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स्वस्थ भारत ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र, कहा जनऔषधि योजना विफल हो चुकी है


• देश के सभी दवा दुकानों को जनऔषधि केन्द्र बनाने की मांग
• देश के सभी दवा दुकानों राष्ट्रीयकृत कर जनऔषधि केन्द्र में बदलने का सुझाव

नई दिल्ली/1.11.2017

स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रही स्वस्थ भारत अभियान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर देश के सभी दवा दुकानों को राष्ट्रीयकृत किए जाने की मांग की है। स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने इस पत्र में प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना की विफलताओं के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि देश में 90 फीसद दवाइयां जेनरिक ही बिक रही हैं। फिर देश की तमाम दवा दुकानों पर ब्रांड के नाम पर जनता को क्यों लूटा जा रहा हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि गर सरकार देश की सभी दवा दुकानों को राष्ट्रीयकृत कर दे और सभी दुकानों पर जनऔषधि दवाइयां मिलने लगे तो अलग से जनऔषधि केन्द्र खोले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि देश का दवा बाजार 90 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया है। महंगी दवाइयों के कारण लोग गरीबी रेखा से ऊबर नहीं पा रहे हैं ऐसे में बाजार में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि हाल ही में स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज विषय को लेकर 21000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा कर के स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह दिल्ली लौटे हैं। स्वस्थ भारत अभियान के अंतर्गत स्वस्थ भारत न्यास पिछले 5 वर्षों से कई जनजागरूकता कैंपेन चला चुका है। कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिमम रिटेल प्राइस, जेनरिक लाइए पैसा बचाइए, तुलसी लगाइए रोग भगाइए, नो योर मेडिसिन एवं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज सरीखे जनजागरूकता कैंपेनके माध्यम से स्वस्थ भारत टीम पूरे भारत में स्वास्थ्य चिंतन को बढावा देने के लिए काम कर रही है।

क्या आप जानते हैं ! 65 साल पहले भारत में आया जापानी इंसेफलाइटिस !

आशुतोष कुमार सिंह

भारत जैसे देश किसी भी नई बीमारी का पालनहाल आसानी से बन जाते हैं। सवा अरब से ज्यादा जनसंख्या को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे भारत में जब कोई बीमारी आयात होती है, तो उसकी खातिरदारी घर आए मेहमान की तरह की जाती है। उसके प्रति हमारा नजरिया, उसको रोकने के उपाय ठीक वैसे ही होते हैं जैसे घर आए दामाद खुद से चले जाएं तो ठीक है, नहीं तो उन्हें कौन कहे की आप अपने घर चले जाइए। ऐसी बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि बीमारियों के फलने-फूलने के लिए जरूरी खाद-पानी यहां पर भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। यहां पर नई बीमारियों की खेती करने में पूरा तंत्र सहयोग करता है। कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू एवं इबोला जैसी बीमारियों की खेती यहां पर खूब हो रही है। इनकी ब्रांडिंग कर के कुछ यहां के कुछ दूसरे मूल्कों की संस्थाएं अपनी आर्थिक स्वार्थों को पूर्ण करने में सफल भी हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ स्वस्थ मानव संसाधन की रीढ़ की हड्डी तोड़ने की कोशिश साकार होती दिख रही है।
इन सब बातों की चर्चा यहां पर इसलिए कर रहा हूं क्योंकि इन दिनों एक और बीमारी की ब्रांडिंग जोरो पर है। वर्षों से इस बीमारी का जो बीज हमने बोए थे वे अब फलदायी हो गए हैं। अब पहले से ज्यादा मारक हो गई है यह बीमारी। अब मौतों की संख्या बढ़ाने में इस बीमारी ने महारत हासिल कर ली है। अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि मैं किस बीमारी की इतनी तारीफ किए जा रहा हूं। जी हां, यह बीमारी है जापानी इंसेफलाइटिस(जेई)। इस बीमारी ने भारत के कई क्षेत्रों को अपना निशाना बनाया है। और आज उसका हरेक निशाना सही लग रहा है। देश के नौनिहालों को निगलने में यह बीमारी बहुत ही सफल रही है। गोरखपुर के बीआडी अस्पताल में हो रही मौतों का सिलसिला थमा भी नहीं था कि यह झारखंड के जमशेदपुर में हाहाकार मचाने में सफल रही। बगल के रांची में भी इसने कोहराम मचा रखा है। बिहार के मुजफ्फरपुर का क्षेत्र हो अथवा गोरखपुर, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज एवं सिवान का भूगोल। इन क्षेत्रों में इंसेफलाटिस ने अपने आप को खूब फैलाया है।

