फार्मा सेक्टर मन की बात विविध

फार्मासिस्ट भटक गए हैं! ऐसा मैंने क्यों कहा?

जहां तक मेरी समझ है वह यह है कि बाजार में जितने फार्मासिस्ट हैं उसमें ज्यादातर ऐसे हैं जिन्होंने पैसे के बल पर डिग्री तो ले ली है लेकिन फार्मा की पढ़ाई ठीक से नहीं की है। उनके अंदर इतनी काबीलियत नहीं है कि वे प्रतियोगिता फेस करें और दवा कंपनियों से लेकर तमाम जगहों पर अपनी उपयोगिता को सिद्ध कर पाएं। यहीं कारण है कि ये सिर्फ और सिर्फ दवा दुकानों तक खुद को समेटकर रखना चाहते हैं। दरअसल ये वही फार्मासिस्ट हैं जिनको अपने प्रोफेशन की इज्जत से कोई लेना-देना नहीं है। ये सिर्फ किसी तरह पैसा कमाना चाहते हैं। इसके लिए इन्होंने अपने जमीर को बेच दिया है। अपनी डिग्री-डिप्लोमा को किराए पर दे दिया है। ये खुद निकम्मे और निठल्ले हैं और किराए के पैसे से रोजी-रोटी चलाना चाहते हैं। दवा खऱीदने वाले उपभोक्ताओं को अच्छी दवा मिले या न मिले इससे इनको कोई सरोकार नहीं है। इनके कारण मेहनत से पढ़े-लिखे फार्मासिस्टों की नाक कटती रहती है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि किरायेबाज फार्मासिस्टों को बेनकाब किया जाए। और ऐसा करने में तमाम फार्मासिस्ट संगठन लगभग विफल रहे हैं।

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SBA विशेष काम की बातें मन की बात

बच्चों! क्या आप अपने स्वास्थ्य को जानते हैं…

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस की सामाजिक स्थिति को समझने के लिए 12 देशों में एक शोध किया है। इस शोध में बताया गया है कि एंटीबायोटिक के प्रयोग को लेकर लोग भ्रम की स्थिति में हैं। इस सर्वे में 64 फीसद लोगों ने माना है कि वे मानते हैं कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस उनके परिवार व उनको प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह कैसे प्रभावित करता है और वे इसको कैसे संबोधित करें, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उदाहरणार्थ 64 फीसद लोग इस बात में विश्वास करते हैं कि सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक का उपयोग किया जा सकता है, जबकि सच्चाई यह है कि एंटीबायोटिक वायरसों से छुटकारा दिलाने में कारगर नहीं है। लगभग एक तिहाई लोगों ( 32 फीसद ) का मानना था कि बेहतर महसूस होने पर वे एंटीबायोटिक का सेवन बंद कर देते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उन्हें चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवा-कोर्स को पूर्ण करना चाहिए।

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काम की बातें विविध समाचार

वैज्ञानिकों ने बनाया चलता-फिरता सौरकोल्ड स्टोरेज

भारत विश्व में फल और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।लेकिन, पर्याप्त शीत भंडारण सुविधाएं नहीं होने से 30 से 35 प्रतिशत फल और सब्जियां लोगों तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती हैं। किसानों को फलों और सब्जियों को तुरंत बाजार ले जाकर बेचने और गुणवत्ता खराब होने का नियमित दबाव बना रहता है। इस नए कोल्ड-स्टोरेज के उपयोग से किसान उत्तम गुणवत्ता की भंडारण सुविधाओं का लाभ छोटे स्तर पर अपनी आवश्यकतानुसार उठा सकेंगे।

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जानिए किस तरह लूटते हैं दिल्ली के बड़े अस्पताल…

दिल्ली के मैक्स, गुरुग्राम एवं बसंतकुंज के फोर्टिज अस्पताल, सरिता बिहार के अपोलो अस्पताल सहित देश की राजधानी के कई नामचीन अस्पतालों की सच्चाई लोगों के पास आनी शुरू हो गई है। जनता जागी तो सरकारों के कान भी बजने लगे हैं। सरकार भी इन अस्पतालों के खिलाफ कमर कस चुकी है। इसी कड़ी में बीते दिसंबर को दिल्ली सरकार ने मेडिकल निग्लीजेंस के मामले में दिल्ली के शालिमारबाग स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया।  इस फैसले ने पूरी मेडिकल क्षेत्र में हो रही लापरवाही एवं लूट के मामले को देश की मुख्यधारा मीडिया में ला दिया है। हालांकि बाद में अस्पताल का लाइसेंस बहाल कर दिया गया। यह बहाली भी कटघरे में ही है।

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क्या आप जानते हैं ! 65 साल पहले भारत में आया जापानी इंसेफलाइटिस !

