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बेटियों का स्वस्थ होना स्वस्थ समाज की पहली कसौटी हैः डॉ अचला नागर

स्वस्थ भारत यात्रा दल का मुंबई में हुआ स्वागत

मुंबई की दो बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर

मीरा-भाइंदर एवं मालाड में हुए आयोजन

बॉलीवुड के रचनाकारों से यात्रा दल की हुई मुलाकात

प्रथम चरण में यात्रा दल ने पूरी की 2700 किमी की यात्रा, दूसरा चरण कन्याकुमारी तक
स्वस्थ भारत यात्रा के प्रथम चरण में 5 राज्यों की 29 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर

मुंबई. 12.2.17

 

यात्रा दल को मिला डॉ अचला नागर का आशीर्वाद
स्वस्थ भारत यात्रा दल ने निकाह, बागवान सहित दर्जनों फिल्म लिखने वाली वरिष्ठ लेखिका डॉ अचला नागर से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने यात्रा के लिए अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि बेटियों का स्वास्थ्य बहुत जरूरी है। वर्तमान स्थिति में बेटियों के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां स्वस्थ नहीं होगी तब तक स्वस्थ देश अथवा समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि आज बेटियों के लिए सारे दरवाजे खुले हुए हैं, बस जरूरत है कि वे सार्थक एवं अनुशासित तरीके से आगे बढ़ें। अपनी ताकत को समझें और समाज में अपनी आवाज को बुलंद करें। ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ राष्ट्रीय यात्रा की परिकल्पना की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां सेहतमंद नहीं होंगी सेहतमंद समाज का सपना अधूरा ही रहेगा। एक घंटे तक चली बातचीत में यात्रा दल के वरिष्ठ यात्री एवं वरिष्ठ पत्रकार लतांत प्रसून ने उनके फिल्मी करियर को लेकर कई सवाल पूछे, जिसका उन्होंने सहजता से उत्तर दिया।
सरोज सुमन, डॉ. सागर एवं शेखर अस्तित्व से भी हुई मुलाकात
मुंबई प्रवास के दौरान यात्रा दल ने जाने-माने संगीतकार सरोज सुमन, गीतकार शेखर अस्तित्व एवं डॉ. सागर से मुलाकात की। सभी ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की अभियान के लिए यात्रा दल को शुभकामनाएं दी। इस दौरान यात्रा दल ने कवयित्री रीता दास राम से भी मुलाकात की।

 

रत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा शुरू हुई स्वस्थ भारत यात्रा का मुंबईकरों ने जोरदार तरीके से स्वागत किया। यात्रा दल सबसे पहले मीरा-भाइंदर के विवेकानंद किड्स स्कूल पहुंचा, जहां पर बच्चों एवं उनको अभिभावकों के बीच में स्वास्थ्य चर्चा हुई। यहां पर जलधारा एवं बेटी बचाओं बेटी पढाओं की टीम ने यात्रा दल का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा दल ने दूसरा कार्यक्रम मुंबई के मालाड (ईस्ट) में किया। इस अवसर पर मुंबई की दो बालाकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। शरन्या सिगतिया और प्रीति सुमन को इस अभियान का गुडविल एंबेसडर बनाया गया। प्रीति सुमन जहां एक ओर निर्देशन के क्षेत्र में अपना नाम रौशन कर रही हैं वहीं उनकी गायकी के चर्चे भी चहुंओर हैं। शरन्या सिगतिया की उम्र अभी 12 वर्ष ही है लेकिन उन्होंने अपनी कक्षा में बेहतरीन परफॉमेंस दिया है। मालाड में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वस्थ भारत (न्यास) के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आज समय आ गया है कि हम अपनी सेहत को लेकर चिंतनशील हों। सेहत की चिंता हम सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। सेहत से बड़ा पूंजी कुछ और नहीं है। यात्रा दल के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत जी ने कहा कि महाराष्ट्र एवं गुजरात की धरती पर माताओं एवं बहनों के प्रति समाज ज्यादा संवेदनशील है। उन्होंने निगम का चुनाव लड़ रहीं 
संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा से कहा कि आप जीत के बाद स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के इस संदेश को और व्यवस्थित तरीके से घर-घर ले जाएं. इस अवसर पर मालाड पूर्व के निगम पार्षद ज्ञानमूर्ति शर्मा ने दवाइयों में मची लूट के बारे में लोगों को जागरूक किया। इस अवसर पर कमलेश शाह, वरिष्ठ लेखिका अलका अग्रवाल सिगतिया, विनोद रोहिल्ला सहित सैकड़ों महिलाएं उपस्थित थीं। महाराष्ट्र में निगम चुनाव के गहमागहमी के बीच में मालाड के स्थानीय लोगों द्वारा आयोजित इस स्वास्थ्य चर्चा के लिए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।

यात्रा के प्रथम चरण में 29 बालिकाएं बनीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर
 2700 किमी की प्रथम चरण की यात्रा में यात्री दल ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज अभियान से 29 बालिकाओं को जोड़ा। इन्हें इस अभियान का गुडविल एंबेसडर बनाया गया। हरियाणा में 6, राजस्थान में 4, मध्यप्रदेश में 15, गुजरात में 2 एवं महाराष्ट्र में 2 बालिकाओं को गुडविल एंबेसडर बनाकर सम्मानित किया गया है। 
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा ‘भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वें वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नंई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप, वर्ल्ड टीवी न्यूज़ सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है। 13 फरवरी को यह यात्रा पुणे होते हुए कन्याकुमारी जायेगी। जहां पर दूसरे चरण की यात्रा समाप्त होगी। 16000 किमी की जनसंदेशात्मक यह यात्रा अप्रैल में समाप्त होगी।
#SwasthBharatYatra #SwasthBalikaSwasthSamaj #KnowYourMedicine#SwasthBharatAbhiyan #GSDS

