समाचार स्वस्थ भारत अभियान

स्वस्थ भारत अभियान ने पूरे किए 6 वर्ष, फेसबुक से शुरू हुआ था यह अभियान

स्वस्थ भारत अभियान के माध्यम से देश के लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने काम आशुतोष कुमार सिंह ने आज ही के दिन  22 जून,2012 को किया था। स्वस्थ भारत अभियान के 6 वर्ष पूरे होने के अवसर पर श्री आशुतोष फेसबुक लाइव के माध्यम से अपने मित्रो से बातचीत करते हुए कहा कि, सोशल मीडिया का सार्थक प्रयोग स्वस्थ भारत अभियान ने बेहतरीन तरीके से किया है। उन्होंने बताया कि महंगी दवाइयों के खिलाफ जो आंदोलन उन्होंने शुरू किया था वह आज जनआंदोलन में तब्दील हो चुका है।

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SBA विशेष आयुष काम की बातें

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष: योग करते समय इन बातों का ध्यान रखें…

भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का अपना प्राचीन इतिहास रहा है। भारत हमेशा से चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। बीच के कुछ कालखंड को छोड़ दे तो भारत की प्राचीन चिकित्सकीय परंपरा हमेशा से सर्वोपरी रही है। वर्तमान समय में भी देश-दुनिया के लोग इस बात को मानने लगे हैं कि स्वस्थ रहना है तो भारतीय स्वास्थ्य पद्धतियों को अपना ही होगा। आयुर्वेद,यूनानी,होमियोपैथी, सिद्धा, प्राकृतिक चिकित्सा, योगा एवं सोवा-रिग्पा जैसी चिकित्सा पद्धतियों को संवर्धित करने एवं इनकी पहुंच आम-जन तक पहुंचाने के लिए ही भारत सरकार ने अलग से आयुष मंत्रालय बनाया है। इस कड़ी में आगे बढ़ते हुए भारत सरकार की पहल के कारण योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान जून 2015 में मिला। और पूरी दुनिया ने एक स्वर में 21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने पर अपनी सहमति प्रदान की। तब से योग का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

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समाचार स्वस्थ भारत अभियान

देश की सभी दवा दुकानों पर मिलेंगी उच्च गुणवत्ता वाली जेनरिक दवाइयां, सरकार कानून लाने की तैयारी में

देश के लोगों को सस्ती दवाइयां मिल सके इसके लिए सरकार हर वह कदम उठाने के लिए तैयार दिख रही है, जो वह उठा सकती है। इसी दिशा में सरकार अब सभी दवा दुकानों पर  जेनरिक दवा उपलब्ध करवाने के लिए कानून बनाने की तैयारी कर रही है। देश के प्रतिष्ठित अखबार अमर ऊजाला में प्रकाशित खबर में बताया गया है कि डीसीजीआई ने राज्यों को इस संबंध में सर्कुलर जारी कर दिया है। अगले 2 महीने में इसे लागू करने की तैयारी चल रही है।

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समाचार

पोलियो उन्मूलन के लिए भारत को मिली वैश्विक सराहना,2011 के बाद भारत में पोलियों का एक भी मामला सामने नहीं आया है

विशेषज्ञों के समूह ने-पिलाने और सूई द्वारा दिए जाने वाले पोलियो टीकों- दोनों का उपयोग करने के लिए भारत की सराहना की और तारीफ करते हुए कहा कि भारत ने इस दिशा में जिस तरह से कार्य किया उससे भारत में आने वाले समय में भी कोई बच्चा पोलियो का शिकार न हो पायेगा, यह बहुत ही सराहनीय कार्य है। सामुदायिक भागीदारी देश में पोलियो टीकाकरण प्रयासों का एक अभिन्न अंग रहा है। विशेषज्ञों के समूह ने देखा कि 23 लाख से अधिक टीकाकरणकर्ताओं को हर पोलियो अभियान को सफल बनाने के लिए एकत्रित किया गया है, जिसके दौरान 17 करोड़ बच्चों को पोलियो की बूंद पिलायी गयी

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समाचार

स्कूली बच्चों को पर्यावरण रक्षक बनना चाहिए: डॉक्टर हर्षवर्द्धन

किसी भी सामाजिक उद्यम में स्कूली बच्चों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉक्टर हर्षवर्द्धन ने स्कूली बच्चों से पर्यावरण रक्षक बनने एवं प्लास्टिक प्रदूषण के संकट से पार पाने में सरकार एवं समाज की सहायता करने का अनुरोध किया । दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लगभग 200 स्कूलों के 10,000 से भी अधिक बच्चे—जो यहां 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस की तैयारी के लिये आयोजित मिनी मैराथन ‘इन्वीथॉन’में सम्मिलित होने के लिये एकत्रित हुए थे—को संबोधित करते हुए डॉक्टर हर्षवर्द्धन ने कहा कि बच्चों में, जिस भी कार्य में वह संलग्न हों, उसमें शक्ति एवं उत्साह भर देने एवं अन्य लोगों को भी प्रोत्साहित करने की अगाध क्षमता होती है ।

