SBA विशेष

पीएम जनऔषधि परियोजना को अंतिम जन तक पहुंचाने की कवायद

पीएमबीजेपी की अगर बात करें तो ऐसा पहली बार हो रहा है कि पीएमबीजेपी के टॉप मॉस्ट अधिकारी जनऔषधि संचालकों से मिल रहे हैं। उन्हें सेमिनार में बुलाया जा रहा है। उनकी समस्याएं सुनी जा रही हैं। ऐसा पहले नहीं देखने को मिल रहा था। जनऔषधि संचालकों को राम-भरोसे छोड़ दिया गया था। चिकित्सकों से इस योजना के बारे में चर्चा नहीं की जा रही थी। लेकिन अब आम लोग से लेकर चिकित्सक, फार्मासिस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता सभी को इस योजना से जोड़ा जा रहा है। और इस योजना को सफल बनाने की सार्थक कोशिश की जा  रही है। इसी कड़ी में इस पिछले सप्ताह 20 जुलाई को गुजरात के सूरत में जनऔषधि को लेकर पीएमबीजेपी ने एक सेमिनार आयोजित किया था। इस आयोजन में  जनऔषधि स्टोर चला रहे संचालकों एवं स्थानीय चिकित्सकों को भी बुलाया गया था। स्वास्थ्य के प्रति सजग एवं पीएमबीजेपी को मजबूत करने के इरादे से आयोजित यह सेमिनार बहुत सफल रहा। चिकित्सकों के मन में जेनरिक दवाइयों को लेकर व्याप्त भ्रम तो दूर हुआ ही साथ ही जनऔषधि संचालकों को काम करने की एक नई ऊर्जा भी मिली।

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मोदी सरकार के चार सालःस्वास्थ्य सेवाओं में होता सुधार, अभी भी बहुत कुछ करने की है जरूरत

भारत बीमारियों का बढ़ते ग्राफ के बीच में इस तरह की खबरें निश्चित रूप से सुकुन देती हैं। वहीं मीडिया में कहीं से यह खबर आती है कि ऑक्सिजन की कमी के कारण शिशुओं की मौत हो गई या प्रसूता को अस्पताल में समय पर भर्ती नहीं किया गया और उसने सड़क पर बच्चे को जन्म दिया। लाश को ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली, परिजन को अपने कंधे पर उठाकर कोषों दूर लाश ले जानी पड़ी। अस्पताल ने मृतक की लाश बिल भूगतान के लिए रोके रखा, परिजनों ने पुवाल का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार करने की तैयारी की। इस तरह की खबरों को पढ़कर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की जर्जरता का अंदाजा लगता है। ऐसी खबरों को पढ़कर रोना आता है और इंसान सोचने पर मजबूर होता है कि आखिर कब भारत सच में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी बनेगा! फिलहाल कुछ अच्छी खबरें आई हैं, उसे पढ़कर मन को तसल्ली तो दिया ही जा सकता है!

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