यात्री दल से संपर्क
9891228151, 9811288151

स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

आंख नहीं, दुनिया देखती हैं कलगी रावल
• स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर
• गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर एवं बापूनगर अहमदाबाद के वाणिज्य महाविद्यालय का यात्रा दल ने किया दौरा, बालिकाओं को दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश
• शहीद ऋषिकेश रामाणी को दी श्रंद्धांजली

अहमदाबाद 8.2.17

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कहते हैं कि बालक-बालिकाओं में हुनर की कमी नहीं होती, जरूरत होती है उसे तराशने की, सही मार्गदर्शन की। एक बार उन्हें सही मार्गदर्शन मिल जाए तो वो अपनी मंजिल खुद ही बना लेती हैं। ऐसी ही एक नेत्रहीन बालिका हैं कलगी रावल। कलगी जन्मजात नेत्रहीन हैं। बावजूद इसके उन्होंने अपनी जिंदगी में अंधेरे अपने पास फटकने नहीं दिया। 10 वीं परीक्षा डायरेक्ट दीं और 76 फीसद अंकों से उतीर्ण हुईं। इतना ही नहीं उन्होंने अमेरिका जाकर 10000 ऑडियंस के बीच अपनी बात को रखा। रेडियो जॉकी के रूप में काम किया। सुगम्य भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने जैसी बालिकाओं की सेवा करने की ठानी है और कल्गी फाउंडेशन के जरीए यह काम कर रही हैं। गुजरात के अहमदाबाद की रहने वाली कलगी के इसी आत्मविश्वास ने उन्हें स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर बनाया है। भारत भ्रमण पर निकली स्वस्थ भारत यात्रा दल ने अपने अभियान के लिए कलगी को चुना है। इस बावत कलगी ने कहा कि उन्हें स्वस्थ भारत के इस अभियान के बारे में जानकर बहुत खुश हूं, साथ ही इसका हिस्सा बनना मेरे लिए आनंद का विषय है।

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बापुनगर के बालिकाओं ने लिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के संदेश को घर-घर पहुंचाने का संकल्प
गुजरात के अहमदाबाद स्थित बापूनगर में स्वस्थ भारत यात्रा दल ने वाणिज्य महिला महाविद्यालय की छात्राओं को संबोधित किया। इस अवसर पर स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि बालिका स्वास्थ्य की स्थिति बहुत दयनीय है. जबतक हम बालिकाओं में प्राथमिक स्तर से ही स्वास्थ्य चिंतन का बीच नहीं बो देंगे तब तक सही मायने में स्वास्थ्य धारा का प्रवाह नहीं हो पायेगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य हमारा मौलिक अधिकार है। ऐसे हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना, अपने परिवार को रखना ही सही मायने में न्याय है। प्लेटो के न्याय के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी स्वास्थ्य को नहीं बचायेंगे तो हम अपने, अपने परिवार एवं राष्ट्र के प्रति न्याय नहीं कर पायेंगे। भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुरू की गई इस यात्रा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हम पूरे देश में जाकर बालिकाओं से संवाद करने का संकल्प लिया है। इस अवसर पर वाणिज्य महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने सुंदर गीत-संगीत प्रस्तुत किया। कलगी रावल को इस मंच से स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। कॉलेज की प्रधानाचार्य किंजलबेन कथिरिया, अल्काबेन सिरोया, हिम्मतभाई, प्रफुल्ल भाई सावलिया, सामाजिक कार्यकर्ता संजय भाई बेंगानी, भूषणभाई कुलकर्णी, सत्यनारायम वैष्णव सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
शहीद वीर मेजर ऋषिकेश रामाणी को यात्रा दल ने दी श्रद्धांजलि

अहमदाबाद का नाम रौशन करने वाले शहीद ऋषिकेश रामाणी की प्रतिमा पर जाकर यात्रा दल ने उन्हें सलामी दी। साथ ही उनके नाम से चलाए जा रहे नगर निगम स्कूल का दौरा भी किया। शहीद वीर मेजर ऋषिकेश रमाणी स्कूल को वल्लभभाई ने गोद लिया है। वल्लभभाई के प्रति वहां के छात्रों में अपार स्नेह देखने को मिला। स्वस्थ भारत के आशुतोष कुमार सिंह ने उन्हें अपनी पत्रिका भेंट की और यात्रा के उद्देश्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर शहीद के पिता वल्लभभाई रमाणी एवं शहीद के नाम से चलाए जा रहे नगर निगम स्कूल के प्राचार्य, रवि पटेल सहित शहर के कई लोग उपस्थित थे।

गोधरा ने भी किया स्वागत

देश के लोगों के मन में गोधरा को लेकर एक संशय की स्थिति आज भी बनी हुई है। लेकिन जिस अंदाज में गोधरा ने स्वस्थ भारत यात्रा का स्वागत किया व अतुलनीय है। गोधरा के स्थानीय पत्रकार रामजानी ए रहीम ने यात्रा दल को पंचमहल के जिला निगम अधिकारी एम.एस गडवी से मिलवाया। उनके सहयोग से यात्रा दल गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर बालिका विद्यालय में जाकर स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश दिया। इस स्कूल की बालिकाओं की परवरिश स्वस्थ तरीके से होते देख स्कूल प्रबंधन को स्वस्थ भारत की ओर से आशुतोष कुमार सिंह ने साधुवाद दिया। यात्रा दल में वरिष्ठ गांधीवादी लेखक एवं पत्रकार कुमार कृष्णनन एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार रोहिल्ला भी श्री आशुतोष के साथ हैं।

