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देश के 100 जिले हुए लिम्फेटिक फाइलेरिया से मुक्त, 156 जिलों में अभी भी है इस बीमारी का असर

लिम्फेटिक फाइलेरिया के संचरण और इस बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि भावी पीढियां इस बीमारी से मुक्त रहें। भारत ने लिम्फेटिक फाइलेरिया को समाप्त करने के प्रयासों तथा इस संदर्भ में किये जाने वाले शोध का हमेशा से स्वागत किया है। उक्त बातें केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी नड्डा ने  लिम्फेटिक फाइलेरिया को समाप्त करने के लिए आयोजित वैश्विक गठबंधन की 10वीं बैठक (जीएईएलएफ) का उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि लिम्फेटिक फाइलेरिया को समाप्त करने की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों व विकास संगठनों के सम्मिलित प्रयास से सर्वाधिक प्रभावित 256 जिलों में से 100 जिलों ने उन्मूलन लक्ष्य हासिल कर लिया है। संचरण मूल्यांकन सर्वे (टीएएस) द्वारा सत्यापन के बाद इन जिलों में बड़े पैमाने पर दी जाने वाली दवा कार्यक्रम को रोक दिया गया है। अभी ये जिले निगरानी में हैं।

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SBA विशेष काम की बातें मन की बात

बच्चों! क्या आप अपने स्वास्थ्य को जानते हैं…

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस की सामाजिक स्थिति को समझने के लिए 12 देशों में एक शोध किया है। इस शोध में बताया गया है कि एंटीबायोटिक के प्रयोग को लेकर लोग भ्रम की स्थिति में हैं। इस सर्वे में 64 फीसद लोगों ने माना है कि वे मानते हैं कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस उनके परिवार व उनको प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह कैसे प्रभावित करता है और वे इसको कैसे संबोधित करें, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उदाहरणार्थ 64 फीसद लोग इस बात में विश्वास करते हैं कि सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक का उपयोग किया जा सकता है, जबकि सच्चाई यह है कि एंटीबायोटिक वायरसों से छुटकारा दिलाने में कारगर नहीं है। लगभग एक तिहाई लोगों ( 32 फीसद ) का मानना था कि बेहतर महसूस होने पर वे एंटीबायोटिक का सेवन बंद कर देते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उन्हें चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवा-कोर्स को पूर्ण करना चाहिए।

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SBA विशेष काम की बातें

उपभोक्ता जागरुकता से ही बदलेगी स्वास्थ्य सेवा की तस्वीर

आयुर्वेद की जननी भारत भूमि का इतिहास बताता है कि यहां पर स्वास्थ्य सेवाओं को प्राचीन काल में परोपकार के नजरिए देखा जाता था। जब तक वैद्य परंपरा रही तब तक मरीज एवं वैद्य के बीच सामाजिक उत्तरदायित्व का बंधन रहा। लेकिन आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के उदय के बाद चिकित्सा एवं इससे जुड़ी हुई सेवाओं को क्रय-विक्रय के सूत्र में बांध दिया गया। चिकित्सकीय सेवा देने वाले एवं मरीज के बीच में उपभोगीय समझौते होने लगे। जैसे अगर आपको हर्निया का ऑपरेशन कराना है तो इतना हजार रुपये लगेगा, डिलेवरी कराना है तो इतना हजार रुपये। मरीज से कॉन्ट्रैक्ट फार्म पर हस्ताक्षर कराए जाने लगे। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बाजार आधारित हो गईं। यहां पर लाभ-हानी की कहानी गढ़ी जाने लगीं। ऐसे में यह जरूरी हो गया कि इन सेवाओं को कानून के दायरे में लाया जाए ताकि खरीदार को कोई बेवकूफ न बना सके, उनसे ओवरचार्ज न कर सके। गलत ईलाज न कर सके। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारतीय न्यायालय ने समय –समय पर दिए अपने आदेशों में यह स्पष्ट कर दिया है कि चिकित्सा संबंधी जितनी भी सेवाएं हैं उसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 के सेक्शन 2(1) के तहत अनुबंधित सेवा माना जायेगा। इस तरह स्वास्थ्य संबंधित सेवाएं कानून के दायरे में आ गईं।

