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बेटियों का स्वस्थ होना स्वस्थ समाज की पहली कसौटी हैः डॉ अचला नागर

स्वस्थ भारत यात्रा दल का मुंबई में हुआ स्वागत

मुंबई की दो बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर

मीरा-भाइंदर एवं मालाड में हुए आयोजन

बॉलीवुड के रचनाकारों से यात्रा दल की हुई मुलाकात

प्रथम चरण में यात्रा दल ने पूरी की 2700 किमी की यात्रा, दूसरा चरण कन्याकुमारी तक
स्वस्थ भारत यात्रा के प्रथम चरण में 5 राज्यों की 29 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर

मुंबई. 12.2.17

 

यात्रा दल को मिला डॉ अचला नागर का आशीर्वाद
स्वस्थ भारत यात्रा दल ने निकाह, बागवान सहित दर्जनों फिल्म लिखने वाली वरिष्ठ लेखिका डॉ अचला नागर से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने यात्रा के लिए अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि बेटियों का स्वास्थ्य बहुत जरूरी है। वर्तमान स्थिति में बेटियों के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां स्वस्थ नहीं होगी तब तक स्वस्थ देश अथवा समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि आज बेटियों के लिए सारे दरवाजे खुले हुए हैं, बस जरूरत है कि वे सार्थक एवं अनुशासित तरीके से आगे बढ़ें। अपनी ताकत को समझें और समाज में अपनी आवाज को बुलंद करें। ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ राष्ट्रीय यात्रा की परिकल्पना की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां सेहतमंद नहीं होंगी सेहतमंद समाज का सपना अधूरा ही रहेगा। एक घंटे तक चली बातचीत में यात्रा दल के वरिष्ठ यात्री एवं वरिष्ठ पत्रकार लतांत प्रसून ने उनके फिल्मी करियर को लेकर कई सवाल पूछे, जिसका उन्होंने सहजता से उत्तर दिया।
सरोज सुमन, डॉ. सागर एवं शेखर अस्तित्व से भी हुई मुलाकात
मुंबई प्रवास के दौरान यात्रा दल ने जाने-माने संगीतकार सरोज सुमन, गीतकार शेखर अस्तित्व एवं डॉ. सागर से मुलाकात की। सभी ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की अभियान के लिए यात्रा दल को शुभकामनाएं दी। इस दौरान यात्रा दल ने कवयित्री रीता दास राम से भी मुलाकात की।

 

रत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा शुरू हुई स्वस्थ भारत यात्रा का मुंबईकरों ने जोरदार तरीके से स्वागत किया। यात्रा दल सबसे पहले मीरा-भाइंदर के विवेकानंद किड्स स्कूल पहुंचा, जहां पर बच्चों एवं उनको अभिभावकों के बीच में स्वास्थ्य चर्चा हुई। यहां पर जलधारा एवं बेटी बचाओं बेटी पढाओं की टीम ने यात्रा दल का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा दल ने दूसरा कार्यक्रम मुंबई के मालाड (ईस्ट) में किया। इस अवसर पर मुंबई की दो बालाकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। शरन्या सिगतिया और प्रीति सुमन को इस अभियान का गुडविल एंबेसडर बनाया गया। प्रीति सुमन जहां एक ओर निर्देशन के क्षेत्र में अपना नाम रौशन कर रही हैं वहीं उनकी गायकी के चर्चे भी चहुंओर हैं। शरन्या सिगतिया की उम्र अभी 12 वर्ष ही है लेकिन उन्होंने अपनी कक्षा में बेहतरीन परफॉमेंस दिया है। मालाड में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वस्थ भारत (न्यास) के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आज समय आ गया है कि हम अपनी सेहत को लेकर चिंतनशील हों। सेहत की चिंता हम सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। सेहत से बड़ा पूंजी कुछ और नहीं है। यात्रा दल के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत जी ने कहा कि महाराष्ट्र एवं गुजरात की धरती पर माताओं एवं बहनों के प्रति समाज ज्यादा संवेदनशील है। उन्होंने निगम का चुनाव लड़ रहीं 
संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा से कहा कि आप जीत के बाद स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के इस संदेश को और व्यवस्थित तरीके से घर-घर ले जाएं. इस अवसर पर मालाड पूर्व के निगम पार्षद ज्ञानमूर्ति शर्मा ने दवाइयों में मची लूट के बारे में लोगों को जागरूक किया। इस अवसर पर कमलेश शाह, वरिष्ठ लेखिका अलका अग्रवाल सिगतिया, विनोद रोहिल्ला सहित सैकड़ों महिलाएं उपस्थित थीं। महाराष्ट्र में निगम चुनाव के गहमागहमी के बीच में मालाड के स्थानीय लोगों द्वारा आयोजित इस स्वास्थ्य चर्चा के लिए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।