गौरतलब है कि भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर स्वस्थ भारत की टीम स्वस्थ भारत यात्रा पर निकली है। स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश देने निकली इस टीम को गांधी स्मृति दर्शन समित, स्पंदन, नेस्टिवा, राजकमल प्रकाशन समूह, संवाद मीडिया, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर, हेल्प एंड होप, जलधारा, वर्ल्ड टीवी न्यूज, आर्यावर्त लाईव सहित कई समाजसेवी संस्थाओं एवं मीडिया मित्रो सहयोग एवं समर्थन प्राप्त है।
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नोटः यात्रा अहमदाबाद के बाद सूरत की ओर कूच कर गयी है। उसके बाद यात्रा मुंबई पहुंचेगी। संपर्क-9891228151, 9811288151

6 छात्राओं को बनाया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

झाबुआ की 6 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर

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भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गंधिस्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में निकली स्वस्थ भारत यात्रा टीम ने आज माँ त्रिपुरा कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग की बालिकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का सन्देश दिया.
छात्राओं को संबोधित करते हुए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आपलोग नर्सिंग की छात्रा हैं, आप के ऊपर देश के स्वास्थ्य की बड़ी जिम्मेदारी हैं. सही मायने में स्वस्थ भारत की सिपाही आप ही लोग हैं. छात्राओं को उन्होंने antibaiotic के दुरूपयोग को लेकर भी जागरुक किया. साथ ही उनसे शुभ लाभ की अवधारणा पर इलाज करने का संकल्प कराया. इस अवसर पर गांधीवादी चिंतक कुमार कृष्णन ने भी अपनी बात रखी.
स्वस्थ भारत यात्री दल ने कॉलेज की तीन छात्राओं को स्वस्थ भारत की ओर से स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गूडविल अम्बेसडर मनोनीत किया.
गौरतलब है की झाबुआ प्रवास के प्रथम दिन भी उत्कृष्ट विद्यालय से तीन बालिकाओं को यात्री दल ने इस अभियान का गुड विल अम्बेसडर बनाया था. साथ ही यहां के पुलिस अधीक्षक महेश चंद जैन से मुलाकात कर यात्रा की जानकारी दी थी. उन्होंने यात्री दल को कम उम्र में बालिकाओं की हो रही शादी के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का सुझाव दिया.

स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल अम्बेसडर

  1. मनीषा गाडडिया
  2. साक्षी सोलंकी
  3. ऋतू निनामा
    सभी उत्कृष्ट विद्यालय, झाबुआ

4 पूजा डोहरिया
5 नेहा डावर
6 इंदूबाला खेतेडीया

कार्यक्रम की शुरुवात दीपप्रज्वलन के साथ हुआ. कार्यक्रम का सञ्चालन श्री ओम शर्मा जी ने की. इस अवसर पर यात्री दल के विनोद कुमार रोहिला, कॉलेज के प्रधानाचार्य अल्पित गांधी सहित बड़ी संख्या में बीएससी नर्सिंग की छात्राएं उपस्थित थी.

16000 हजार किमी की यह यात्रा झाबुआ से अहमदाबाद, मुम्बई होते हुए कन्याकुमारी, फिर नार्थ इष्ट होते हुए दिल्ली तक जायेगी. इस यात्रा में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजकमल प्रकाशन समूह, नॅस्टिवा अस्पताल, संवाद मीडिया सहित कई समाजसेवी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं.

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संपर्क
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स्वस्थ भारत यात्रा २०१६-१७ सूरत पहुचीं

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गुरुग्राम, जयपुर, कोटा, भोपाल, इंदौर, झाबुआ, अहमदाबाद के बाद स्वस्थ भारत यात्रा #SwasthBharatYatra आज सूरत  पहुँच चुकी है।  रात्रि विश्राम के बाद यहाँ कल स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के अन्तर्गत बालिका स्वास्थ को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. यहाँ से यात्रा अपने अगले पड़ाव मुम्बई के लिए प्रस्थान करेगी।  मुम्बई में यात्रा २ दिनों तक रहेगी।  मुम्बई में यात्रा का पहला चरण पूरा होगा और द्वितीय चरण आरम्भ होगा।  वहां से यात्रा में लतांत प्रसून जी भी जुड़ जायेंगे।

यात्रा टीम दूरभाष : +९१-९८९१२२८१५१

स्वस्थ समाज की परिकल्पना में बालिकाओं का स्वस्थ होना जरूरीः प्रो. बीके कुठियाला

स्वस्थ समाज की परिकल्पना में बालिकाओं का स्वस्थ होना जरूरीः प्रो. बीके कुठियाला

स्वस्थ भारत के यात्रियों ने दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश

कबीर वाणी के माध्यम से दिया गया स्वास्थ्य एवं स्वच्छता का संदेश

भोपाल/ 4.02.17

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बालिकाओं की प्रबंधकीय क्षमता बेहतर होती है। एक समय था जब पत्रकारिता में बालिकाओं की संख्या कम थी लेकिन आज बढ़ी है। बदलाव हो रहा है लेकिन शायद समाज उतना नहीं बदला है जितना उसे बदलने की जरूरत है। नहीं तो स्वस्थ भारत यात्रा की जरूरत नहीं पड़ती। यह कहना था प्रो. बीके कुठियाला का। वे आज शहर में स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज एक परिसंवाद में अपनी बात रख रहे थे. उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष को याद करते हुए निकली स्वस्थ भारत की टीम एक बहुत ही ज्वलंत मुद्दे को समाज के सामने रखने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर बेटियों को पहले जैसा सम्मान मिल जाए तो शायद आशुतोष कुमार सिंह और उनकी टीम को सड़क पर भटक कर इस तरह के संदेश देने की जरूरत न पड़े।