लचर व्यवस्था ने ली जान

अब यहां पर सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर इंसेफलाइटिस होता कैसे है? और भारत में इसने कब कदम रखा? इसकी मजबूती का राज क्या है?
उत्तर प्रदेश में इंसेफलाइटिस पर पिछले दिनों एपीपीएल ट्रस्ट ने एक अध्ययन किया था। उस अध्य्यन में कहा गया है कि यह रोग फ्लावी वायरस के कारण होता है। यह भी मच्छर जनित एक वायरल बीमारी है। जिसमें सिर में अचानक से दर्द शुरू होता है, शरीर कमजोर पड़ने लगता है। इसका लक्ष्ण भी बहुत हद तक सामान्य बुखार जैसा ही होता होता है। इसका असर शरीर के न्यूरो सिस्टम पर पड़ता है। यही कारण है कि इस बीमारी ने या तो बीमारों को मौत की नींद सुलाया है अथवा उन्हें विकलांग कर दिया है। इस बीमारी को फैलने वाले क्षेत्र के बारे मे इस शोध में कहा गया है कि धान की खेती एवं सुअर-पालन जिन क्षेत्रों में होता है, वहां पर यह बीमारी आसानी से फैलती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका फैलाव व्यक्ति से व्यक्ति के रूप में नहीं होता है। यह बात तो इस बीमारी के सिम्टम्स की हुई।

65 वर्ष पहले भारत में आई थी यह बीमारी

भारत में यह बीमारी कब आई यह जानना भी कम दिलचस्प नहीं है। आज से 65 वर्ष पूर्व यानी 1952 में पहली बार महाराष्ट्र के नागपुर परिक्षेत्र में इस बीमारी का पता चला। वहीं सन् 1955 तमिलनाडू के उत्तरी एरकोट जिला के वेल्लोर में पहली बार क्लीनीकली इसे डायग्नोस किया गया। 1955 से 1966 के बीच दक्षिण भारत में 65 मामले सामने आए। धीरे-धीरे इस बीमारी ने भारत के अन्य क्षेत्रों में भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। भारत में पहली बार इस बीमारी ने 1973 फिर 1976 में पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा तबाही मचाई। पंश्चिम बंगाल के वर्दवान एवं बांकुरा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। 1973 में बांकुरा जिला में इस रोग से पीड़ित 42.6 फीसद लोगों की मौत हुई। 1978 आते-आते यह बीमारी देश के 21 राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में फैल गयी। इसी दौरान भारत के उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 1002 मामले सामने आए जिसमें 297 मौतें हुई। सिर्फ यूपी की बात की जाए तो 1978 से 2005 तक यह बीमारी 10,000 से ज्यादा मौतों का कारण बनी। 2005 में जो हुआ उसने इस बीमारी की ताकत से देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को परिचित कराया। सिर्फ गोरखपुर में 6061 केस सामने आए जिसमें 1500 जानें गईं। इसी तरह 2006 में 2320 मामलों में 528 बच्चों को अपनी जान गवानी पड़ी। 2007 में 3024 मामलों में 645 मौत। इस तरह 2007 तक देश में 103389 मामले सामने आए जिसमें 33,729 रोगियों को नहीं बचाया जा सका। इस शोध में यह बात भी कही गयी है कि 597,542,000 लोग जापानी इंसेफलाइटिस प्रभावित क्षेत्र में रह रहे हैं और 1500-4000 मामले प्रत्येक वर्ष सामने आ रहे हैं। यहां पर यह भी ध्यान देने वाली बात है कि अभी तक हम लोग जिन आंकड़ों की बात कर रहे हैं, वे सब रिपोर्टेड हैं। बहुत से मामले ऐसे भी होंगे जो रिपोर्ट नहीं हुए होंगे। ऐसे में जब बिना रिपोर्ट किए गए मामलों की नज़र से इस बीमारी को हम देखें तो पता चलेगा कि यह बीमारी कितनी ताकतवर हो चुकी है। नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीबीडीसीपी) जिसे पहले हमलोग राष्ट्रीय एंटी मलेरिया प्रोग्राम (एनएएमपी) के नाम से जानते थे, इन दिनों भारत में जेई के मामले को मोनिटर कर रही है। अभी तक देश के 26 राज्यों में कभी-कभार तो 12 राज्यों में अनवरत यह बीमारी अपना कहर बरपा रही है।
1951-52 में पहली बार भारत में लोकसभा चुनाव हुआ था। तब से लेकर अभी तक तमाम प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री बने और चले गए लेकिन 1952 से चली आ रही इस बीमारी का ईलाज नहीं ढ़ूढ़ पाए। लोग मरते रहे और आज भी मर रहे हैं।

