आयुष समाचार

अपनी बदहाली पर रो रहा है 90लखिया होम्योपैथी लैब, पांच वर्ष गुजर गए एक भी कर्मचारी नहीं बहाल हुआ

इस प्रयोगशाला की बिल्डिंग के निर्माण में करीब 90 लाख रुपये की लागत आई थी उद्द्येश था कि पिछड़ती प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति होम्योपैथी को एक नया मुकाम देना। लेकिन इसे अधिकारियों की लापरवाही ही कहेंगे कि 5 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक इस प्रयोगशाला में रिसर्च के लिए पदों का सृजन नहीं हो पाया है।
उत्तर प्रदेश होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड के सचिव डॉ विक्रमा प्रसाद ने बताया कि ये भारत में दूसरे नंबर की प्रयोगशाला है। अभी तक किसी कारणवश प्रयोगशाला में पदों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इसके कारण अभी तक प्रयोगशाला की शुरुआत नहीं हो पाई हैं। जल्द से जल्द पदों को सृजित कर प्रयोगशाला को शुरू किया जाएगा।