भोपाल की चार बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर
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मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज परिसंवाद के अवसर पर स्वस्थ भारत (न्यास) ने शहर के चार बालिकाओं को इस अभियान का गुडविल एमबेसडर मनोनित किया। आस्था दीक्षित, वत्सला चौबे, सर्वज्ञा त्रिपाठी एवं कीर्ति गुर्जर को गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। प्रो. बीके कुठियाला एवं स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशतोष कुमार सिंह के हाथों बालिकाओं को यह मनोनयन प्रपत्र प्रदान किया गया।

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बालिकाओं के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए संस्था के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि अगर भारत की बालिकाएं अपनी शक्ति को समझ लें तो निश्चित रूप से वह दिन दूर नहीं जब स्वस्थ समाज की परिकल्पना को पूर्ण किया जा सके। इस अवसर पर मालिनी अवस्थी का वीडियो संदेश भी दिखाया गया। अंतं में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ जिसमें दयाराम सारोलिया एवं साथियों द्वारा कबीर गायन प्रस्तुत किया गया।
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वें वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नंई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है। 5 फरवरी को यह यात्रा मध्यप्रदेश के इंदौर एवं 6 फरवरी को झाबुआ में रहेगी। 16000 किमी की जनसंदेशात्मक यह यात्रा अप्रैल में समाप्त होगी।
इस अवसर पर स्पंदन के अनिल सौमित्र, सुनिल मिश्र, विनोद गुर्जर, विनोद रोहिल्ला सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन गांधीवादी पत्रकार कुमार कृष्णन ने किया।

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भविष्‍य से जुड़ा हैं बालिका स्वास्‍थ्‍य का चिंतन ”स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज”

                              अटल बिहारी वाजेपयी वि‍वि भोपाल मप्र
                                 पत्रकारिता विभाग
                            भविष्‍य से जुड़ा हैं बालिका स्वास्‍थ्‍य का चिंतन
                                  ”स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज”
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भोपाल, 03/02/2017। बालिका के स्वास्‍थ्‍य का चिंतन समाज के विकास एवं देश के भविष्य से जुड़ा हुआ हैं। मौजूदा समय में हम इससे नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं। यह मानना है स्वस्थ भारत न्यास के अध्यक्ष आशुतोष कुमार सिंह का। वह अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे। स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज विषय पर यह कार्यक्रम स्पंदन व विवि के गर्भ तपोवन संस्कांर केंद्र के सहयोग से किया गया था। समारोह का शुभारंभ मॉ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्‍ज्‍वलित कर किया गया। इस अवसर पर डॉ अभय चौधरी, डॉ यशवंत मिश्रा, कुमार कृष्णन और विनोद कुमार मौजूद थे।  यहां बता दें, आशुतोष कुमार सिंह अपने सहयोगियों के साथ बालिकाओं के स्वस्थ  जागरूकता के मुद्दे को लेकर स्वस्थ भारत यात्रा पर हैं।

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श्री सिंह ने बालिका स्वस्थ पर जहां चिंता जाहिर की वहीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की अवधारणा पर विचार भी व्यंक्तय किया। उनका कहना था, सशक्त् देश की कल्पना बालिका स्वस्थ  को सुधारे बिना नहीं की जा सकती है। ध्यान देने की इसलिए भी जरूरत है, क्योंकि यह जहां देश का भविष्य है वहीं भाग्य विधाता भी है। सरकार द्वारा मुहैया कराई जा रही तमाम सुविधाओं के बाद भी स्थित जस की तस बनी रहने के पीछे शासन की उस व्यवस्था को जिंम्मे्दार ठहराया, जिसके तहत जैनेरिक दवाईयों को लगातार नजर अंदाज किया गया। खामियाजा यह रहा कि, जनता के स्वस्थ के नाम पर आवंटित बजट की अधिकतम राशि दबाईयों के नाम पर बड़ी वैश्विक कंपनियों की आय का जरिया बन रही है। इससे पूर्व विवि में पत्रकारिता विभाग के प्रभारी डॉ अनिल सौमित्र ने कहा कि, स्वस्थ का मुद़दा व्याक्ति और समाज के वि‍कास से जुड़ा है। जब तक हम सेहत मंद नहीं होंगे, तब तक हम किसी क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ सकते हैं। बालिकाओं के स्वस्थ का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। लेकिन अफसोस है, कि लगातार अनदेखी हो रही है।  डॉ अभय चौधरी ने समाज में स्थित महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता को लेकर महिलाओं को मानसिक और शारीरि‍क रुप से शसक्त होने की बात पर जोर दिया हैं। इस कार्यक्रम में  हिंदी विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्रगण उपस्थित थे।

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यात्रा के बारे में
स्वस्थ भारत यात्रा दिल्ली से आरंभ हुई और हरियाणा और राजस्थान का सफर पूरा करते हुए गुरूवार रात भोपाल पहुंची। 16 हजार किमी का सफर तय करने के बाद इस यात्रा का समापन अप्रैल 2017 में दिल्ली पहुंचकर होगा। रविवार यह यात्रा मप्र के औद्योगिक शहर इंदौर में पड़ाव डालेगी। इसके बाद 6 फरवरी को झाबुआ पहुंचेगी। यहां लोगों के साथ संवाद होगा और यात्रा के मकसद से जनसमुदाय को अवगत कराया जाएगा।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें

– आशुतोष कुमार सिंह
राष्‍ट्रीय समन्वयक
स्वस्थ भारत यात्रा
09891228151

जयपुर की दो बालिकाएं बनीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल अम्बेसडर

जयपुर की दो बालिकाएं बनीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल अम्बेसडर

जयपुर/ 1.२.17
जयपुर स्थित किड्स ओरिजिन पब्लिक स्कूल की दो छात्राओं को स्वस्थ भारत (न्यास) ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज कैम्पेन का गुडविल अम्बेसडर मनोनीत किया है. इस कैम्पेन को पूरे देश में फ़ैलाने के मकसद से निकली स्वस्थ भारत यात्रा दल ने अपने 2 दिवसीय जयपुर प्रवास के दौरान दिया गर्ग और नीलम शर्मा को गुडविल अम्बेसडर के लिए चुना. इन दोनों बालिकाओं को यह सम्मान स्कूल के वार्षिक उत्सव में दिया जायेगा.