यात्रा के प्रथम चरण में 29 बालिकाएं बनीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर
 2700 किमी की प्रथम चरण की यात्रा में यात्री दल ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज अभियान से 29 बालिकाओं को जोड़ा। इन्हें इस अभियान का गुडविल एंबेसडर बनाया गया। हरियाणा में 6, राजस्थान में 4, मध्यप्रदेश में 15, गुजरात में 2 एवं महाराष्ट्र में 2 बालिकाओं को गुडविल एंबेसडर बनाकर सम्मानित किया गया है। 
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा ‘भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वें वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नंई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप, वर्ल्ड टीवी न्यूज़ सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है। 13 फरवरी को यह यात्रा पुणे होते हुए कन्याकुमारी जायेगी। जहां पर दूसरे चरण की यात्रा समाप्त होगी। 16000 किमी की जनसंदेशात्मक यह यात्रा अप्रैल में समाप्त होगी।
#SwasthBharatYatra #SwasthBalikaSwasthSamaj #KnowYourMedicine#SwasthBharatAbhiyan #GSDS

यात्री दल से संपर्क
9891228151, 9811288151

स्वस्थ भारत यात्रा २०१६-१७ सूरत पहुचीं

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गुरुग्राम, जयपुर, कोटा, भोपाल, इंदौर, झाबुआ, अहमदाबाद के बाद स्वस्थ भारत यात्रा #SwasthBharatYatra आज सूरत  पहुँच चुकी है।  रात्रि विश्राम के बाद यहाँ कल स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के अन्तर्गत बालिका स्वास्थ को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. यहाँ से यात्रा अपने अगले पड़ाव मुम्बई के लिए प्रस्थान करेगी।  मुम्बई में यात्रा २ दिनों तक रहेगी।  मुम्बई में यात्रा का पहला चरण पूरा होगा और द्वितीय चरण आरम्भ होगा।  वहां से यात्रा में लतांत प्रसून जी भी जुड़ जायेंगे।

यात्रा टीम दूरभाष : +९१-९८९१२२८१५१

एंटीबायोटिक्स खाने का सीधा असर दिमाग पर

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लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स का सेवन वैसे तो साइड इफेक्ट्स को जन्म देता है लेकिन सबसे गंभीर है कि इन दवाओं को खाने से इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है।

यह सामने आया है हाल ही में जर्नल सेल रिपोट्र्स में प्रकाशित की गई एक रिसर्च में। बर्लिन में मैक्स डेलब्रक सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन में यह रिसर्च की गई है। इसमें बताया गया है कि दिमाग को तेज रखने के लिए आंत में हैल्दी बैक्टीरिया की आवश्यकता होती है।

एक विशेष प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिका बेक्टीरिया और दिमाग के बीच मध्यस्थता का काम करती है। आंत और ब्रेन से निकलने वाले हार्मोन सीधा तंत्रिका संपर्क के सहारे एक-दूसरे के साथ संवाद कायम करते हैं।

इस स्टडी में रिसर्चर्स ने एंटीबायोटिक के सहारे चूहे की आंत के माइक्रोबायोम (आंतों में मौजूद जीवाणु) को खत्म कर दिया। एंटीबायोटिक इलाज न पाने वाले चूहों की तुलना में इलाज पाने वाले चूहों के मस्तिष्क के हिप्पोकैंपस में बेहद कम संख्या में नई मस्तिष्क कोशिकाओं (मेमोरी के लिए महत्वपूर्ण) का निर्माण हुआ।

कम कोशिकाओं के निर्माण से इन चूहों की मेमोरी डिफेक्ट पाया गया। साथ ही रिसर्चर्स ने इन चूहों में विशेष प्रतिरक्षा कोशिकाओं एलवाई6सी (एचआई) मोनोसाइट की संख्या में भी कमी दर्ज की।

साभार : राजस्थान पत्रिका

 

“कायाकल्‍प पखवाड़ा”

The Union Minister for Health & Family Welfare, Shri J.P. Nadda launched the “Swachchta Fortnight”, and reviewed the Kayakalp initiative, at AIIMS, in New Delhi on May 20, 2016.