भारत जैसे देश किसी भी नई बीमारी का पालनहाल आसानी से बन जाते हैं। सवा अरब से ज्यादा जनसंख्या को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे भारत में जब कोई बीमारी आयात होती है, तो उसकी खातिरदारी घर आए मेहमान की तरह की जाती है। उसके प्रति हमारा नजरिया, उसको रोकने के उपाय ठीक वैसे ही होते हैं जैसे घर आए दामाद खुद से चले जाएं तो ठीक है, नहीं तो उन्हें कौन कहे की आप अपने घर चले जाइए। ऐसी बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि बीमारियों के फलने-फूलने के लिए जरूरी खाद-पानी यहां पर भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। यहां पर नई बीमारियों की खेती करने में पूरा तंत्र सहयोग करता है। कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू एवं इबोला जैसी बीमारियों की खेती यहां पर खूब हो रही है। इनकी ब्रांडिंग कर के कुछ यहां के कुछ दूसरे मूल्कों की संस्थाएं अपनी आर्थिक स्वार्थों को पूर्ण करने में सफल भी हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ स्वस्थ मानव संसाधन की रीढ़ की हड्डी तोड़ने की कोशिश साकार होती दिख रही है।
आश्चर्य का विषय यह है कि भारत सरकार इंसेफलाइटिस के सही कारणों को जानने में अभी तक नाकाम रही है। अभी जांच का फोकस गोरखपुर बना हुआ है। जबकि इस बीमारी का फैलाव देश के लगभग प्रत्येक कोने में है। दक्षिण भारत में यह बीमारी पहले आई लेकिन वहां पर वह उतना सफल नहीं हुई जितना उत्तर भारत में दिख रही है। ऐसे में शोध का बिंदु दक्षिण भारत भी होना चाहिए। इतना ही नहीं जांच का बिंदु एशिया के तमाम देश भी होने चाहिए जहां पर यह बीमारी अपना पांव पसार चुकी है। शायद तब जाकर हम इस बीमारी के कारणों की तह में जा पाएंगे एवं ईलाज ढूढ़ पाने के नजदीक पहुंचेंगे। अभी तो ऐसा लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं है कि इस बीमारी का ईलाज संभव हो सके नहीं तो गर हमारी सरकारों ने इस बीमारी की भयावहता को पहले ही भांप कर समुचित कदम उठाया होता तो बीआरडी अस्पताल में जो चीख-पुकार सुनने को मिल रही है शायद वह नहीं मिलती।

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यात्रा रपट समाचार स्वस्थ भारत अभियान स्वस्थ भारत यात्रा

बेटियों का स्वस्थ होना स्वस्थ समाज की पहली कसौटी हैः डॉ अचला नागर

यात्रा दल को मिला डॉ अचला नागर का आशीर्वाद
स्वस्थ भारत यात्रा दल ने निकाह, बागवान सहित दर्जनों फिल्म लिखने वाली वरिष्ठ लेखिका डॉ अचला नागर से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने यात्रा के लिए अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि बेटियों का स्वास्थ्य बहुत जरूरी है। वर्तमान स्थिति में बेटियों के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां स्वस्थ नहीं होगी तब तक स्वस्थ देश अथवा समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है।

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स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

आंख नहीं, दुनिया देखती हैं कलगी रावल
• स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर
• गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर एवं बापूनगर अहमदाबाद के वाणिज्य महाविद्यालय का यात्रा दल ने किया दौरा, बालिकाओं को दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश
• शहीद ऋषिकेश रामाणी को दी श्रंद्धांजली

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यात्रा रपट समाचार स्वस्थ भारत अभियान स्वस्थ भारत यात्रा

6 छात्राओं को बनाया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

झाबुआ की 6 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर

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समाचार स्वस्थ भारत अभियान

स्वस्थ भारत नें 9 बालिकाओं को बनाया ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ का गुडविल एंबेसडर

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति में आयोजित मूल्य निर्माण शिविर में स्वस्थ भारत न्यास ने देश के सात राज्यों की 9 बालिकाओं को ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ कैंपेन का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया है। ज्ञात हो कि बालिकाओं के स्वास्थ्य को लेकर शुरू किए गए इस कैंपेन को पूरे देश में ले जाने के लिए न्यास की टीम स्वस्थ भारत यात्रा पर निकलने वाली है। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति (जीएसडीएस), नेस्टिवा अस्पताल एवं मेडिकेयर फाउंडेशन, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन सहित देश के तमाम संगठनों के सहयोग से स्वस्थ भारत (न्यास) स्वस्थ भारत अभियान के अंतर्गत ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ कैंपेन चला रहा है। 2016-17 में 300 बालिकाओं को ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ का गुडविल एंबेसडर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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स्वस्थ भारत का सपना जरूर पूरा होगाः आशुतोष कुमार सिंह

आज स्वस्थ भारत अभियान के संयोजक आशुतोष कुमार सिंह का जन्म दिन है। उनके जन्म दिन के अवसर पर हम आपके लिए लेकर आए हैं विशेष बातचीत है। पिछले दिनों विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आशुतोष कुमार सिंह का साक्षात्कार आकाशवाणी के एफएम रेंबो ने आशुतोष कुमार सिंह से स्वास्थ्य के संबंध में विशेष चर्चा की थी। आप भी सुने और स्वस्थ भारत की उनकी परिकल्पना को साकार करने में उनका साथ दें।

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