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हरियाणा की छह बालिकाएं बनेंगी स्वस्थ् बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल अम्बेसडर

Yatra crossed Delhi, Gurugram and Jiapur. Current it is at Kota. In Gurugram, 6 girls were selected as goodwill ambassador. Mr Sunil Saini joined Swasth Bharat as it Gurugram Co-ordinator.

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SBA विशेष

स्वास्थ्य क्षेत्र में परवान चढ़ती उम्मीदें

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार इस बात की वकालत की है कि सरकार का आदर्श लक्ष्य सभी नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थ केयर प्रदान करना है. इस प्रतिबद्धता के अनुरूप ही सरकार ने तकनीकी तौर पर नेशनल हेल्थ एश्योरेंस मिशन के तहत नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थ केयर प्रदान करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य स्वीकार किया.

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समाचार

बजट 2016: नई स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की होगी शुरूआत, प्रति परिवार 1 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा

देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नागरिकों के उम्र के हिसाब से तीन भागों में विभक्त करना चाहिए। 0-25 वर्ष तक, 26-59 वर्ष तक और 60 से मृत्युपर्यन्त। शुरू के 25 वर्ष और 60 वर्ष के बाद के नागरिकों के स्वास्थ्य की पूरी व्यवस्था निःशुल्क सरकार को करनी चाहिए। जहाँ तक 26-59 वर्ष तक के नागरिकों के स्वास्थ्य का प्रश्न है तो इन नागरिकों को अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत लाना चाहिए। जो कमा रहे हैं उनसे बीमा राशि का प्रिमियम भरवाना चाहिए, जो बेरोजगार है उनकी नौकरी मिलने तक उनका प्रीमियम सरकार को भरना चाहिए।

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SBA विशेष

बजट का खेल और सबका स्वास्थ्य

आंकड़े बताते हैं कि देश की बड़ी आबादी के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं कितनी कम हैं। इससे यह भी साफ है कि यदि हमें सबको स्वास्थ्य का सपना साकार करना है तो इसके दस-बीस गुणे बजट की आवश्यकता पड़ेगी, जो वर्तमान स्थिति में संभव ही नहीं है। ऐसी स्थिति में क्या किया जाए यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है, जिसका जवाब ढूढ़ना प्रत्येक भारतीय व सरकार का कर्तव्य है । आखिर कब तक स्वास्थ्य के नाम पर बजट का खेल चलता रहेगा…आखिर कितना बजट चाहिए पूरे देश को स्वस्थ रखने के लिए…प्रत्येक वर्ष जो अरबों रूपये बहाए जा रहे हैं उन खर्चों का प्रतिफल तो कहीं दिख नहीं रहा है! आखिर कब तक बजट-बजट हम खेलते रहेंगे…

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SBA विशेष

स्वास्थ्य बजट अलग से क्यों नहीं…

कंट्रोल एम.एम.आर.पी कैंपेन से जुड़े स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का मानना है कि रेल बजट की तर्ज पर स्वास्थ्य के लिए भी अलग से बजट लाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार स्वास्थ्य पर और ध्यान देते हुए स्वास्थ्य बजट में और पारदर्शिता लाए। इसके लिए आवश्यक है कि रेल बजट की तरह स्वास्थ्य बजट भी अलग से पेश किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल देश में स्वास्थ्य पर किया जाने वाला यह खर्च विश्व के अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। दूसरा तर्क यह है कि सरकार द्वारा कम बजट और सुविधाएं दिए जाने के कारण लोगों को निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की ओर जाना पड़ता है। निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की भागेदारी आज सरकार से कहीं आधिक हो गई है। 2008-09 के एक अध्ययन के अनुसार देश के स्वास्थ्य-व्यय का 71.62 प्रतिशत निजी क्षेत्र से आता है और केवल 26.7 प्रतिशत सरकार द्वारा। इससे स्वास्थ्य सेवाएं मंहगी और गरीबों की पहुंच से दूर हो रही हैं।

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SBA विशेष दस्तावेज

बजट और स्वास्थ्यःस्वस्थ भारत का सपना

एक पुरानी और सर्वमान्य संकल्पना है कि पढ़ाई, दवाई और लड़ाई यानी कि शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय तीनों पूरी तरह निःशुल्क होने चाहिएं। स्वाधीन भारत के संविधान निर्माताओं ने संभवतः इसी बात को ध्यान में रख कर भारत को एक कल्याणकारी राज्य घोषित किया था और इसको ही ध्यान में रख कर सरकार हर वर्ष […]

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