SBA विशेष फार्मा सेक्टर साक्षात्कार

अगले दो महीने में आपूर्ति की समस्या का निदान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : सचिन कुमार सिंह, सीइओ  पीएमबीजेपी

हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है कि जो स्टोर खुल चुके हैं, उनको इस तरह से बनाना कि वे कमर्सियली वायबल बन सके। स्टोर संचालकों की आमदनी इतनी हो सके कि वे अपने स्टोर को सार्थक तरीके से रन कर सकें। इससे और दोगुने जोश के साथ वे इस परियोजना को सफल बनाने में लगेंगे। कोई भी मानव सेवा तभी कर सकेगा, जब वह खुद सस्टेन कर पाए। इसके लिए हमने अपने सभी मार्केटिंग ऑफिसर्स के कहा है कि वे स्टोर्स की सेल बढाने में सहयोग करें। वे चिकित्सकों के पास जाएं। उन्हें जन औषधि के फायदे के बारे में बताएं। उन्हें यह सुनिश्चित करें कि जन औषधि की दवाइयां गुणवत्तायुक्त एवं सस्ती हैं। इतना ही नहीं वे जनता के बीच में भी जाएं।

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SBA विशेष अस्पताल कैरियर

अब तो मेडिकल की महंगी पढाई मार गई…

स्वास्थ्य के मामले में भारत की स्थिति दुनिया में शर्मनाक  है। यहां तक कि चिकित्सा सेवा के मामले में भारत के हालात श्रीलंका, भूटान व बांग्लादेश से भी बदतर हैं। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य पत्रिका ‘ लांसेट’ की ताजातरीन रिपोर्ट ‘ ग्लोबल बर्डन आफ डिसीज’ में बताया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में हमारा देश दुनिया के कुल 195 देशों की सूची में  145वें स्थान पर है। रिपोर्ट कहती है कि भारत ने सन 1990 के बाद अस्पतालों की सेहत में सुधार तो किया है। उस साल भारत को 24.7 अंक मिले थे, जबकि 2016 में ये बढ़ कर 41.2 हो गए हैं। देश के आंचलिक कस्बें की बात तो दूर राजधानी दिल्ली के एम्स या सफदरजंग जैसे अस्पतालों की भीड़ और आम मरीजों की दुर्गति किसी से छुपी नहीं है। एक तो हम जरूरत के मुताबिक डाक्टर तैयार नहीं कर पा रहे, दूसरा देश की बड़ी आबादी ना तो स्वास्थ्य के बारे में पर्याप्त जागरूक है और ना ही उनके पास आकस्मिक चिकित्सा के हालात में  केाई बीमा या अर्थ की व्यवस्था है।  हालांकि सरकार गरीबों के लिए मुफ्त इलाज की कई योजनाएं चलाती है लेकिन व्यापक अशिक्षा और गैरजागरूकता के कारण ऐसी योजनाएं माकूल नहीं हैं।

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SBA विशेष काम की बातें

Women with breast cancer may be spared chemotherapy, but…

These are legitimate concerns that need to be addressed in a systematic manner by the government as well as health care professionals. This would allow Indian patients to  benefit from the impact of this study allowing  early stage breast cancer patients  (Hormone receptor positive, Her2 negative, axillary node negative) with a medium range risk score in Oncotype Dx to safely avoid chemotherapy and its associated physical, emotional and economic burden

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समाचार

देश के 100 जिले हुए लिम्फेटिक फाइलेरिया से मुक्त, 156 जिलों में अभी भी है इस बीमारी का असर

लिम्फेटिक फाइलेरिया के संचरण और इस बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि भावी पीढियां इस बीमारी से मुक्त रहें। भारत ने लिम्फेटिक फाइलेरिया को समाप्त करने के प्रयासों तथा इस संदर्भ में किये जाने वाले शोध का हमेशा से स्वागत किया है। उक्त बातें केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी नड्डा ने  लिम्फेटिक फाइलेरिया को समाप्त करने के लिए आयोजित वैश्विक गठबंधन की 10वीं बैठक (जीएईएलएफ) का उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि लिम्फेटिक फाइलेरिया को समाप्त करने की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों व विकास संगठनों के सम्मिलित प्रयास से सर्वाधिक प्रभावित 256 जिलों में से 100 जिलों ने उन्मूलन लक्ष्य हासिल कर लिया है। संचरण मूल्यांकन सर्वे (टीएएस) द्वारा सत्यापन के बाद इन जिलों में बड़े पैमाने पर दी जाने वाली दवा कार्यक्रम को रोक दिया गया है। अभी ये जिले निगरानी में हैं।

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SBA विशेष काम की बातें

उपभोक्ता जागरुकता से ही बदलेगी स्वास्थ्य सेवा की तस्वीर

आयुर्वेद की जननी भारत भूमि का इतिहास बताता है कि यहां पर स्वास्थ्य सेवाओं को प्राचीन काल में परोपकार के नजरिए देखा जाता था। जब तक वैद्य परंपरा रही तब तक मरीज एवं वैद्य के बीच सामाजिक उत्तरदायित्व का बंधन रहा। लेकिन आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के उदय के बाद चिकित्सा एवं इससे जुड़ी हुई सेवाओं को क्रय-विक्रय के सूत्र में बांध दिया गया। चिकित्सकीय सेवा देने वाले एवं मरीज के बीच में उपभोगीय समझौते होने लगे। जैसे अगर आपको हर्निया का ऑपरेशन कराना है तो इतना हजार रुपये लगेगा, डिलेवरी कराना है तो इतना हजार रुपये। मरीज से कॉन्ट्रैक्ट फार्म पर हस्ताक्षर कराए जाने लगे। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बाजार आधारित हो गईं। यहां पर लाभ-हानी की कहानी गढ़ी जाने लगीं। ऐसे में यह जरूरी हो गया कि इन सेवाओं को कानून के दायरे में लाया जाए ताकि खरीदार को कोई बेवकूफ न बना सके, उनसे ओवरचार्ज न कर सके। गलत ईलाज न कर सके। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारतीय न्यायालय ने समय –समय पर दिए अपने आदेशों में यह स्पष्ट कर दिया है कि चिकित्सा संबंधी जितनी भी सेवाएं हैं उसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 के सेक्शन 2(1) के तहत अनुबंधित सेवा माना जायेगा। इस तरह स्वास्थ्य संबंधित सेवाएं कानून के दायरे में आ गईं।