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SBA विशेष विविध समाचार स्वस्थ भारत अभियान स्वस्थ भारत यात्रा

भविष्‍य से जुड़ा हैं बालिका स्वास्‍थ्‍य का चिंतन ”स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज”

बालिका के स्वास्‍थ्‍य का चिंतन समाज के विकास एवं देश के भविष्य से जुड़ा हुआ हैं। मौजूदा समय में हम इससे नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं। भविष्‍य से जुड़ा हैं बालिका स्वास्‍थ्‍य का चिंतन ”स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज”

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समाचार

एंटीबायोटिक्स खाने का सीधा असर दिमाग पर

लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स का सेवन वैसे तो साइड इफेक्ट्स को जन्म देता है लेकिन सबसे गंभीर है कि इन दवाओं को खाने से इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है।

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चिंतन

कैंसर-मरीज के नाम पर कहीं आपको लूटा तो नहीं जा रहा!

मैंने कहा कोई 1लाख ऐसे ही तो नहीं दे देगा न जिसे मदत की जरुरत है मैं उसे डायरेक्ट दू तो मुझे ज्यदा ख़ुशी मिलेगी। मै पैसे के मामले में बहुत बड़ा झटका खा चूका था इसलिये किसी और पे भरोषा नहीं कर सकता था आशूतोष जी आप जानते है। अब लड़के ने कहा हमें आपका डोनेशन नहीं चाहिये आप जाइये। ये कह के दोनों जाने लगे। मैंने कहा क्यों उस बच्चे के मदत के लिए मैं इतनी बड़ी रकम दे रहा हूँ क्यों नहीं चाहिये पर वे लोग मेरी बात अनसुनी कर के चले जा रहे थे । लड़की ने कहा आप हम लोगो का टाइम वेस्ट मत कीजेये

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समाचार स्वस्थ भारत अभियान

सरकार का पहला धर्म नागरिकों की स्वास्थ्य रक्षा होना चाहिएः आशुतोष कु.सिंह

महात्मा गांधी के स्वास्थ्य दर्शन से लोगों को परिचित कराते हुए श्री आशुतोष ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि क्या हम गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति एक आत्म संविधान बनाने का संकल्प ले सकते हैं।

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SBA विशेष

सेहत की सुध

स्वास्थ्य सेवाओं को नागरिकों के मूल अधिकारों में शामिल करने और इन्हें उपलब्ध न कराए जाने पर दंडात्मक प्रावधान का केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का प्रस्ताव निस्संदेह सराहनीय कहा जा सकता है। मगर इस पर प्रति व्यक्ति आने वाले खर्च का निर्धारण इसकी कामयाबी पर स्वाभाविक ही प्रश्नचिह्न लगाता है।

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Soft Drink
समाचार

अपनी मौत तो नहीं पी रहे हैं!

Ashutosh Kumar Singh for SBA जिस तरह से बाजार ने हमें अपना गुलाम बनाया है, हम भूल गए हैं कि हम जो खा रहे हैं, जो पी रहे हैं वह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानीकारक है की नहीं। हम खुद को एक विशेष वर्ग का बताने के लिए अपनी जीवन-शैली को नकारात्मक तरीके से बदलने […]

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दवा रिएक्शन शिकायत न.
समाचार

दवा रिएक्शन की शिकायत के लिए टोलफ्री न.

Ashutosh Kumar Singh  दवाइयों आ अंधाधुध प्रयोग ने एक नयी समस्या खड़ी कर दी है। जिस केमिकल का प्रयोग हम खुद को ठीक करने के लिए करते हैं, कई बार वह केमिकल हमारे शरीर पर विपरित असर करता है। जिसे आम तौर पर हमलोग दवा-रिएक्शन के नाम से जानते हैं। लेकिन बहुत कम ही लोग […]

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