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शराब बंदी का साइड इफ्फेक्ट: बिहार में नशीले कफ सीरप का बढ़ सकता है कारोबार…

बगैर डाक्‍टरी पुर्जा कफ सीरप नहीं बेची जा सकती । पर बिकती हर जगह है । कई दफे खबर मिलती रहती है कि गार्डेन की साफ-सफाई में कफ सीरप की बोतलें जब्‍त हो रही है । यह अपने आप में खतरनाक संकेतक है । फिर जब, 1 अप्रैल से शराबबंदी होगी,तो कफ सीरप की बिक्री में बेहिसाब वृद्धि को रोकना बड़ी चुनौती होगी । कफ सीरप की तरह ही नशा देनेे वाली दूसरी दवाओं की बिक्री पर भी नजर रखनी होगी ।

शराबबंदी की चुनौतियों को लेकर मुख्‍य मंत्री ने बिहार के उत्‍पाद विभाग को एक्‍शन प्‍लान बनाने को कहा है । पर इस एक्‍शन प्‍लान की तैयारी में अभी से ही कई दूसरे विभागों को शामिल कर लेना आवश्‍यक होगा । मसलन,हेल्‍थ व फूड एंड सिविल सप्‍लाई डिपार्टमेंट को । इसका आकलन दिसंबर-जनवरी में ही कर लेना चाहिए कि बिहार में अभी कफ सीरप की बिक्री औसतन कितनी है । मौसम के बदलाव के वक्‍त मांग में तेजी-कमी का हिसाब लगना चाहिए । फिर इसके बाद 1 अप्रैल,2016 से कफ सीरप की बिक्री पर सतत् निगरानी रखनी होगी ।

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