146 वर्ष पहले जापान में सबसे पहले इस बीमारी का पता चला

इंसेफलाइटिस की जड़ों को अगर हम ढूढ़ें तो पता चलता है कि इसका जन्म सबसे पहले जापान में हुआ था। शायद यहीं कारण है कि इसे जापानी इंसेफलाइटिस कहा जाता है। आज से 146 वर्ष पूर्व जापान में यह बीमारी सबसे पहले पहचान में आई। 53 वर्षों के बाद इस बीमारी ने अपना विकराल रूप दिखाया और 1924 में जापान में 6000 केस पंजीकृत हुए। यहां से इसका फैलाव एशिया के देशों में हुआ। 1960 के दशक में चलाए गए टिकाकरण अभियान के कारण इस पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया गया। जापान के अलावा, कोरिया, ताइवान, सिंगापुर जैसे देशों में इसने अपना पैर पसारा फिर जैसा की ऊपर बताया जा चुका है 1952 में इसका प्रवेश भारत में हुआ।

आश्चर्य का विषय यह है कि भारत सरकार इंसेफलाइटिस के सही कारणों को जानने में अभी तक नाकाम रही है। अभी जांच का फोकस गोरखपुर बना हुआ है। जबकि इस बीमारी का फैलाव देश के लगभग प्रत्येक कोने में है। दक्षिण भारत में यह बीमारी पहले आई लेकिन वहां पर वह उतना सफल नहीं हुई जितना उत्तर भारत में दिख रही है। ऐसे में शोध का बिंदु दक्षिण भारत भी होना चाहिए। इतना ही नहीं जांच का बिंदु एशिया के तमाम देश भी होने चाहिए जहां पर यह बीमारी अपना पांव पसार चुकी है। शायद तब जाकर हम इस बीमारी के कारणों की तह में जा पाएंगे एवं ईलाज ढूढ़ पाने के नजदीक पहुंचेंगे। अभी तो ऐसा लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं है कि इस बीमारी का ईलाज संभव हो सके नहीं तो गर हमारी सरकारों ने इस बीमारी की भयावहता को पहले ही भांप कर समुचित कदम उठाया होता तो बीआरडी अस्पताल में जो चीख-पुकार सुनने को मिल रही है शायद वह नहीं मिलती।

यह लेख www.firstposthindi.com से साभार लिया गया है।

विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत ने की मांग, महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर बने शौचालय!

नई दिल्ली

‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ विषय को लेकर 21000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा करने वाले स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर अलग शौचालय बनाएं जाने कीय मांग की है। अपनी यात्रा के अनुभवों एवं बालिकाओं से हुई बातचीत का हवाला देते हुए श्री आशुतोष ने कहा कि देश के प्रत्येक जिला मुख्यालय, प्रखंड मुख्यालय, बस अड्डा सहित उन सभी जगहों पर महिलाओं के अलग से शौचालय बनें, विशेष रूप से मूत्रालय।

श्री आशुतोष ने बताया की यात्रा के दौरान देश भर की बालिकाओं ने अलग से मूत्रालय बनाये जाने की बात प्रमुखता से रखी थी। विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत (न्यास) के पदाधिकारियों ने एक बैठक की। इस बैठक में यह निर्णय किया गया की बालिकाओं के लिए अलग से शौचालय की मांग को जोर सोर से उठाया जायेगा। अगर सरकार इस बात पर गंभीर नहीं हुई तो आंदोलन किया जायेगा। इस अवसर पर धीप्रज्ञ द्विवेदी, शशिप्रभा तिवारी, प्रसून लतांत सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।

श्रीनगर के 18 वर्षीय युवा को ‘स्वच्छता ही सेवा’ का एम्बेसडर बनाया गया

नई दिल्ली/पीआइबी/25.9.17

श्रीनगर के युवा बिलाल डार को श्रीनगर नगर निगम का ब्रान्ड एम्बेसडर बनाया गया है। 12 वर्ष की उम्र से ही बिलाल डार ‘स्वच्छता अभियान’ में योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में बिलाल डार का जिक्र किया था।

प्रमुख व्यक्तियों द्वारा स्वच्छता के लिए श्रमदान कार्यक्रम के अन्तर्गत आज रेल राज्य मंत्री श्री राजेन गोहेन ने गुवाहटी में श्रमदान कार्यक्रम में अपना योगदान दिया। उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री करम श्याम ने मणिपुर में स्वच्छता ही सेवा अभियान का शुभारम्भ किया। चण्डीगढ प्रशासन के अधिकारियों ने केंद्र-प्रशासन सचिवालय परिसर में आयोजित स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

