SBA विशेष आयुष काम की बातें

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष: वैश्विक होता योग

आशुतोष कुमार सिंह बड़ी आबादी वाले अपने देश में स्वस्थ समाज के निर्माण का कार्य बहुत बड़ी चुनौती है। विकास की दौड़ में गर सबसे ज्यादा नुकसान किसी चीज का हुआ है तो वो हमारा स्वास्थ्य ही है। अपने देश में अंग्रेजी दवा बाजार तकरीबन 90 हजार करोड़ रुपये (वार्षिक) का है। पिछले दिनों स्वस्थ भारत यात्रा […]

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गांधी का स्वास्थ्य चिंतन ही रख सकता है सबको स्वस्थःप्रसून लतांत

‘स्वस्थ रहने के लिए गांधी के स्वास्थ्य चिंतन को अपनाना पड़ेगा। स्वस्थ भारत की कुंजी गांधी के विचारों में ही अंतर्निहित है। यदि आप गांधी को जी रहे हैं तो निश्चित ही रोग आपसे कोसो दूर रहेगा। रोग को भगाने के लिए गांधी का स्वास्थ्य चिंतन रामवाण है।’ उक्त बातें गांधी स्वच्छता एवं स्वास्थ्य विषय पर बोलते हुए वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक प्रसून लतांत ने कही। वे गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत न्यास द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में बोल रहे थे। समस्तीपुर के सूदुर गांव बटहा के सुंदरी देवी सरस्वती विद्या मंदिर विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में बोलते हुए स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि स्वच्छ भारत से ही स्वस्थ भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने महात्मा गांधी के स्वच्छता के संदेश को साझा करते हुए कहा कि मन एवं तन दोनों की स्वच्छता जरूरी है। स्वच्छ मन से ही स्वस्थ तन का निर्माण होता है। स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के संबंध पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अस्वच्छता के कारण मलेरिया, डेंगू, डायरिया, पीलिया सहित तमाम तरह की बीमारियों के शिकार हम हो जाते हैं।

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निरोगी काया के लिए जरूरी है कार्यस्थलों पर योग

योग बाजार में योग सिखाने वाले शिक्षकों की मांग देश ही नहीं विश्व के अन्य देशों में भी बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ अमेरिका में 76, 000 रजिस्टर्ड योग शिक्षक हैं और इसके साथ 7000 योग के स्कूल जुड़े हुए हैं। Yoga Alliance से 2014 से 2016 के बीच 14, 000 नये योग शिक्षक जुड़े। एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार देश में योग की मांग आने वाले वर्षों में 30-40 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ने का अनुमान है। एसोचैम की इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि योग की शिक्षा देने वालों की मांग 30-35 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ने का अनुमान है। योग के ब्रांड अम्बेस्ड्र बाबारामदेव की बात न की जाये तो बात अधूरी है निसंदेह बाबा रामदेव का बहुत बड़ा योगदान है योग को विश्व पटल पर लाने का। आज बाबा लाखो नौजवानो के प्रेरणा है कल तक जिस योग को दुनिया करतब और सरकर्स कहने से नहीं झिझकती थी आज उन सबकी नजरे हमारी तरफ एक उम्मीद से देख रही है की कैसे योग के माध्यम से हम संसार को तनावमुक्त और निरोगी काया दे रहे है।

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अच्छी आदतों से जोड़ने का काम करता है योग

दरअसल योग सिर्फ स्वस्थ जीवन का ही आधार नही है बल्कि ये लोगो को जोड़ने का माध्यम भी बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री ने कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर प्राणायाम करके लोगो को प्रेरणा भी दी। हालांकि वो समय- समय पर ऐसा करते रहते है जिससे की देशवासी सेहतमंद और फिट रहें । योग की लोकप्रियता का आलम ये है की क्या आम क्या ख़ास आज हर कोई योग से अपनी जिंदगी संवार रहा है। इस बीच सोशल मीडिया पर तमाम मंत्रियो और गणमान्य लोगों ने फिटनेस चेलेंज दिया जो इस बात का सबूत है योग का प्रचार प्रसार कितनी तेज़ी से हुआ है। 

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष: योग करते समय इन बातों का ध्यान रखें…

भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का अपना प्राचीन इतिहास रहा है। भारत हमेशा से चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। बीच के कुछ कालखंड को छोड़ दे तो भारत की प्राचीन चिकित्सकीय परंपरा हमेशा से सर्वोपरी रही है। वर्तमान समय में भी देश-दुनिया के लोग इस बात को मानने लगे हैं कि स्वस्थ रहना है तो भारतीय स्वास्थ्य पद्धतियों को अपना ही होगा। आयुर्वेद,यूनानी,होमियोपैथी, सिद्धा, प्राकृतिक चिकित्सा, योगा एवं सोवा-रिग्पा जैसी चिकित्सा पद्धतियों को संवर्धित करने एवं इनकी पहुंच आम-जन तक पहुंचाने के लिए ही भारत सरकार ने अलग से आयुष मंत्रालय बनाया है। इस कड़ी में आगे बढ़ते हुए भारत सरकार की पहल के कारण योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान जून 2015 में मिला। और पूरी दुनिया ने एक स्वर में 21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने पर अपनी सहमति प्रदान की। तब से योग का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

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