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केरल से निपाह वायरस का खतरा टला, केरल जाना अब सुरक्षित

गर्मियों की छुट्टी में केरल जाने का प्लान कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब वे अपना टीकट बुक करा सकते हैं। निपाह वायरस का  खतरा टल गया है। दरअसल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, केरल सरकार ने 11 जून को जारी नए एडवाइजरी में कहा है कि केरल में निपाह वायरस का खतरा टल गया है।

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SBA विशेष मन की बात

निपाह से डरे नहीं, समझे इसे

यहां यह ध्यान देने की बात है कि निपाह वायरस कोई नया वायरस नहीं है। आज से 20 वर्ष पूर्व 1998-99 में यह सबसे पहले मलेशिया एवं सिंगापुर में पाया गया था। 2001 में बाग्लादेश एवं भारत के पूर्वी हिस्सों में इसने अपना जाल फैलाया। भारत में सबसे पहले जनवरी-फरवरी-2001 में यह वायरस सिलीगुड़ी में फैला था। तब 66 केस सामने आए थे जिसमें 45 लोग यानी 68 फीसद लोगों को मृत्यु से नहीं बचाया जा सका। फिर सन 2007 में भारत के नादिया क्षेत्र में 5 लोग इस वायरस के परिक्षेत्र में आए और पांचों को अपनी जान गंवानी पड़ी। और एक बार फिर से केरल में इसने अपना पैर फैलाया है। इस बीमारी का लक्ष्ण जापानी बुखार, इंसेफलाइटिस जैसा ही है। बुखार आना, मांसपेसियों में दर्द होना एवं वोमेंटिंग इंटेंशन इस बीमारी के सामान्य लक्ष्ण बताए जा रहे हैं । चिकित्सकों के लिए मुसीबत यह है कि यह लक्ष्ण आमतौर पर पाए जाते हैं।

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