भारतीय कोस्ट गार्ड ने अपने परिसर में स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के तहत स्वच्छता अभियान चलाया और पौधे लगाए। जहाज की साफ-सफाई करते हुए कचरा एकत्र किया और फिर उसका निपटान भी किया।

‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ आम लोगों के साथ-साथ कबाड़ का व्यवसाय करने वालों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है। इसके अलावे मच्छरों, मक्खियों से फैलने वाली बिमारियों की भी रोकथाम करने में मदद मिल रही है।

 

बेटियों का स्वस्थ होना स्वस्थ समाज की पहली कसौटी हैः डॉ अचला नागर

स्वस्थ भारत यात्रा दल का मुंबई में हुआ स्वागत

मुंबई की दो बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर

मीरा-भाइंदर एवं मालाड में हुए आयोजन

बॉलीवुड के रचनाकारों से यात्रा दल की हुई मुलाकात

प्रथम चरण में यात्रा दल ने पूरी की 2700 किमी की यात्रा, दूसरा चरण कन्याकुमारी तक
स्वस्थ भारत यात्रा के प्रथम चरण में 5 राज्यों की 29 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर

मुंबई. 12.2.17

 

यात्रा दल को मिला डॉ अचला नागर का आशीर्वाद
स्वस्थ भारत यात्रा दल ने निकाह, बागवान सहित दर्जनों फिल्म लिखने वाली वरिष्ठ लेखिका डॉ अचला नागर से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने यात्रा के लिए अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि बेटियों का स्वास्थ्य बहुत जरूरी है। वर्तमान स्थिति में बेटियों के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां स्वस्थ नहीं होगी तब तक स्वस्थ देश अथवा समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि आज बेटियों के लिए सारे दरवाजे खुले हुए हैं, बस जरूरत है कि वे सार्थक एवं अनुशासित तरीके से आगे बढ़ें। अपनी ताकत को समझें और समाज में अपनी आवाज को बुलंद करें। ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ राष्ट्रीय यात्रा की परिकल्पना की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां सेहतमंद नहीं होंगी सेहतमंद समाज का सपना अधूरा ही रहेगा। एक घंटे तक चली बातचीत में यात्रा दल के वरिष्ठ यात्री एवं वरिष्ठ पत्रकार लतांत प्रसून ने उनके फिल्मी करियर को लेकर कई सवाल पूछे, जिसका उन्होंने सहजता से उत्तर दिया।
सरोज सुमन, डॉ. सागर एवं शेखर अस्तित्व से भी हुई मुलाकात
मुंबई प्रवास के दौरान यात्रा दल ने जाने-माने संगीतकार सरोज सुमन, गीतकार शेखर अस्तित्व एवं डॉ. सागर से मुलाकात की। सभी ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की अभियान के लिए यात्रा दल को शुभकामनाएं दी। इस दौरान यात्रा दल ने कवयित्री रीता दास राम से भी मुलाकात की।

 

रत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा शुरू हुई स्वस्थ भारत यात्रा का मुंबईकरों ने जोरदार तरीके से स्वागत किया। यात्रा दल सबसे पहले मीरा-भाइंदर के विवेकानंद किड्स स्कूल पहुंचा, जहां पर बच्चों एवं उनको अभिभावकों के बीच में स्वास्थ्य चर्चा हुई। यहां पर जलधारा एवं बेटी बचाओं बेटी पढाओं की टीम ने यात्रा दल का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा दल ने दूसरा कार्यक्रम मुंबई के मालाड (ईस्ट) में किया। इस अवसर पर मुंबई की दो बालाकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। शरन्या सिगतिया और प्रीति सुमन को इस अभियान का गुडविल एंबेसडर बनाया गया। प्रीति सुमन जहां एक ओर निर्देशन के क्षेत्र में अपना नाम रौशन कर रही हैं वहीं उनकी गायकी के चर्चे भी चहुंओर हैं। शरन्या सिगतिया की उम्र अभी 12 वर्ष ही है लेकिन उन्होंने अपनी कक्षा में बेहतरीन परफॉमेंस दिया है। मालाड में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वस्थ भारत (न्यास) के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आज समय आ गया है कि हम अपनी सेहत को लेकर चिंतनशील हों। सेहत की चिंता हम सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। सेहत से बड़ा पूंजी कुछ और नहीं है। यात्रा दल के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत जी ने कहा कि महाराष्ट्र एवं गुजरात की धरती पर माताओं एवं बहनों के प्रति समाज ज्यादा संवेदनशील है। उन्होंने निगम का चुनाव लड़ रहीं 
संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा से कहा कि आप जीत के बाद स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के इस संदेश को और व्यवस्थित तरीके से घर-घर ले जाएं. इस अवसर पर मालाड पूर्व के निगम पार्षद ज्ञानमूर्ति शर्मा ने दवाइयों में मची लूट के बारे में लोगों को जागरूक किया। इस अवसर पर कमलेश शाह, वरिष्ठ लेखिका अलका अग्रवाल सिगतिया, विनोद रोहिल्ला सहित सैकड़ों महिलाएं उपस्थित थीं। महाराष्ट्र में निगम चुनाव के गहमागहमी के बीच में मालाड के स्थानीय लोगों द्वारा आयोजित इस स्वास्थ्य चर्चा के लिए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।