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बसंतपंचमी के दिन स्वस्थ भारत यात्रा दल ने किड्स ओरिजिन स्कूल की बचियों से स्वास्थ्य चर्चा की. यात्रा दल के सदस्य एवं न्यास के चेरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए कहा कि अगर उन्हें आगे बढ़ना है, खूब सफलता प्राप्त करनी है तो स्वस्थ रहना पड़ेगा. इसके लिए जरूरी है की हम साफ सफाई पर ध्यान दें. घर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहर की सफाई पर भी ध्यान देना अति आवश्यक है. उन्होंने बालिकाओ एवं बालकों से कहा की वे हरसंभव दातुन से मुँह धोएं. और इसके लिए नीम का पेड़ लगाना जरुरी है. उन्होने बचों को तुलसी एवं नीम के पेड़ के फ़ायदे गिनाये और सभी को पेड़ लगाने का होम वर्क दिया. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा की सभी बचे अपने माता पिता को जाकर बताएं की बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी दवा का सेवन न करें. इस दौरान बचो ने श्री आशुतोष से खूब सवाल जवाब किये और अपनी दिनचर्या के बारे में उनको बताया. किसी ने कहा की वह 14 घंटे टीवी देखता है तो किसी ने कहा की वह 9 घंटे तक सोता है. बचो ने अपने पसंदीदा कार्टून के बारे में भी आशुतोष से बात की. श्री आशुतोष ने उन्हें समझाते हुए कहा कि बचो को महात्मा गांधी के बताये रास्ते पर चलना चाहिए. और वे जो भी कार्य करें उसे अनुशाषित तरीके से करें.

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संवाद शुरू होने के पूर्व स्कूल के शिक्षक मोहित कुमार ने यात्रा दल का परिचय बालक बालिकाओं से कराया.इस अवसर पर वरिष्ट पत्रकार एवं यात्रा दल के सदस्य कुमार कृष्णन जी, यात्री विनोद कुमार, स्कूल के निदेशक जीतेन्द्र सैनी, प्रेरणा सैनी, रुचिता शर्मा , शकुंतला कुमावत, नितिका रजावत, प्रिय अ रजावत, दीक्षा कुमावत , प्रियंका कंवर, नीतू शर्मा, किरण सैनी, रेणु जाँगिड़ सहित सैकड़ों छात्र छात्राएं उपस्थित थे.
गौरतलब है की स्वस्थ भारत (न्यास) गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत यात्रा संचालित कर रहा है. 16 हजार किमी की यह यात्रा पूरे भारत में जायेगी. भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर निकली यह यात्रा स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश देते हुए आगे बढ़ रही है.
जयपुर से यह यात्रा कोटा होते हुए भोपाल पहुचेगी.
यात्री दल से 9891228151, 9811288151 पर संपर्क किया जा सकता है.
इस यात्रा को गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजकमल प्रकाशन समूह, नॅस्टिवा अस्पताल, सवाद मीडिया, हेल्प एंड हॉप, स्पंदन, जलधारा, आर्यावर्त, आईडया क्रेकर्स सहित कई संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है.
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हरियाणा की छह बालिकाएं बनेंगी स्वस्थ् बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल अम्बेसडर

 

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दिल्ली से जयपुर आने के क्रम में स्वस्थ भारत यात्रा का स्वागत रास्ते में नेस्टिवा हॉस्पिटल में उसकी टीम ने किया। टीम में डॉ अमित के नेतृत्व में नेस्टिवा अस्पताल के सभी कर्मचारियेां ने  यात्रा की सफलता की कामना की और कहा यह मकसद में कामयाव हो। इस अवसर पर नेस्टिवा के निदेशक अंकेश रंजन ने बताया कि नेस्टिवा अस्पताल स्वस्थ बालिका, स्वस्थ समाज की परिकल्पना को पूर्णत: समर्थन देता है। उन्होंने बताया कि इस अभियान को मजबूत करने की दिशा में उनका अस्पताल प्रयासरत है। बालिकाओं के इलाज में यह अस्पताल हरमुमकिन रियायत देने के लिए कृतसंकल्प है।
सुनील सैनी हुए गुरूग्राम के संयोजक

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इसी क्रम में यात्रा गुरूग्राम पहुंची। यहां आल इंडिया क्राइम रिफार्म आॅर्गनाइजेशन के गुरूग्राम शाखा ने सुेंनील कुमार सैनी के नेतृत्व में इफ्कोचौक पर स्वागत किया। इस अबसर पर स्वस्थ भारत (न्यास) ने हरियाणा में छह बालिकाओं को गुडविल अम्बेसडर बनाए जाने की घोषणा की। इनमें विदही(15 वर्ष), उर्वसी सैनी(16 वर्ष), प्रियंका मालवाल (11वर्ष), प्रिंसी मालवाल (11 वर्ष),दुहा(11 वर्ष) और प्राची सैनी(11 वर्ष) शामिल हैं। इस अवसर पर स्वस्थ भारत (न्यास) के चैयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने सुनील सैनी को स्वस्थ भारत अभियान का गुरूग्राम संयोजक मनोनित किया। इस मौके पर सुनील सैनी ने कहा कि बालिकाओं के हित में काम करना उनके लिए गर्व की बात है। टीम इसके बाद गुरूग्राम से जयपुर के लिए रवाना हुई।