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री द्वारा शुरु किया गया “कायाकल्‍प पखवाड़ा” पूरे देश में केंद्र सरकार के अस्‍पतालों में मनाया जाएगा।

श्री जगत प्रकाश नड्डा, स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने आज यहां बताया कि “माननीय प्रधानमंत्री द्वारा शुरु किए गए स्‍वच्‍छ भारत अभियान के विजन और सिद्धांत को कार्यान्‍वित करने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा केंद्रों में स्‍वच्‍छता तथा साफ-सफाई के लिए प्रतिमान स्‍थापित करने के लिए विगत वर्ष कायाकल्‍प शुरु किया था। सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा केंद्रों में संपूर्ण “स्‍वच्‍छता” से संबंधित पहल का लक्ष्‍य जन स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा केंद्रों में प्रयोक्‍ताओं का भरोसा हासिल करना, उच्‍च गुणवत्‍ता वाली सेवाएं प्रदान करना तथा समूह में कार्य करने की भावना को प्रोत्‍साहन देना है।” उन्‍होंने यह भी बताया कि इस पहल से देश में प्रत्‍येक जन स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा केंद्रों को और अधिक साफ रखने में मदद हेतु उत्‍कृष्‍ट मानक तय करने में प्रोत्‍साहन मिलेगा।

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ‘कायाकल्प पखवाड़ा’ की शुरुआत के अवसर पर अपने उद्गार व्‍यक्‍त कर रहे थे जिसे स्‍वच्‍छ भारत अभियान के अंतर्गत कायाकल्‍प पहल में तेजी लाने की दृष्‍टि से 20 मई, 2016 से 3 जून, 2016 तक केंद्र सरकार के विभिन्‍न अस्‍पतालों में पूरे देश में मनाया जाएगा। श्री नड्डा ने एम्स, नई दिल्‍ली में कायाकल्‍प पखवाड़े की शुरुआत की। श्री नड्डा ने बताया कि इस पखवाड़े के दौरान चलाए जाने वाले विभिन्‍न कार्यकलापों के एक भाग के रूप में मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी पूरे देश में केंद्र सरकार के विभिन्‍न अस्‍पतालों का निरीक्षण करेंगे ताकि मौजूदा स्‍थिति का जायजा लिया जा सके और स्‍वच्‍छता अभियान में तेजी लाई जा सके। राज्‍यों से अपने-अपने राज्‍यों में ऐसे ही अभियान चलाने का अनुरोध किया गया है।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने एम्‍स के परिसर में और उसके बाहर स्‍वच्‍छता और सफाई को बनाए रखने संबंधी कार्यों की समीक्षा की और ओटी, आईसीयू, आपातकालीन और निजी वार्डों सहित विभिन्‍न वार्डों का दौरा किया। केंद्रीय मंत्री ने प्रोटोकॉल की समीक्षा के लिए निपटान क्षेत्रों और शौचालयों का भी दौरा किया। इस संबंध में जिस प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है और इसमें किस प्रकार और सुधार लाया जाए इस संबंध में सुझाव प्राप्‍त करने के लिए निदेशक तथा विभिन्‍न सुविधा केंद्रों / वार्डों के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारियों तथा चिकित्‍सकों के साथ श्री नड्डा ने एक बैठक की। कायाकल्‍प के एक भाग के रूप में भवन के भीतर और बाहर सेवाओं को बनाए रखने के लिए मानक और प्रोटोकॉल का निर्धारण; विभिन्‍न स्‍थानों पर लांड्री और खाद्य जैसी सहायक सेवाएं प्रदान करना; मानकों के अनुसार अपशिष्‍ट प्रबंधन करना और संक्रमण नियंत्रण उपाय लागू करना। इन क्षेत्रों में की गई प्रगति की आवधिक समीक्षा और निगरानी के लिए समितियों और उप-समितियों का गठन किया गया है।