यात्रा के प्रथम चरण में 29 बालिकाएं बनीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर
 2700 किमी की प्रथम चरण की यात्रा में यात्री दल ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज अभियान से 29 बालिकाओं को जोड़ा। इन्हें इस अभियान का गुडविल एंबेसडर बनाया गया। हरियाणा में 6, राजस्थान में 4, मध्यप्रदेश में 15, गुजरात में 2 एवं महाराष्ट्र में 2 बालिकाओं को गुडविल एंबेसडर बनाकर सम्मानित किया गया है। 
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा ‘भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वें वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नंई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप, वर्ल्ड टीवी न्यूज़ सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है। 13 फरवरी को यह यात्रा पुणे होते हुए कन्याकुमारी जायेगी। जहां पर दूसरे चरण की यात्रा समाप्त होगी। 16000 किमी की जनसंदेशात्मक यह यात्रा अप्रैल में समाप्त होगी।
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यात्री दल से संपर्क
9891228151, 9811288151

6 छात्राओं को बनाया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

झाबुआ की 6 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर

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भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गंधिस्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में निकली स्वस्थ भारत यात्रा टीम ने आज माँ त्रिपुरा कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग की बालिकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का सन्देश दिया.
छात्राओं को संबोधित करते हुए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आपलोग नर्सिंग की छात्रा हैं, आप के ऊपर देश के स्वास्थ्य की बड़ी जिम्मेदारी हैं. सही मायने में स्वस्थ भारत की सिपाही आप ही लोग हैं. छात्राओं को उन्होंने antibaiotic के दुरूपयोग को लेकर भी जागरुक किया. साथ ही उनसे शुभ लाभ की अवधारणा पर इलाज करने का संकल्प कराया. इस अवसर पर गांधीवादी चिंतक कुमार कृष्णन ने भी अपनी बात रखी.
स्वस्थ भारत यात्री दल ने कॉलेज की तीन छात्राओं को स्वस्थ भारत की ओर से स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गूडविल अम्बेसडर मनोनीत किया.
गौरतलब है की झाबुआ प्रवास के प्रथम दिन भी उत्कृष्ट विद्यालय से तीन बालिकाओं को यात्री दल ने इस अभियान का गुड विल अम्बेसडर बनाया था. साथ ही यहां के पुलिस अधीक्षक महेश चंद जैन से मुलाकात कर यात्रा की जानकारी दी थी. उन्होंने यात्री दल को कम उम्र में बालिकाओं की हो रही शादी के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का सुझाव दिया.

स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल अम्बेसडर

  1. मनीषा गाडडिया
  2. साक्षी सोलंकी
  3. ऋतू निनामा
    सभी उत्कृष्ट विद्यालय, झाबुआ

4 पूजा डोहरिया
5 नेहा डावर
6 इंदूबाला खेतेडीया

कार्यक्रम की शुरुवात दीपप्रज्वलन के साथ हुआ. कार्यक्रम का सञ्चालन श्री ओम शर्मा जी ने की. इस अवसर पर यात्री दल के विनोद कुमार रोहिला, कॉलेज के प्रधानाचार्य अल्पित गांधी सहित बड़ी संख्या में बीएससी नर्सिंग की छात्राएं उपस्थित थी.

16000 हजार किमी की यह यात्रा झाबुआ से अहमदाबाद, मुम्बई होते हुए कन्याकुमारी, फिर नार्थ इष्ट होते हुए दिल्ली तक जायेगी. इस यात्रा में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजकमल प्रकाशन समूह, नॅस्टिवा अस्पताल, संवाद मीडिया सहित कई समाजसेवी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं.