गौरतलव है कि स्वस्थ भारत यात्रा भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वे वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकबी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया,राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल,मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है।

kumar krishnan (journalist)

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बालिका स्वास्थ्य का संदेश घर-घर पहुंचाने की सार्थक पहल

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पूरे देश-दुनिया में जहां योग दिवस के दिन योग पर चर्चा-परिचर्चा हुई वहीं भारत के युवाओ की एक टीम ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के सन्देश को बुलंद कर रही थी।
नई दिल्ली/ पूरे देश-दुनिया में जहां योग दिवस के दिन योग पर चर्चा-परिचर्चा हुई वहीं भारत के युवाओ की एक टीम ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के सन्देश को बुलंद कर रही थी.
पद्म श्री मालिनी अवस्थी परिसंवाद को संबोधित करते हुए

पद्म श्री मालिनी अवस्थी परिसंवाद को संबोधित करते हुए

स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन करते हुए स्वस्थ भारत (न्यास) के इन युवाओं ने यह संकल्प लिया की भारत में बालिका स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाएंगे. गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति एवं स्वस्थ भारत ( न्यास) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस परिसंवाद में एक ओर जहां कला क्षेत्र से पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने युवाओं का मार्गदर्शन किया वही दूसरी तरफ गांधी स्मृति दर्शन समिति के कार्यकारणी सदस्य गाँधीवादी लक्षमीदास जी का अध्यक्षीय सम्बोधन इस विषय को और गहराई से समझने का मौका दिया. पांचवा स्तम्भ की संपादिका संगीता सिन्हा ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बालिकाओं को लेकर समाज में ब्याप्त रूढ़िवादी सोच को उजागर किया. बेटियों के जन्म पर अपने अस्पताल में मिठाईयां बाटने वाले डॉ गणेश राख ने बेटियो के प्रति समाज के नजरिये को बदलने पर बल दिया. ध्यान देने वाली बात यह है कि डॉ राख पुणे स्थित अपने अस्पताल में 500 से ज्यादा बेटियों की डिलेवरी बिना शुल्क लिए करवा चुके हैं. इसकी चर्चा व तारीफ हाल ही में मोदी सरकार के दो वर्ष होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन ने भी की थी.

2इस परिसंवाद में नॅस्टिवा हॉस्पिटल की डॉ सौम्या ने स्त्रियों को होने वाली बीमारियों व उसे रोकने के उपायो की चर्चा की. भ्रूण हत्या व इससे सम्बंधित कानूनों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए अभिभावक जिम्मेदार हैं.डॉक्टरों पर दबाव डाला जाता है. उनके इस टिप्प्णी से असंतोष जताते हुए पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा की यदि डॉ लिंग जाँच न करने के लिए पूरी तरह से कृतसंकल्पित हो जाये तो क्या किसी अभिभावक की हिम्मत है की ओ डॉ की बात न माने.
ravishankarवही अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में लक्ष्मीदास जी ने कहा कि हमारे देश के स्वास्थ्य मंत्रालय का नाम ट्रीटमेंट मंत्रालय कर दिया जाना चाहिए. क्योकि यहाँ स्वास्थय की कम ट्रीटमेंट की ज्यादा चर्चा होती है. इस पूरे आयोजन को संरक्षण देने वाले गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के निदेशक दीपंकर श्री ज्ञान ने देश के स्वास्थ्य की बिगड़ती हालत पर चिंता जाहिर की.
स्वस्थ भारत (न्यास) के ब्रांड अम्बेसडर एवरेस्ट विजेता नरिंदर सिंह ने अपने जीवन संघर्ष को साझा करते हुए बेटी बचाने के अपने संकल्प को दुहराया. गौरतलब है की डॉ नरिंदर सिंह की अगुवाई में 8 सदस्यीय अंडरवाटर साइक्लिंग टीम ने स्वस्थ भारत के बैनर तले बेटी बचाओ एवं पर्यावरण बचाने का सन्देश देने के लिये इसी वर्ष जनवरी में समुद्र के नीचे जाकर साईकिल चलाया था. इस कारनामे को यूनिक वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह मिला है.

sangeeta-sinhaइस परिसंवाद की खास बात यह रही की इसमें बोलने, सुनने और करने वाले ज्यादातर युवा थे. हावर्ड से पब्लिक हेल्थ में मास्टर डीग्री हासिल कर लौटी डॉ अनन्या अवस्थी ने परिसंवाद के शुरू में ही अपनी बात रखते हुए कई सुझाव दिए.उनका मानना था कि आंगनवाड़ी जैसी ब्यवस्थाओं को और कौशलयुक्त एवं सूचनापरक बनाया जाये. स्वस्थ भारत न्यास के रविशंकर ने विषय प्रवेश कराते हुए, इस विषय की परिकल्पना, इसके विस्तार क्षेत्र को सूक्त शब्दों में रखा. वही न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने स्वस्थ क्षेत्र में किये गए अपने प्रयासों को साझा करते हुए कहा कि न्यास इस विषय को समाधानपरक बनाने की हर संभव कोशिश करेगा. वही धीप्रज्ञ द्विवेदी ने इस विषय को देश के हर कोने में ले जाने की घोषणा की और इस मुहीम में सभी को जुड़ने का आह्वान किया.