अपने दौरे के दौरान श्री नड्डा ने रोगियों से बातचीत की और कायाकल्‍प पहल पर उनसे जानकारी ली तथा उनसे इस बारे में सुझाव भी लिए कि देश के इस प्रमुख अस्‍पताल में स्‍वच्‍छता के मानकों में और अधिक सुधार किस प्रकार लाया जा सकता है। उन्‍होंने कहा, “मुझे यह देखकर खुशी हुई है कि रोगियों और उनकी सेवा करने वालों ने हमारे द्वारा निर्धारित मानदंडों के प्रति संतोष दर्शाया है। यह हमारे कठिन परिश्रम की पुष्‍टि करता है“।

साहब! एड्स नहीं आंकड़ों का खेल कहिए…

भोग-बाजार के विस्तार ने पारिवारिक ढांचे को तहस-नहस कर दिया, संबंध और रिश्तों के अनुशासन को बाजार के हवाले कर दिया और जरूरतों को वस्तुवादी बना दिया। फिर हम खुद भी बाजार के लिए एक वस्तु बन गए! वर्तमान में बीमारियों में सबसे बड़े ब्रांड के रूप में एड्स की पहचान है! पहले भोगी बना कर बाजार ने कमाई की और अब उसके दुष्परिणाम को बेच कर बाजार अपना विस्तार पा रहा है। बाजार-विस्तार को सूक्ष्मता से निरीक्षण करने पर मालूम चलता है कि बाजार ने हमें बीमारू किस तरह से बना दिया है।

एड्स के अर्थशास्त्र को समझने की जरूरत है...

एड्स के अर्थशास्त्र को समझने की जरूरत है…

भारतीय सांस्कृतिक चेतना का विस्तार सुखानुभूति पर आधारित रही है। सुख की खोज भारतीयों को अध्यात्म से जोड़ता है। जब मन-मस्तिष्क अध्यात्म की सीमा में प्रवेश करता है, तब आप मानवतावादी हो जाते हैं, बल्कि सही मायने में धार्मिक हो जाते हैं। क्या करें और क्या न करें की सीमा को समझने लगते हैं। भारतीयों के इस स्वभाव को आधुनिक बाजार ने बहुत ही सूक्ष्मता से समझा है। हमारे शब्दों के माध्यम से ही वह हमें मात देने की जुगत में है। सुख-खोजी भारतीयों को सुख-भोगी बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बाजार ने जाल फैलाया है। ये दोनों शब्द प्रथमदृष्ट्या एक-से ही लगते हैं। इसी भ्रम का फायदा उठा कर बाजार ने सुख को बाजारू बना दिया, एक वस्तु में तब्दील कर दिया, एक आकार दे दिया। जब भाव को कोई आकार मिल जाता है तो स्वाभाविक रूप से हमारी इंद्रियां उस आकार के साथ खुद को जोड़ने के लिए चुंबक की तरह दौड़ी चली जाती हैं। इसी स्वाभाविकता को बाजार ने अपने विस्तार का सबसे सुगम हथियार बनाया और हम अपने भावों को वस्तुपरक स्वरूप देते गए।
आज चारों ओर बाजार का दबदबा है। उसने हमारे मनोभाव को इस कदर गुलाम बना लिया है कि हम उसके कहे को नकार नहीं पाते। वह जो कहता है, वही जीवन-आधार और सुख का मानक हो जाता है! इसी बाजार ने एक बीमारी दी, जिसको वर्तमान में एड्स के नाम से जाना जाता है। इसके लिए बाजार ने बहुत ही शातिर तरीके से सुख-खोजी प्रवृत्ति को सुख-भोगी बना दिया है! भोग-बाजार के विस्तार ने पारिवारिक ढांचे को तहस-नहस कर दिया, संबंध और रिश्तों के अनुशासन को बाजार के हवाले कर दिया और जरूरतों को वस्तुवादी बना दिया। फिर हम खुद भी बाजार के लिए एक वस्तु बन गए! वर्तमान में बीमारियों में सबसे बड़े ब्रांड के रूप में एड्स की पहचान है! पहले भोगी बना कर बाजार ने कमाई की और अब उसके दुष्परिणाम को बेच कर बाजार अपना विस्तार पा रहा है। बाजार-विस्तार को सूक्ष्मता से निरीक्षण करने पर मालूम चलता है कि बाजार ने हमें बीमारू किस तरह से बना दिया है।