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स्वस्थ भारत यात्रा २०१६-१७ सूरत पहुचीं

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गुरुग्राम, जयपुर, कोटा, भोपाल, इंदौर, झाबुआ, अहमदाबाद के बाद स्वस्थ भारत यात्रा #SwasthBharatYatra आज सूरत  पहुँच चुकी है।  रात्रि विश्राम के बाद यहाँ कल स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के अन्तर्गत बालिका स्वास्थ को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. यहाँ से यात्रा अपने अगले पड़ाव मुम्बई के लिए प्रस्थान करेगी।  मुम्बई में यात्रा २ दिनों तक रहेगी।  मुम्बई में यात्रा का पहला चरण पूरा होगा और द्वितीय चरण आरम्भ होगा।  वहां से यात्रा में लतांत प्रसून जी भी जुड़ जायेंगे।

यात्रा टीम दूरभाष : +९१-९८९१२२८१५१

इंदौर की पांच वालिकाएं बनीं ‘स्वस्थ वालिका स्वस्थ समाज’ की गुडविल एम्बेसडर

#YatraRapat #SwasthBharatYatra
इंदौर की पांच वालिकाएं बनीं ‘स्वस्थ वालिका स्वस्थ समाज’ की गुडविल एम्बेसडर
ईवा वेलफेयर ऑरगाइनेशन ने स्वस्थ भारत यात्रा का किया स्वागत
प्रेस क्लब इंदौर में हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश

बीमार नहीं बीमारी को दूर करने की है जरूरत : आशुतोष कुमार सिंह
16000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा अप्रैल में होगी पूरी
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने पर चल रही है यह यात्रा
इंदौर। 5.02.17

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स्वस्थ भारत यात्रा के इंदौर पहुंचने पर इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित समारोह में ईवा ऑर्गनाइजेशन की ओर से स्वागत किया गया। आयोजित समारोह में स्वस्थ भारत यात्रा के प्रकल्पक आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि बालिकाओं के सेहत के सवाल की लगातार अनदेखी हो रही है। लोगों की संवेदना को झकझोरने और सामाजिक नजरिया बदलने के मकसद से यह यात्रा भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से अंग्रेजों को भगाने के लिए भारत छोड़ों आंदोलन की शुरूआत की थी उसी तरह हमारे साथियों ने देश से बीमारी को भगाने के लिए एवं बालिकाओं के स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की परिकल्पना की है। उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य के सवाल पर लोगों का जागरूक होना जरूरी है। इस परिप्रेक्ष्य में ‘अपनी दवा को जाने’ और जेनरिक मेडिसिन को लेकर चलाये जा रहे मुहिम की विस्तार से जानकारी दी। मौजूदा समय में स्वास्थ्य नीति का ताना—वाना बीमारों को ठीक करने के ईदगिर्द घूम रही है। जबकि बीमारी खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने जीवन शैली को बदलने की चर्चा करते हुए कहा कि तुलसी, नीम जैसे हर्वल का इस्तेमाल कर हम स्वस्थ् रह सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि नीम और तुलसी के पौधे व्यापक स्तर पर लगाएं। इंदौर शहर के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ मनोहर भंडारी ने कहा कि स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की अवधारणा ‘स्वस्थ समाज’ की दिशा में एक सार्थक पहल है। यह समाज में बालिकाओं के प्रति बढ़ी नकारात्मकता को कम करने की दिशा में उठाया गया एक बेहतर अनुष्ठान है। इस मौके पर इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने स्वस्थ भारत यात्रा की इस मुहिम को भ्ररपूर समर्थन दिया, साथ ही इंदौर की होनहार बालिकाओं को ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ का गुडविल एम्बेसडर बनाए जाने पर शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि मीडिया के पास नकारात्मक खबरों को स्थान देने की जगह तो होती है लेकिन सकारात्मक खबरों को कम जगह मिल पाती है। ऐसे में जरूरत है आशुतोष एवं इनकी टीम के जैसे किए जा रहे सार्थक कार्यों को मीडिया में भरपूर जगह मिले। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार कुमार कृष्णन ने कहा कि गांधी का चिंतन लोगों तक ले जाना और बालिकाओं के प्रति उनके स्वास्थ्य के नजरिये को प्रसारित करना गांधी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
ईवा वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की ओर से आशुतोष कुमार सिंह, कुमार कृष्ण्न् और विनोद रोहिल्ला को सम्मानित किया गया। ईवा वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की संस्थापक अध्यक्ष भारती मांडोले ने कहा कि बालिका किसी से पीछे नहीं है। उन्होंने इस यात्रा के मुहिम की सराहना की और कहा यह गर्व का विषय है कि हमें इंदौर में स्वागत करने का अवसर मिला।

