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मनसुख भाई मांडविया की पाठशाला में जनऔषधि से जुड़े कर्मचारियों की लगी क्लास…

रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख भाई मांडविया ने पिछले दिनों बीपीपीआई के झंडेवालान दफ्तर गए थे। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना की प्रोगरेस रिपोर्ट की जाँच-पड़ताल के संग-संग इस योजना को जन-जन तक कैसे पहुंचाया जाए इसको लेकर पीएमबीजेपी के अधिकारियों से लंबी बातचीत भी किए। अपने ट्वीटर पर जारी किए फोटोग्राप्स में वे अधिकारियों को हिदायत देते हुए दिख रहे हैं।

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SBA विशेष फार्मा सेक्टर साक्षात्कार

अगले दो महीने में आपूर्ति की समस्या का निदान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : सचिन कुमार सिंह, सीइओ  पीएमबीजेपी

हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है कि जो स्टोर खुल चुके हैं, उनको इस तरह से बनाना कि वे कमर्सियली वायबल बन सके। स्टोर संचालकों की आमदनी इतनी हो सके कि वे अपने स्टोर को सार्थक तरीके से रन कर सकें। इससे और दोगुने जोश के साथ वे इस परियोजना को सफल बनाने में लगेंगे। कोई भी मानव सेवा तभी कर सकेगा, जब वह खुद सस्टेन कर पाए। इसके लिए हमने अपने सभी मार्केटिंग ऑफिसर्स के कहा है कि वे स्टोर्स की सेल बढाने में सहयोग करें। वे चिकित्सकों के पास जाएं। उन्हें जन औषधि के फायदे के बारे में बताएं। उन्हें यह सुनिश्चित करें कि जन औषधि की दवाइयां गुणवत्तायुक्त एवं सस्ती हैं। इतना ही नहीं वे जनता के बीच में भी जाएं।

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समाचार

जनऔषधि परियोजना का आत्मघाती फैसला, देश भर के अधिकारियों में फैला है आक्रोश

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अधिकारियों में एक फरमान ने आक्रोश पैदा कर दिया है। 11 जुलाई को बीपीपीआई के सीइओ सचिन कुमार सिंह ने एक ऑफिस ऑर्डर निकाला है, जिसमें पीएमबीजेपी में काम कर रहे अधिकारियों के पदनाम बदलने का आदेश दिया गया है। इस आदेश के आते ही पीएमबीजेपी के मार्केटिंग से जुड़े अधिकारियों में नाराजगी फैल गयी है। 

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SBA विशेष विविध स्वास्थ्य स्कैन

मोदी सरकार के चार वर्षः ग्रामीण स्वास्थ्य की बदलती तस्वीर

आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत अभियान, पोषण अभियान, इंद्रधनुष अभियान, नल-जल योजना, उज्ज्वला योजना सहित तमाम ऐसी योजनाएं बीते चार वर्षों में लागू हुई हैं। इसका सकारात्मक असर देश के शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। खासतौर से ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण एक क्रांतिकारी सामाजिक बदलाव की तरह दिख रहा है। प्रत्येक गांव में आशा कार्यकर्ताओं की उपलब्धता ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को मजबूति प्रदान की है। बावजूद इसके भारत जैसे बड़े भूभाग एवं जनसंख्या वाले देश के लिए अपने नागरिकों की स्वास्थ्य को सेहतमंद बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती है। और इस चुनौती को इस सरकार ने बीते चार वर्षों में सफलतापूर्वक स्वीकार किया भी है।

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समाचार स्वस्थ भारत अभियान

देश की सभी दवा दुकानों पर मिलेंगी उच्च गुणवत्ता वाली जेनरिक दवाइयां, सरकार कानून लाने की तैयारी में

देश के लोगों को सस्ती दवाइयां मिल सके इसके लिए सरकार हर वह कदम उठाने के लिए तैयार दिख रही है, जो वह उठा सकती है। इसी दिशा में सरकार अब सभी दवा दुकानों पर  जेनरिक दवा उपलब्ध करवाने के लिए कानून बनाने की तैयारी कर रही है। देश के प्रतिष्ठित अखबार अमर ऊजाला में प्रकाशित खबर में बताया गया है कि डीसीजीआई ने राज्यों को इस संबंध में सर्कुलर जारी कर दिया है। अगले 2 महीने में इसे लागू करने की तैयारी चल रही है।

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फार्मा सेक्टर मन की बात विविध

फार्मासिस्ट भटक गए हैं! ऐसा मैंने क्यों कहा?

