SBA विशेष आयुष काम की बातें

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष: योग करते समय इन बातों का ध्यान रखें…

भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का अपना प्राचीन इतिहास रहा है। भारत हमेशा से चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। बीच के कुछ कालखंड को छोड़ दे तो भारत की प्राचीन चिकित्सकीय परंपरा हमेशा से सर्वोपरी रही है। वर्तमान समय में भी देश-दुनिया के लोग इस बात को मानने लगे हैं कि स्वस्थ रहना है तो भारतीय स्वास्थ्य पद्धतियों को अपना ही होगा। आयुर्वेद,यूनानी,होमियोपैथी, सिद्धा, प्राकृतिक चिकित्सा, योगा एवं सोवा-रिग्पा जैसी चिकित्सा पद्धतियों को संवर्धित करने एवं इनकी पहुंच आम-जन तक पहुंचाने के लिए ही भारत सरकार ने अलग से आयुष मंत्रालय बनाया है। इस कड़ी में आगे बढ़ते हुए भारत सरकार की पहल के कारण योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान जून 2015 में मिला। और पूरी दुनिया ने एक स्वर में 21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने पर अपनी सहमति प्रदान की। तब से योग का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

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SBA विशेष अस्पताल कैरियर

अब तो मेडिकल की महंगी पढाई मार गई…

स्वास्थ्य के मामले में भारत की स्थिति दुनिया में शर्मनाक  है। यहां तक कि चिकित्सा सेवा के मामले में भारत के हालात श्रीलंका, भूटान व बांग्लादेश से भी बदतर हैं। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य पत्रिका ‘ लांसेट’ की ताजातरीन रिपोर्ट ‘ ग्लोबल बर्डन आफ डिसीज’ में बताया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में हमारा देश दुनिया के कुल 195 देशों की सूची में  145वें स्थान पर है। रिपोर्ट कहती है कि भारत ने सन 1990 के बाद अस्पतालों की सेहत में सुधार तो किया है। उस साल भारत को 24.7 अंक मिले थे, जबकि 2016 में ये बढ़ कर 41.2 हो गए हैं। देश के आंचलिक कस्बें की बात तो दूर राजधानी दिल्ली के एम्स या सफदरजंग जैसे अस्पतालों की भीड़ और आम मरीजों की दुर्गति किसी से छुपी नहीं है। एक तो हम जरूरत के मुताबिक डाक्टर तैयार नहीं कर पा रहे, दूसरा देश की बड़ी आबादी ना तो स्वास्थ्य के बारे में पर्याप्त जागरूक है और ना ही उनके पास आकस्मिक चिकित्सा के हालात में  केाई बीमा या अर्थ की व्यवस्था है।  हालांकि सरकार गरीबों के लिए मुफ्त इलाज की कई योजनाएं चलाती है लेकिन व्यापक अशिक्षा और गैरजागरूकता के कारण ऐसी योजनाएं माकूल नहीं हैं।

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समाचार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सलाह, सभी स्वास्थ्यकर्मी हेपेटाइटीस बी का टीका जरूर लगवाएं

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे. पी. नड्डा के निर्देश पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हेपेटाइटिस बी संक्रमण के शिकार की आशंका  होने वाले सभी स्वास्थ्य कर्मियों को हेपेटाइटिस बी का टीका लगाने का निर्णय लिया है। ऐसे कर्मियों में डिलिवरी कराने वाले, सुई देने वाले और खून और रक्त उत्पाद के प्रभाव में आने वाले स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। ऐसे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए, जो पेशेवर खतरे की आशंका के दायरे में आते हैं और पूरी तरह प्राथमिक श्रृंखला की सूइयां नहीं ले पाए हैं उन्हें सरकार ने हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाने की सिफारिश की है।

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SBA विशेष दस्तावेज

NMC-2017: स्वास्थ्य शिक्षा की बदलेगी तस्वीर…

स्वास्थ्य शिक्षा किसी भी देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रुप से चलाने के लिए जरूरी घटक होता है। स्वास्थ्य व्यवस्था को गतिमान बनाने के लिए एक ऐसी विधायी व्यवस्था की जरूरत होती है जो समय के साथ-साथ कदम ताल मिलाए। यही सोचकर सरकार ने एनएमसी बिल जल्द से जल्द पास कराना चाहती है। ऐसा नहीं है कि भारत में इस बिल के पहले स्वास्थ्य शिक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं रही है। 6 दशक पहले भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम,1956 के अंतर्गत मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया का गठन किया गया था। इसके ऊपर देश की चिकित्सा सेवा एवं व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानको के अनुरूप रखने की जिम्मेदारी थी। लेकिन कालांतर में यह संस्था भ्रष्टाचार के गिरफ्त में आ गई और मेडिकल कॉलेजों से ऐसे लोग पास होकर निकलने लगे, जिनकी चिकित्सकीय योग्यता कटघरे में रही। हद तो उस समय हुई जब इस संस्था का अध्यक्ष एक मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने के बदले घुस लेने के आरोप में सीबीआई के हाथों पकड़ा गया। 23 अप्रैल, 2010 का वह दिन एमसीआई के इतिहास का काला दिन साबित हुआ। उस दिन अध्यक्ष केतन देसाई के संग-संग एमसीआई का ही एक पदाधिकारी जेपी सिंह एवं उक्त मेडिकल कॉलेज का प्रबंधक भी गिरफ्तरा हुआ। एमसीआई भ्रष्टाचार की कहानियां मीडिया में खूब सूर्खियों में रही। दूसरी ओर देश के कोने-कोने से एमसीआई को भंग करने की मांग की जाने लगी। आगे चलकर एमसीआई को भंग करना पड़ा। और आज यह कहानी आईएमसी अधिनियम-1956 की जगह एनएमसी बिल,2017 के रूप में अपने अंतिम निष्कर्ष की ओर है।

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समाचार

693826 आंगनबाड़ी केन्द्रों में  नहीं है शौचालय!

एसबीए डेस्क देश में भले ही चारो तरफ स्वच्छता की बात हो रही हो, लेकिन सच्चाई यह है कि अभी भी स्वच्छता के लिए बहुत कुछ करना बाकी है। देश के आधे से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इस बाद की पुष्टि सरकार न राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में […]

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समाचार

कैंसर ग्रस्त बच्चों के लिए सरकारी उपचार! 

एसबीए डेस्क किसी भी देश के लिए स्वास्थ्य एक बहुत बड़ा मसला होता है। लेकिन भारत में स्वास्थ्य का मसला राज्य व केन्द्र सरकारों के बीच लटक कर रह जाता है। इसका ताजा उदाहरण है केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री श्रीपद येशो नायक का राज्यसभा दिया गया वह लिखित उत्तर जिसमें उन्होंने […]

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