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SBA विशेष मन की बात विमर्श

जेनरिक दवाइयां अनिवार्य रूप से देश के सभी दवा दुकानों पर उपलब्ध होनी चाहिए

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत भारत सरकार निश्चित रूप से लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने में जुटी है। जाने-अनजाने में सरकार ने एक समानान्तर दवा बाजार बनाने की कोशिश की है। एक बाजार जिस दवा को 100 रुपये में बेच रहा है, उसी दवा को जनऔषधि केन्द्र में 10 रुपये में बेचा जा रहा है। मुनाफे के खेल को खत्म करने की एक सार्थक कदम भारत सरकार ने उठाया है। लेकिन सही अर्थों में 3600 जनऔषधि केन्द्रों से देश की सवा अरब जनता को सस्ती दवाइयां नहीं उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके लिए सरकार को दवा बाजार के अर्थतंत्र को ठीक से समझना होगा। बाजार के खेल को समझना होगा। बिना इसे समझे सरकार आम लोगों तक सस्ती दवाइयों की खुराक नहीं पहुंचा सकती है।

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SBA विशेष मन की बात

आयुष्मान भारत से होगा भारत स्वस्थ

विगत 22 मार्च 2018 को  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण मिशन को मंजूरी दी। इस मिशन में केंद्रीय सरकार का हिस्सा आयुष्मान भारत के तहत उपलब्ध होगा, जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक कार्यक्रम है। इस बावत केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का कहना है कि, एनएचपीएम सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह स्वास्थ्य खर्च की भयावहता से 50 करोड़ लोगों (10 करोड़ परिवारों) को सुरक्षित करेगा। इससे देश के 40 प्रतिशत जनसंख्या को लाभ मिलेगा।

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SBA विशेष

मोदी सरकार के चार सालःस्वास्थ्य सेवाओं में होता सुधार, अभी भी बहुत कुछ करने की है जरूरत

भारत बीमारियों का बढ़ते ग्राफ के बीच में इस तरह की खबरें निश्चित रूप से सुकुन देती हैं। वहीं मीडिया में कहीं से यह खबर आती है कि ऑक्सिजन की कमी के कारण शिशुओं की मौत हो गई या प्रसूता को अस्पताल में समय पर भर्ती नहीं किया गया और उसने सड़क पर बच्चे को जन्म दिया। लाश को ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली, परिजन को अपने कंधे पर उठाकर कोषों दूर लाश ले जानी पड़ी। अस्पताल ने मृतक की लाश बिल भूगतान के लिए रोके रखा, परिजनों ने पुवाल का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार करने की तैयारी की। इस तरह की खबरों को पढ़कर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की जर्जरता का अंदाजा लगता है। ऐसी खबरों को पढ़कर रोना आता है और इंसान सोचने पर मजबूर होता है कि आखिर कब भारत सच में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी बनेगा! फिलहाल कुछ अच्छी खबरें आई हैं, उसे पढ़कर मन को तसल्ली तो दिया ही जा सकता है!

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SBA विशेष फार्मा सेक्टर स्वस्थ भारत अभियान

स्वस्थ भारत ने मनाया अपना तीसरा स्थापना दिवस, गांधी का स्वास्थ्य चिंतन व जनऔषधि की अवधारणा विषय पर हुआ राष्ट्रीय परिसंवाद

अंतरराष्ट्रीय मानक के हिसाब से पेटेंट फ्री मेडिसिन को जेनरिक दवा कहा जाता है। लेकिन भारत में साल्ट के नाम से बिकने वाली दवा को सामान्यतया जेनरिक माना जाता रहा है। वैसे बाजार में जेनरिक दवाइयों को ‘ऐज अ ब्रांड’ बेचने का भी चलन है, जिसे आम बोलचाल में जेनरिक ब्रांडेड कहा जाता है। लेकिन ‘प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना’ के अंतर्गत खुलने वाली सभी दवा दुकानों पर हम लोग विशुद्ध जेनरिक दवा रखते हैं। यहां पर स्ट्रीप पर साल्ट अर्थात रसायन का ही नाम लिखा होता है’ अपने लक्ष्य को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि,’बीपीपीआई का गठन 2008 में हुआ था। तब से लेकर 2014 तक उतनी सफलता नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी। लेकिन 2014 से सरकार ने इस दिशा में तेजी से काम किया है और आज हम 3350 से ज्यादा जनऔषधि केन्द्र खोलने में सफल रहे हैं। 2018-19 में जनऔषधि केन्द्रों की संख्या 4000 तक ले जाने का हमारा लक्ष्य है।

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SBA विशेष फार्मा सेक्टर स्वस्थ भारत अभियान

सस्ती एवं गुणवत्तायुक्त दवा उपलब्ध कराने का जन-अभियान है प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजनाः विप्लव चटर्जी, सीईओ

जनऔषधि एक सामाजिक आंदोलन की अवधारणा है। इसमें चिकित्सकों की भूमिका बहुत अहम हैं। इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए चिकित्सकों का सहयोग अपेक्षित है। यह सच है कि चिकित्सकों का सहयोग उस रूप में नहीं मिल पाया है, जिस रूप में मिलना चाहिए था। लेकिन हम आशान्वित हैं कि देश के चिकित्सक भी इस पुनीत अनुष्ठान में अपनी आहूति और तीव्रता के साथ देते रहेंगे।

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