कार्यक्रम का संचालन कर रहीं आकाशवाणी की समाचार वाचिका अलका सिंह ने इस विषय को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया. बीच-बीच में अपनी कविताओं से उन्होंने इस विषय को गति प्रदान करने का काम किया. गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के टैगोर हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ पत्रकार, रंगकर्मी, फार्मासिस्ट, डॉक्टर, समाजसेवी सहित सभी रंगों के बुद्धिजीवियों की उपस्थिति ने इस परिसंवाद को सार्थक बना दिया.

स्वास्थ्य क्षेत्र में परवान चढ़ती उम्मीदें

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स्वास्थ्य क्षेत्र में परवान चढ़ती उम्मीदें

——-प्रभांशु ओझा 

यह बात निर्विवाद है कि भारत में आजादी के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास पर उचित ध्यान नहीं दिया गया. यही कारण है कि स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियां साल दर साल बीतने के बाद बढ़ती ही चली गयी हैं. वर्तमान सरकार जिन वैश्विक हालातों में सत्ता में आयी, उसमें नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराना सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दा ही नहीं था, बल्कि इसके लिये संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से भारत पर दबाव भी था. संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर भारत ने इस प्रतिबद्धता के साथ हस्ताक्षर भी किये हैं कि भारत नागरिकों को ‘यूनिवर्सल हेल्थ केयर’ देने की दिशा में हो रही वैश्विक प्रगति के अनुरूप प्रयास करेगा. जाहिर था कि वर्तमान केंद्र सरकार के लिये यह कठिन चुनौती थी. लेकिन अब तक के कार्यकाल में किये गये प्रयासों से यह समझना मुश्किल नहीं है कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र की हालत सुधारने के लिये गंभीरता से प्रयासरत है. उसने न सिर्फ इस दौरान महत्वपूर्ण योजनायें आरम्भ की हैं, बल्कि स्वास्थ्य स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचे और बदलती जरूरतों को समझने का भी माद्दा दिखाया है.     

नेशनल हेल्थ एश्योरेंस मिशन

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार इस बात की वकालत की है कि सरकार का आदर्श लक्ष्य सभी नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थ केयर प्रदान करना है. इस प्रतिबद्धता के अनुरूप ही सरकार ने तकनीकी तौर पर नेशनल हेल्थ एश्योरेंस मिशन के तहत नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थ केयर प्रदान करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य स्वीकार किया. हालांकि इसका नीतिगत रूप अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन उम्मीद की जा रही कि भारत जल्द ही इसको स्पष्ट करते हुये लागू कर देगा. स्पष्ट है कि केंद्र सरकार अब तक सभी नागरिकों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराने की अपनी प्रतिबद्धता से मुकरी नहीं है.

मिशन कायाकल्‍प की शुरूआत

कायाकल्प सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक अहम पहल है. इस पहल को सार्वजनिक सुविधाओं में स्‍वच्‍छता, सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण प्रचलनों को बढ़ावा देने के लिए प्रारंभ किया गया है। पहल के तहत  सार्वजनिक   स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं का मूल्‍यांकन किया जाएगा और ऐसी सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं जो स्‍वच्‍छता, सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण के नवाचारों के असाधारण प्रदर्शन वाले मानदंडों को प्राप्‍त करेंगी उन्‍हें पुरस्‍कार और सराहना प्रदान की जाएंगी। इसके अतिरिक्‍त सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य  सुविधाओं में  स्‍वच्‍छता, सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण प्रचलनों को बढ़ावा देने के लिए स्‍वच्‍छता दिशा-निर्देश 15 मई 2015 को जारी किये गये थे। ये दिशानिर्देश सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं में स्‍वच्‍छता को लेकर योजना निर्माण, बारंबारता, पद्धतियों , निगरानी आदि पर विस्‍तार से जानकारी मुहैया कराते हैं।

किलकारी एवं मोबाईल अकादमी

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गर्भवती महिलाओं, बच्‍चों के माता-पिता और क्षेत्र कार्यकर्ताओं के बीच नवजात देखभाल(एएनसी),  संस्‍थागत प्रसव, नवजात पश्‍चात देखभाल (पीएनसी) एवं प्रतिरोधन के महत्‍व के बारे में उचित जागरूकता सृजित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से देशभर में किलकारी एवं मोबाईल अकादमी सेवाएं क्रियान्‍वित  करने का फैसला किया गया है। पहले चरण में 6 राज्‍यों उत्‍तराखंड, झारखंड, उत्‍तर प्रदेश, ओडिशा, राजस्‍था न (एचपीडी) और मध्‍य प्रदेश में किलकारी प्रारंभ की जाएगी। चार राज्‍यों उत्‍तराखंड, झारखंड, राजस्‍थान एवं मध्‍य प्रदेश में मोबाईल अकादमी की शुरूआत की जाएगी।

किलकारी एक इंटरएक्टिव वॉइस रिस्‍पोन्‍स (आईवीआर) आधारित मोबाईल सेवा है, जो सीधे गर्भवती महिलाओं, बच्‍चों की माताओं एवं उनके परिवारों के मोबाईल फोन पर गर्भावस्‍था एवं शिशु स्‍वास्‍थ्‍य  के बारे में टाईम- सेन्‍सिटीव ऑडियो मैसेज (वॉइस कॉल) भेजती है।

राष्ट्रीय कौशल प्रयोगशाला- दक्ष

स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के कौशल में सुधार लाने के लिए गुणवत्ता वाली  सेवाएं (प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य) प्रदान करने के लिए केंद्र  सरकार ने लिवरपूल ट्रॉपिकल मेडिसिन (एलएसटीएम) दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र  में पांच राष्ट्रीय कौशल प्रयोगशाला “दक्ष” की स्थापना कर एक बड़ा कदम उठाया। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं में कुशल कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, सेवा पूर्व प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना और सतत नर्सिंग शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय कौशल प्रयोगशालाओं  को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जोड़ा जा रहा है। 30 स्टैंड- अलोन कौशल प्रयोगशालाओं को गुजरात, हरियाणा , बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल,ओडिशा, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे अलग-अलग राज्यों में स्थापित किया गया है। कहने की आवश्यकता नहीं कि केंद्र सरकार की यह पहल महिलाओं का जीवन बचाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है.