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शहर की पांच बालिकाएं बनी गुडविल एंबेसडर, वृसाली टिकलकर बनीं उनकी संरक्षक
प्रेस क्लब इंदौर में आयोजित इस समारोह में इंदौर शहर की पांच बालिकाओं को वृसाली टिकलकर साहू के संरक्षण में गुडविल एम्बेसडर बनाया गया। सात सालों से आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर पांच हजार वालिकाओं को प्रशिक्षित करनेवाली दलजीत कौर, नेत्रहीन एवं मूक वधिर को आत्म रक्षा का गुड़ सिखाने वाली रानी हनोतिया, सेवाभावी वैदेही व्यास, थ्रो वॉल में राष्ट्रीय स्तर नाम कमा चुकी सपना कुलकर्णी एवं गीत संगीत के साथ— साथ स्वास्थ की दुनिया में नाम कमाने वाली डॉ अश्विनी राठौर को स्वस्थ भारत (न्यास) की ओर से गुडविल एम्बेसडर मनोनित किया गया।
खुशी के आंसू

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समारोह में सम्मान पाकर दलजीर कौर और रानी हनोतिया इतनी भावुक हो गयी कि उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। इनके संबोधन के एक एक शब्द इतने भावपूर्ण थे कि सभी की आंखे गिली हुए बिना नहीं रह सकी। इस अवसर पर डॉ. अश्विनी राठौर से संगीत के माध्यम से बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
देवास के झुग्गी बस्ती में पहुंची स्वस्थ भारत यात्रा
यात्रा टीम 5 फरवरी की सुबह भोपाल से चलकर इंदौर पहुंची। इस दौरान रास्ते में देवास के झुग्गी झोपड़ी के बच्चों के बीच समय बिताया। टीम को स्थानीय लोगों ने बताया कि स्वच्छता के नाम पर सरकारी पैसे तो खूब आएं हैं लेकिन शौचालय के नाम पर इन्हें आज भी चार सौ मीटर दूर जाकर सार्वजनिक शौचालय की अस्वच्छ व्यवस्था में मल त्याग करना पड़ता है। इस स्थिति पर यात्री दल ने हैरानी जतायी और स्थानीय लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी बात सरकार तक पहुंचायी जाएगी। हालांकि इस बीच एक महिला के वक्तव्य ने सबका ध्यान आकृष्ट किया जिसमें उसने कहा कि झुग्गी में गंदगी नहीं मिलेगी तो और क्या मिलेगी?
कल यात्रा पहुंचेगी झाबुआ
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वें वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नंई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है। 6 फरवरी को यह झाबुआ में रहेगी। 16000 किमी की जनसंदेशात्मक यह यात्रा अप्रैल में समाप्त होगी।
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यात्री दल से संपर्क
9891228151, 9811288151

स्वस्थ समाज की परिकल्पना में बालिकाओं का स्वस्थ होना जरूरीः प्रो. बीके कुठियाला

स्वस्थ समाज की परिकल्पना में बालिकाओं का स्वस्थ होना जरूरीः प्रो. बीके कुठियाला

स्वस्थ भारत के यात्रियों ने दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश

कबीर वाणी के माध्यम से दिया गया स्वास्थ्य एवं स्वच्छता का संदेश

भोपाल/ 4.02.17

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बालिकाओं की प्रबंधकीय क्षमता बेहतर होती है। एक समय था जब पत्रकारिता में बालिकाओं की संख्या कम थी लेकिन आज बढ़ी है। बदलाव हो रहा है लेकिन शायद समाज उतना नहीं बदला है जितना उसे बदलने की जरूरत है। नहीं तो स्वस्थ भारत यात्रा की जरूरत नहीं पड़ती। यह कहना था प्रो. बीके कुठियाला का। वे आज शहर में स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज एक परिसंवाद में अपनी बात रख रहे थे. उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष को याद करते हुए निकली स्वस्थ भारत की टीम एक बहुत ही ज्वलंत मुद्दे को समाज के सामने रखने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर बेटियों को पहले जैसा सम्मान मिल जाए तो शायद आशुतोष कुमार सिंह और उनकी टीम को सड़क पर भटक कर इस तरह के संदेश देने की जरूरत न पड़े।

भोपाल की चार बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर
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मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज परिसंवाद के अवसर पर स्वस्थ भारत (न्यास) ने शहर के चार बालिकाओं को इस अभियान का गुडविल एमबेसडर मनोनित किया। आस्था दीक्षित, वत्सला चौबे, सर्वज्ञा त्रिपाठी एवं कीर्ति गुर्जर को गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। प्रो. बीके कुठियाला एवं स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशतोष कुमार सिंह के हाथों बालिकाओं को यह मनोनयन प्रपत्र प्रदान किया गया।