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अगर मगर के डगर में स्वस्थ भारत की तस्वीर

किसी भी राष्ट्र-राज्य के नागरिक-स्वास्थ्य को समझे बिना वहां के विकास को नहीं समझा जा सकता है। दुनिया के तमाम विकसित देश अपने नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर हमेशा से चिंतनशील व बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रयत्नशील रहे हैं। नागरिकों का बेहतर स्वास्थ्य राष्ट्र की प्रगति को तीव्रता प्रदान करता है। इतिहास गवाह रहा है कि जिस देश के लोग ज्यादा स्वस्थ रहे हैं, वहां की उत्पादन शक्ति बेहतर रही है। और किसी भी विकासशील देश के लिए अपना उत्पदान शक्ति का सकारात्मक बनाए रखना ही उसकी विकसित देश की ओर बढ़ने की पहली शर्त है। ऐसे में भारत को पूरी तरह कैसे स्वस्थ बनाए जाए यह एक अहम् प्रश्न है। अथवा दूसरे शब्दों में कहें तो भारतीय नागरिकों को पूर्ण रूपेण स्वास्थ्य-सुरक्षा कैसे दी जाए आज भी एक यक्ष प्रश्न है। ऐसे में एक स्वास्थ्य चिंतक होने के नाते कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर मैं चिंतन-मनन करता रहा हूं। हमें लगता है कि सरकार इन सुझाओं पर ध्यान दें तो इस दिशा में और बेहतर परिणाम आ सकते हैं।

स्वास्थ्य ही क्यों हमारी किसान नीति भी कहां कुछ कर पा रही है। जो किसान हमें अनाज उत्पादित कर के देता है। जिसकी मेहनत से हम अपना पेट पालते हैं। उसकी मेहनत का उचित मूल्य आज तक हम नहीं दे पाएं हैं। गर हम सरकारी आंकड़ों को माने जिसके अनुसार देश में 65 फीसद किसान हैं तो इसका मतलब यह हुआ कि देश के आधे से ज्यादा लोग किसानी पर निर्भर हैं। 35 फीसद लोग नौकरी, उद्योग धंधे आदि पर निर्भर हैं। 35 फीसद लोग जो उत्पाद बनाते हैं उसका ग्राहक भी उनके साथ-साथ किसान भी है। लेकिन यहां पर भी गजब की धोखाधड़ी है। किसान के उत्पाद का मूल्य सरकार तय करती है और उसके उत्पाद से उत्पादित वस्तु का मूल्य साहूकार यानी उद्योगपति तय करता है। बाजार में आज 20 रुपये में 4 किलो आलू उपलब्ध है। लेकिन आलू से बने 40 ग्राम चिप्स की कीमत आज भी 10 रुपये है। मेहनत किसान करे और डीपीएस स्कूल में पढने उद्योगपति का लड़का जाए!

गजब का यह विकास मॉडल है! इन विषयों पर बात की जाए तो लंबी बात की जा सकती हैं। मूल बात यह है कि विकास के मौजूदा मॉडल को भारतीय संदर्भ में परिभाषित किए जाने की सख्त जरूरत है। नहीं तो सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत सिर्फ चिड़िया बन कर रह जायेगा, वह भी बिना हाड़ मांस के! गर 2018 में इन विषयों पर हम थोड़ा भी संजीदा गो गए तो निश्चित ही स्वस्थ भारत की दिशा में एक बेहतर कदम होगा!

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यात्रा रपट समाचार स्वस्थ भारत अभियान स्वस्थ भारत यात्रा

बेटियों का स्वस्थ होना स्वस्थ समाज की पहली कसौटी हैः डॉ अचला नागर

यात्रा दल को मिला डॉ अचला नागर का आशीर्वाद
स्वस्थ भारत यात्रा दल ने निकाह, बागवान सहित दर्जनों फिल्म लिखने वाली वरिष्ठ लेखिका डॉ अचला नागर से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने यात्रा के लिए अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि बेटियों का स्वास्थ्य बहुत जरूरी है। वर्तमान स्थिति में बेटियों के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां स्वस्थ नहीं होगी तब तक स्वस्थ देश अथवा समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है।

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यात्रा रपट समाचार स्वस्थ भारत अभियान स्वस्थ भारत यात्रा

स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

आंख नहीं, दुनिया देखती हैं कलगी रावल
• स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर
• गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर एवं बापूनगर अहमदाबाद के वाणिज्य महाविद्यालय का यात्रा दल ने किया दौरा, बालिकाओं को दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश
• शहीद ऋषिकेश रामाणी को दी श्रंद्धांजली

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यात्रा रपट समाचार स्वस्थ भारत अभियान स्वस्थ भारत यात्रा

6 छात्राओं को बनाया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

झाबुआ की 6 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर

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स्वस्थ भारत यात्रा २०१६-१७ सूरत पहुचीं

गुरुग्राम, जयपुर, कोटा, भोपाल, इंदौर, झाबुआ, अहमदाबाद के बाद स्वस्थ भारत यात्रा #SwasthBharatYatra आज सूरत पहुँच चुकी है।

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