SBA विशेष दस्तावेज

NMC-2017: स्वास्थ्य शिक्षा की बदलेगी तस्वीर…

स्वास्थ्य शिक्षा किसी भी देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रुप से चलाने के लिए जरूरी घटक होता है। स्वास्थ्य व्यवस्था को गतिमान बनाने के लिए एक ऐसी विधायी व्यवस्था की जरूरत होती है जो समय के साथ-साथ कदम ताल मिलाए। यही सोचकर सरकार ने एनएमसी बिल जल्द से जल्द पास कराना चाहती है। ऐसा नहीं है कि भारत में इस बिल के पहले स्वास्थ्य शिक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं रही है। 6 दशक पहले भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम,1956 के अंतर्गत मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया का गठन किया गया था। इसके ऊपर देश की चिकित्सा सेवा एवं व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानको के अनुरूप रखने की जिम्मेदारी थी। लेकिन कालांतर में यह संस्था भ्रष्टाचार के गिरफ्त में आ गई और मेडिकल कॉलेजों से ऐसे लोग पास होकर निकलने लगे, जिनकी चिकित्सकीय योग्यता कटघरे में रही। हद तो उस समय हुई जब इस संस्था का अध्यक्ष एक मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने के बदले घुस लेने के आरोप में सीबीआई के हाथों पकड़ा गया। 23 अप्रैल, 2010 का वह दिन एमसीआई के इतिहास का काला दिन साबित हुआ। उस दिन अध्यक्ष केतन देसाई के संग-संग एमसीआई का ही एक पदाधिकारी जेपी सिंह एवं उक्त मेडिकल कॉलेज का प्रबंधक भी गिरफ्तरा हुआ। एमसीआई भ्रष्टाचार की कहानियां मीडिया में खूब सूर्खियों में रही। दूसरी ओर देश के कोने-कोने से एमसीआई को भंग करने की मांग की जाने लगी। आगे चलकर एमसीआई को भंग करना पड़ा। और आज यह कहानी आईएमसी अधिनियम-1956 की जगह एनएमसी बिल,2017 के रूप में अपने अंतिम निष्कर्ष की ओर है।

समाचार

693826 आंगनबाड़ी केन्द्रों में  नहीं है शौचालय!

एसबीए डेस्क देश में भले ही चारो तरफ स्वच्छता की बात हो रही हो, लेकिन सच्चाई यह है कि अभी भी स्वच्छता के लिए बहुत कुछ करना बाकी है। देश के आधे से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इस बाद की पुष्टि सरकार न राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में […]

समाचार

कैंसर ग्रस्त बच्चों के लिए सरकारी उपचार! 

एसबीए डेस्क किसी भी देश के लिए स्वास्थ्य एक बहुत बड़ा मसला होता है। लेकिन भारत में स्वास्थ्य का मसला राज्य व केन्द्र सरकारों के बीच लटक कर रह जाता है। इसका ताजा उदाहरण है केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री श्रीपद येशो नायक का राज्यसभा दिया गया वह लिखित उत्तर जिसमें उन्होंने […]