भारत में एड्स का पहला मामला सन 1986 में पाया गया था। यह वह दौर था, जब भारत के दरवाजे बाजार के लिए खुलने वाले थे। वैश्विक शक्ति एकध्रुव्रीय होने की कगार पर पहुंच चुकी थी। हुआ भी यही। अगले पांच सालों में सोवियत संघ का पतन हुआ और बाजार-विस्तार की गति और तीव्र हुई। भारत में उदारीकरण के वायरस का तेजी से विस्तार हुआ और सुख-खोजी भारतीयों को सुख-भोगी बनाने का एक बड़ा प्लेटफार्म मिल गया। एड्स नियंत्रण विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी 2013-14 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि 20.89 लाख लोग एड्स से प्रभावित हैं।

सवा अरब से ज्यादा की आबादी वाले देश में जिस बीमारी से तकरीबन इक्कीस लाख लोग प्रभावित है, उसे रोकने के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तृतीय चरण (2007-12) के दौरान विभिन्न बजटीय स्रोतों के माध्यम से 6,237.48 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे और अब चौथे चरण के लिए 13,415 करोड़ रुपए का बजट अनुमोदित हुआ है। इसमें सरकारी बजटीय सहयोग, विश्व बैंक बाह्य सहायता प्राप्त सहयोग और वैश्विक निधि और अन्य विकास साझेदारों के अतिरिक्त बजटीय सहयोग शामिल है। सच्चाई यह है कि विगत अट्ठाईस वर्षों में बाजार ने पहले भोगी बनाया फिर रोगी बनाया और दोनों ही स्थिति में खुद को विस्तारित करने में सफल रहा!

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…तो हमारे अधिकारी चाहते हैं कि आंकड़ों में एड्स बना रहे !

एड्स का समाजशास्त्र

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दिल्ली चुनाव में स्वास्थ्य होगा मुख्य मुद्दा!

आआपा ने बनाया स्वास्थ्य को चुनावी मुद्दा

दिल्ली की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी आम आदमी पार्टी ने दिल्ली वालों के सामने अपनी स्वास्थ्य योजनाओं का पिटारा खोला है। पिछले दिनों इस बावत अपनी नीति का खुलासा करते हुए आआपा ने कहा है कि यदि उसकी सरकार बनती है तो वो दिल्ली वासियों को अस्पतालों में 30,000 नए विस्तर की व्यवस्था करेगी।

अरविंद केजरीवाल, संयोजक आम आदमी पार्टी

अरविंद केजरीवाल, संयोजक आम आदमी पार्टी

 

नीचे आम आदमी पार्टी द्वारा भेजे गए उस प्रेस रिलीज को साझा कर रहे हैं।

अस्पतालों में 30,000 नए बिस्तरों , 500 नए स्कूलों और 20 नए कॉलेज शुरू करने का आम आदमी पार्टी का वादा
दिल्ली डायलॉग श्रृंखला के तहत आम आदमी पार्टी ने शिक्षा व स्वास्थ्य से जुड़े पार्टी की नीतिगत ढ़ांचे का खुलासा किया। एक प्रेस कांफ्रेस में आम आदमी पार्टी के नेता आशीष खेतान ने बताया कि दिल्ली में सत्ता में आने के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इन दोनों क्षेत्रों में बेहतर बदलाव लाएगी।

आम आदमी पार्टी ने शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी आगामी योजनाओं का खुलासा ऐसे वक्त में किया जब भाजपा सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी खर्चे में दस फीसदी की कटौती की है।