जहां तक मेरी समझ है वह यह है कि बाजार में जितने फार्मासिस्ट हैं उसमें ज्यादातर ऐसे हैं जिन्होंने पैसे के बल पर डिग्री तो ले ली है लेकिन फार्मा की पढ़ाई ठीक से नहीं की है। उनके अंदर इतनी काबीलियत नहीं है कि वे प्रतियोगिता फेस करें और दवा कंपनियों से लेकर तमाम जगहों पर अपनी उपयोगिता को सिद्ध कर पाएं। यहीं कारण है कि ये सिर्फ और सिर्फ दवा दुकानों तक खुद को समेटकर रखना चाहते हैं। दरअसल ये वही फार्मासिस्ट हैं जिनको अपने प्रोफेशन की इज्जत से कोई लेना-देना नहीं है। ये सिर्फ किसी तरह पैसा कमाना चाहते हैं। इसके लिए इन्होंने अपने जमीर को बेच दिया है। अपनी डिग्री-डिप्लोमा को किराए पर दे दिया है। ये खुद निकम्मे और निठल्ले हैं और किराए के पैसे से रोजी-रोटी चलाना चाहते हैं। दवा खऱीदने वाले उपभोक्ताओं को अच्छी दवा मिले या न मिले इससे इनको कोई सरोकार नहीं है। इनके कारण मेहनत से पढ़े-लिखे फार्मासिस्टों की नाक कटती रहती है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि किरायेबाज फार्मासिस्टों को बेनकाब किया जाए। और ऐसा करने में तमाम फार्मासिस्ट संगठन लगभग विफल रहे हैं।

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पीएमबीजेपी के अन्तर्गत खुलने वाली जनऔषधि केन्द्रों की संख्या 5000 तक बढाई जायेगीः नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सरकार जल्द जनऔषधि केन्द्रों की संख्या 5000 तक बढ़ायेगी। देशवासियों से सेहत की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि, महंगी दवाइयों के कारण मध्यम वर्ग के लोग निम्न वर्ग एवं निम्न वर्ग के लोग गरीबी रेखा से नीचे चले जा रहे हैं। ऐसे में लोगों को सस्ती दवाइयां मिल सके इसलिए सरकार ने पूरे देश में 3600 से ज्यादा जनऔषधि केन्द्र खोला है। उन्होंने आगे कहा कि इन केन्द्रों को और तेजी से खोलते हुए हम इसे 5000 तक ले जायेंगे।

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जनऔषधि केन्द्र खोलने पर ढाई लाख रुपये का इंसेंटिव

जो युवा, उद्यमी, फार्मासिस्ट जनऔषधि केन्द्र खोलना चाहते हैं उनके लिए खुशखबरी है। उनको सरकार ढाई लाख रुपये का इंसेंटिव देगी। यह इंसेंटिव उन्हें 10000 रुपये प्रति माह के हिसाब से 25 महीने तक दी जायेगी। उक्त बाते रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख भाई मांडविया ने पीआईबी सेंटर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि जो उद्यमी, फार्मासिस्ट, युवा जनऔषधि केन्द्र खोलकर लोगों को सस्ती दवाइयां पहुंचाना चाहते हैं उनके संस्टनेबिलिटी के लिए यह जरूरी है कि उनको कुछ समय तक सहयोग किया जाए ताकि वे बाजार में खुद को स्थापित कर सके। 

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