्चा पिछले साठ सालों में नहीं हुई होगी बावजूद इसके यह चर्चा अभी भी ऊंट के मुंह में जीरा के फोरन के समान ही है। अभी भी मेन स्ट्रीम मीडिया के पास हेल्थ रिपोर्टिंग नामक कोई व्यवस्थित तंत्र विकसित नहीं हो पाया है। किसी भी अखबार के पास शायद ही हेल्थ के नाम पर एक दैनिक पृष्ठ सुरक्षित हो। हेल्थ जैसे मसले पर जिसका सीधा संबंध ‘राइट टू लाइफ’ से है, यदि हमारी मुख्य धारा की मीडिया का ध्यान नहीं है तो हमें नहीं लगता है कि उसे खुद को चौथा स्तम्भ कहने का कोई नैतिक हक बनता है !

राष्ट्र बीमार होता जा रहा है, इतना ही नहीं बीमार बनाया जा रहा है! बीमारियों की ब्रान्डिंग हो रही है। दवा कंपनियों की लूट चरम पर है। डाक्टर मनमाने हो गए हैं। दवा दुकानदार पर किसी का अंकुश नहीं है। मरीज घर-जोरू-जमीन बेचकर जीने की जद्दोजहत में है, ऐसे में हमारी मीडिया के पास इसे छापने के लिए स्पेस नहीं है। मीडिया की नजरों में शायद ये वे लोग हैं जिनके पास मीडिया में स्पेस खरीदने की ताकत नहीं है। जिसकी है, वह छप रहा है, उसकी प्रेस रिलीज देश के लिए फ्रंट पेज की स्टोरी बन रही है। लेकिन न जाने क्यों मुद्दों पर आधारित रिपोर्टिंग करने में हमारी मीडिया पीछे हट जाती है! हद तो यह है कि आज खबर छपवाने के लिए रिपोर्टरों को ढूंढ़ना पड़ता है, शायद पहले के जमाने में (जिसे हमने नहीं देखा, सुना है) खबर तक रिपोर्टर खुद पहुंचते थे।

मीडिया जिसका एक हिस्सा मैं भी हूं, को देखकर दुःखद आश्चर्य होता है! जन की आवाज को सरकार तक पहुंचाने वाली मीडिया सरकारी भोंपू की तरह काम करने लगी है। सरकार बदलते ही उसका सुर भी बदलने लगता है। कई बार तो ऐसा लगता है कि हमारी मीडिया खुद को राष्ट्र से भी ऊपर मान बैठी है। राष्ट्र जिसमें उसका अस्तित्व है को विखंडित करने में भी उसे आनंद की अनुभूति हो रही है।

आंदोलन और मीडिया के संबंध को दो वर्षों का अपरिपक्व बालक जितना समझ पाया है उतनी बात आप तक पहुंचा रहा हूं। जाते-जाते एक अनुभव और सुना देता हूं। मीडिया बेशक भटकाव के दौर में है बावजूद इसके यदि मेरी-आपकी बात कही सुनी जा रही है तो वह भी मीडिया का ही रूप है।

नोटः
(लेखक स्वस्थ भारत अभियान के संयोजक हैं व इस वेबसाइट के संस्थापक संपादक हैं)

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