आम आदमी पार्टी घर-घर जाकर स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में जरूरी बदलाव के लिए लोगों से राय लेगी। 10 जनवरी 2015 से शुरू हो रहे इस अभियान के तहत अगले 10 दिनों में आम आदमा पार्टी के नेता 16 विधानसभा क्षेत्रों- ग्रेटर कैलाश, मालवीय नगर, जंगपुरा, रिठाला, शालीमार बाग, मॉडल टाउन, हरि नगर, तिलक नगर, जनकपुरी, मटियाला, राजिंदर नगर, कृष्णा नगर, कोंडली, उत्तम नगर, कस्तूरबा नगर और आरके पुरम में जाकर आम लोगों से इन दोनों मुद्दे पर संवाद करेंगे। इस अभियान में पार्टी वरिष्ठ नेता आनंद कुमार, योगेंद्र यादव, आशीष खेतान, अतिशि मर्लेना, अजीत झा और सत्येंद्र जैन शामिल होंगे। ये नेता स्थानीय आरडब्ल्यू एसोसिएशन के पदाधिकारियों से स्वास्थ्य और शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर उनकी प्रतिक्रिया लेंगे। इन बैठकों के अलावा, सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के उम्मीदवार आरडब्ल्यूए से  स्वास्थ्य और शिक्षा से संबंधित बातचीत का भी आयोजन करेंगे।

 

आम आदमी पार्टी की स्वास्थ्य संबंधी नीति निम्न होगी:-

  • स्वास्थ्य सेवा पर कुल बजटीय आवंटन और उसपर खर्च होने वाली राशि 2,700 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 4000 करोड़ रुपये की जाएगी।
  • डॉक्टरों के 4000 और सहयोगी स्टाफ के 15,000 रिक्त पद भरे जाएंगे। ठेके व अस्थायी नियुक्तियों का प्रावधान समाप्त कर दिया जाएगा।
  • शिशुओं व युवाओं बच्चों के लिए रोग प्रतिरक्षक (Immunization) शत प्रतिशत निशुल्क
  • दिल्ली में फिलहाल 300 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। आम आदमी पार्टी 900 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलेगी। इस तरह दिल्ली में 1200 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के बनाने से द्वितीयक और तृतीयक अस्पतालों पर भार कम हो जाएगा।
  • द्वितीयक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या 10,600 से बढ़ाकर 40,000 की जाएगी। इसमें 4000 बिस्तर विशेष रूप से प्रसूति बेड भी होगा। इस तरह आम आदमी पार्टी दिल्ली में 100% संस्थागत प्रसव का प्रावधान सुनिश्चित करेगी।
  • आम आदमी पार्टी दिल्ली के प्रत्येक अस्पताल में नेत्र और दंत चिकित्सा देखभाल केन्द्रों की स्थापना भी करेगी।
  • सभी अस्पतालों में 24 घंटे की हेल्पलाइन की सुविधा होगी। हेल्पलाइन नंबर संचालन के लिए योग्य कर्मचारियों को रखा जाएगा ।
  • दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा के प्रावधान और स्वास्थ्य सेवाओं को कुशलता पूर्वक सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली के सभी निवासियों के लिए स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाएगा।
  • भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए दवाइयों और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया को केंद्रीकृत किया जाएगा।
  • सभी अस्पतालों को सौ फीसदी कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। इससे जुड़ी एक पायलट परियोजना पहले से ही LNJP अस्पताल में एएपी सरकार द्वारा शुरू की जा चुकी है।
  • नि: शुल्क एम्बुलेंस सेवा की सुविधा सभी अस्पतालों में उपलब्ध होगी। यहां तक की निजी अस्पतालों में भी यह सुविधा होगी। पिछली फरवरी में आम आदमी पार्टी का सरकार ने आईसीयू सहित 100 एंबुलेंस का आदेश दिया था ।
  • घर से अस्पताल और अस्पताल से श्मशान के लिए नि: शुल्क शव वाहन सेवा।
  • जेनेरिक दवाओं के लिए अधिक दुकाने खोली जाएंगी।
  • ऑफिस जाने वाले मरीजों की सुविधाओं का ध्यान रखते बाह्य मरीज अस्पतालों (ओपीडी) के कार्य अवधि में बढ़ोतरी होगी। सभी अस्पतालों में ऑनलाइन अपव्यांटमंट की सुविधा भी होगी।
  • दिल्ली के अस्पतालों में आपातकालीन सुविधाओं में विस्तार किया जाएगा। सभी अस्पतालों में इमरजेंसी बिस्तरों की संख्या में 10 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी होगी।
  • 500 सस्ती दवा दुकानों पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए नि: शुल्क दवाओं की सुविधा होगी।
  • 38 अस्पतालों में diagnostic centers है। इन केंद्रों की क्षमता बढ़ाई जाएगी और 10 नए diagnostic centers खोले जाएंगे।

