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दो लाख आबादी को कवर करने वाली मलेरिया उन्‍मूलन प्रदर्शन परियोजना का शुभारंभ मांडला में होगा – श्री जेपी नड्डा

मलेरिया लोगों की प्रमुख स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या है और मलेरिया ग्रसित देशों में आर्थिक वृद्धि की दर कम दर्शाई गई है इसको ध्‍यान में रखते हुए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने बताया कि आईसीएमआर और सनफार्मा की भागीदारी के हिस्‍से के रूप में मलेरिया उन्‍मूलन में राष्‍ट्रीय ढांचे की सहायता के लिए मलेरिया उन्‍मूलन प्रदर्शन परियोजना-‘मलेरिया मुक्‍त भारत’ का गठन किया जाएगा, जिसकी घोषणा स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा फरवरी 2016 में की गई थी। प्रदर्शन परियोजना की शुरूआत पहले मांडला से की जाएगी, जो मध्‍यप्रदेश के सबसे अधिक मलेरिया प्रभावित जिलों में से एक है। सनफार्मा मांडला जिले के 200,000 घरों के लिए 3 से 5 वर्ष की अवधि तक मलेरिया उन्‍मूलन कार्यक्रम चलाने के लिए राशि उपलब्‍ध करायेगी। मध्‍य प्रदेश की सरकार की मदद और इस सहयोग से मांडला जिले में मलेरिया उन्‍मूलन प्रदर्शन परियोजना कार्यान्‍वित की जाएगी।

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“कायाकल्‍प पखवाड़ा”

माननीय प्रधानमंत्री द्वारा लांच किये गए स्वच्छ भारत अभियान के वीजन और दर्शन को कार्यान्वित करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले वर्ष कायाकल्प अभियान शुरु किया ताकि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में स्वच्छता, साफ-सफाई के मानक तय हो सकें। स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी.नड्डा ने कहा है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में पूर्ण स्वच्छता की दिशा में बढ़ने के इस अभियान का उद्देश्य सार्वजिनक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने वाले लोगों में विश्वास बढ़ाना , अच्छी गुणवत्ता संपन्न सेवा देना और टीम के रूप में काम करना है। उन्होंने कहा कि इस अभियान से सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को ऊंचे मानकों की ओर बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा।

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तीन नये चिकित्‍सा महाविद्यालयों का शिलान्‍यास

श्री जे.पी. नड्डा ने राजौरी, अनंतनाग एवं बारामूला में तीन नये चिकित्‍सा महाविद्यालयों का शिलान्‍यास किया
क्षेत्र में तृतीयक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल एवं चिकित्‍सा शिक्षा को बड़ा प्रोत्‍साहन : जे.पी.नड्डा
श्री नड्डा ने कहा कि ‘नये चिकित्‍सा महाविद्यालय चिकित्‍सा ढांचे को मजबूत बनाएंगे और क्षेत्र में तृतीयक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल एवं चिकित्‍सा शिक्षा को काफी प्रोत्‍साहित करेंगे।’

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निजी क्षेत्र की मदद से राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुधारना चाहती है सरकार!

भारत की बिगड़ते स्वास्थ्य का ईलाज सरकार निजी क्षेत्र के उद्यमियों से कराना चाहती है। स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने देश की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए निजी क्षेत्रों को आगे आने का आह्वान किया है। स्वस्थ भारत अभियान का स्पष्ट मानना है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजी दखअंदाजी राष्ट्र के स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। सरकार को स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेना चाहिए। वर्तमान में अनियंत्रित स्वास्थ्य सेवा के कारण ही आम लोगों का ईलाज नहीं हो पा रहा है। मीडिया में लगातार इस तरह की खबरे आ रही हैं कि निजी क्षेत्र मरीजों को लूटने में जुटे हैं। ऐसे में निजी हाथों में स्वास्थ्य की कमान आने वाले भविष्य में गरीबों के स्वास्थ्य-रक्षा की दिशा में शुभ संकेत नहीं हैं।

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निष्ठुर न बने डॉक्टर:स्वास्थ्य मंत्री

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने उपभोक्‍ता अदालतों में चिकित्‍सकों के खिलाफ मुकदमों के मामलों तथा सार्वजनिक अस्‍पतालों में चिकित्‍सकों के निष्‍ठुर बर्ताव की बढ़ती घटनाओं का जिक्र करने से बचते हुए चिकित्‍सकों से आग्रह किया कि वे हिप्‍पोक्रेटिक शपथ को याद करें और अपने रोगियों का उपचार करने के दौरान उनके साथ प्रेम एवं दया का बर्ताव करें। उन्‍होंने वहां उपस्‍थित चिकित्‍सकों से स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल एवं बीमार तथा जरूरतमंद लोगों के उपचार के उद्देश्‍य के प्रति अपने को फिर से समर्पित कर देने का स्‍मरण दिलाया।

चिकित्सक संवेदनशील बनें
SBA विशेष अस्पताल

देश के गरीबों को ध्‍यान में रखें चिकित्सकः प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सर्वांगीण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा संबंधी विश्‍व रुझानों का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने उत्‍तीर्ण छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल बीमारी का इलाज न करें बल्‍कि मरीजों के साथ निकट का संबंध भी रखें। समारोह में निकट के सरकारी स्‍कूलों के बच्‍चों की उपस्‍थिति को देखकर प्रधानमंत्री ने कहा कि ये बच्‍चे ही इस अवसर पर असली विशेष अतिथि हैं। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि यह अवसर बच्‍चों को प्रेरित करेगा।

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स्वास्थ्य मसले पर सक्रिय हुई मोदी सरकार!

प्रधानमंत्री ने विशेषकर बच्‍चों के बीच एन्‍सेफ्लाइटिस जैसी बीमारियां फैलने पर गंभीर चिंता जताते हुए अधिकारियों से कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और अन्‍य राष्‍ट्रीय आपदाओं की ही भांति इन बीमारियों से भी निपटने का खाका तैयार किया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य का अधिकार
SBA विशेष

स्वास्थ्य के अधिकार की दरकार  

विगत दिनों छत्तीसगढ़ में हमारे देश के स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही का एक उदाहरण नसबंदी के दौरान हुई कई महिलाओं की मौत के रूप में दिखा था। इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में खूब हंगामा भी मचा था। मगर छत्तीसगढ़ में हुई उस घटना को राजनीति से उपर उठकर अगर बुनियादी तौर पर देखें […]

Soft Drink
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अपनी मौत तो नहीं पी रहे हैं!

Ashutosh Kumar Singh for SBA जिस तरह से बाजार ने हमें अपना गुलाम बनाया है, हम भूल गए हैं कि हम जो खा रहे हैं, जो पी रहे हैं वह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानीकारक है की नहीं। हम खुद को एक विशेष वर्ग का बताने के लिए अपनी जीवन-शैली को नकारात्मक तरीके से बदलने […]