तम्बाकू उत्पादों पर सख्ती

केंद्र सरकार ने जब तम्बाकू उत्पादों के 85 फीसदी हिस्से पर चित्रित चेतावनियां छापने को अनिवार्य किया तो उम्मीद की जा रही थी कि देश का तम्बाकू कारोबार सरकार पर निर्णय बदलने का दबाव बनायेगा. लेकिन केंद्र सरकार ने इस फैसले पर कायम रहते हुये समाज और देश के नागरिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी. केंद्र सरकार का यह फैसला स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा सबसे साहसी था. यह गौर तलब है कि सरकार के फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी मुहर लगायी. कुछ दिनों पहले अपने निर्णय में न्यायालय ने कहा कि सिगरेट निर्माता कंपनियों को केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत सिगरेट पैकेट के 85 फीसदी हिस्‍से पर वैधानिक चेतावनी देनी ही होगी। स्पष्ट है कि तम्बाकू उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की समाज की तरफ कुछ जिम्मेदारी भी है। जितना ज्यादा तम्बाकू उत्पाद के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को प्रचारित किया जाएगा उतना ही ज्यादा भारतीयों के जीवन को बचाया जा सकता है।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति- एक क्रांतिकारी कदम

केंद्र सरकार ने सत्ता में आने के बाद एक महत्वपूर्ण पहल देश की पहली  राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति पेश कर की. नीति का उद्देश्य सभी स्तरों पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समझ बढ़ाना तथा मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में नेतृत्व को सुदृढ़ करके मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को व्यापक स्तर पर ले जाना था। वर्तमान में भारत में सिर्फ समाज के उच्च वर्ग में ही मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता है, लेकिन इस नीति से पहली बात देश में निर्धन तबकों को भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया जा सकेगा.

यह गौर करने वाली बात है कि मानसिक रूप से बीमार लोगों की देखभाल के लिए बनाए गए पूर्व कानून जैसे भारतीय पागलखाना अधिनियम, 1858 और भारतीय पागलपन अधिनियम, 1912 में मानवाधिकार के पहलू की उपेक्षा की गई थी और केवल पागलखाने में भर्ती म‍रीजों पर ही विचार किया गया था। आजादी के बाद भारत में इस संबंध में पहला कानून बनाने में 31 वर्ष का समय लगा और उसके 9 वर्ष के उपरांत मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य अधिनियम, 1987 अस्तित्‍व में आया। परंतु इस अधिनियम में कई खामियां होने के कारण इसे कभी भी किसी राज्‍य एवं केंद्र शासित प्रदेश में लागू नहीं किया गया। जाहिर है कि भारत में नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य को संबोधित करने के लिये एक नीति की आवश्यकता लगातार बनी हुयी थी.

नये मेडिकल संस्थानों की पहल

भारत में अच्छी गुणवत्ता और सेवाओं वाले मेडिकल संस्थानों की कमी एक बड़ी समस्या है. केंद्र सरकार ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिये उल्लेखनीय प्रयास किये हैं. इसके लिये केंद्र सरकार ने भारत के कुछ चुनिंदा जिला स्वास्थ्य केन्द्रों को केंद्र मेडिकल कालेज में परिवर्तित करने की योजना बनायी है। इसे चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार तथा कर्मियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है। भारत के कुल 671 जिलों में से 58 जिलों में, जिनमे अभी तक कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है , सर्वप्रथम उन जिला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित करने की योजना है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेजों में MBBS की कम से कम 100 सीटें होंगी। सरकार ने अपने कार्यकाल में 150 जिला अस्पतालों को परिवर्तित करने का लक्ष्य बनाया है।

जानकारों की मानें तो भारत में एक मेडिकल कॉलेज बनाने पर लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत आती है। सरकार ने इस लागत का 25 प्रतिशत राज्य सरकारों के हिस्से में तय किया है। पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में लागत की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकारों की होगी, बाकि बचे 85 प्रतिशत केंद्र द्वारा मुहैय्या कराए जाएंगे। इस योजना के पहले चरण में 22 जिला अस्पतालों को मंजूरी मिल चुकी है तथा पहली किश्त के तौर पे 144 करोड़ रूपए भी जारी कर दिए गए हैं. संकेत हैं कि संसाधन कम होने पर यह योजना PPP मॉडल के अनुसार भी लागू हो सकती है। उस स्थिति में मेडिकल कॉलेज में निवेश निजी क्षेत्र करेगा। केंद्र सरकार की इस योजना से समाज के एक बड़े समूह को सुविधायें मुहैया करायी जा सकेंगी.

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी अन्य उपलब्धियां और चुनौतियां

वास्तव में केंद्र सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. सरकार द्वारा इबोला और जीका वायरस से निपटने के प्रयासों को भी देश में हर तरफ से प्रशंसा मिली है. बावजूद इसके स्वास्थ्य क्षेत्र में चुनौतियां अब भी बरक़रार हैं. सबसे बड़ी चुनौती है स्वास्थ्य पर खर्च होने वाले बजट 1.04 ( सकल घरेलू उत्पाद)  को बढ़ाना और उसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी तय करना. भारत पर अब अपने स्वास्थ्य ढांचे को दुरुस्त करने का वैश्विक दबाव भी है. उम्मीद की जा सकती है कि केंद्र सरकार इन चुनौतियों से सही योजना और नजरिये से निपटेगी.