 

 

 

मर्ज का ईलाज करेगा ‘ऋषि‍केश-एम्स’

newlogo_aiims rishikeshAshutosh Kumar Singh for Swasthbharat.in

 

भारत की स्वास्थ्य नीति हमेशा से बीमारों को ठीक करने के इर्द-गीर्द रही है। नई सरकार ने पहली बार बीमारी को ठीक करने की दिशा में सकारात्मक पहल की है। भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (एम्‍स) ऋषि‍केश देश का पहला नागरि‍क-स्‍वास्‍थ केन्द्र होगा, जो उपचार की अपेक्षा नि‍रोधात्‍मक पद्धति‍ पर केन्‍द्रि‍त होगा। एम्स, ऋषि‍केश का प्रयास होगा कि ‍यह लोगों का नि‍रोधात्‍मक स्‍थि‍ति‍ में उपचार करे। एम्‍स-ऋषि‍केश में मीडिया को सम्‍बोधि‍त करते हुए केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा-  ‘जब लोग पहाड़ों पर बीमार पडते है, तो अस्‍पताल तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी समस्‍या होती है। प्राय: बीमारी इतनी गम्‍भीर नही होती, किंतु अस्‍पताल तक आते-आते मरीज की हालत बि‍गड़ जाती है। इस समस्‍या को हल करने के लि‍ए मैंने एम्‍स के अधि‍कारि‍यों को निर्देशि‍त कि‍या है कि‍ वे मरीजों का एक डाटा बैंक तैयार करें तथा ई-मेल और मोबाईल के जरि‍ए उनसे संवाद कायम करने की प्रणाली काम में लाए।’

स्‍वास्‍थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि‍ लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचे, यह उनकी कार्ययोजना में प्रमुखता से शामिल है। एम्‍स ऋषि‍केश को एक पाइलट परि‍योजना के रूप में पूरा करने का गौरव प्रदान हुआ है। एम्स ऋषि‍केश का पंजीकरण पटल मूलभूत डाटा का स्रोत होगा। इसमें आने वाले प्रत्‍येक रोगी का ई-मेल अथवा मोबाइल नम्‍बर कम्‍प्‍यूटर में दर्ज कि‍या जाएगा। नि‍रन्‍तर अन्‍तराल पर ई-मेल अथवा संदेश के जरि‍ए अस्‍पताल संवाद कायम करेगा। रोगी को नि‍यमि‍त अंतराल पर स्‍वास्‍थ्‍य जांच शि‍वि‍‍रों के बारे में अग्रि‍म रूप से भी सूचि‍त कि‍या जाएगा। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने बताया कि‍ सम्‍पर्क में रहने की यह पहल पारस्परिक आधार पर रहेगी।

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि‍, ‘ईलाज से परहेज बेहतर है’ का सि‍द्धान्‍त सरकार की स्‍वास्‍थ्‍य नीति‍ का केन्‍द्र बि‍न्‍दु है। प्रत्‍येक चि‍कि‍त्‍सक को बताया जाएगा कि ‍वे रोगि‍यों को समुचि‍त जीवन शैली अपनाने के लि‍ए प्रेरि‍त करें,जि‍ससे मरीजों का आना जरूरी न हो। मैंने एम्‍स के सभी ओ.पी.डी. स्‍टाफ को भी निर्देशि‍त कि‍या है कि ‍वे सम्‍बंधि‍त वि‍भाग के कार्यक्रमों के बारे में सूचनाओं को लगातार प्रदर्शि‍त करें। इस प्रकार ईलाज का इन्‍तजार कर रहे मरीजों व उनके रि‍श्‍तेदारों को रोग के बारे में गहरी जानकारी मि‍लेगी, जि‍सके चलते मरीज अस्‍पताल में आया और रोग की रोकथाम कैसे हो, इसका भी उन्‍हें पता चल सकेगा।’
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि, ‘मैंने इस एम्‍स के वि‍स्‍तार के लि‍ए पहले ही योजनायें तैयार की हुई है और यह केन्‍द्र मेरे दि‍ल में बसा है, क्‍योंकि‍ ये एम्‍स ऐसे क्षेत्र के लोगों की सेवा में लगा है, जो हमारे राष्‍ट्र की आध्‍यात्‍मि‍क रीढ़ हैं।’