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बालिकाओं के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए संस्था के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि अगर भारत की बालिकाएं अपनी शक्ति को समझ लें तो निश्चित रूप से वह दिन दूर नहीं जब स्वस्थ समाज की परिकल्पना को पूर्ण किया जा सके। इस अवसर पर मालिनी अवस्थी का वीडियो संदेश भी दिखाया गया। अंतं में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ जिसमें दयाराम सारोलिया एवं साथियों द्वारा कबीर गायन प्रस्तुत किया गया।
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वें वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नंई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है। 5 फरवरी को यह यात्रा मध्यप्रदेश के इंदौर एवं 6 फरवरी को झाबुआ में रहेगी। 16000 किमी की जनसंदेशात्मक यह यात्रा अप्रैल में समाप्त होगी।
इस अवसर पर स्पंदन के अनिल सौमित्र, सुनिल मिश्र, विनोद गुर्जर, विनोद रोहिल्ला सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन गांधीवादी पत्रकार कुमार कृष्णन ने किया।

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भविष्‍य से जुड़ा हैं बालिका स्वास्‍थ्‍य का चिंतन ”स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज”

                              अटल बिहारी वाजेपयी वि‍वि भोपाल मप्र
                                 पत्रकारिता विभाग
                            भविष्‍य से जुड़ा हैं बालिका स्वास्‍थ्‍य का चिंतन
                                  ”स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज”
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भोपाल, 03/02/2017। बालिका के स्वास्‍थ्‍य का चिंतन समाज के विकास एवं देश के भविष्य से जुड़ा हुआ हैं। मौजूदा समय में हम इससे नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं। यह मानना है स्वस्थ भारत न्यास के अध्यक्ष आशुतोष कुमार सिंह का। वह अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे। स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज विषय पर यह कार्यक्रम स्पंदन व विवि के गर्भ तपोवन संस्कांर केंद्र के सहयोग से किया गया था। समारोह का शुभारंभ मॉ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्‍ज्‍वलित कर किया गया। इस अवसर पर डॉ अभय चौधरी, डॉ यशवंत मिश्रा, कुमार कृष्णन और विनोद कुमार मौजूद थे।  यहां बता दें, आशुतोष कुमार सिंह अपने सहयोगियों के साथ बालिकाओं के स्वस्थ  जागरूकता के मुद्दे को लेकर स्वस्थ भारत यात्रा पर हैं।

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श्री सिंह ने बालिका स्वस्थ पर जहां चिंता जाहिर की वहीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की अवधारणा पर विचार भी व्यंक्तय किया। उनका कहना था, सशक्त् देश की कल्पना बालिका स्वस्थ  को सुधारे बिना नहीं की जा सकती है। ध्यान देने की इसलिए भी जरूरत है, क्योंकि यह जहां देश का भविष्य है वहीं भाग्य विधाता भी है। सरकार द्वारा मुहैया कराई जा रही तमाम सुविधाओं के बाद भी स्थित जस की तस बनी रहने के पीछे शासन की उस व्यवस्था को जिंम्मे्दार ठहराया, जिसके तहत जैनेरिक दवाईयों को लगातार नजर अंदाज किया गया। खामियाजा यह रहा कि, जनता के स्वस्थ के नाम पर आवंटित बजट की अधिकतम राशि दबाईयों के नाम पर बड़ी वैश्विक कंपनियों की आय का जरिया बन रही है। इससे पूर्व विवि में पत्रकारिता विभाग के प्रभारी डॉ अनिल सौमित्र ने कहा कि, स्वस्थ का मुद़दा व्याक्ति और समाज के वि‍कास से जुड़ा है। जब तक हम सेहत मंद नहीं होंगे, तब तक हम किसी क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ सकते हैं। बालिकाओं के स्वस्थ का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। लेकिन अफसोस है, कि लगातार अनदेखी हो रही है।  डॉ अभय चौधरी ने समाज में स्थित महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता को लेकर महिलाओं को मानसिक और शारीरि‍क रुप से शसक्त होने की बात पर जोर दिया हैं। इस कार्यक्रम में  हिंदी विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्रगण उपस्थित थे।

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यात्रा के बारे में
स्वस्थ भारत यात्रा दिल्ली से आरंभ हुई और हरियाणा और राजस्थान का सफर पूरा करते हुए गुरूवार रात भोपाल पहुंची। 16 हजार किमी का सफर तय करने के बाद इस यात्रा का समापन अप्रैल 2017 में दिल्ली पहुंचकर होगा। रविवार यह यात्रा मप्र के औद्योगिक शहर इंदौर में पड़ाव डालेगी। इसके बाद 6 फरवरी को झाबुआ पहुंचेगी। यहां लोगों के साथ संवाद होगा और यात्रा के मकसद से जनसमुदाय को अवगत कराया जाएगा।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें

– आशुतोष कुमार सिंह
राष्‍ट्रीय समन्वयक
स्वस्थ भारत यात्रा
09891228151