क्या है योजना
• हॉलि‍स्‍टि‍क मेडीसिन में 100 बेड वाला सर्वोत्‍तम केन्‍द्र। यहां मरीजों का ऐलोपैथि‍क पद्धति‍ के साथ-साथ आयुर्वेद, योग तथा अन्‍य भारतीय चि‍कि‍त्‍सा पद्धति‍यों से भी उपचार होगा।

  • चि‍कि‍त्‍सा के क्षेत्र में वि‍ख्‍यात अमरीकी अथवा फ्रांस के सहयोग से एक अन्‍तर्राष्‍ट्रीय लोक स्‍वास्‍थ्‍य वि‍द्यालय की स्‍थापना (घोषणा बाद में की जाएगी)।
  • ऑनकोलॉजी, न्‍यूरोसर्जरी, नेफ्ररोलॉजी, कार्डि‍यक थोरासि‍स एवं वस्कुलर सर्जरी के लि‍ए उत्‍कृष्‍ट उपचार केंद्र होगा।
  • 120सीटों से युक्‍त भारत का पहला नर्सिंग शि‍क्षा में सर्वोत्तम प्रशिक्षण केंद्र अगले वर्ष तक शुरू हो जाएगा और यह पुरूष छात्रों के दाखि‍ले के लि‍ए पहला एम्‍स नर्सिंग कॉलेज होगा
  • जि‍रीयट्रि‍क मेडीसीन एवं ऑक्‍यूपेशनल व पर्यावरण स्‍वास्‍थ्‍य के लि‍ए नए वि‍भाग
    एम्स ऋषिकेश का विस्तार
    एम्‍स, ऋषि‍केश में एक नवनिर्मि‍त ब्‍लड बैंक के उद्द्याटन के उपरान्‍त, डॉ. हर्षवर्धन ने घोषणा की कि‍ उत्‍तराखंड सरकार के साथ यह बात चल रही है कि‍ अति‍रिक्‍त 100 एकड़ भूमि ‍पर एम्‍स, ऋषि‍केश की सुवि‍धाओं का वि‍स्‍तार कि‍या जाए तथा चि‍कि‍त्‍सीय जड़ी बुटी की खेती के लि‍ए अति‍रि‍क्‍त भूमि ‍की आवश्‍यकता है, जो हॉलि‍स्‍टि‍क स्‍वास्‍थ लाभ के लि‍ए औषधि‍यों के निर्माण के लि‍ए उपयोग में लाई जाएगी।
    इस बावत उन्‍होंने यह भी बताया कि‍ एम्‍स – ऋषि‍केश के नि‍देशक को शक्‍ति‍यां प्रदत्‍त कर दी गई है कि ‍वे मंत्रालय को सन्‍दर्भि‍त कि‍ए बगैर ही अपने स्‍तर पर संकाय सदस्‍य, अधि‍कारि‍यों तथा अन्‍य स्‍टाफ की भर्ती कर सकते हैं। उन्‍हें उपकरणों की खरीद तथा नव निर्माण कार्य कराने के लि‍ए भी वित्तीय शक्‍ति‍यां प्राप्‍त होगी। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि, ‍एम्‍स-ऋषि‍केश का पूर्ण निर्माण सुनि‍श्‍चि‍त करने के लि‍ए मैंने सभी कठि‍नाईयों को समाप्‍त कर दि‍या है, जो मैंने इस वर्ष 25 दि‍सम्‍बर तक पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बि‍हारी वाजपेई के जन्‍म दि‍वस पर पूरा करने का वायदा कि‍या था।
    डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि‍, ‘मैं उत्‍तराखंड में स्‍वास्‍थ्‍य के लि‍ए आधारभूत संरचना में सुधार हेतु वचनबद्ध हूँ और सरकार एवं यहां उपस्‍थि‍त लोगों को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि‍ मेरा मंत्रालय स्‍वास्‍थ के मानकों मे सुधार के लि‍ए सभी आवश्‍यक संसाधन जुटाने के लि‍ए तत्‍पर है।’

 नोटः यह खबर अगस्त, 2014 की है…लेकिन इस खबर को मुख्यधारा की मीडिया में वह स्थान नहीं मिल पायी थी जो मिलनी चाहिए थी…

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